लखनऊ (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर को कम करने और युवाओं को स्वरोजगार (Self-Employment) की दिशा में प्रेरित करने के लिए राज्य सरकार लगातार नए और प्रभावी कदम उठा रही है। सरकार का मुख्य विजन प्रदेश के युवाओं को 'जॉब सीकर' (नौकरी मांगने वाला) की जगह 'जॉब क्रिएटर' (नौकरी देने वाला) बनाना है। इसी कड़ी में राज्य सरकार अपनी सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' के ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है, जिसका सीधा फायदा स्कूल और कॉलेज से निकलने वाले लाखों युवा छात्र-छात्राओं को मिलेगा।READ ALSO:-टोल प्लाजा पर अब नहीं लगेगी ब्रेक! देश में पहली बार शुरू हुआ 'बैरियर-लेस फ्री फ्लो टोल सिस्टम', फर्राटे भरते हुए कट जाएगा टैक्स
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अब तक इस योजना के तहत केवल उन युवाओं को व्यवसाय के लिए ऋण दिया जाता था, जिनकी उम्र कम से कम 21 वर्ष हो। लेकिन, सरकार अब इस आयु सीमा में पूरे तीन साल की छूट देने की तैयारी कर रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह बदलाव क्यों किया जा रहा है, इसके पीछे सरकार की क्या रणनीति है और इससे प्रदेश के युवाओं को किस तरह फायदा पहुंचेगा।
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1. क्या है प्रस्तावित बदलाव और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

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वर्तमान में 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' के दिशा-निर्देशों के अनुसार, केवल 21 से 40 आयु वर्ग के युवाओं को ही इस योजना का लाभ मिल सकता है। लेकिन एमएसएमई विभाग (MSME Department) अब इस न्यूनतम आयु सीमा को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने की पूरी तैयारी कर चुका है।
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आयु सीमा कम करने का मुख्य कारण: उत्तर प्रदेश में हर साल लाखों युवा 18 साल की उम्र तक अपनी इंटरमीडिएट (12वीं कक्षा) की पढ़ाई या ITI (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) और पॉलिटेक्निक जैसे तकनीकी डिप्लोमा पूरे कर लेते हैं। पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद कई युवाओं के पास अपना खुद का काम शुरू करने के शानदार आइडियाज होते हैं। लेकिन 21 साल की उम्र सीमा होने के कारण, ये 18 से 20 साल के युवा सरकारी योजनाओं के तहत बैंक लोन पाने से वंचित रह जाते थे।
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इस 3 साल के गैप के कारण कई युवाओं का उत्साह कम हो जाता था या वे मजबूरी में किसी छोटी-मोटी नौकरी की तरफ मुड़ जाते थे। आयु सीमा 18 वर्ष होने से अब 12वीं या डिप्लोमा पास करते ही युवा अपने स्टार्टअप (Startup) या छोटे व्यवसाय के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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2. 10 लाख युवाओं का लक्ष्य, लेकिन पिछड़ रहा था MSME विभाग

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इस योजना के नियमों में बदलाव रातों-रात नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसके पीछे विभाग की एक बड़ी चुनौती छिपी है।
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    योजना की शुरुआत: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष 24 जनवरी को 'उत्तर प्रदेश दिवस' (UP Diwas) के भव्य मौके पर इस महत्वाकांक्षी योजना का विधिवत शुभारंभ किया था।
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    बड़ा लक्ष्य (Target): सरकार ने इस योजना के तहत प्रदेश में एक बड़ा रोडमैप तैयार किया था। लक्ष्य निर्धारित किया गया था कि आगामी 10 वर्षों में 10 लाख युवाओं को बिना ब्याज और बिना गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि हर साल कम से कम 1 लाख युवाओं को उद्यमी बनाने का टारगेट तय किया गया था।
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    लक्ष्य प्राप्ति में बाधा: एमएसएमई विभाग ने अपनी तरफ से तमाम कोशिशें कीं, जागरूकता अभियान चलाए, लेकिन इसके बावजूद विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य (Target) को हासिल करने में लगातार पिछड़ रहा था। 21 से 40 वर्ष के आयु वर्ग में योग्य आवेदकों की संख्या उम्मीद से काफी कम आ रही थी।
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लक्ष्य पूरा न होने की इसी बड़ी समस्या को देखते हुए, विभाग ने समीक्षा बैठक की और यह निष्कर्ष निकाला कि यदि न्यूनतम आयु में 3 वर्ष की छूट दे दी जाए, तो आवेदकों के एक बहुत बड़े वर्ग (18-20 वर्ष के युवाओं) को इस योजना से जोड़ा जा सकेगा।
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3. योजना के सबसे बड़े फायदे: 'बिना ब्याज और बिना गारंटी' का 5 लाख का लोन

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'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' प्रदेश की अन्य ऋण योजनाओं से काफी अलग और युवाओं के अनुकूल है। एक आम युवा जब बैंक में लोन लेने जाता है, तो उससे सबसे पहले प्रॉपर्टी की गारंटी (Collateral) मांगी जाती है, जो एक बेरोजगार या नए युवा के पास नहीं होती।
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    कोई गारंटी नहीं (No Collateral): इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यही है कि 5 लाख रुपये तक का लोन लेने के लिए युवा को अपनी जमीन, घर या किसी भी प्रकार की संपत्ति बैंक के पास गिरवी नहीं रखनी पड़ती है। ऋण की पूरी गारंटी राज्य सरकार खुद लेती है।
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    जीरो प्रतिशत ब्याज (Zero Interest Rate): बैंकों द्वारा दिए जाने वाले इस व्यवसायिक ऋण पर युवाओं को कोई ब्याज नहीं देना होता है। व्यवसाय को स्थापित करने के शुरुआती संघर्ष के दिनों में ब्याज माफी एक बहुत बड़ी आर्थिक राहत का काम करती है।
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    मार्जिन मनी में सहायता: योजना के तहत प्रोजेक्ट कॉस्ट का एक निश्चित प्रतिशत सरकार द्वारा मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में भी दिया जाता है, जिससे युवा पर आर्थिक बोझ बिल्कुल कम हो जाता है।
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4. ऋण की राशि बढ़ाने पर भी हो रहा है अहम विचार

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एमएसएमई विभाग के सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव में सिर्फ आयु सीमा कम करने की ही बात नहीं है, बल्कि ऋण की राशि बढ़ाने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
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वर्तमान समय में महंगाई और तकनीक के इस दौर में किसी भी अच्छी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, सर्विस सेक्टर की दुकान या आधुनिक तकनीकी व्यवसाय को शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये की रकम कई बार कम पड़ जाती है। मशीनों की कीमत, कच्चे माल (Raw Material) की लागत और दुकान के किराये को देखते हुए विभाग ने प्रस्ताव किया है कि प्रथम चरण में या सफल व्यवसायियों के लिए इस ऋण सीमा (Loan Amount) को भविष्य में बढ़ाया जाए, ताकि युवा और भी मजबूत और आधुनिक कारोबार स्थापित कर सकें।
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5. उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था (1 Trillion Economy) में युवाओं की भागीदारी

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर ($1 Trillion Economy) बनाने का जो लक्ष्य रखा है, वह प्रदेश के एमएसएमई (MSME) सेक्टर और युवा उद्यमियों के बिना पूरा नहीं हो सकता।
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अगर 18 साल की उम्र में ही युवाओं को बिना ब्याज का लोन मिलने लगेगा, तो इसके कई सामाजिक और आर्थिक फायदे होंगे:
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    पलायन पर रोक: गांव और छोटे कस्बों के युवाओं को जब अपने ही क्षेत्र में दुकान, डेयरी, बेकरी, रिपेयरिंग सेंटर या छोटी फैक्ट्री लगाने के लिए पैसा मिलेगा, तो वे नौकरी की तलाश में दिल्ली, मुंबई या गुजरात जैसे राज्यों की तरफ पलायन नहीं करेंगे।
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    रोजगार का सृजन: एक युवा जब 5 लाख का लोन लेकर अपना काम शुरू करता है, तो वह न केवल खुद आत्मनिर्भर बनता है, बल्कि कम से कम 2 से 3 अन्य लोगों को भी रोजगार देता है।
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    कौशल का सही उपयोग: ITI और स्किल इंडिया (Skill India) के तहत प्रशिक्षण ले चुके युवाओं को तुरंत अपनी खुद की वर्कशॉप शुरू करने का मौका मिलेगा।
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युवाओं के सपनों को मिलेगी नई उड़ान

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एमएसएमई विभाग द्वारा तैयार किया गया यह प्रस्ताव अगर जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त कर लेता है, तो यह उत्तर प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए एक 'गेम चेंजर' (Game Changer) साबित होगा। न्यूनतम आयु सीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष करने का यह फैसला न केवल 'मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना' के 10 लाख ऋण के लक्ष्य को तेजी से पूरा करेगा, बल्कि यह प्रदेश में एक नई और युवा औद्योगिक क्रांति की नींव भी रखेगा। सरकार का यह कदम स्पष्ट करता है कि वह युवाओं के आइडिया और उनकी ऊर्जा पर पूरा भरोसा करती है और उन्हें आत्मनिर्भर (Aatmanirbhar) बनाने के लिए हर संभव कानूनी और आर्थिक अड़चनों को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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