महाराष्ट्र के बीड जिले में एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। माजलगांव में आयोजित 'आई लव मोहम्मद' कार्यक्रम के मंच से मौलाना अशफाक निसार शेख ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर बेहद भड़काऊ और आपत्तिजनक बयान दिया है। मौलाना ने खुलेआम मंच से सीएम योगी को दफनाने की धमकी दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।READ ALSO:-दिल्ली-NCR में पटाखों के निर्माण की इजाजत, पर बिक्री पर रोक: सुप्रीम कोर्ट बोला- 'पूरी तरह बैन संभव नहीं'
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मौलाना ने दी खुली चुनौती
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मौलाना अशफाक निसार शेख ने मंच से बोलते हुए सीएम योगी को माजलगांव की मुस्तफा मस्जिद आने की खुली चुनौती दी। उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि अगर सीएम योगी वहां आएं तो "उन्हें यहीं दफना दिया जाएगा।" इस तरह की आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल से राजनीतिक और सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
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शिवसेना की कड़ी मांग
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मौलाना के इस भड़काऊ भाषण पर शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
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    शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने पुलिस से मांग की है कि मौलाना के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें तुरंत हिरासत में लिया जाए।
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    हेगड़े ने कहा कि ऐसी चीजें दो समुदायों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश हैं और इन्हें बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
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    हालांकि, खबर लिखे जाने तक माजलगांव पुलिस थाने में इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी।
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क्या है 'आई लव मोहम्मद' अभियान?
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यह अभियान उत्तर प्रदेश के कानपुर से शुरू हुआ था और देश के कई हिस्सों में फैल गया है।
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    कानपुर की शुरुआत: इसी साल सितंबर की शुरुआत में बारावफात के जुलूस के दौरान मुस्लिम युवाओं ने 'आई लव मोहम्मद' नारे वाले पोस्टर और बैनर लगाए थे।
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    विरोध और कार्रवाई: स्थानीय हिंदू संगठनों ने इसे नई परंपरा बताते हुए इसका विरोध किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए पोस्टर हटवाए और कुल 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की, जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने और धार्मिक भावनाएं भड़काने जैसी धाराएं लगाई गईं थीं।
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    आंदोलन का रूप: कानपुर की इस घटना के बाद मुस्लिम संगठनों ने इसे एक आंदोलन का रूप दे दिया और शुक्रवार की नमाज के बाद कई मस्जिदों के बाहर प्रदर्शन किए।
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    आयोजकों का आरोप: बीड समेत अन्य जगहों पर कार्यक्रम आयोजित करने वाले आयोजकों का कहना है कि कानपुर में पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ की गई पुलिस कार्रवाई अनुचित थी, जिससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों का हनन हुआ।
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माजलगांव के आयोजकों का कहना है कि कानपुर में पोस्टर लगाने वालों पर की गई कार्रवाई अनुचित थी और इससे न केवल सांप्रदायिक माहौल बिगड़ा, बल्कि निर्दोष नागरिकों के अधिकारों का हनन भी हुआ। हालाँकि, मौलाना का भड़काऊ बयान अब पूरे मामले को एक नया और गंभीर मोड़ दे चुका है।
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