मेरठ/लखनऊ (UP News): उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख जिलों में ठंड बढ़ने के साथ ही हवा जहरीली हो गई है। यूपी में वायु प्रदूषण (Air Pollution in UP) का स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। हालात ये हैं कि हापुड़, ग्रेटर नोएडा, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के करीब पहुंच गया है, जो 'गंभीर' श्रेणी में आता है।READ ALSO:-UP Weather: पश्चिमी हवाओं ने फिर बढ़ाई ठिठुरन, अगले 3 दिन में और लुढ़केगा पारा; इन 7 जिलों में कोहरे का 'येलो अलर्ट'
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इस जहरीली हवा का सीधा असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। मेरठ और आसपास के जिलों में अस्पतालों की ओपीडी में सांस, दमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्रदूषण और कोहरे की दोहरी मार ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।
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हापुड़ की हवा सबसे जहरीली, नोएडा भी पीछे नहीं

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सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) द्वारा बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, एनसीआर के जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हापुड़ का एक्यूआई 394 दर्ज किया गया, जो बेहद खतरनाक है। विभिन्न शहरों का AQI (बुधवार का अपडेट):
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    हापुड़: 394 (बेहद खराब)
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    नोएडा: 377
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    ग्रेटर नोएडा: 355
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    गाजियाबाद: 338
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    मेरठ: 271
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    लखनऊ: 270
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    मुजफ्फरनगर: 263
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    कानपुर: 212
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आईआईटीआर (IITR) के निदेशक डॉ. भास्कर नारायण ने पुष्टि की है कि इस समय यूपी में वायु प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ा हुआ है, जिससे माइक्रो और नैनो पार्टिकल्स सीधे लोगों के फेफड़ों में जा रहे हैं।
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अस्पतालों में 40% बढ़ गए मरीज

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प्रदूषण बढ़ने से अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें लग गई हैं। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि दिवाली के बाद से ही ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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वहीं, मेरठ के जाने-माने चेस्ट और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट डॉ. विरोत्तम तोमर ने बताया कि ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। डॉ. तोमर ने कहा, "वायरल निमोनिया, बैक्टीरियल निमोनिया और फंगल निमोनिया के मामले सामने आ रहे हैं। दमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है। गले में खराश और नाक बहने की समस्या आम हो गई है।"
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लखनऊ के इन इलाकों में सांस लेना दूभर

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राजधानी लखनऊ भी प्रदूषण की मार से अछूती नहीं है। बुधवार को शहर का औसत एक्यूआई 270 रहा, लेकिन इंडस्ट्रियल इलाकों में हालत खराब है।
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    तालकटोरा इंडस्ट्रियल एरिया: 372 AQI
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    लालबाग: 280 AQI
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    केंद्रीय विद्यालय क्षेत्र: 231 AQI
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डॉक्टर्स की चेतावनी: कोहरे में मॉर्निंग वॉक से बचें

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डॉ. विरोत्तम तोमर ने वरिष्ठ नागरिकों और सांस के रोगियों के लिए विशेष सलाह जारी की है। उन्होंने कहा कि जब बाहर कोहरा हो, तो मॉर्निंग वॉक पर बिल्कुल न जाएं। कोहरे में प्रदूषण के कण (Smog) नीचे आ जाते हैं जो फेफड़ों के लिए घातक हैं।
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बचाव के लिए क्या करें:

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    मास्क पहनें: घर से बाहर निकलते समय एन-95 मास्क या कपड़े से मुंह ढककर निकलें।
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    वैक्सीन: डॉ. तोमर के अनुसार, 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोग और बच्चे फ्लू और निमोनिया की वैक्सीन जरूर लगवाएं। यह लाइफ में एक बार लगती है और संक्रमण से बचाती है।
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    घरेलू उपाय: भाप लें, गर्म सूप, चाय या कॉफी पिएं। ठंडी चीजों से परहेज करें।
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ये पौधे कम कर सकते हैं प्रदूषण

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पर्यावरण को बचाने के लिए डॉ. भास्कर नारायण ने अधिक से अधिक पेड़ लगाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि नीम, पीपल, तुलसी, बरगद, कनेर, जामुन और शहतूत जैसे पेड़ धूल, धुआं और जहरीली गैसों (नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड) को सोखने की क्षमता रखते हैं।
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कब डॉक्टर के पास जाएं?

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अगर किसी व्यक्ति को छाती में जकड़न महसूस हो, सांस फूल रही हो, लेटने में दिक्कत हो या बलगम पीला आ रहा हो, तो इसे सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज न करें। यह निमोनिया या अस्थमा अटैक के लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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उत्तर प्रदेश में ठंड और कोहरे के साथ प्रदूषण का स्तर जानलेवा हो गया है। हापुड़ (394) और नोएडा (377) में हवा सबसे ज्यादा जहरीली है। मेरठ में सांस के मरीजों की संख्या में 40% का इजाफा हुआ है। डॉक्टरों ने बुजुर्गों और बच्चों को सुबह के समय घर से बाहर न निकलने और मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी है।
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