लखनऊ: उत्तर प्रदेश में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है। अगर आप भी अब तक हर छोटे-बड़े काम के लिए आंख मूंदकर आधार कार्ड (Aadhaar Card) पर भरोसा करते आए हैं, तो सावधान हो जाइए। उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब से आधार कार्ड को 'जन्म प्रमाण' (Date of Birth Proof) के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से स्कूल में एडमिशन से लेकर कई सरकारी योजनाओं के फॉर्म भरने तक की प्रक्रिया बदल जाएगी।READ ALSO:-नौकरी की तलाश खत्म! योगी सरकार ला रही है 'रोजगार महाकुंभ 2025': 300 कंपनियां, 20 हजार पद और हाथों-हाथ मिलेगी ज्वॉइनिंग
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आधार पहचान है, जन्म प्रमाण नहीं

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उत्तर प्रदेश सरकार के इस फैसले के पीछे का तर्क बिल्कुल स्पष्ट है। सरकार का कहना है कि आधार कार्ड एक विशिष्ट पहचान पत्र (Unique Identity Proof) है, न कि जन्म प्रमाण पत्र। राज्य के प्लानिंग विभाग ने पाया कि आधार कार्ड में दर्ज जन्म तिथि (DOB) का डेटा हमेशा किसी प्रमाणित जन्म रजिस्टर से नहीं लिया जाता है। कई बार यह अनुमानित होती है या स्व-घोषित होती है।
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UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) के डेटाबेस में जन्म तिथि के सत्यापन की वह प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती जो जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम के तहत होती है। इसलिए, इसे जन्म के आधिकारिक और कानूनी सबूत के तौर पर इस्तेमाल करना गलत है और इससे भविष्य में दस्तावेजों में गड़बड़ी हो सकती है।
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UIDAI के पत्र के बाद लिया गया एक्शन

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यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। दरअसल, UIDAI के लखनऊ रीजनल ऑफिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि आधार का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति की पहचान और पते का सत्यापन करना है। आधार कार्ड का उपयोग नागरिकता या जन्म तिथि के प्रमाण के रूप में नहीं किया जा सकता। UIDAI के इसी दिशा-निर्देश (Guideline) को आधार बनाते हुए यूपी सरकार ने सभी विभागों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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इन कामों पर पड़ेगा सीधा असर

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सरकार के आदेश के मुताबिक, सभी सरकारी विभागों को जन्म संबंधी वेरिफिकेशन (DOB Verification) में आधार कार्ड को तत्काल प्रभाव से अस्वीकार करने को कहा गया है। इसका सीधा असर आम जनता के रोजमर्रा के कामों पर पड़ेगा:
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    स्कूल एडमिशन: बच्चों के स्कूल में दाखिले के समय अब आधार कार्ड जन्म तिथि के सबूत के तौर पर नहीं चलेगा।
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    सरकारी नौकरियां: आवेदन फॉर्म भरते समय आयु सीमा साबित करने के लिए आधार मान्य नहीं होगा।
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    पेंशन और अन्य योजनाएं: जहां भी उम्र का सत्यापन जरूरी है, वहां जन्म प्रमाण पत्र या हाईस्कूल की मार्कशीट देनी होगी।
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अब लोगों को जन्म तिथि साबित करने के लिए नगर निगम या पंचायत द्वारा जारी जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate) या 10वीं की मार्कशीट जैसे दस्तावेजों का ही उपयोग करना होगा।
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सुरक्षा और अवैध प्रवासियों पर नजर

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इस फैसले के पीछे सिर्फ तकनीकी कारण ही नहीं, बल्कि राज्य की सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। यूपी सरकार नेपाल सीमा से सटे जिलों और अन्य संवेदनशील इलाकों में अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) की पहचान को लेकर सख्त है। अक्सर देखा गया है कि अवैध रूप से रह रहे लोग आधार कार्ड बनवा लेते हैं और उसे ही अपनी जन्म तिथि और नागरिकता का सबूत मानकर पेश करते हैं।
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सरकार ने हाल ही में अवैध विदेशियों के लिए अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने के भी निर्देश दिए हैं। ऐसे में दस्तावेजों की जांच में सख्ती बरती जा रही है। आधार को जन्म प्रमाण की सूची से हटाने से अवैध तरीके से भारतीय दस्तावेजों में सेंध लगाने वालों पर रोक लगेगी।
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यूपी सरकार का यह कदम प्रशासनिक रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करने और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, आम जनता के लिए यह थोड़ी परेशानी का सबब बन सकता है, खासकर उनके लिए जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र नहीं है। इसलिए सलाह दी जाती है कि आप जल्द से जल्द अपने या अपने बच्चों का वैध जन्म प्रमाण पत्र बनवा लें, क्योंकि अब आधार कार्ड केवल आपकी पहचान बताएगा, आपकी उम्र नहीं।
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उत्तर प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किया है कि अब आधार कार्ड को जन्म तिथि (Date of Birth) के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह फैसला UIDAI के दिशानिर्देशों और सुरक्षा कारणों को देखते हुए लिया गया है। अब स्कूल एडमिशन और सरकारी कामों के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
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