भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में नीतियां बनाने, विकास योजनाओं को लागू करने और संसाधनों के सही बंटवारे के लिए सटीक जनसंख्या आंकड़े होना बेहद जरूरी है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 (Census 2027) के दूसरे चरण (Phase 2) का ब्लूप्रिंट पूरी तरह तैयार कर लिया है।
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​इस चरण का फोकस पूरी तरह से देश के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों पर रहेगा। सरकार ने इसका शेड्यूल पहले ही जारी कर दिया था, लेकिन अब इस प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाली प्रश्नावली (Questionnaire) को भी आधिकारिक रूप से नोटिफाई कर दिया गया है।
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किन राज्यों में होगी जनगणना और क्यों चुना गया सितंबर का महीना?

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​जनगणना का यह दूसरा चरण मुख्य रूप से उत्तर भारत के ऊंचे और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों को कवर करेगा। इसमें निम्नलिखित 4 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं:
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  1. \r\n
    ​जम्मू और कश्मीर (Jammu & Kashmir)
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  2. \r\n
  3. \r\n
    ​लेह-लद्दाख (Leh-Ladakh)
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  4. \r\n
  5. \r\n
    ​हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)
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  6. \r\n
  7. \r\n
    ​उत्तराखंड (Uttarakhand)
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  8. \r\n
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सितंबर का महीना ही क्यों?

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इन पहाड़ी इलाकों का भौगोलिक ढांचा और मौसम मैदानी इलाकों से बिल्कुल अलग होता है। केंद्र सरकार ने इन राज्यों में जनगणना के लिए 1 सितंबर से 30 सितंबर 2027 तक का समय निर्धारित किया है। इसके पीछे एक बहुत ही व्यावहारिक कारण है। दरअसल, अक्टूबर के बाद इन क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड पड़ने लगती है और कई इलाके भारी बर्फबारी के कारण देश के बाकी हिस्सों से कट जाते हैं। वहीं, जुलाई-अगस्त में मानसून के चलते लैंडस्लाइड (Landslide) और भारी बारिश का खतरा रहता है।
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​सितंबर के महीने में इन चारों राज्यों में मौसम सबसे अनुकूल और साफ रहता है। ऐसे में घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करने वाले सरकारी कर्मचारियों (Enumerators) को दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर सफर करने में कोई भौगोलिक या मौसमी समस्या नहीं आएगी।
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​नोटिफाई किए गए 40 सवालों की सूची: क्या-क्या पूछा जाएगा आपसे?

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​केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन के अनुसार, इस बार जनगणना कर्मचारियों के हाथ में जो फॉर्म होगा, उसमें कुल 40 अहम सवाल होंगे। इन सवालों को इस तरह से डिजाइन किया गया है ताकि देश के नागरिकों की वर्तमान सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य स्थिति का एकदम सटीक खाका तैयार किया जा सके।
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​इन 40 सवालों में कुछ मूलभूत जानकारियां शामिल हैं, जैसे:

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  • \r\n
    ​परिवार के मुखिया का नाम और सदस्यों की कुल संख्या।
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  • \r\n
    ​मकान की स्थिति (कच्चा या पक्का) और उसमें मौजूद सुविधाएं (जैसे- टॉयलेट, पानी का कनेक्शन)।
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  • \r\n
  • \r\n
    ​परिवार के पास मौजूद वाहन और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स।
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  • \r\n
  • \r\n
    ​परिवार के सदस्यों की शिक्षा और रोजगार की स्थिति।
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  • \r\n
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जनगणना में पहली बार: कोरोना वैक्सीनेशन और जातिगत आंकड़े

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​इस बार की जनगणना पिछले सभी दशकों की जनगणनाओं से काफी अलग और ऐतिहासिक होने जा रही है। 40 सवालों की सूची में दो सबसे बड़े और नए बदलाव किए गए हैं:
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​1. पहली बार होगी जाति की गिनती (Caste Census Included)

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​लंबे समय से देश के विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों द्वारा जातिगत जनगणना (Caste Census) की मांग की जा रही थी। इस बार केंद्र सरकार ने इसे जनगणना का हिस्सा बना लिया है। फॉर्म में लोगों से स्पष्ट रूप से पूछा जाएगा कि वे अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) से संबंधित हैं, या फिर उनकी विशिष्ट जाति (Caste) क्या है?
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​इस कदम से सरकार को आरक्षण (Reservation), कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) और सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी। यह पहली बार है जब राष्ट्रीय स्तर की जनगणना में इतने विस्तृत पैमाने पर जातिगत आंकड़े जुटाए जा रहे हैं।
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​2. कोरोना वैक्सीनेशन (COVID-19 Vaccination) का रिकॉर्ड

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​हम सभी ने हाल ही में सदी की सबसे बड़ी महामारी का सामना किया है। स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस बार प्रश्नावली में कोरोना वायरस (COVID-19) वैक्सीन से जुड़ा सवाल भी जोड़ा गया है। नागरिकों से पूछा जाएगा कि क्या उन्होंने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज और प्रिकॉशन डोज (Booster) ली है या नहीं? इसके अलावा, वैक्सीन किस स्थान (सरकारी या प्राइवेट अस्पताल) पर लगवाई गई, इसका भी रिकॉर्ड दर्ज किया जाएगा।
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​इससे सरकार के पास देश की 'हर्ड इम्युनिटी' (Herd Immunity) और स्वास्थ्य ढांचे की पहुंच का एक मजबूत और प्रामाणिक डेटाबेस तैयार हो जाएगा।
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​आगे क्या? (Next Steps)

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​सितंबर के अंत तक इन चार पहाड़ी राज्यों का डेटा सफलतापूर्वक इकट्ठा करने के बाद, सरकार देश के बाकी मैदानी राज्यों में जनगणना के अगले चरणों को लागू करेगी। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि डेटा कलेक्शन की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी और डिजिटल फ्रेंडली रखा जाए, ताकि परिणामों का संकलन (Compilation) तेजी से किया जा सके।
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​नागरिकों से अपील:

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चूंकि यह डेटा सीधे तौर पर आपके क्षेत्र के विकास, स्कूल, अस्पताल और सरकारी योजनाओं के बजट को तय करता है, इसलिए जब भी जनगणना अधिकारी आपके घर आएं, तो उन्हें अपने परिवार, जाति और वैक्सीनेशन से जुड़ी एकदम सही और सटीक जानकारी ही दें। राष्ट्र निर्माण के इस महा-अभियान में आपकी भागीदारी बेहद जरूरी है।
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