उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी और ऐतिहासिक कदम उठाया है। 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' (Mukhyamantri Gram Parivahan Yojana 2026) के तहत अब प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों को सीधे ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों से बस सेवा के माध्यम से जोड़ा जाएगा। हाल ही में यूपी कैबिनेट द्वारा इस योजना को हरी झंडी मिलने के बाद, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने इसे धरातल पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। इसी कड़ी में राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के विभिन्न रीजन में निजी बस संचालकों से आवेदन मांगे गए हैं। यह योजना न केवल ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने वाली है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करने जा रही है।READ ALSO:-मेरठ में 'गैस इमरजेंसी': घरेलू चूल्हे तो जले, लेकिन फैक्ट्रियों की भट्टियां बुझीं; कमर्शियल LPG किल्लत से करोड़ों का कारोबार ठप
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इस लेख में हम 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के हर एक पहलू, आवेदन प्रक्रिया, नियम, शर्तें और इसके दूरगामी प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
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मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026 क्या है?
\r\n\r\n'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' उत्तर प्रदेश सरकार की एक ऐसी पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के उन सुदूर ग्रामीण इलाकों को मुख्यधारा से जोड़ना है, जहां आजादी के दशकों बाद भी सार्वजनिक परिवहन की सुलभ व्यवस्था नहीं थी। राज्य में लगभग 59,163 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 12,200 से अधिक गांव ऐसे थे जहां कोई बस सेवा नहीं पहुंचती थी। इस नई नीति के तहत, अब यूपी के हर एक गांव तक बस की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।
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इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें निजी क्षेत्र के बस संचालकों (Private Operators) को शामिल किया जा रहा है। सरकार का मॉडल यह है कि निजी ऑपरेटर अपनी छोटी बसें (मिनी बस) लगाएंगे, और सरकार उन्हें परमिट व टैक्स में भारी छूट देगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की जनता—विशेषकर छात्रों, महिलाओं, किसानों और मजदूरों—को अपने दैनिक कार्यों के लिए शहर आने-जाने में एक सुरक्षित, सस्ती और विश्वसनीय परिवहन सुविधा मिलेगी।
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लखनऊ में योजना का क्रियान्वयन और आवेदन प्रक्रिया
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) के लखनऊ परिक्षेत्र ने इस योजना को लागू करने के लिए कमर कस ली है। लखनऊ रीजन के क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) अमरनाथ सहाय ने बताया कि 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों की जनता को सुरक्षित और सीधी बस सेवा उपलब्ध कराने के लिए निजी बस मालिकों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
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आवेदन कहां और कैसे करें? लखनऊ और आसपास के ब्लॉकों में बस संचालन के इच्छुक वाहन स्वामियों को अपना आवेदन कैसरबाग स्थित सहायक क्षेत्रीय प्रबन्धक (एआरएम - ARM) कार्यालय में जमा करना होगा। परिवहन निगम ने आवेदकों की सुविधा के लिए संपर्क सूत्र भी जारी किए हैं। किसी भी प्रकार की जानकारी या शंका समाधान के लिए मोबाइल नंबर 8726005106 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा, आधिकारिक ईमेल आईडी armksb@upsrtc.com पर भी मेल भेजकर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि वाहन स्वामी जिस ब्लॉक के लिए आवेदन करेंगे, उन्हें उसी ब्लॉक की ग्राम पंचायतों और निर्धारित रूट पर वाहन संचालन की अनुमति दी जाएगी। इसका अर्थ है कि स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में बस चलाने का मौका मिलेगा, जिससे उन्हें रूट की भौगोलिक जानकारी का फायदा भी होगा।
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45 दिन का मास्टर प्लान: कैसे मिलेगी बस संचालन की मंजूरी?
\r\n\r\nसरकार ने 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' को लाल फीताशाही से बचाने और तेजी से लागू करने के लिए एक सख्त और स्पष्ट समय-सीमा (Time Limit) तय की है। पूरी प्रक्रिया को मात्र 45 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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- \r\n आवेदन और स्क्रीनिंग (15 दिन): परिवहन निगम द्वारा आवेदन मांगे जाने के बाद, प्राप्त सभी आवेदनों की शुरुआती जांच (Screening) 15 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इस दौरान दस्तावेजों की वैधता और आवेदक की पृष्ठभूमि की जांच होगी।\r\n \r\n
- \r\n वाहन उपलब्ध कराना (15 दिन): स्क्रीनिंग में सफल होने वाले आवेदकों (वाहन स्वामियों) को अपने वाहन (बस) को विभाग के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस अवधि में उन्हें बस की फिटनेस, रंग-रूप और निगम द्वारा तय किए गए मानकों को पूरा करना होगा।\r\n \r\n
- \r\n अंतिम प्रक्रिया और संचालन (15 दिन): वाहन के निरीक्षण और सभी औपचारिकताओं (जैसे अनुबंध पर हस्ताक्षर, सुरक्षा राशि जमा करना आदि) के लिए बाकी 15 दिन का समय रहेगा।\r\n \r\n
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इस प्रकार, कुल 45 दिनों के अंदर आवेदक को बस संचालन की अंतिम अनुमति मिल जाएगी और बसें गांव की सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।
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चयन समिति: जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता में होगा फैसला
\r\n\r\nइस योजना में पारदर्शिता बनाए रखने और स्थानीय स्तर पर सही निर्णय लेने के लिए जिला स्तर पर एक उच्चाधिकार प्राप्त चयन समिति का गठन किया गया है। आवेदनों की अंतिम जांच, रूट का निर्धारण और वाहन स्वामियों का चयन इसी समिति द्वारा किया जाएगा।
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इस समिति की संरचना इस प्रकार होगी:
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- \r\n अध्यक्ष: संबंधित जिले के जिलाधिकारी (District Magistrate - DM)\r\n \r\n
- \r\n सदस्य: मुख्य विकास अधिकारी (CDO)\r\n \r\n
- \r\n सदस्य: पुलिस अधीक्षक (SP) या उनके प्रतिनिधि\r\n \r\n
- \r\n सदस्य: सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (ARTO)\r\n \r\n
- \r\n सदस्य सचिव: परिवहन निगम के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (ARM)\r\n \r\n
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यह समिति न केवल आवेदकों का चयन करेगी, बल्कि स्थानीय परिस्थितियों और मांग को देखते हुए किराया (Fare) और रूट मैप भी तय करेगी, ताकि जनता और बस ऑपरेटर दोनों को नुकसान न हो।
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वाहन स्वामियों के लिए पात्रता, नियम और शर्तें
\r\n\r\n'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' में शामिल होने के लिए परिवहन निगम ने कुछ स्पष्ट नियम और तकनीकी मापदंड तय किए हैं। जो भी निजी ऑपरेटर इस योजना का हिस्सा बनना चाहता है, उसे निम्नलिखित शर्तों का पालन करना अनिवार्य होगा:
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1. वाहन की क्षमता और प्रकार
\r\n\r\nग्रामीण रास्तों की चौड़ाई और मोड़ को ध्यान में रखते हुए बड़ी बसों के बजाय मिनी बसों को प्राथमिकता दी गई है। योजना के तहत 15 से 28 सीट क्षमता वाले वाहन ही मान्य होंगे। ये वाहन डीजल, सीएनजी (CNG) या इलेक्ट्रिक (EV) हो सकते हैं।
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2. वाहनों की आयु सीमा (Age Limit of Vehicles)
\r\n\r\nइस योजना में खटारा बसों के संचालन पर पूरी तरह रोक है। वाहन की अधिकतम आयु सीमा 8 वर्ष तय की गई है। यानी 8 साल से पुरानी बसें इस योजना में स्वीकार नहीं की जाएंगी। एक बार अनुबंध होने के बाद, अनुबंध की मूल अवधि 10 वर्ष की होगी, जिसे बाद में वाहन की स्थिति (Fitness) के आधार पर अधिकतम 5 वर्ष तक और बढ़ाया जा सकेगा।
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3. एनसीआर (NCR) क्षेत्र के लिए विशेष नियम
\r\n\r\nराष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वहां के लिए नियम सख्त किए गए हैं। एनसीआर के अंतर्गत आने वाले उत्तर प्रदेश के जिलों (जैसे नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ आदि) में 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के तहत केवल सीएनजी (CNG) या इलेक्ट्रिक (EV) बसें ही स्वीकार की जाएंगी। वहां डीजल बसों के संचालन की अनुमति नहीं होगी।
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4. वित्तीय शर्तें और शुल्क
\r\n\r\nनिजी बस संचालकों के लिए सरकार ने वित्तीय ढांचे को बहुत ही सरल और किफायती रखा है:
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- \r\n आवेदन शुल्क (Application Fee): मात्र 2000 रुपये।\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा राशि (Security Money): प्रति वाहन 5000 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी।\r\n \r\n
- \r\n मासिक शुल्क (Monthly Fee): वाहन स्वामी को परिवहन निगम (UPSRTC) को प्रतिमाह 1500 रुपये का संरक्षण शुल्क (Protection Fee) देना होगा।\r\n \r\n
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5. परमिट और टैक्स से छूट (सबसे बड़ा फायदा)
\r\n\r\nइस योजना को आकर्षक बनाने के लिए राज्य सरकार ने सबसे बड़ा दांव चला है। 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के तहत अनुबंधित बसों को परमिट की अनिवार्यता से पूरी तरह छूट (Permit Free) देने का प्रस्ताव किया गया है। साथ ही इन बसों को रोड टैक्स से भी मुक्त रखा गया है। इससे बस मालिकों को हर साल होने वाले लाखों रुपये के खर्च की बचत होगी, जिससे कम किराये में भी वे मुनाफा कमा सकेंगे।
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संचालन और रूट के कड़े नियम: वाहन स्वामी इन बातों का रखें ध्यान
\r\n\r\nयोजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, इसके लिए यूपी सरकार ने बस संचालन के लिए सख्त नियम बनाए हैं। बस मालिकों को अपनी मनमर्जी से बस चलाने की छूट नहीं होगी, बल्कि उन्हें एक तय प्रोटोकॉल का पालन करना होगा:
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- \r\n रूट का निर्धारण: आवेदक ने जिस ब्लॉक में आवेदन किया है, वहां उसको अपने विवेकानुसार संचालन, फेरों की संख्या और रूट का निर्धारण करने का प्राथमिक अधिकार होगा, लेकिन ग्राम पंचायत से ब्लॉक तक का जो सबसे छोटा रूट (Shortest Route) होगा, वही उस वाहन का आधिकारिक मार्ग माना जाएगा। यह सेवा ग्राम पंचायत से शुरू होकर ब्लॉक, तहसील और फिर जिला मुख्यालय तक जा सकेगी।\r\n \r\n
- \r\n न्यूनतम फेरे (Minimum Trips): ऑपरेटर को प्रत्येक ग्राम पंचायत में प्रतिदिन कम से कम दो बार (Two Times) वाहन की सेवा प्रदान करना अनिवार्य होगा। एक बार सुबह गांव से शहर की ओर और दूसरी बार शाम को शहर से गांव की ओर।\r\n \r\n
- \r\n प्रति ब्लॉक न्यूनतम बसें: यह सुनिश्चित किया जाएगा कि राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम दो वाहनों (बसों) का संचालन हो।\r\n \r\n
- \r\n रूट परिवर्तन पर पाबंदी: बस मालिक अपनी मर्जी से ब्लॉक या रूट नहीं बदल सकते। रूट परिवर्तन सामान्यतः मान्य नहीं होगा। विशेष परिस्थिति में इसके लिए जिलाधिकारी (DM) की अध्यक्षता वाली समिति से लिखित अनुमति लेनी होगी।\r\n \r\n
- \r\n स्टाफ की व्यवस्था: बस पर तैनात चालक (Driver) और परिचालक (Conductor) की नियुक्ति वाहन स्वामी स्वयं करेगा। सरकार की मंशा है कि ड्राइवर और कंडक्टर उसी गांव या आसपास के इलाके के हों, ताकि रात में बस को गांव में हॉल्ट (Night Halt) कराने में सुविधा हो और सुबह जल्दी बस शुरू की जा सके।\r\n \r\n
- \r\n किराये का निर्धारण (Ticketing): टिकट की दरों का निर्धारण स्थानीय मांग के अनुसार वाहन स्वामी द्वारा स्वयं किया जाएगा, लेकिन यह मनमाना नहीं हो सकता। टिकट की अधिकतम धनराशि राज्य परिवहन प्राधिकरण (State Transport Authority) द्वारा निर्धारित दर से ज्यादा नहीं हो सकती। जिला स्तरीय समिति यह सुनिश्चित करेगी कि किराया आम आदमी की जेब पर भारी न पड़े।\r\n \r\n
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बीमा, फिटनेस और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी
\r\n\r\n'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' में यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। अनुबंधित बसें भले ही सरकारी नियंत्रण में चलेंगी, लेकिन उनके रखरखाव और सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी बस मालिक की होगी।
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- \r\n कागजात की वैधता: वाहन की फिटनेस (Fitness Certificate), रोड टैक्स की अदायगी, वाहन का वैध बीमा (Comprehensive Insurance), और चालक व परिचालक के ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) की वैधता सुनिश्चित करने की पूर्ण जिम्मेदारी वाहन स्वामी की होगी।\r\n \r\n
- \r\n दुर्घटना का उत्तरदायित्व (Accident Liability): बस संचालन के दौरान यदि कोई दुर्घटना (Accident) होती है, तो उसके लिए राज्य सरकार या परिवहन निगम जिम्मेदार नहीं होगा। दुर्घटना की स्थिति में किसी भी प्रकार के मुआवजे (Compensation) या कानूनी कार्रवाई का पूरा उत्तरदायित्व बस मालिक का ही होगा। इसलिए थर्ड पार्टी इंश्योरेंस का होना बेहद जरूरी है। (External link: source URL - Motor Vehicles Act 1988 Guidelines on Commercial Passenger Vehicles)\r\n \r\n
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ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' का प्रभाव
\r\n\r\nयह योजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) के लिए एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
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1. स्वरोजगार और स्थानीय नौकरियां: इस योजना से हजारों की संख्या में निजी बस मालिकों को अपना व्यवसाय शुरू करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा, चूंकि एक बस पर एक ड्राइवर, एक कंडक्टर और संभवतः एक हेल्पर की जरूरत होगी, इसलिए राज्य में प्रत्यक्ष रूप से 20 से 30 हजार नए रोजगार पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को उनके गांव के पास ही रोजगार मिल सकेगा।
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2. किसानों और छोटे व्यापारियों को लाभ: गांवों में पैदा होने वाली ताजी सब्जियां, फल और दूध को शहर के बाजारों तक पहुंचाने में अक्सर किसानों को दिक्कत होती थी या उन्हें महंगे निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता था। अब इस नियमित बस सेवा से ग्रामीण किसान अपने उत्पाद आसानी से और कम लागत में तहसील या जिला मुख्यालय की मंडियों तक पहुंचा सकेंगे।
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3. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में क्रांति: ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियां अक्सर अच्छी परिवहन सुविधा न होने के कारण अपनी उच्च शिक्षा बीच में ही छोड़ देती थीं। 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के तहत सुरक्षित बस सेवा मिलने से छात्राएं ब्लॉक या जिला मुख्यालय के कॉलेजों में आसानी से जा सकेंगी। इसी तरह, मेडिकल इमरजेंसी या नियमित चेकअप के लिए शहर के अस्पतालों तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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4. दिन के समय का सदुपयोग: परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुसार, ये बसें सुबह गांव से चलकर 10 बजे तक मुख्यालय पहुंचेंगी। इसके बाद सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ये बसें खाली नहीं खड़ी रहेंगी, बल्कि उन्हें शहर के अन्य छोटे रूटों पर डायवर्ट (Divert) किया जाएगा। इससे बस मालिकों की अतिरिक्त कमाई होगी। शाम 4 बजे के बाद ये बसें वापस यात्रियों को लेकर गांवों की तरफ लौटेंगी और रात 8 बजे तक गांव पहुंच जाएंगी।
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पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक कदम
\r\n\r\nसरकार ने इस योजना के तहत 8 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को प्रतिबंधित करके और एनसीआर में केवल सीएनजी/ईवी को अनिवार्य करके पर्यावरण संरक्षण (Environmental Protection) का भी ध्यान रखा है। पुरानी खटारा बसों और जुगाड़ वाहनों (डग्गामार वाहन) से होने वाले प्रदूषण और हादसों पर लगाम लगेगी। 15 से 28 सीटर नई बसें न केवल आरामदायक होंगी, बल्कि उनका कार्बन फुटप्रिंट (Carbon Footprint) भी कम होगा।
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सुशासन और ग्रामीण सशक्तिकरण की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश
\r\n\r\nअंत में यह कहा जा सकता है कि 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से जो गांव पक्की सड़कों और परिवहन के साधनों से कटे हुए थे, वे अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने लखनऊ से इसकी शुरुआत कर दी है और जल्द ही 28 मार्च तक इसके आवेदन पूरे कर लिए जाएंगे। 45 दिन की त्वरित प्रक्रिया यह दर्शाती है कि सरकार इस योजना को लेकर कितनी गंभीर है।
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निजी ऑपरेटरों को टैक्स और परमिट से छूट देकर सरकार ने एक शानदार 'पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप' (PPP Model) का उदाहरण पेश किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गांव की पगडंडियों से शहर के पक्के रास्तों तक का यह नया सफर उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को कितनी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है। यदि आप भी इस योजना का लाभ उठाकर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो तुरंत अपने जिले के एआरएम (ARM) कार्यालय से संपर्क करें और आवेदन की प्रक्रिया पूरी करें।
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'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना 2026' के तहत उत्तर प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम पंचायतों को ब्लॉक और जिला मुख्यालयों से बस सेवा के जरिए जोड़ा जा रहा है। लखनऊ सहित सभी क्षेत्रों में UPSRTC ने 15-28 सीटर बसों के लिए निजी ऑपरेटरों से आवेदन मांगे हैं। आवेदन से लेकर बस संचालन की अनुमति तक की पूरी प्रक्रिया मात्र 45 दिनों में पूरी की जाएगी। बस मालिकों को हर महीने 1500 रुपये का मामूली शुल्क देना होगा, जबकि उन्हें भारी टैक्स और परमिट से पूरी तरह छूट मिलेगी। एनसीआर में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक बसें ही चलेंगी। यह योजना न केवल ग्रामीणों के लिए यातायात सुलभ बनाएगी, बल्कि प्रदेश में हजारों नए रोजगार भी पैदा करेगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.