उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज पल-पल बदल रहा है। पिछले कुछ दिनों से प्रदेशवासियों को जो राहत आंधी और बारिश की वजह से मिल रही थी, उस पर फिलहाल दो दिनों के लिए ब्रेक लग गया है। रविवार सुबह से ही पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह से साफ नजर आ रहा है और आसमान से तेज धूप आग उगलने के लिए तैयार है। हालांकि, सुबह-सुबह चल रही हल्की ठंडी हवाएं तेज धूप की चुभन को थोड़ा कम जरूर कर रही हैं, लेकिन दिन चढ़ने के साथ ही गर्मी अपने चरम पर पहुंचने लगी है। मौसम विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि रविवार को पूरे प्रदेश में कहीं भी आंधी या बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। ऐसे में लोगों को चिलचिलाती धूप का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।Read also:-महंगाई का महा-धमाका! 15 मई से पहले पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ने के संकेत, आपकी जेब पर पड़ेगा इतना बोझ
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तापमान में उछाल: 40°C के पार पहुंचा पारा
\r\n\r\nलगातार बदल रहे मौसम के बीच गर्मी ने एक बार फिर अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। करीब एक सप्ताह की राहत के बाद शनिवार को दिन का तापमान अचानक से 40°C के पार पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि रविवार को भी पारे का यह उछाल जारी रहेगा और अधिकतम तापमान 40°C से लेकर 43°C के बीच झूल सकता है।
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आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने मौसम की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि यूपी में 30 अप्रैल से जो बारिश और आंधी का सिलसिला चल रहा था, उस पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। मौजूदा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) का असर उत्तर प्रदेश से पूरी तरह से खत्म हो गया है। इसी वजह से अगले दो दिनों तक प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ने के आसार हैं। कुछ इलाकों में तो दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म महसूस हो सकती हैं। हालांकि, राहत की बात बस इतनी है कि फिलहाल खतरनाक 'लू' (Heatwave) चलने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
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12 मई से फिर करवट लेगा मौसम: आंधी, ओले और बारिश का अलर्ट
\r\n\r\nअगर आप सोच रहे हैं कि अब गर्मियां लगातार सताएंगी, तो ऐसा नहीं है। 12 मई से मौसम का मिजाज एक बार फिर अचानक बिगड़ने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ों पर एक नया और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है। इस नए सिस्टम के असर से उत्तर प्रदेश में एक बार फिर से बारिश का दौर शुरू होगा।
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वैज्ञानिकों की मानें तो यह सिस्टम इतना मजबूत हो सकता है कि 12 मई से कई जिलों में भयंकर आंधी-तूफान के साथ ओले गिरने जैसे हालात बन सकते हैं। हवा की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे कच्चे मकानों, पेड़ों और होर्डिंग्स को नुकसान पहुंचने की आशंका है। किसानों के लिए भी यह अलर्ट महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेज आंधी और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलों और बागानों को भारी नुकसान हो सकता है।
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पिछले 24 घंटे का हाल: झांसी भट्टी की तरह तपा, सुल्तानपुर में रही ठंडक
\r\n\r\nपिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरे प्रदेश में कहीं भी बारिश की एक बूंद नहीं गिरी। बुंदेलखंड का इलाका, जो अपनी भीषण गर्मी के लिए जाना जाता है, वहां का झांसी शहर सबसे ज्यादा गर्म रहा। झांसी में अधिकतम तापमान 40°C रिकॉर्ड किया गया।
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हैरानी की बात यह है कि महज दो दिन पहले यानी 8 मई को झांसी का पारा 34.8°C रिकॉर्ड किया गया था। इसका मतलब है कि मात्र 48 घंटे के भीतर तापमान में सीधे 5°C का भारी उछाल आया है। वहीं दूसरी ओर, सुल्तानपुर की रात पूरे प्रदेश में सबसे ठंडी रही, जहां न्यूनतम तापमान 19°C रिकॉर्ड किया गया। यह विरोधाभास यूपी के विशाल भौगोलिक क्षेत्र और अलग-अलग मौसमी प्रभाव को दर्शाता है।
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बड़े शहरों का हाल: जानिए अपने शहर का तापमान
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- \r\n लखनऊ (Lucknow): राजधानी लखनऊ में सुबह से ही आसमान एकदम साफ है और तेज धूप निकली हुई है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले एक सप्ताह के भीतर राजधानी के तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की भारी बढ़त देखने को मिल सकती है। जल्द ही लखनऊ का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच जाएगा, जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा।\r\n \r\n
- \r\n कानपुर (Kanpur): मैनचेस्टर ऑफ ईस्ट कहे जाने वाले कानपुर में भी आसमान पूरी तरह साफ है और धूप खिली हुई है। हालांकि, यहां हवा भी चल रही है, लेकिन बीते कुछ दिनों के मुकाबले सुबह के समय से ही गर्मी महसूस की जा रही है। अभी तापमान 31 डिग्री के करीब है, लेकिन दोपहर तक इसके तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।\r\n \r\n
- \r\n गाजियाबाद (Ghaziabad): एनसीआर के अहम शहर गाजियाबाद में सुबह से ही चटक धूप खिली है। यहां सुबह का न्यूनतम तापमान 27.5 डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिन में अधिकतम तापमान 37 डिग्री के पार जा सकता है। पिछले दो दिनों में यहां का पारा 2 डिग्री उछल चुका है।\r\n \r\n
- \r\n बरेली (Bareilly): नाथ नगरी बरेली में भी सुबह से तेज धूप निकली है। यहाँ अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। हवा की रफ्तार 10 से 15 किमी/घंटा रहने की संभावना है, जो थोड़ी राहत दे सकती है।\r\n \r\n
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मौसम में आखिर क्यों हो रहा है इतना उतार-चढ़ाव?
\r\n\r\nमौसम में इस बार-बार हो रहे बदलाव के पीछे मुख्य कारण पहाड़ी इलाकों का मौसम है। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों पर मौसम लगातार करवट ले रहा है। वहां कहीं-कहीं बर्फबारी हो रही है, तो कहीं बारिश। और किसी दिन एकदम से धूप निकलकर मौसम साफ हो जा रहा है।
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पहाड़ों पर होने वाले इस मौसमी ड्रामा का सीधा असर मैदानी इलाकों, विशेषकर उत्तर प्रदेश पर पड़ता है। जब भी पहाड़ों से ठंडी हवाएं मैदानों की तरफ आती हैं, तो वे यूपी के मौसम को ठंडा कर देती हैं। यही हवाएं वायुमंडल में नमी लाती हैं, जो तेज धूप के संपर्क में आकर वाष्पीकृत होती हैं और बारिश के लिए अनुकूल सिस्टम (बादल) तैयार कर देती हैं। अगले कुछ दिनों तक ऐसा ही उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
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अगले 5 दिनों का विस्तृत पूर्वानुमान (11 मई से 15 मई)
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- \r\n 11 मई: पूरे उत्तर प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ रहेगा। आसमान से तेज धूप निकलेगी और दिन का पारा तेजी से चढ़ेगा। गर्मी से बचाव जरूरी है।\r\n \r\n
- \r\n 12 मई: मौसम अचानक पलटेगा। पूर्वी और पश्चिमी यूपी में घने बादल छाए रहेंगे। बारिश होने की पूरी संभावना है और 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलेगी।\r\n \r\n
- \r\n 13 मई: पूरे प्रदेश में बादलों का डेरा रहेगा। कई जिलों में गरज-चमक (Thunderstorm) के साथ झमाझम बारिश होगी और तेज आंधी चलने के आसार हैं।\r\n \r\n
- \r\n 14 मई: यह दिन थोड़ा खतरनाक हो सकता है। तेज हवा के साथ पूरे प्रदेश में बारिश होगी। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning) की भी चेतावनी जारी की गई है। लोगों को बेवजह घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है।\r\n \r\n
- \r\n 15 मई: पश्चिमी यूपी में मौसम धीरे-धीरे साफ होने लगेगा, लेकिन पूर्वी यूपी में अभी भी गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है।\r\n \r\n
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मानसून 2024 पर बड़ा अपडेट: इस साल कम बारिश का अनुमान
\r\n\r\nगर्मी और आंधी के बीच किसानों और आम जनता की निगाहें मानसून पर टिकी होती हैं। लेकिन इस बार मानसून को लेकर जो रिपोर्ट आई है, वह थोड़ी चिंताजनक है। देश की प्रमुख निजी मौसम एजेंसी 'स्काईमेट वेदर' (Skymet Weather) ने इस साल के मानसून का पूर्वानुमान जारी कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल मानसून के दौरान बारिश सामान्य से 6% कम रह सकती है।
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आमतौर पर भारत में जून से लेकर सितंबर तक मानसून के 4 महीनों में बारिश का सामान्य औसत 868.6 मिलीमीटर माना जाता है। मौसम विज्ञान की भाषा में सामान्य से कम मानसून का मतलब है कि कुल बारिश 90% से 95% के बीच ही रहेगी। स्काईमेट एजेंसी ने इस साल कुल 94% बारिश होने का अनुमान जताया है।
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महीनेवार कैसा रहेगा मानसून? रिपोर्ट के मुताबिक, जून के महीने में तो बारिश सामान्य गति से होगी, जिससे किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई में मदद मिलेगी। लेकिन असली चिंता जुलाई से शुरू होगी। जुलाई से बारिश के ग्राफ में गिरावट आनी शुरू हो जाएगी। इसके बाद अगस्त और सितंबर के महीनों में मानसून काफी कमजोर पड़ जाएगा। खासकर अगस्त और सितंबर में बारिश की भारी कमी रहने के संकेत हैं, जो खड़ी फसलों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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यूपी में कम बारिश क्यों होगी? जानिए अल-नीनो और ला-नीना का विज्ञान
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में भी जून से सितंबर के बीच सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई गई है। मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझाया है। उन्होंने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में ला-नीना (La Nina) जैसी स्थितियां अब खत्म हो रही हैं और मौसम तेजी से अल-नीनो (El Nino) की ओर बढ़ रहा है।
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यही अल-नीनो भारत में कम वर्षा का सबसे बड़ा कारण बनेगा। आसान शब्दों में कहें तो इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से काफी कमजोर रहने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा, एक और बड़ा कारण यह है कि इस साल जनवरी से मार्च के बीच उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में बर्फबारी कम हुई है। कम बर्फबारी का असर भी सीधे तौर पर मानसून के हवाओं के दबाव को प्रभावित करता है।
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क्या होता है अल-नीनो (El Nino)? अल-नीनो एक ऐसी समुद्री और वायुमंडलीय घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के सतह का तापमान सामान्य से 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है। इसका प्रभाव आमतौर पर 10 साल में दो बार देखने को मिलता है। अल-नीनो के सक्रिय होने से हवाओं का रुख बदल जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि दुनिया में जिन क्षेत्रों में आमतौर पर ज्यादा बारिश होती है (जैसे भारत), वहां सूखा पड़ने लगता है या बारिश कम होती है। वहीं, जिन क्षेत्रों में कम बारिश होती है, वहां बाढ़ आने लगती है।
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क्या होता है ला-नीना (La Nina)? ला-नीना, अल-नीनो के बिल्कुल विपरीत काम करता है। इस स्थिति में प्रशांत महासागर का पानी तेजी से ठंडा होने लगता है। इसका असर दुनियाभर के मौसम पर बहुत सकारात्मक पड़ता है, खासकर भारत के लिए। ला-नीना के प्रभाव से आसमान में घने बादल छाते हैं, मानसूनी हवाएं मजबूत होती हैं और देश भर में बहुत अच्छी बारिश होती है। पिछले कुछ समय से ला-नीना का ही असर था, जिससे अच्छी बारिश हो रही थी, लेकिन अब इसके खत्म होने से चिंताएं बढ़ गई हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.