उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के दस्तक देने से पहले ही राज्य की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार को आगाह किया है कि यदि समय रहते ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले महीनों में UP Power Supply (यूपी बिजली आपूर्ति) पूरी तरह चरमरा सकती है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक औपचारिक पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। पत्र में वर्तमान "वर्टिकल व्यवस्था" और बुनियादी ढांचे की कमियों को इस संभावित संकट का मुख्य कारण बताया गया है।READ ALSO:-उन्नाव: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर मौत का तांडव, बेकाबू पिकअप के परखच्चे उड़े; हवा में 6 फीट उछले लोग, 3 साल की मासूम समेत 2 की दर्दनाक मौत
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वर्टिकल व्यवस्था से बढ़ी उपभोक्ताओं की परेशानी

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उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, प्रदेश के जिन शहरों में वर्तमान में "वर्टिकल व्यवस्था" लागू की गई है, वहां मार्च के पहले सप्ताह से ही हालात खराब होने लगे हैं। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इस नई व्यवस्था के कारण आम उपभोक्ता परेशान हैं और राज्य में विद्युत दुर्घटनाओं की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
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वर्मा ने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि बिजली संबंधी शिकायतों के लिए बनाई गई टोल-फ्री हेल्पलाइन '1912' अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है। उपभोक्ताओं की शिकायतों का न तो समय पर समाधान हो पा रहा है और न ही कोई प्रभावी फीडबैक मिल रहा है।
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33,000 मेगावाट की पीक डिमांड का अनुमान

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इस वर्ष गर्मी के मौसम में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की संभावना है। परिषद के अनुमान के मुताबिक, इस बार पीक डिमांड 32,000 मेगावाट से लेकर 33,000 मेगावाट के बीच रहने वाली है। यह मांग पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जिसके लिए वर्तमान बुनियादी ढांचा पर्याप्त नजर नहीं आ रहा है।
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राज्य में बिजली की स्थिति को दर्शाने वाले कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:

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    कुल उपभोक्ता: प्रदेश में लगभग 3.72 करोड़ विद्युत उपभोक्ता हैं।
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    स्वीकृत भार: कुल स्वीकृत भार (Approved Load) लगभग 8 करोड़ किलोवाट से अधिक है।
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    सब-स्टेशन क्षमता: 132 केवी सब-स्टेशनों की वर्तमान उपलब्ध क्षमता केवल 6 करोड़ किलोवाट के आसपास है।
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अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि स्वीकृत भार और उपलब्ध क्षमता के बीच जो 2 करोड़ किलोवाट का अंतर है, उसे नियंत्रित रखना पावर कॉरपोरेशन के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। उन्होंने मांग की है कि पावर कॉरपोरेशन प्रयोगात्मक बदलावों को बंद कर व्यावहारिक और उपभोक्ता-केंद्रित व्यवस्था पर ध्यान दे।
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सरकार की छवि खराब करने की साजिश का आरोप

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अवधेश कुमार वर्मा ने अपने पत्र में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यदि भविष्य में विद्युत व्यवस्था विफल होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बिजली विभाग के कुछ चुनिंदा उच्च अधिकारियों की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी जानबूझकर उपभोक्ताओं को मुसीबत में डाल रहे हैं ताकि सरकार की छवि खराब की जा सके।
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परिषद ने राज्य सरकार से निम्नलिखित आग्रह किए हैं:

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    ग्रीष्मकाल के पूर्ण रूप से प्रारंभ होने से पूर्व वर्तमान व्यवस्था का वास्तविक और गंभीर आकलन किया जाए।
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    बिजली कंपनियों में किए जा रहे प्रयोगात्मक प्रशासनिक बदलावों को तुरंत रोका जाए।
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    यदि उपभोक्ताओं को बिजली संकट का सामना करना पड़ता है, तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
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उत्तर प्रदेश की बिजली व्यवस्था इस समय एक नाजुक मोड़ पर है। एक तरफ बढ़ती मांग और दूसरी तरफ बुनियादी ढांचे में सुधार की धीमी गति, आने वाली गर्मी में आम जनता के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। UP Power Supply को सुचारू बनाए रखने के लिए न केवल पर्याप्त बिजली उत्पादन की आवश्यकता है, बल्कि वितरण और शिकायत निवारण तंत्र को भी मजबूत करना होगा। यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उपभोक्ता परिषद की इस चेतावनी पर तुरंत संज्ञान लेते हैं, तो शायद प्रदेश को एक बड़े बिजली संकट से बचाया जा सकेगा।
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राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने यूपी के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आने वाली गर्मी में बिजली संकट की चेतावनी दी है। परिषद का कहना है कि 33,000 मेगावाट की पीक डिमांड के मुकाबले सब-स्टेशनों की क्षमता 2 करोड़ किलोवाट कम है। साथ ही, वर्टिकल व्यवस्था और हेल्पलाइन 1912 की विफलता से उपभोक्ताओं में रोष है। परिषद ने इसे सरकार की छवि खराब करने की साजिश बताते हुए अधिकारियों पर कार्रवाई और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
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