बिजनौर (शकील अहमद ब्यूरो चीफ बिजनौर): जिस स्कूल को हम 'शिक्षा का मंदिर' कहते हैं, वहां अगर शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेर लें तो क्या होगा? बिजनौर के हल्दौर क्षेत्र में एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल शिक्षा प्रणाली पर, बल्कि इंसानियत पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां एक कंपोजिट विद्यालय के शिक्षक और स्टाफ, छुट्टी के बाद एक नन्हे छात्र को क्लासरूम में ही बंद कर घर चले गए। घंटों तक वह मासूम बच्चा एक अंधेरे, बंद कमरे में अकेले अपनी किस्मत पर रोता रहा, जब तक कि देवदूत बनकर आए अधिकारियों ने उसकी सिसकियां नहीं सुन लीं।READ ALSO:-'अब डरना नहीं, लड़ना है!'...नूरपुर के कॉलेज में गूंजा मिशन शक्ति का नारा, एंटी रोमियो टीम ने थमाया सुरक्षा का 'हथियार'
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वो खौफनाक शाम: जब सन्नाटे को चीर रही थी मासूम की आवाज
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कल्पना कीजिए, स्कूल की घंटी बज चुकी है। बच्चे अपने बस्ते उठाकर हंसते-खेलते घर जा चुके हैं। सूरज ढल रहा है और स्कूल के गेट पर ताला लग चुका है। चारों ओर गहरा सन्नाटा है... लेकिन उस सन्नाटे को एक बंद कमरे के अंदर से आ रही एक मासूम की रोने की आवाज चीर रही थी।
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हल्दौर स्थित कंपोजिट विद्यालय में शुक्रवार को यही खौफनाक मंजर हकीकत बना। स्कूल का पूरा स्टाफ अपनी 'ड्यूटी' पूरी करके जा चुका था, लेकिन वे यह देखना भूल गए कि उनकी निगरानी में आया एक बच्चा अभी भी स्कूल में ही है। वे एक जीवित, सांस लेते हुए बच्चे को चारदीवारी में कैद कर गए थे।
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और फिर हुआ चमत्कार...
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शाम के वक्त, जब सब कुछ अंधकार में डूब रहा था, शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारी एक औचक निरीक्षण के लिए स्कूल पहुंचे। वे अपनी नियमित जांच-पड़ताल कर ही रहे थे कि उनके कानों में एक अनजानी सी आवाज पड़ी। पहले तो उन्हें लगा कि यह उनका वहम है, लेकिन जब उन्होंने ध्यान से सुना, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। यह किसी बच्चे के रोने की आवाज थी! अधिकारी एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे और उस आवाज की दिशा में भागे जो एक बंद कमरे से आ रही थी।
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ताला टूटा, तो सामने आया लापरवाही का घिनौना सच
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अधिकारियों ने तुरंत स्कूल के प्रधानाध्यापक और अन्य स्टाफ को फोन घनघनाना शुरू कर दिया। जैसे-तैसे चाबी का इंतजाम कर या ताला खुलवाकर जब दरवाजा खोला गया, तो अंदर का दृश्य देखकर हर कोई कांप उठा। एक छोटा सा बच्चा, डर के मारे एक कोने में दुबका हुआ, अपनी लाल-लाल आंखों से टकटकी लगाए देख रहा था। उसके आंसू सूख चुके थे और चेहरे पर खौफ साफ नजर आ रहा था। अधिकारियों ने दौड़कर बच्चे को उठाया, उसे गले लगाया और पानी पिलाकर शांत कराया।
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अब कौन लेगा जिम्मेदारी?
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बच्चे को सुरक्षित उसके परिजनों को सौंप दिया गया है, लेकिन माता-पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उन्होंने सवाल उठाया है, "यह कोई छोटी-मोटी भूल नहीं, यह एक अपराध है। अगर मेरे बच्चे को उस बंद कमरे में कुछ हो जाता, कोई जहरीला कीड़ा काट लेता या वह डर के मारे ही बीमार पड़ जाता, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?"
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इस घटना ने पूरे शिक्षा विभाग को हिलाकर रख दिया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने मामले की तत्काल उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों और स्टाफ पर निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई होना तय है। यह घटना एक कड़वा सबक है कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान देने से कहीं ज़्यादा महत्वपूर्ण है।
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