उत्तर प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह से अपने रौद्र रूप में आ चुका है। लगातार हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण प्रदेश भर की नदियां उफान पर हैं और खादर तथा तटीय इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। हालात इतने गंभीर हैं कि गंगा, यमुना, शारदा और सरयू समेत 10 से ज्यादा प्रमुख नदियां खतरे के निशान के बेहद करीब बह रही हैं। इस जलप्रलय ने धर्मनगरी काशी और मथुरा से लेकर ऐतिहासिक शहर कानपुर तक के घाटों को जलमग्न कर दिया है, वहीं ग्रामीण इलाकों में जनजीवन पूरी तरह से ठप पड़ गया है।READ ALSO:-बिजनौर में कांवड़ यात्रा का महाकुंभ: बच्चों की सुरक्षा और भारी ट्रैफिक को देखते हुए सोमवार को सभी स्कूल बंद, जिला प्रशासन का बड़ा आदेश जारी
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आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि प्रदेश के किन जिलों में बाढ़ ने हाहाकार मचा रखा है, बारिश के ताज़ा आंकड़े क्या कहते हैं, और सबसे महत्वपूर्ण—कल (सोमवार) को पश्चिमी यूपी (UP West) और पूर्वी यूपी (UP East) का मौसम कैसा रहने वाला है।
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धर्मनगरियों में जलप्रलय: काशी, मथुरा और कानपुर में नदियों का रौद्र रूप

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नदियों के उफनते जलस्तर ने सबसे ज्यादा तबाही नदियों के किनारे बसे शहरों और उनके ऐतिहासिक घाटों पर मचाई है:
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    काशी (वाराणसी) में 84 घाटों का संपर्क टूटा: आध्यात्मिक नगरी काशी में मां गंगा का जलस्तर लगातार डराने लगा है। पानी इतना बढ़ गया है कि यह प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि काशी के सभी 84 घाटों को आपस में जोड़ने वाले रास्ते पूरी तरह से जलमग्न हो गए हैं, जिससे घाटों का आपसी संपर्क कट गया है। विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेघ घाट पर होने वाली नित्य गंगा आरती की जगह भी बाढ़ के पानी के कारण बदलनी पड़ी है।
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    मथुरा-वृंदावन में सीढ़ियों तक पहुंचा यमुना का पानी: कान्हा की नगरी मथुरा में यमुना नदी पूरे उफान पर है। पानी घाटों की सीढ़ियों को पार कर ऊपर तक आ गया है। वृंदावन के ऐतिहासिक केशीघाट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां पूरा परिक्रमा मार्ग डूब चुका है। आस्था का आलम यह है कि भक्त मजबूरी में एक फीट गहरे पानी में उतरकर परिक्रमा पूरी कर रहे हैं।
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    कानपुर में 'ब्रह्मा की खूंटी' जलमग्न: कानपुर शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध गंगा घाट 'ब्रह्मावर्त घाट' पर भी पानी ने अपना कब्जा जमा लिया है। यहां मंदिर में स्थित पौराणिक 'ब्रह्मा की खूंटी' पूरी तरह डूब चुकी है, जो गंगा के विकराल रूप का सीधा संकेत है।
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टापू बने गांव: फर्रुखाबाद और बिजनौर में नावों और ट्रैक्टरों का सहारा

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शहरी घाटों के अलावा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में नदियां किसानों और निवासियों के लिए आफत बन गई हैं। लाखों हेक्टेयर फसलें बर्बाद होने के कगार पर हैं:
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    फर्रुखाबाद में 36 गांव बाढ़ की चपेट में: गंगा और रामगंगा के उफान ने फर्रुखाबाद जिले में भारी तबाही मचाई है। जिले के 36 से अधिक गांव पूरी तरह से बाढ़ के पानी से घिर चुके हैं। यहां के ग्रामीण इलाकों में अब सड़कों की जगह नावें चल रही हैं।
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    बिजनौर में 11 दिनों से हाईवे पर बह रहा पानी: पश्चिमी यूपी के बिजनौर में हालात बेकाबू हैं। पिछले 11 दिनों से गंगा का पानी सीधे स्टेट हाईवे के ऊपर से बह रहा है। जिले के 12 गांवों में बाढ़ से हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि लोग अपने पुश्तैनी घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। पानी के बीच फंसे लोगों को अपनी रोजमर्रा की आवाजाही के लिए सिर्फ ट्रैक्टर और बैलगाड़ी का ही सहारा बचा है।
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आज का मौसम और मौसम विभाग (IMD) का बड़ा अलर्ट

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रविवार की सुबह से प्रदेश की राजधानी लखनऊ, औद्योगिक शहर कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज समेत कई प्रमुख शहरों में मौसम साफ रहा। आसमान में तेज धूप खिली रही, लेकिन बीच-बीच में बादलों की आवाजाही ने मौसम को सुहाना बनाए रखा। ठंडी हवाएं चलने के कारण लोगों को उमस और भीषण गर्मी से काफी राहत मिली।
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हालांकि, यह राहत केवल कुछ समय की है। मौसम विभाग (IMD) ने रविवार को ही प्रदेश के 52 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। ललितपुर और सोनभद्र समेत 10 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। सोमवार को पूरे उत्तर प्रदेश में व्यापक रूप से मानसूनी बारिश होने की पूरी संभावना है। प्रशासन ने खास तौर पर ललितपुर और महोबा जिलों के लिए 'भारी से भारी बारिश' का रेड/ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
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कल कहां-कहां होगी बारिश? जानें UP West और UP East का सटीक पूर्वानुमान

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आगामी 24 से 72 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का मिज़ाज भिन्न रहने वाला है। यहाँ पश्चिमी और पूर्वी यूपी का स्पष्ट पूर्वानुमान दिया गया है:
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पश्चिमी यूपी (UP West) के मौसम का हाल

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मानसूनी गतिविधियां जारी रहेंगी। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार, मानसूनी रेखा (Monsoon Trough) इस समय दिल्ली और आगरा से होकर गुजर रही है।
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    प्रभावित क्षेत्र: इसके प्रभाव से आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, और मुरादाबाद मंडलों में कल मध्यम से भारी बारिश देखने को मिल सकती है।
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    बाढ़ का खतरा: चूंकि बिजनौर जैसे तराई इलाकों में गंगा पहले से ही उफान पर है और पश्चिमी यूपी के दक्षिणी हिस्से (बुंदेलखंड से सटे ललितपुर और महोबा) में भारी से भारी बारिश का अलर्ट है, इसलिए यहाँ नदियों का जलस्तर और तेजी से बढ़ सकता है। पश्चिमी यूपी में बादलों की गड़गड़ाहट के साथ रुक-रुक कर बारिश का दौर कल पूरे दिन बना रहेगा।
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पूर्वी यूपी (UP East) के मौसम का हाल

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पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए एक नया मौसमी सिस्टम तैयार हो रहा है। दक्षिणी पश्चिम बंगाल और उससे सटे उत्तरी ओडिशा पर बना एक नया कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) तेजी से उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है।
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    प्रभावित क्षेत्र: इस सिस्टम के असर से कल पूर्वी यूपी (वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर, भदोही, गोरखपुर, और बलिया) में बादलों का डेरा रहेगा और अच्छी बारिश होगी।
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    नदियों पर असर: काशी में गंगा पहले ही खतरे के पास है, और पूर्वी यूपी के दक्षिणी हिस्सों (जैसे सोनभद्र और मिर्जापुर) में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके चलते पूर्वी यूपी में अगले तीन दिनों तक मानसून अत्यधिक सक्रिय रहेगा और ठंडी हवाओं के साथ झमाझम बारिश होगी।
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मौसम वैज्ञानिक का विश्लेषण: क्यों बिगड़ रहे हैं हालात?

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लखनऊ मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने वर्तमान मौसमी बदलावों पर प्रकाश डालते हुए बताया, "दक्षिण-पश्चिम यूपी के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र अब भले ही कमजोर पड़ गया है, लेकिन मुख्य मानसूनी रेखा (Monsoon Trough) अभी भी दिल्ली और आगरा से होते हुए पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी की ओर जा रही है।"
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उन्होंने आगे बताया कि बंगाल की खाड़ी और ओडिशा तट पर बन रहे नए कम दबाव के क्षेत्र के कारण, आने वाले कम से कम तीन दिनों तक उत्तर प्रदेश के दक्षिणी और तराई हिस्सों में मानसून अपनी चरम सक्रियता पर रहेगा, जिससे रुक-रुक कर भारी बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
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यूपी में बारिश के चौंकाने वाले आंकड़े: कहीं सूखा, कहीं जलप्रलय

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लगातार हो रही बारिश के बावजूद, अगर 1 जून (मानसून की शुरुआत) से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उत्तर प्रदेश में कुल मिलाकर बारिश का बड़ा असंतुलन देखने को मिला है:
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    प्रदेश का कुल आंकड़ा (20% कम बारिश): मौसम विभाग के अनुसार, 1 जून से अब तक यूपी में औसतन 423.5 मिमी बारिश होनी चाहिए थी। लेकिन वास्तविकता में अब तक केवल 337.7 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो कि सामान्य से करीब 20 प्रतिशत कम है।
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    संभल में रिकॉर्ड तोड़ बारिश: पश्चिमी यूपी का संभल जिला बारिश के मामले में सबसे आगे रहा है। यहां सामान्य तौर पर 377.4 मिमी बारिश का अनुमान था, लेकिन अब तक 642.7 मिमी बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है, जो कि सामान्य से लगभग 70% अधिक है।
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    भदोही में सूखे जैसे हालात: दूसरी ओर, पूर्वी यूपी के भदोही जिले में मानसून रूठा हुआ नजर आया। यहां 445.6 मिमी बारिश का अनुमान था, लेकिन अब तक मात्र 139.8 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है, जो किसानों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
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मौसम की यह असमानता और उफनती नदियां प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं। आम जनता से अपील है कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और नदियों के घाटों से उचित दूरी बनाए रखें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करते हुए सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।
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