उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन (UP Power Corporation) ने दीपावली से ठीक पहले राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को एक बड़ी राहत दी है। अब उपभोक्ता स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) की लागत किस्तों (Installments) में भी चुका सकेंगे। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के निर्देश पर पावर कारपोरेशन ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह फैसला मुख्य रूप से कम आय वर्ग के उन उपभोक्ताओं की दिक्कतों को देखते हुए लिया गया है, जिन्हें एक बार में स्मार्ट मीटर का पूरा दाम चुकाने में परेशानी हो रही थी।read also
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मीटर की कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं को दिक्कत

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उत्तर प्रदेश सरकार पूरे राज्य में चरणबद्ध तरीके से पुराने मीटरों को हटाकर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा रही है। यह मीटर सिस्टम बिजली की चोरी रोकने और बिलिंग को पारदर्शी बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
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    दाम की वसूली: अब तक उपभोक्ताओं को मीटर का दाम एकमुश्त (One-time) जमा करना पड़ता था, जिससे खासकर कम आय वर्ग के लोगों को नया कनेक्शन लेते समय या मीटर बदलते समय वित्तीय परेशानी हो रही थी।
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    मंत्री का निर्देश: उपभोक्ताओं की इन दिक्कतों की जानकारी मिलने के बाद, ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने शनिवार को पावर कारपोरेशन को इस संबंध में तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए थे।
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किस्तों में भुगतान का विकल्प जारी

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ऊर्जा मंत्री के निर्देश के बाद, पावर कारपोरेशन ने किस्तों में मीटर का दाम लेने के संबंध में आदेश जारी कर दिया है। यह आदेश नए कनेक्शन लेने वाले और मौजूदा मीटर बदलने वाले दोनों उपभोक्ताओं पर लागू होगा।
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    विकल्प: उपभोक्ता के पास यह विकल्प होगा कि वह मीटर का दाम एक बार में जमा करे या किस्तों में भुगतान करे।
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    किस्त की दर (कम आय वर्ग): कम आय वर्ग वाले उपभोक्ता, जो नया बिजली कनेक्शन लेते हैं, उन्हें ₹125 प्रति माह की दर से 60 महीने (5 साल) तक किस्त अदा करनी होगी।
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    किस्त की दर (अन्य उपभोक्ता): अन्य उपभोक्ताओं को 12 किस्तों में मीटर के दाम का भुगतान करने का विकल्प दिया गया है।
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    शुल्क: किस्तों में भुगतान करने पर उपभोक्ताओं से 12.50% का स्थानांतरित बकाया शुल्क (Transferred Outstanding Charge) भी वसूला जाएगा।
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नियामक आयोग और कारपोरेशन के बीच की स्थिति

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कारपोरेशन ने राहत देने वाला यह आदेश तो जारी कर दिया है, लेकिन इस मामले में एक कानूनी पेंच फंसा हुआ है।
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    नियामक आयोग की अवमानना: दरअसल, नियामक आयोग (Regulatory Commission) ने पहले स्मार्ट प्रीपेड मीटर के दामों की वसूली को अवमानना (Contempt) माना था।
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    कारपोरेशन के विकल्प: अब पावर कारपोरेशन के पास दो रास्ते हैं:
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      वह आयोग के अंतिम निर्णय आने तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर का दाम वसूलना बंद कर दे।
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      अगर वसूली जारी रहती है, तो आयोग के अंतिम निर्णय के अनुसार आगे का फैसला लिया जाएगा (जैसे, वसूली गई राशि वापस करना पड़ सकता है)।
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    आदेश निरस्त होने पर: यदि पावर कारपोरेशन वसूली के आदेश निरस्त करता है, तो किस्तों में शुल्क लेने का यह फैसला आयोग की रोक तक जारी रहेगा।
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दिवाली से पहले बड़ी राहत

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किस्तों में भुगतान का विकल्प UP Power Corporation की एक बड़ी पहल है, जो लाखों निम्न और मध्यम आय वर्ग के उपभोक्ताओं को राहत देगी। यह फैसला स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने की प्रक्रिया को भी गति देगा। हालांकि, नियामक आयोग के अंतिम निर्णय पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।
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