उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में विकास कार्यों, जन कल्याणकारी योजनाओं और सरकारी परियोजनाओं की जमीनी हकीकत को परखने तथा विभागीय जवाबदेही तय करने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त रुख अपना रहा है। इसी क्रम में बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को बिजनौर कलेक्ट्रेट सभागार में एक अति महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। Bijnor DM Review Meeting के दौरान जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले 'सीएम डैशबोर्ड' (CM Dashboard) और 'जिला अनुश्रवण पुस्तिका' के अंतर्गत सितंबर 2026 तक की विभागीय प्रगति का बारीकी से आकलन किया। जिलाधिकारी ने उपस्थित सभी अधिकारियों को स्पष्ट और कड़े शब्दों में हिदायत दी है कि प्रदेश के मुखिया की प्राथमिकता वाले विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर कोई लापरवाही या ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विभागीय रैंकिंग में सुधार के सख्त निर्देश बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि सभी विभागीय अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली में तेजी लाएं और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी विभाग की मासिक ग्रेडिंग 'ए' श्रेणी से नीचे न खिसके। योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर जिला प्रशासन की पैनी नजर है। इसी के चलते समीक्षा बैठक में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने पर दुग्ध विकास अधिकारी तथा सेतु निगम के संबंधित अधिकारियों से तत्काल प्रभाव से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का यह साफ संदेश है कि महत्वपूर्ण सरकारी बैठकों और विभागीय कार्यों की अनदेखी को पूरी गंभीरता से लिया जाएगा।
गुणवत्ता परखने के लिए गठित होगी रैंडम जांच समिति जिले में विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं द्वारा संचालित निर्माण कार्यों की गति और गुणवत्ता को लेकर जिलाधिकारी ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए। उन्होंने सीएनडीएस, लोक निर्माण विभाग (PWD) और यूपी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड सहित सभी निर्माण एजेंसियों को निर्देशित किया कि वे अपने लंबित प्रोजेक्ट्स के निर्माण में तेजी लाएं और हर हाल में दिसंबर 2026 तक सभी निर्धारित कार्यों को शत-प्रतिशत पूरा कर उन्हें जनोपयोगी बनाएं।
निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी या घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए जिला स्तर पर एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति किसी भी समय निर्माण साइट्स पर जाकर औचक (रैंडम) जांच करेगी। इसके अलावा, कार्यों की वास्तविक स्थिति का तथ्यात्मक आकलन करने के लिए प्रशासन ने एक नया नियम लागू किया है। इसके तहत कार्य शुरू होने से पहले की स्थिति, निर्माण प्रक्रिया के दौरान के हालात और कार्य पूरा होने के बाद की तस्वीरें अनिवार्य रूप से साक्ष्य के तौर पर उपलब्ध करानी होंगी।
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सितंबर 2026 की मासिक रैंकिंग का विस्तृत विवरण बैठक के दौरान मुख्य प्रदर्शन घटकों यानी की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स (KPI) के आधार पर कुल 84 सरकारी योजनाओं और परियोजनाओं की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट पेश की गई। समीक्षा में प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, 59 कार्यक्रमों और परियोजनाओं ने निर्धारित मानकों को पूरा करते हुए 'ए' श्रेणी हासिल की है। वहीं 4 परियोजनाओं को 'बी' श्रेणी, 4 को 'सी' श्रेणी और 4 योजनाओं को निराशाजनक प्रदर्शन के चलते 'डी' श्रेणी में रखा गया है। इसके अतिरिक्त 13 योजनाएं और कार्यक्रम ऐसे रहे जिन्हें 'नॉट एप्लीकेबल' की श्रेणी में रखा गया। जिलाधिकारी ने कम रैंकिंग वाले विभागों के प्रमुखों को अपनी कार्यशैली में तत्काल सुधार लाने और निर्धारित केपीआई (KPI) को ध्यान में रखकर काम करने की नसीहत दी।
छात्रवृत्ति, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और पारदर्शी आवासीय योजनाएं जन कल्याण से जुड़ी योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग छात्रवृत्ति योजना तथा दिव्यांगजन कल्याण विभाग से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के आवेदनों और निस्तारण की स्थिति जानी। इसके साथ ही आवासीय और संपर्क मार्गों के कार्यों का भी फीडबैक लिया।
बिजली व्यवस्था के मुद्दे पर समीक्षा करते हुए विद्युत विभाग के संबंधित अभियंता ने बैठक में दावा किया कि वर्तमान में शासन के रोस्टर के अनुसार ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति की जा रही है। इस दावे पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्युत आपूर्ति की इस वास्तविक स्थिति की पुष्टि केवल विभागीय आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम जनता और विभिन्न स्तरों से सीधे फीडबैक लेकर की जाएगी।
अंत में जिलाधिकारी ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सहित अन्य आवासीय योजनाओं के संदर्भ में सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए और केवल वास्तविक रूप से पात्र लाभार्थियों को ही इसका लाभ मिलना चाहिए। ऐसा करने से योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली अनियमितताओं और भविष्य में उत्पन्न होने वाली शिकायतों को समय रहते रोका जा सकेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.