नई दिल्ली/मुंबई (बिज़नेस डेस्क): बीते कुछ हफ्तों से कमोडिटी बाजार (Commodity Market) में जो तूफानी तेजी देखी जा रही थी, उस पर अचानक एक बड़ा 'ब्रेक' लग गया है। निवेशकों को मालामाल करने वाली चांदी और सोना, जो हर दिन नए रिकॉर्ड बना रहे थे, अचानक औंधे मुंह गिर पड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार से लेकर भारतीय सर्राफा बाजार तक, कीमती धातुओं में भारी उथल-पुथल मची हुई है।Read also:-मेरठ के स्पा सेंटरों में चल रहा था 'जिस्मफरोशी' का काला कारोबार: पुलिस ने 4 सेंटरों पर जड़े ताले, 20 युवतियां हिरासत में; मोबाइल में मिले गंदे धंधे के राज
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महज चार दिनों में 20% की तूफानी तेजी दिखाने वाली चांदी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक ही झटके में 7.3 प्रतिशत तक टूट गई। वहीं, सोने की चमक भी फीकी पड़ गई है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब निवेशक यह मानकर चल रहे थे कि कीमतें अभी और आसमान छुएंगी। लेकिन अमेरिका से आई एक खबर और बाजार की तकनीकी वजहों ने पूरे समीकरण को पलट कर रख दिया है।
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क्या यह गिरावट महज एक करेक्शन (Correction) है या मंदी की शुरुआत? क्या 2 लाख 77 हजार रुपये किलो वाली चांदी अब सस्ती होगी? इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमें बाजार की इस हलचल की तह तक जाना होगा।
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क्यों आई सुनामी जैसी गिरावट? सबसे बड़ी वजह: अमेरिका और 'ट्रंप कार्ड'

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इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका से आया है। दरअसल, बाजार में यह डर बैठा हुआ था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के आयात पर भारी-भरकम टैरिफ (Import Tariff) लगा सकते हैं। अगर ऐसा होता, तो सप्लाई चेन बाधित होती और कीमतें और भी ज्यादा बेकाबू हो जातीं।
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लेकिन, व्हाइट हाउस से आए ताज़ा संकेतों ने बाजार की हवा निकाल दी:
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    टैरिफ का डर खत्म: राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर 'तत्काल' कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाएंगे।
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    न्यूनतम मूल्य (Price Floor) की नीति: टैरिफ के बजाय, अमेरिका अब 'प्राइस फ्लोर' यानी न्यूनतम मूल्य और द्विपक्षीय समझौतों (Bilateral Agreements) के जरिए आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर देगा।
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    बाजार को राहत: जैसे ही यह खबर आई कि टैरिफ का खतरा टल गया है, चांदी, प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी धातुओं में बना हुआ 'सप्लाई रिस्क प्रीमियम' (Supply Risk Premium) खत्म हो गया, जिससे कीमतों में तेज गिरावट आई।
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मुनाफावसूली का 'दबाव': 4 दिन की तेजी एक दिन में साफ 

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विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ट्रंप का बयान ही गिरावट की वजह नहीं है, बल्कि बाजार तकनीकी रूप से 'ओवरबॉट' (Overbought) जोन में था।
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    20% की रैली: पिछले सिर्फ चार कारोबारी सत्रों में चांदी 20% चढ़ चुकी थी। इतनी तेज बढ़त किसी भी संपत्ति के लिए अस्थिर होती है।
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    प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking): जब कीमतें रिकॉर्ड हाई पर पहुंचीं, तो निचले स्तरों पर खरीदारी करने वाले निवेशकों ने अपना माल बेचना शुरू कर दिया। वे अपना मुनाफा घर ले जाना चाहते थे, जिससे बिकवाली का दबाव (Selling Pressure) बना।
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    तकनीकी कारण: बाजार विश्लेषकों के अनुसार, गिरावट का एक बड़ा कारण 'मार्जिन कॉल' (Margin Call) और 'ऑप्शन हेजिंग' (Option Hedging) भी है। जब कीमतें गिरनी शुरू हुईं, तो जिन ट्रेडर ने कर्ज लेकर निवेश किया था, उन्हें अपनी पोजीशन काटनी पड़ी, जिससे गिरावट और तेज हो गई।
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भारतीय बाजार: ऑल टाइम हाई से फिसलन

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भारत में शादियों का सीजन और निवेश की मांग के चलते कीमतें एवरेस्ट पर बैठी थीं। गिरावट से ठीक पहले के आंकड़े किसी को भी चौंकाने के लिए काफी थे:
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    चांदी का ऑल टाइम हाई: बुधवार को भारतीय सर्राफा बाजार में चांदी ने इतिहास रच दिया था। यह एक ही दिन में 14,480 रुपये उछलकर 2,77,512 रुपये प्रति किलो (IBJA Rates) के सर्वकालिक उच्च स्तर पर बंद हुई थी।
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    सोने की छलांग: सोना भी पीछे नहीं था। इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, सोना 1,731 रुपये की छलांग लगाकर 1,42,015 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।
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लेकिन गुरुवार सुबह अंतरराष्ट्रीय संकेतों ने भारतीय बाजार का मूड भी खराब कर दिया। जो खरीदार कल तक लाइन में लगे थे, वे अब कीमतें और गिरने का इंतजार कर रहे हैं।
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बाजार में अस्थिरता (Volatility): खतरे की घंटी?

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बाजार के जानकारों का कहना है कि अभी तूफान थमा नहीं है।
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    एक्स्पोनेंशियल एवरेज (Exponential Average): बाजार की अस्थिरता को मापने वाला 14-दिन का एक्स्पोनेंशियल एवरेज टू रेंज इंडिकेटर तेजी से बढ़ा है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में कीमतों में और बड़े उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।
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    सिंगापुर मार्केट का हाल: एशियाई बाजारों में मंदी साफ दिखी। सिंगापुर में सुबह चांदी 4.6% गिरकर 88.90 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि सोना 0.5% टूटकर 4,602.44 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।
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क्या अब सुरक्षित निवेश (Safe Haven) नहीं रहा सोना-चांदी?

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कीमतों में गिरावट के बावजूद, बड़े निवेशक अभी भी सोने-चांदी से मुंह मोड़ने को तैयार नहीं हैं। इसके पीछे ठोस कारण हैं:
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    भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension): दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में शेयर बाजार या करेंसी के बजाय सोना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
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    चीन की खरीदारी: चीन लगातार अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ा रहा है।
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    अनिश्चितता: सर्वे बताते हैं कि जनवरी के बाद भी सोने में तेजी का रुख बना रह सकता है। हालांकि, चांदी और तांबे (Copper) को लेकर अनिश्चितता है क्योंकि ये औद्योगिक धातुएं (Industrial Metals) भी हैं और इनकी मांग फैक्ट्री आउटपुट पर निर्भर करती है।
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विशेषज्ञों की राय: अब क्या करें निवेशक?

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कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है: "यह गिरावट लंबी अवधि के निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका हो सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सावधान रहने की जरूरत है। ट्रंप की नीतियां अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं और 'भविष्य में शुल्क' लगाने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया गया है।"
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प्रमुख टेकअवे (Key Takeaways):

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    सोना: अभी भी मजबूत स्थिति में है, गिरावट पर खरीदारी की सलाह दी जा रही है।
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    चांदी: इसमें अस्थिरता ज्यादा रहेगी। यह औद्योगिक मांग और सरकारी नीतियों पर ज्यादा निर्भर करेगी।
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बाजार का यह 'करेक्शन' उन लोगों के लिए राहत की खबर हो सकता है जो शादियों के लिए गहने खरीदना चाहते थे, लेकिन 2.77 लाख रुपये किलो का भाव सुनकर जिनके पसीने छूट रहे थे। अब देखना यह है कि यह गिरावट कहां जाकर थमती है।
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(नोट: कमोडिटी बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।)
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