भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि वह कोर्ट के हवाले से गलत तथ्य पेश न करे। Supreme Court On ECI Form 6 मामले में शीर्ष अदालत ने 12 अक्टूबर को स्पष्ट कर दिया कि उसने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' के संशोधित प्रारूप को लेकर कोई आदेश या फैसला नहीं सुनाया है। अदालत ने आयोग को दोटूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, "हमारे मुंह में अपने शब्द न डालें।"

क्या है चुनाव आयोग का दावा? यह पूरा विवाद निर्वाचन आयोग के उस दावे के बाद सामने आया, जिसमें कहा गया था कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान 'फॉर्म 6' में जोड़े गए 'अतिरिक्त डिक्लेरेशन' को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी थी। इसके उलट, अदालत ने साफ किया है कि फॉर्म का यह नया वर्जन बिहार में हुई पिछली एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के बाद लाया गया था और कोर्ट ने इसे वैध नहीं ठहराया है।

अतिरिक्त डिक्लेरेशन का विवाद क्या है? भारत के नागरिक मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए 'फॉर्म 6' का इस्तेमाल करते हैं। विवाद उस नए ऑनलाइन डिक्लेरेशन पर केंद्रित है, जिसमें आवेदकों से एक नई जानकारी मांगी जा रही है। इस डिक्लेरेशन में पूछा जाता है कि क्या पूर्व की एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में उनके या उनके माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी के नाम शामिल थे?

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याचिकाकर्ताओं ने इस बदलाव पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि क्या चुनाव आयोग बिना तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किए ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से ऐसे नियम थोप सकता है। गौरतलब है कि 'फॉर्म 6' का प्रारूप 'जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' के तहत बनाए गए 'निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960' के अंतर्गत केंद्र सरकार और आयोग के आपसी विचार-विमर्श से तय किया गया है।

चुनाव आयोग की सफाई और कोर्ट के निर्देश इस मामले में चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहना है कि मूल 'फॉर्म 6' में कोई स्थायी बदलाव नहीं किया गया है। यह अतिरिक्त डिक्लेरेशन केवल एसआईआर अवधि के लिए विशेष तौर पर लाया गया था। आयोग ने यह भी जानकारी दी है कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां से इस डिक्लेरेशन की अनिवार्यता को वापस ले लिया गया है।

इससे पहले 5 अक्टूबर को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से वे सभी रिकॉर्ड तलब किए थे, जिनसे यह साबित हो सके कि फॉर्म में इन बदलावों को किसने मंजूरी दी और इनका कानूनी आधार क्या था। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है। इस सुनवाई में फॉर्म 6 में जोड़े गए नियमों की वैधानिकता और मतदाता पंजीकरण पर इसके संभावित असर की विस्तृत जांच होने की उम्मीद है।

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