उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे (किलोमीटर 224) पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे का लाइव वीडियो सामने आया है। फरीदाबाद से होली मनाने लौट रहे परिवार की बेकाबू पिकअप डिवाइडर से टकराई। हवा में 6 फीट उ
Published at : 03 Mar 2026, 12:51 PM
Updated at : 11 Sep 2026, 09:25 PM
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Unnao Death leap on expressway Holi celebrations turn into mourning
मंगलवार की सुबह, देश के सबसे प्रमुख और तेज रफ्तार वाले मार्गों में से एक, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे (Agra-Lucknow Expressway) पर एक ऐसा खौफनाक सड़क हादसा (Road Accident) हुआ, जिसका लाइव वीडियो देखकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं। फरीदाबाद (Faridabad) से उन्नाव लौट रही एक तेज रफ्तार पिकअप गाड़ी अचानक बेकाबू होकर सीधे डिवाइडर से जा टकराई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि गाड़ी के पीछे बैठे लोग गुरुत्वाकर्षण के सारे नियमों को तोड़ते हुए हवा में 6 फीट तक उछल गए और 15 फीट दूर जाकर गिरे।
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@khabreelal_news उन्नाव में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे (किलोमीटर 224) पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे का लाइव वीडियो सामने आया है। फरीदाबाद से होली मनाने लौट रहे परिवार की बेकाबू पिकअप डिवाइडर से टकराई। हवा में 6 फीट उछले लोग, ड्राइवर और 3 साल की बच्ची की मौके पर ही मौत। pic.twitter.com/5mC9Kjls0R
इस हृदयविदारक हादसे में पिकअप के ड्राइवर और एक 3 साल की मासूम बच्ची की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 4 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। आइए, इस पूरे खौफनाक हादसे, इसके कारणों, यूपीडा (UPIDA) के रेस्क्यू ऑपरेशन और पीड़ित परिवारों की पृष्ठभूमि का विस्तार से विश्लेषण करते हैं।
1. घटना का समय और स्थान: आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे का किलोमीटर 224
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यह जानलेवा हादसा मंगलवार की सुबह हुआ। जब सूरज की पहली किरणें एक्सप्रेस-वे को रोशन कर रही थीं, तब उन्नाव जिले के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र (Bangarmau Kotwali) के अंतर्गत आने वाले किलोमीटर संख्या 224 पर मौत अपना खेल खेल रही थी।
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे 302 किलोमीटर लंबा एक हाई-स्पीड कॉरिडोर है, जो उत्तर प्रदेश के कई जिलों को जोड़ता है। इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की गति सीमा (Speed Limit) आमतौर पर 100 किमी/घंटा निर्धारित है। तड़के का समय अक्सर ड्राइवरों के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है, क्योंकि इसी समय 'हाइवे हिप्नोसिस' (Highway Hypnosis) या नींद का झोंका आने की सबसे अधिक संभावना होती है। माना जा रहा है कि इस हादसे के पीछे भी तेज रफ्तार और ड्राइवर का नियंत्रण खोना ही मुख्य कारण रहा।
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2. रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो: मौत की वह चंद सेकंड की क्लिप
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इस पूरे हादसे का एक सीसीटीवी/डैशकैम वीडियो सामने आया है, जो सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो दिल कमजोर वाले लोगों के लिए नहीं है, क्योंकि इसमें मौत का नंगा नाच साफ नजर आ रहा है।
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वीडियो का दृश्य-दर-दृश्य विश्लेषण:
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तेज रफ्तार की एंट्री: वीडियो की शुरुआत में एक सफेद रंग की पिकअप गाड़ी अत्यधिक तेज गति से अपनी लेन में आती हुई दिखाई देती है।
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नियंत्रण खोना: अचानक गाड़ी का संतुलन बिगड़ता है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे ड्राइवर अशोक कुमार (30) का स्टीयरिंग पर से नियंत्रण पूरी तरह से खत्म हो गया हो।
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डिवाइडर पर चढ़ना: अगले ही पल, पिकअप के अगले दोनों पहिए सड़क के बीचोबीच बने कंक्रीट के डिवाइडर (Divider) पर चढ़ जाते हैं।
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भीषण टक्कर: गाड़ी डिवाइडर की मजबूत दीवार से पूरी ताकत से टकराती है। टक्कर लगते ही एक जोरदार और भयानक झटका लगता है। गाड़ी का अगला हिस्सा (इंजन और केबिन) बुरी तरह से चकनाचूर हो जाता है।
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हवा में उछलते इंसान: इस हादसे का सबसे खौफनाक मंजर वह है, जब पिकअप के पीछे (डाले में) बैठे लोग टक्कर के झटके (Inertia) के कारण हवा में करीब 6 फीट ऊपर उछल जाते हैं। भौतिक विज्ञान का नियम कहता है कि जब कोई वाहन अचानक रुकता है, तो उसमें बैठे लोग उसी गति से आगे की ओर फेंक दिए जाते हैं।
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सड़क पर गिरे शव: हवा में उछलने के बाद एक युवक करीब 15 फीट आगे जाकर कंक्रीट की सड़क पर बुरी तरह गिरता है, जबकि 2 अन्य युवक 10 फीट आगे गिरकर तड़पने लगते हैं।
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मदद की गुहार: एक युवक पिकअप की बॉडी फटने के कारण उसी के पिछले टायर के पास जा गिरता है। वह गंभीर रूप से घायल है, लेकिन कुछ देर बाद वह हिम्मत जुटाकर उठता है और हाईवे पर गुजरने वाले अन्य वाहनों से मदद के लिए चीखने-चिल्लाने लगता है।
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3. पीड़ित परिवार: फरीदाबाद से लौट रही थीं खुशियां
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इस पिकअप में सवार लोग कोई अजनबी नहीं थे, बल्कि एक ही गांव और परिवार के लोग थे, जो परदेस में मेहनत-मजदूरी करके अपना घर चलाते थे।
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कौन-कौन था गाड़ी में सवार? उन्नाव जिले के औरास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अरसेम गांव का रहने वाला मोनू (Monu) अपने पूरे परिवार के साथ इस पिकअप में सफर कर रहा था। उनके साथ परिवार के अन्य सदस्य भी थे:
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शिवमूर्ति (उम्र 32 वर्ष): गंभीर रूप से घायल।
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मुंशीलाल (उम्र 40 वर्ष): हादसे में बुरी तरह घायल और सदमे में।
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महक (उम्र 8 वर्ष): मोनू की बड़ी बेटी, जो इस खौफनाक हादसे में घायल हुई है।
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शिक्षा (उम्र 3 वर्ष): मोनू की सबसे छोटी और लाडली बेटी। (मृतक)
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ये सभी लोग हरियाणा के फरीदाबाद (Faridabad) शहर में रहते थे और वहीं काम करते थे। होली (Holi) के पावन पर्व पर अपने पैतृक गांव अरसेम में परिवार के अन्य सदस्यों के साथ त्योहार मनाने के लिए इन्होंने इस पिकअप को किराए पर लिया था। उन्हें क्या पता था कि जिस गांव की मिट्टी की महक उन्हें खींचकर ला रही है, वहां पहुंचने से पहले ही रास्ते में काल उनका इंतजार कर रहा है।
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4. केबिन के अंदर का खौफनाक मंजर: स्टीयरिंग और इंजन के बीच पिचक गया ड्राइवर
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पिकअप को चलाने की जिम्मेदारी अचलगंज थाना क्षेत्र के गांव सतकू खेड़ा के रहने वाले अशोक कुमार (30 वर्ष) के कंधों पर थी। अशोक एक पेशेवर ड्राइवर था और फरीदाबाद से ही लोडर वाहन चलाने का काम करता था।
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ड्राइवर की दर्दनाक मौत: जब पिकअप डिवाइडर से टकराई, तो सबसे ज्यादा नुकसान गाड़ी के फ्रंट केबिन (Front Cabin) को हुआ। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप का इंजन पीछे की तरफ खिसक गया और स्टीयरिंग व्हील पूरी ताकत से अशोक की छाती और सिर से जा टकराया।
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खून से लाल हुई सड़क: स्टीयरिंग से टकराकर अशोक का सिर बुरी तरह से फट गया। उसका शरीर इंजन और स्टीयरिंग के बीच के संकरे हिस्से में बुरी तरह से फंसकर पिचक गया। चंद सेकंड में ही अशोक के प्राण पखेरू उड़ गए और पिकअप के अंदर से खून बहकर हाईवे की सड़क तक आने लगा।
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ड्राइवर अशोक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल: हादसे की खबर मिलते ही अशोक के पिता सुरेश अस्पताल पहुंचे। बेटे का क्षत-विक्षत शव देखकर पिता फूट-फूट कर रोने लगे। भारी मन से सुरेश ने बताया- "मेरा बेटा फरीदाबाद में लोडर चलाता था। वह होली पर घर आ रहा था। उसके साथ गांव के बाकी लोग भी लौट रहे थे। सुबह पुलिस ने कॉल करके बेटे के एक्सीडेंट की खबर दी। जब मैं अस्पताल पहुंचा, तो मुझे मेरे जवान बेटे की लाश मिली।" अशोक अपने दो भाइयों में सबसे बड़ा था और ड्राइवरी करके ही पूरे परिवार का पेट पालता था। अब उसके परिवार में उसकी विधवा पत्नी, एक 3 साल का बेटा और एक 4 साल की बेटी रह गए हैं, जिनके सिर से हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है।
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5. तीन साल की मासूम 'शिक्षा' की मौत ने रुलाया
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इस हादसे की सबसे दुखद और दिल चीर देने वाली घटना 3 साल की मासूम बच्ची शिक्षा की मौत है। शिक्षा अपने पिता मोनू की दो बेटियों में सबसे छोटी थी। वह ड्राइवर के ठीक पीछे वाली सीट या केबिन के हिस्से में बैठी थी।
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जब टक्कर हुई, तो मासूम शरीर उस भयानक झटके को बर्दाश्त नहीं कर सका। गंभीर अंदरूनी चोटों (Internal Bleeding) और सिर में लगी चोट के कारण शिक्षा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में खिलौने और पिचकारियां होनी चाहिए, उस उम्र में शिक्षा का शरीर कफन में लिपट गया। अस्पताल में शिक्षा के घायल माता-पिता का अपनी बच्ची को खोने के बाद जो रुदन था, उसने वहां मौजूद डॉक्टरों और पुलिसवालों की भी आंखें नम कर दीं।
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6. यूपीडा (UPIDA) का त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation)
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एक्सप्रेस-वे पर हादसे अक्सर बहुत भयानक होते हैं, लेकिन यूपीडा (Uttar Pradesh Expressways Industrial Development Authority) की पेट्रोलिंग टीमों की मुस्तैदी के कारण कई बार लोगों की जान बचा ली जाती है।
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कंट्रोल रूम को सूचना: जैसे ही हादसा हुआ और गाड़ी डिवाइडर से टकराई, एक्सप्रेस-वे पर लगे कैमरों और गुजर रहे अन्य वाहन चालकों ने यूपीडा के टोल फ्री नंबर और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।
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एंबुलेंस और क्रेन की एंट्री: सूचना मिलते ही बांगरमऊ पुलिस और यूपीडा की रेस्क्यू टीम तुरंत सायरन बजाती हुई घटनास्थल पर पहुंच गई। टीम अपने साथ हाई-टेक क्रेन (Crane), एंबुलेंस (Ambulance) और गैस कटर मशीनें लेकर आई थी।
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कटर से काटी गई गाड़ी: घटनास्थल का नजारा भयावह था। घायल सड़क पर तड़प रहे थे और ड्राइवर का शव गाड़ी में फंसा था। यूपीडा के कर्मियों ने सबसे पहले सड़क पर गिरे घायलों को उठाकर एंबुलेंस में शिफ्ट किया। इसके बाद, कटर मशीनों (Metal Cutters) की मदद से पिकअप की पिचक चुकी बॉडी को काटा गया ताकि अशोक के फंसे हुए शव को बाहर निकाला जा सके।
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अस्पताल में शिफ्टिंग: सभी घायलों को तुरंत बांगरमऊ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया गया।
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चिकित्सकों का बयान: सीएचसी (CHC) बांगरमऊ में तैनात इमरजेंसी ड्यूटी डॉक्टरों ने जांच के बाद ड्राइवर अशोक कुमार (30) और 3 साल की मासूम शिक्षा को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की मौत घटनास्थल पर ही अत्यधिक खून बहने (Heavy Blood Loss) और गंभीर हेड इंजरी (Head Injury) के कारण हो चुकी थी। वहीं, मोनू, शिवमूर्ति, मुंशीलाल और 8 वर्षीय महक की हालत को गंभीर देखते हुए, प्राथमिक उपचार (First Aid) के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए उन्नाव के जिला अस्पताल (District Hospital) रेफर कर दिया गया।
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7. पुलिस की कार्रवाई और ट्रैफिक सुचारु करना
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हादसे के कारण आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के उस हिस्से पर कुछ देर के लिए यातायात प्रभावित हुआ था। क्षतिग्रस्त पिकअप हाईवे के बीचोबीच खड़ी थी, जिससे पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों के टकराने (Pile-up accident) का खतरा बना हुआ था।
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बांगरमऊ कोतवाली पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए:
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क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त पिकअप को हाईवे से हटाकर किनारे किया।
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सड़क पर फैले खून और कांच के टुकड़ों को साफ करवाया ताकि अन्य गाड़ियों के टायर पंचर न हों।
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रूट को डायवर्ट करके ट्रैफिक को दोबारा सुचारु (Traffic Cleared) कराया।
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मृतकों के शवों का पंचनामा (Inquest) भरकर उन्हें पोस्टमार्टम (Postmortem) के लिए जिला मोर्चरी भेज दिया है। पुलिस अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है और आरटीओ (RTO) से गाड़ी की फिटनेस रिपोर्ट भी मांगी जा सकती है।
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8. एक्सप्रेस-वे पर क्यों होते हैं इतने भयानक हादसे? (गहरा विश्लेषण)
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे हो या यमुना एक्सप्रेस-वे, अक्सर इन विश्वस्तरीय सड़कों पर हादसे बहुत ज्यादा जानलेवा होते हैं। उन्नाव के इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर सफर करने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आइए समझते हैं इसके मुख्य कारण:
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A. हाइवे हिप्नोसिस और नींद (Highway Hypnosis & Sleep Deprivation)
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एक्सप्रेस-वे की सड़कें एकदम सीधी और चिकनी होती हैं। जब कोई ड्राइवर लगातार ऐसी सड़क पर बिना किसी रुकावट के गाड़ी चलाता है, तो उसका दिमाग एक 'ट्रान्स' (Trance) या सम्मोहन जैसी स्थिति में चला जाता है। इसे 'हाइवे हिप्नोसिस' कहते हैं। इसमें ड्राइवर की आंखें खुली होती हैं, लेकिन दिमाग कुछ सेकंड के लिए काम करना बंद कर देता है। इसके अलावा, रात भर गाड़ी चलाने के कारण सुबह के समय (भोर में) नींद का झपका आना हादसों का सबसे बड़ा कारण है। हो सकता है कि अशोक को भी नींद की झपकी आ गई हो, जिसके कारण पलक झपकते ही गाड़ी डिवाइडर पर चढ़ गई।
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B. मालवाहक वाहनों (पिकअप) में सवारी ढोना
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कानूनन, पिकअप, ट्रैक्टर-ट्रॉली या लोडर जैसे मालवाहक (Commercial Goods Vehicles) वाहनों में इंसानों को बैठाकर यात्रा करना पूरी तरह से अवैध (Illegal) और जानलेवा है। इन गाड़ियों के पीछे (डाले में) बैठने वालों के लिए कोई सीटबेल्ट (Seatbelt), एयरबैग (Airbag) या पकड़ने के लिए मजबूत हैंडल नहीं होते। यही कारण है कि उन्नाव हादसे में जब टक्कर हुई, तो पीछे बैठे लोग बिना किसी सुरक्षा के हवा में 15 फीट दूर तक उछल गए। अगर यही लोग किसी बस या कार में सीटबेल्ट लगाकर बैठे होते, तो शायद उनकी जान बच जाती।
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C. तेज रफ्तार और टायर फटना (Speeding and Tire Burst)
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एक्सप्रेस-वे पर कंक्रीट की सड़क होने के कारण टायरों का घर्षण (Friction) बहुत ज्यादा होता है। गर्मी के मौसम में टायरों का प्रेशर बढ़ जाता है। अगर गाड़ी ओवर-स्पीडिंग (Over-speeding) कर रही हो और अचानक ब्रेक लगाना पड़े, तो गाड़ी नियंत्रण से बाहर हो जाती है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पिकअप की रफ्तार बहुत ज्यादा थी, जिसे संभालना असंभव हो गया था।
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9. सड़क सुरक्षा के लिए 5 जरूरी सबक जो इस हादसे से सीखने चाहिए
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इस तरह की दिल दहला देने वाली घटनाओं को सिर्फ एक खबर मानकर भूल जाना हमारी सबसे बड़ी भूल होगी। प्रत्येक नागरिक को इस घटना से सबक लेना चाहिए:
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मालवाहक वाहनों में यात्रा न करें: पैसे बचाने के लिए कभी भी ट्रक, पिकअप या लोडर के पिछले हिस्से में बैठकर सफर न करें। यह सीधे तौर पर मौत को दावत देना है।
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सीटबेल्ट का उपयोग: चाहे आप कार की अगली सीट पर बैठे हों या पिछली सीट पर, सीटबेल्ट हमेशा बांधें। यह आपको हादसे के समय हवा में उछलने और शीशा तोड़कर बाहर गिरने से रोकती है।
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पर्याप्त नींद लें: लंबी दूरी की यात्रा (Long Drive) से पहले ड्राइवर का पूरी नींद (कम से कम 7-8 घंटे) लेना बेहद जरूरी है।
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ब्रेक लें (Take a Break): एक्सप्रेस-वे पर हर 2 घंटे या 150 किलोमीटर की ड्राइविंग के बाद कम से कम 15 मिनट का ब्रेक जरूर लें। मुंह पर पानी मारें और चाय-कॉफी पिएं।
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रफ्तार पर नियंत्रण: त्यौहार पर घर पहुंचने की जल्दी में अपनी जिंदगी दांव पर न लगाएं। "देर आयद, दुरुस्त आयद" यानी देर से पहुंचना, न पहुंचने से हमेशा बेहतर होता है।
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होली का रंग जो आंसुओं में धुल गया
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उन्नाव के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर हुआ यह हादसा सिर्फ दो मौतों का आंकड़ा नहीं है; यह दो परिवारों के पूरी तरह उजड़ जाने की दर्दनाक दास्तान है। 3 साल की मासूम शिक्षा ने तो अभी दुनिया ठीक से देखी भी नहीं थी और 30 साल के अशोक के कंधों पर अपने पूरे परिवार को पालने की जिम्मेदारी थी।
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त्योहारों का समय परिवार से मिलने और खुशियां बांटने का होता है। सरकारें और पुलिस प्रशासन अपनी तरफ से लाख नियम बना लें, लेकिन जब तक हम खुद सड़क सुरक्षा (Road Safety) को लेकर जागरूक नहीं होंगे, तब तक ऐसी चीखें हाईवे के सन्नाटे को चीरती रहेंगी।
Sabse pehle comment karne wale banein.