आज के समय में जब हम सुई से लेकर हवाई जहाज के टिकट तक सब कुछ अपने स्मार्टफोन से खरीदते हैं, तो डिजिटल पेमेंट्स हमारी जिंदगी का एक अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। यूपीआई (UPI), नेट बैंकिंग, और मोबाइल वॉलेट्स ने हमारी जिंदगी को जितना आसान बनाया है, उतना ही साइबर अपराधियों के लिए नए दरवाजे भी खोले हैं। आए दिन हम सुनते हैं कि किसी के खाते से लिंक पर क्लिक करते ही हजारों रुपये उड़ गए, या किसी को फर्जी कस्टमर केयर बनकर ठग लिया गया।Read also:-केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा, जानें मिडिल ईस्ट की जंग से कैसे जुड़ा है यह LPG Cylinder Price Hike
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इन बढ़ती घटनाओं और ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को सुरक्षित करने के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने 'कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस' (Customer Liability in Digital Transactions) नाम से एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। यह नया नियम उन लाखों भारतीयों के लिए एक ढाल बनकर उभरेगा जो अनजाने में डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।
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इस नए ड्राफ्ट के अनुसार, यदि कोई ग्राहक डिजिटल फ्रॉड का शिकार होता है और वह निर्धारित समय सीमा के भीतर इसकी रिपोर्ट करता है, तो उसे 25,000 रुपये तक का सीधा मुआवजा मिल सकता है। यह कदम न केवल ग्राहकों का बैंकों के प्रति विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को दुनिया में सबसे सुरक्षित बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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आइए, इस विस्तृत रिपोर्ट में गहराई से समझते हैं कि यह नियम क्या है, यह कैसे काम करेगा, इसके पीछे की पृष्ठभूमि क्या है, और एक आम नागरिक के रूप में आपको इसके बारे में क्या-क्या जानना चाहिए।
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RBI का नया ड्राफ्ट: मुख्य बिंदु और रिफंड की गणित

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नए ड्राफ्ट का सबसे बड़ा आकर्षण इसका स्पष्ट और पारदर्शी मुआवजा मॉडल है। पहले जहां ग्राहक महीनों तक बैंक और पुलिस के चक्कर काटते थे, वहीं अब आरबीआई ने एक स्टैंडर्ड फॉर्मूला पेश किया है।
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क्या है 85% या ₹25,000 का नियम?

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प्रस्तावित नियमों के अनुसार, छोटे मूल्य के डिजिटल फ्रॉड (Small Value Digital Frauds) को कवर करने के लिए एक विशेष सीमा तय की गई है।
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यदि आपके साथ ₹50,000 तक का कोई अनधिकृत डिजिटल लेनदेन (Unauthorized Digital Transaction) होता है, और आप बिना किसी देरी के (तुरंत) अपने बैंक या वित्तीय संस्थान को इसकी सूचना देते हैं, तो:
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    आपको हुए नुकसान का 85% हिस्सा बैंक द्वारा वापस किया जाएगा।
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  • \r\n
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    या अधिकतम ₹25,000 दिए जाएंगे।
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  • \r\n
  • \r\n
    (इन दोनों में से जो भी राशि कम होगी, वही ग्राहक को मुआवजे के तौर पर मिलेगी।)
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उदाहरणों से समझें मुआवजे का गणित (Compensation Calculation)

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इसे आम आदमी की भाषा में समझने के लिए हमने कुछ संभावित स्थितियां (Scenarios) तैयार की हैं:
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स्थिति (Scenario)
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फ्रॉड की कुल रकम (₹)
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85% के अनुसार गणना (₹)
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अधिकतम सीमा (₹)
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ग्राहक को मिलने वाला रिफंड (₹)
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स्थिति 1
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₹10,000
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₹8,500
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₹25,000
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₹8,500 (चूंकि 8.5k, 25k से कम है)
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स्थिति 2
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₹20,000
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₹17,000
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₹25,000
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₹17,000
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स्थिति 3
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₹29,400
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₹24,990
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₹25,000
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₹24,990
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स्थिति 4
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₹40,000
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₹34,000
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₹25,000
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₹25,000 (85% 34k है, लेकिन लिमिट 25k है)
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स्थिति 5
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₹50,000
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₹42,500
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₹25,000
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₹25,000 (अधिकतम सीमा लागू)
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नोट: यह मुआवजा मैकेनिज्म केवल तभी काम करेगा जब ग्राहक की ओर से कोई घोर लापरवाही (जैसे अपना पिन या ओटीपी खुद से फ्रॉड को बता देना) साबित न हो और शिकायत समय पर की गई हो।
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2017 के पुराने नियमों को बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी?

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यह सवाल उठना लाजमी है कि जब आरबीआई के पास पहले से नियम मौजूद थे, तो इस नए ड्राफ्ट की क्या जरूरत आ पड़ी? इसका उत्तर पिछले सात-आठ सालों में भारत की डिजिटल यात्रा में छिपा है।
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1. डिजिटल पेमेंट्स में अभूतपूर्व वृद्धि: साल 2017 में जब पुराने नियम बने थे, तब यूपीआई (UPI) अपने शुरुआती दौर में था। आज भारत दुनिया भर में रीयल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में नंबर वन है। गली के नुक्कड़ पर चाय वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स तक, हर जगह क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन हो रहे हैं। लेन-देन की संख्या बढ़ने के साथ-साथ रिस्क भी कई गुना बढ़ गया है।
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2. साइबर अपराधियों के नए और हाई-टेक तरीके:

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2017 के दौर में फ्रॉड मुख्य रूप से डेबिट/क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग या चोरी तक सीमित थे। आज के हैकर्स और ठग बहुत एडवांस हो चुके हैं:
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    डीपफेक वीडियो कॉल (Deepfake Video Calls): एआई का इस्तेमाल करके रिश्तेदारों की आवाज और चेहरे में कॉल करके पैसे मांगना।
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  • \r\n
  • \r\n
    स्क्रीन शेयरिंग ऐप्स (Screen Sharing Apps): AnyDesk या TeamViewer जैसे ऐप डाउनलोड करवाकर पूरा फोन कंट्रोल कर लेना।
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  • \r\n
  • \r\n
    फर्जी कस्टमर केयर: गूगल सर्च पर बैंकों या कंपनियों के फर्जी हेल्पलाइन नंबर डालकर ठगी करना।
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    पुराने नियम इन अत्याधुनिक तकनीकी अपराधों को पूरी तरह से कवर करने में अक्षम साबित हो रहे थे।
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3. शिकायतों के निपटारे में होने वाली देरी (Delayed Redressal):

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अक्सर देखा जाता था कि फ्रॉड होने के बाद जब ग्राहक बैंक जाता था, तो बैंक यह साबित करने में महीनों लगा देते थे कि गलती ग्राहक की है या सिस्टम की। इस "ब्लेम गेम" में आम आदमी पिसता था। नया नियम इस प्रक्रिया को स्ट्रीमलाइन करने और बैंकों की जवाबदेही तय करने के लिए लाया गया है।
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बैंकों पर कसेगी नकेल: बढ़ेगी जवाबदेही, घटेगा प्रोसेसिंग टाइम

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इस ड्राफ्ट का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पहलू है—बैंकों और वित्तीय संस्थानों (NBFCs) को अधिक जिम्मेदार बनाना।
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तेज रिफंड प्रक्रिया (Faster Refund Processing)

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अक्सर ग्राहक शिकायत करते हैं कि फ्रॉड होने के बाद उन्हें रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है। RBI का नया ड्राफ्ट साफ करता है कि शिकायत मिलने के बाद एक निश्चित और बहुत ही कम समय सीमा के भीतर बैंक को मामले की जांच करनी होगी और ग्राहक के खाते में पैसे (Shadow Credit) डालने होंगे।
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बैंकों की हिस्सेदारी और निवेश

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आरबीआई की योजना है कि भविष्य में इस मुआवजे के भुगतान में केंद्रीय बैंक अपनी हिस्सेदारी कम करेगा और कमर्शियल बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर बैंकों को अपनी जेब से मुआवजा देना पड़ेगा, तो वे अपनी साइबर सुरक्षा प्रणाली (Cyber Security Infrastructure) को और अधिक मजबूत करने के लिए मजबूर होंगे। वे बेहतर एआई (AI) और मशीन लर्निंग (ML) टूल्स अपनाएंगे जो किसी भी संदिग्ध लेन-देन को होने से पहले ही ब्लॉक कर दें।
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ग्राहकों के लिए एक्शन प्लान: फ्रॉड होने पर तुरंत क्या करें?

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कानून और नियम तभी आपकी मदद कर सकते हैं जब आप जागरूक हों और सही समय पर सही कदम उठाएं। अगर आरबीआई का यह 85% रिफंड वाला नियम लागू होता है, तो इसका लाभ उठाने के लिए आपको "तुरंत रिपोर्टिंग" (Zero Delay Reporting) करनी होगी।
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यदि आपके या आपके किसी परिचित के साथ ऑनलाइन ठगी हो जाए, तो बिना घबराए ये कदम उठाएं:
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चरण 1: साइबर हेल्पलाइन '1930' पर कॉल करें

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भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने साइबर फ्रॉड की रिपोर्टिंग के लिए एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर 1930 जारी किया है। फ्रॉड होते ही सबसे पहले इस नंबर पर कॉल करें। अगर आप "गोल्डन ऑवर" (ठगी के तुरंत बाद का समय) में कॉल करते हैं, तो पुलिस उस पैसे को अपराधी के खाते में फ्रीज (Freeze) कर सकती है।
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चरण 2: बैंक को तत्काल सूचित करें

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अपने बैंक के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर (जो आपके कार्ड के पीछे या पासबुक पर लिखा हो) पर कॉल करें। उन्हें बताएं कि एक अनधिकृत लेन-देन हुआ है और तुरंत अपने खाते, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई आईडी को ब्लॉक (Block/Freeze) करवाएं।
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चरण 3: ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें

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भारत सरकार के राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर जाएं और विस्तार से अपनी शिकायत दर्ज करें। वहां से मिलने वाली एफआईआर (FIR) या एकनॉलेजमेंट रसीद (Acknowledgement Receipt) को संभाल कर रखें।
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चरण 4: बैंक ब्रांच में लिखित शिकायत दें

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साइबर पोर्टल की रसीद और अपने बैंक स्टेटमेंट की कॉपी लेकर 24 से 48 घंटे के भीतर अपनी बैंक शाखा (Home Branch) में जाएं। वहां एक फॉर्मल डिस्प्यूट फॉर्म (Dispute Form) भरें और रिसीविंग लें। यही दस्तावेज़ आपको RBI के नए नियम के तहत मुआवजा दिलाने का आधार बनेंगे।
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जनता से मांगे गए हैं सुझाव: आप भी बन सकते हैं नियम बनाने का हिस्सा!

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भारतीय रिजर्व बैंक कोई भी बड़ा नियम लागू करने से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करता है। यही कारण है कि 'कस्टमर लायबिलिटी इन डिजिटल ट्रांजैक्शंस' को सीधे कानून न बनाकर पहले एक 'ड्राफ्ट' (Draft) के रूप में पेश किया गया है।
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आरबीआई ने इस ड्राफ्ट को अपनी आधिकारिक वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर अपलोड कर दिया है।
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सुझाव देने की अंतिम तिथि: 6 अप्रैल, 2026:-

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कौन दे सकता है फीडबैक?

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    आम जनता (Citizens)
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  • \r\n
  • \r\n
    उपभोक्ता अधिकार समूह (Consumer Rights Groups)
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  • \r\n
  • \r\n
    रेगुलेटेड एंटिटीज (जैसे- बैंक, NBFCs, पेमेंट बैंक)
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  • \r\n
  • \r\n
    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और टेक कंपनियां
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  • \r\n
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कैसे भेजें अपने सुझाव?

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आप आरबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक ईमेल पते पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव भेज सकते हैं। यदि आपको लगता है कि ₹50,000 की लिमिट को बढ़ाकर ₹1,00,000 कर देना चाहिए, या रिफंड का प्रतिशत 85% से बढ़ाकर 100% होना चाहिए, तो एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आप 6 अप्रैल 2026 तक अपना फीडबैक जरूर दर्ज कराएं। सभी सुझावों का विश्लेषण करने के बाद ही सरकार और आरबीआई इन नियमों को अंतिम रूप (Finalize) देंगे और पूरे देश में लागू करेंगे।
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साइबर ठगी के प्रकार जिन्हें इस फ्रेमवर्क में शामिल किया जा सकता है

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यह समझना भी जरूरी है कि डिजिटल फ्रॉड कितने प्रकार के होते हैं, ताकि आप सतर्क रह सकें:
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  1. \r\n
    फिशिंग (Phishing): आपको एक फर्जी ईमेल या मैसेज आता है जो बिल्कुल आपके बैंक जैसा दिखता है। इसमें एक लिंक होता है, जिस पर क्लिक करते ही आप एक नकली वेबसाइट पर पहुंच जाते हैं और अपनी लॉगिन डिटेल्स डाल देते हैं।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    विशिंग (Vishing - Voice Phishing): ठग आपको कॉल करके खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस या इनकम टैक्स ऑफिसर बताता है और डरा-धमका कर या लालच देकर आपसे ओटीपी (OTP) या सीवीवी (CVV) मांग लेता है।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    सिम स्वैपिंग (SIM Swapping): अपराधी आपके नाम पर आपकी टेलीकॉम कंपनी से एक नया सिम कार्ड निकलवा लेता है। आपका नेटवर्क गायब हो जाता है और आपके बैंक के सारे ओटीपी सीधे अपराधी के फोन पर जाने लगते हैं।
    \r\n
  6. \r\n
  7. \r\n
    एटीएम स्किमिंग (ATM Skimming): एटीएम मशीन के कार्ड स्लॉट में एक छोटी सी डिवाइस लगा दी जाती है जो आपके कार्ड का डेटा चुरा लेती है, और कीपैड के ऊपर एक छोटा कैमरा आपका पिन रिकॉर्ड कर लेता है।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    रिवॉर्ड या लॉटरी फ्रॉड: "बधाई हो! आपने 25 लाख की लॉटरी जीती है, बस प्रोसेसिंग फीस के तौर पर ₹5000 इस यूपीआई पर भेज दें।" यह सबसे आम ठगी है।
    \r\n
  10. \r\n
  11. \r\n
    केवाईसी अपडेट फ्रॉड (KYC Update Fraud): "आपका बैंक खाता आज रात बंद हो जाएगा, तुरंत अपना पैन कार्ड और आधार लिंक करने के लिए इस ऐप को डाउनलोड करें।"
    \r\n
  12. \r\n
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नए नियमों के दायरे में इन सभी प्रकार के अनधिकृत लेनदेन को शामिल करने का प्रयास किया जा रहा है, बशर्ते यह साबित हो जाए कि ग्राहक ने जानबूझकर धोखाधड़ी में हिस्सा नहीं लिया है।
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अर्थव्यवस्था और डिजिटल इकोसिस्टम पर इसका दूरगामी प्रभाव

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आरबीआई के इस कदम को केवल 'पैसे वापसी' तक सीमित रखना गलत होगा। इसके गहरे आर्थिक और सामाजिक मायने हैं:
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  • \r\n
    डिजिटल साक्षरता और विश्वास (Trust in Digital Economy): बहुत से वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizens) या ग्रामीण इलाकों के लोग ऑनलाइन पेमेंट करने से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पैसा कट गया तो वापस नहीं मिलेगा। ₹25,000 की गारंटी उनके इस डर को खत्म करेगी और देश में डिजिटल पेमेंट्स को और बढ़ावा देगी।
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  • \r\n
  • \r\n
    फिनटेक कंपनियों के लिए चुनौती और अवसर: फोनपे (PhonePe), गूगल पे (Google Pay), पेटीएम (Paytm) जैसी फिनटेक कंपनियों को अब फ्रॉड डिटेक्शन एल्गोरिदम पर भारी निवेश करना होगा। यह साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में नई नौकरियों और स्टार्टअप्स के लिए अवसर पैदा करेगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    वैश्विक मंच पर भारत की साख: यूरोप (GDPR) और अमेरिका (Consumer Financial Protection Bureau) में ग्राहकों की सुरक्षा के बेहद कड़े नियम हैं। आरबीआई का यह नया ड्राफ्ट भारत के बैंकिंग नियमों को वैश्विक मानकों (Global Standards) के समकक्ष ला खड़ा करेगा।
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  • \r\n
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

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प्रश्न 1: क्या यह नियम अभी से लागू हो गया है?
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उत्तर: नहीं, अभी यह केवल एक 'ड्राफ्ट' (प्रस्ताव) है। आरबीआई ने 6 अप्रैल 2026 तक जनता और स्टेकहोल्डर्स से इस पर सुझाव मांगे हैं। इसके बाद बदलावों के साथ इसे अंतिम रूप देकर लागू किया जाएगा।
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प्रश्न 2: अगर मेरे साथ ₹1,00,000 का फ्रॉड हुआ है, तो मुझे कितने पैसे वापस मिलेंगे?
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उत्तर: नए ड्राफ्ट के अनुसार, यह मुआवजा योजना मुख्य रूप से ₹50,000 तक के छोटे फ्रॉड के लिए फोकस की गई है। हालांकि, यदि बड़े फ्रॉड में ग्राहक की कोई गलती (Zero Liability) नहीं पाई जाती है (जैसे बैंक के सर्वर से डेटा लीक होना), तो पुराने और नए नियमों के क्लॉज़ के तहत पूरा रिफंड भी मिल सकता है, लेकिन इस विशिष्ट 85% वाले फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म की अधिकतम सीमा ₹25,000 ही प्रस्तावित है।
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प्रश्न 3: मुझे फ्रॉड की रिपोर्ट कितने समय के अंदर करनी होगी?
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उत्तर: बैंकिंग नियमों के अनुसार, किसी भी अनधिकृत लेनदेन की रिपोर्ट 3 कार्य दिवसों (Working Days) के भीतर कर देनी चाहिए। यदि आप 3 दिन के भीतर रिपोर्ट करते हैं, तो आपकी देनदारी शून्य (Zero Liability) हो सकती है। 4 से 7 दिन के बीच रिपोर्ट करने पर आंशिक देनदारी होती है। नए नियम में 'तुरंत' रिपोर्टिंग पर जोर दिया गया है।
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प्रश्न 4: क्या मेरी खुद की गलती से हुए फ्रॉड में भी मुझे पैसा मिलेगा?
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उत्तर: यदि आपने खुद अपना पासवर्ड, OTP, या कार्ड डिटेल्स किसी अनजान व्यक्ति को बता दिए हैं, तो इसे 'ग्राहक की घोर लापरवाही' (Customer Negligence) माना जाता है। ऐसे मामलों में बैंक रिफंड देने से मना कर सकते हैं। हालांकि, जब तक आप बैंक को सूचित कर देते हैं, उसके बाद होने वाले किसी भी लेन-देन के लिए आप जिम्मेदार नहीं होंगे। 
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प्रश्न 5: क्या क्रेडिट कार्ड के फ्रॉड भी इसमें शामिल होंगे?
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उत्तर: हाँ, आरबीआई के 'कस्टमर लायबिलिटी' नियम बचत खातों (Savings Accounts), क्रेडिट कार्ड (Credit Cards), और मोबाइल वॉलेट (Mobile Wallets) जैसे सभी डिजिटल पेमेंट माध्यमों पर लागू होते हैं।
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सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है

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भारतीय रिजर्व बैंक का यह नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क ग्राहकों के हितों की रक्षा की दिशा में एक शानदार और बहुत ही जरूरी कदम है। जब यह नियम लागू हो जाएगा (संभवतः 2026 के मध्य तक), तो यह छोटे फ्रॉड के शिकार हुए लाखों लोगों को बड़ी राहत देगा और उन्हें कानूनी पचड़ों से बचाएगा।
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हालांकि, हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि "सावधानी हटी, दुर्घटना घटी"। कोई भी नियम या कानून शत-प्रतिशत नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता, और मानसिक उत्पीड़न की तो कोई कीमत ही नहीं होती। इसलिए, डिजिटल दुनिया में कदम रखते समय अपनी आंख-कान हमेशा खुले रखें। कभी भी किसी के साथ अपना OTP, PIN, या पासवर्ड साझा न करें।
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