नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किला मेट्रो पार्किंग के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक बड़ा अंतर्राष्ट्रीय एंगल सामने आया है। जांच एजेंसियों (NIA और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल) के सूत्रों के अनुसार, इस आतंकवादी हमले के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक हैंडलर से जुड़े हैं, जिसका ठिकाना तुर्की (Turkey) की राजधानी अंकारा में था।READ ALSO:-'बाबरी का बदला' लेने का था प्लान: 6 दिसंबर को देशभर में 32 जगह धमाके करने की थी तैयारी, दिल्ली ब्लास्ट इसी बड़ी साजिश का था हिस्सा
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\nब्लास्ट के मुख्य संदिग्ध, फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल के सदस्य डॉ. उमर उन नबी, जो कार विस्फोट में मारा गया, वह लगातार इस तुर्की स्थित हैंडलर के संपर्क में था। यह पूरा कम्युनिकेशन 'सेशन' (Session) नामक एक अत्यधिक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप के जरिए किया जा रहा था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\nहैंडलर 'उकासा' और तुर्की का दौरा
\r\nजांच एजेंसियों को डॉ. उमर के डिजिटल उपकरणों से मिली चैट हिस्ट्री और पासपोर्ट रिकॉर्ड से इस दिल्ली ब्लास्ट तुर्की कनेक्शन का पता चला है।
\r\n\r\n
    \r\n
  •  हैंडलर की पहचान: तुर्की में बैठे इस हैंडलर का कोडनेम 'उकासा' (Ukasa) बताया गया है, जिसका अरबी में अर्थ 'मकड़ी' होता है। माना जा रहा है कि यह कोडनेम हैंडलर की असली पहचान छिपाने के लिए इस्तेमाल किया गया था। अधिकारियों का मानना है कि 'उकासा' ने ही समूह की गतिविधियों, वित्त पोषण और कट्टरपंथ के प्रयासों का समन्वय अंकारा से किया था।
  • \r\n
  •  2022 की यात्रा: सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर उन नबी और उसके साथियों (जिनमें गिरफ्तार डॉ. मुजम्मिल शकील गनई शामिल है) ने मार्च 2022 में तुर्की की यात्रा की थी। इस दौरान उमर लगभग दो सप्ताह तक अंकारा में रुका था। एजेंसियों को संदेह है कि इसी यात्रा के दौरान वे अपने हैंडलर के संपर्क में आए और उन्हें जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क में भर्ती और कट्टरपंथी बनाया गया था।
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
आतंकियों का पसंदीदा 'सेशन ऐप' क्या है?
\r\n\r\n
आतंकियों ने अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए टेलीग्राम के बाद सेशन ऐप (Session App) का उपयोग करना शुरू कर दिया था, क्योंकि यह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म अन्य ऐप्स की तुलना में कहीं अधिक गुमनामी प्रदान करता है।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n
सेशन ऐप की मुख्य विशेषताएँ, जो इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौतीपूर्ण बनाती हैं:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  •  फोन नंबर या ईमेल की आवश्यकता नहीं: सेशन ऐप पर अकाउंट बनाने के लिए किसी मोबाइल नंबर या ईमेल की जरूरत नहीं होती है। उपयोगकर्ता केवल एक रैंडम सेशन आईडी द्वारा पहचाने जाते हैं, जिसे ट्रैक करना लगभग असंभव है।
  • \r\n
  •  विकेन्द्रीकृत नेटवर्क (Decentralized Network): यह ऐप किसी सेंट्रल सर्वर के बजाय एक विकेन्द्रीकृत नेटवर्क पर काम करता है, जिसमें संदेश कई नोड्स के माध्यम से भेजे जाते हैं। इसका मतलब है कि मैसेज का ओरिजिन और डेस्टिनेशन छिपा रहता है, जिससे किसी भी मेटाडेटा को स्टोर नहीं किया जा सकता है।
  • \r\n
  •  पूर्ण एन्क्रिप्शन: यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है, जिससे मैसेज केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं।
  • \r\n
  •  लोकल डेटा स्टोरेज: मैसेज केवल उपयोगकर्ता के डिवाइस पर ही स्टोर होते हैं, न कि किसी क्लाउड सर्वर पर, जिससे डेटा तक पहुँच बनाना मुश्किल हो जाता है। 
  • \r\n
\r\n\r\n

\r\nजांच का दायरा और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया
\r\n\r\n
दिल्ली ब्लास्ट तुर्की कनेक्शन सामने आने के बाद जांच एजेंसियों का ध्यान अब जैश-ए-मोहम्मद के लिए विदेशी फंडिंग के स्रोतों और इस मॉड्यूल के अन्य सदस्यों की पहचान पर केंद्रित हो गया है। तुर्की के अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स पर कड़ी आपत्ति जताई है, इसे 'झूठी और भ्रामक' खबर बताते हुए भारत-तुर्की संबंधों को खराब करने की कोशिश करार दिया है।
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\nसुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना दर्शाती है कि आतंकवादी समूह अपनी गतिविधियों को अंजाम देने और अपने सदस्यों के कट्टरपंथ के लिए हाई-टेक एन्क्रिप्टेड उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। इस आतंकी मॉड्यूल का उद्देश्य देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था, जिसकी प्लानिंग अंकारा से की गई। 
\r\n\r\n
 
\r\n\r\n

\r\nदिल्ली ब्लास्ट की जांच ने जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर 'उकासा' के माध्यम से एक गंभीर दिल्ली ब्लास्ट तुर्की कनेक्शन का खुलासा किया है। विस्फोटक सामग्री की खरीद से लेकर हमले की योजना बनाने तक, सभी निर्देश अंकारा में बैठे इस हैंडलर द्वारा सेशन ऐप के अत्यधिक एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के माध्यम से दिए गए थे। यह खुलासा राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन के माध्यम से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें