मुरादाबाद: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) अक्सर अपने अजब-गजब कारनामों के लिए सुर्खियों में रहता है, लेकिन मुरादाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ के दलपतपुर विद्युत उपकेंद्र (Dalpatpur Power Substation) पर एक सरकारी अधिकारी ने पुलिस और कानून का सहारा लेने के बजाय खुद ही 'अदालत' लगा दी।READ ALSO:-आधार कार्ड धारकों के लिए बड़ा धमाका: अब मोबाइल नंबर और OTP की झंझट खत्म! बिना रजिस्टर्ड सिम के मिनटों में डाउनलोड होगा आपका आधार
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ग्रामीण उपभोक्ता से 25 हजार रुपये का गबन करने वाले एक संविदा मीटर रीडर को उपखंड अधिकारी (SDO) ने अपने ही दफ्तर के बाहर सरेआम 'मुर्गा' बना दिया। करीब 30 मिनट तक चली इस अमानवीय सजा का तमाशबीनों ने वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो के वायरल होते ही बिजली विभाग के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया और मामले की लीपापोती शुरू हो गई। आइए, इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाते हैं।
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 मीटर रीडर करीब 30 मिनट तक दफ्तर के बाहर मुर्गा बना रहा।

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क्या है पूरा मामला? 25 हजार रुपये और एक फर्जी रसीद का खेल

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इस पूरे विवाद की जड़ में एक ग्रामीण उपभोक्ता की गाढ़ी कमाई और संविदा कर्मी का लालच शामिल है। मुरादाबाद जिले का ही रहने वाला मतलूब उर्फ रानू (उम्र लगभग 35 वर्ष) दलपतपुर बिजलीघर के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्रों में मीटर रीडिंग और बिलिंग का काम करता था। रानू का काम उपभोक्ताओं के घरों तक जाना, मीटर की रीडिंग लेना और बिल जनरेट करना था।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, करीब 10 दिन पहले रानू रसूल नगला गांव में रीडिंग लेने पहुंचा था। वहां एक ग्रामीण उपभोक्ता के बिजली कनेक्शन पर 25,000 रुपये का भारी-भरकम बिल बकाया था। मीटर रीडर रानू ने उपभोक्ता को डरा-धमका कर या झांसे में लेकर बकाया राशि जमा करने को कहा। उपभोक्ता ने विभाग की कार्रवाई से बचने के लिए तुरंत 25 हजार रुपये नकद रानू को सौंप दिए।
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रानू ने इन रुपयों को सरकारी खजाने या विभाग के खाते में जमा करने के बजाय अपनी जेब में रख लिया। उपभोक्ता का विश्वास जीतने के लिए उसने एक फर्जी रसीद (Fake Receipt) तैयार की और उपभोक्ता के हाथ में थमा दी। ग्रामीण उपभोक्ता इस बात से बेफिक्र हो गया कि उसका बकाया चुकता हो चुका है, लेकिन उसे बिल जमा होने का कोई आधिकारिक SMS प्राप्त नहीं हुआ, जिसे उसने तकनीकी खामी समझकर नजरअंदाज कर दिया।
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पैरों तले खिसक गई जमीन: जब विभाग ने फिर मांगा बकाया

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फर्जीवाड़े का यह खेल तब उजागर हुआ जब कुछ दिनों बाद बिजली विभाग की एक रिकवरी टीम रसूल नगला गांव पहुंची। टीम ने उसी उपभोक्ता को दोबारा 25 हजार रुपये का बकाया जमा करने का नोटिस थमा दिया।
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अधिकारियों की बात सुनकर उपभोक्ता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने कड़े शब्दों में विरोध करते हुए कहा कि वह पहले ही मीटर रीडर को पूरा पैसा दे चुका है और उसके पास इसकी रसीद भी है। जब उपभोक्ता ने गर्व के साथ वह रसीद बिजली विभाग की टीम को दिखाई, तो अधिकारियों ने उसे जांचने के बाद साफ बता दिया कि यह रसीद पूरी तरह से 'फर्जी' है। विभाग के सिस्टम में उसके खाते में कोई भी पैसा जमा नहीं हुआ है। इसके बाद उपभोक्ता को ठगी का अहसास हुआ और उसने गांव वालों के साथ मिलकर आरोपी मीटर रीडर की तलाश शुरू कर दी।
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ग्रामीणों का गुस्सा और SDO का 'तालिबानी' फरमान

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शनिवार के दिन उपभोक्ता और अन्य ग्रामीणों के हाथ मीटर रीडर रानू कुमार लग गया। गुस्साए ग्रामीणों ने उसे वहीं पकड़ लिया और उसे खींचते हुए सीधे दलपतपुर उपकेंद्र स्थित SDO कार्यालय ले गए।
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ग्रामीणों ने SDO आरएन राठौड़ (RN Rathore) के सामने रानू को पेश किया और उसकी करतूत की पोल खोल दी। भारी भीड़ और ग्रामीणों का आक्रोश देखकर SDO राठौड़ को नियमानुसार आरोपी को पुलिस के हवाले कर धोखाधड़ी (IPC/BNS के तहत) की एफआईआर (FIR) दर्ज करानी चाहिए थी। लेकिन, राठौड़ ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को ताक पर रखते हुए एक अजीबोगरीब और गैर-कानूनी फैसला लिया।
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उन्होंने आरोपी मीटर रीडर को अपने दफ्तर के ठीक बाहर 'मुर्गा' बनने का आदेश दे दिया। रानू करीब आधे घंटे तक तपती धूप में दफ्तर के बाहर मुर्गा बना रहा। वहां मौजूद ग्रामीणों और अन्य उपभोक्ताओं ने इस घटना का वीडियो अपने मोबाइल फोन में कैद कर लिया।
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वीडियो हुआ वायरल, तो विभाग में मचा हड़कंप

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जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स (Facebook, X, WhatsApp) पर वायरल हुआ, मुरादाबाद से लेकर लखनऊ तक बिजली विभाग की किरकिरी होने लगी। एक तरफ संविदा कर्मी द्वारा खुलेआम की जा रही लूट का पर्दाफाश हुआ, तो दूसरी तरफ एक राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) द्वारा कानून को अपने हाथ में लेने की घटना सामने आई।
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वीडियो के तूल पकड़ते ही स्थानीय अधिकारी मामले को दबाने और मीडिया से बचने की कोशिश करने लगे। लेकिन मामला मुरादाबाद जोन के चीफ इंजीनियर (Chief Engineer) तक पहुंच चुका था, जिसके बाद उच्च स्तरीय कार्रवाई शुरू हुई।
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चीफ इंजीनियर की बड़ी कार्रवाई: मीटर रीडर बर्खास्त, SDO पर भी गिरी गाज की तलवार

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मामले की गंभीरता को देखते हुए मुरादाबाद जोन के चीफ इंजीनियर अशोक कुमार चौरसिया ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने मीडिया को आधिकारिक बयान देते हुए बताया कि इस पूरे प्रकरण की जांच अधिशासी अभियंता-2 (Executive Engineer-2) को सौंप दी गई है।
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चीफ इंजीनियर चौरसिया ने स्पष्ट किया: "प्राथमिक जांच में यह बात सही पाई गई है कि मीटर रीडर ने उपभोक्ता से बिल की रकम लेकर उसे फर्जी रसीद सौंपी थी। यह विभाग के नियमों का गंभीर उल्लंघन और आपराधिक कृत्य है। आरोपी मीटर रीडर रानू कुमार की संविदा सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (Terminate) कर दी गई हैं।"
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वहीं, SDO आरएन राठौड़ के कृत्य पर उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का काम एफआईआर दर्ज कराना है, न कि इस तरह की सजा देना। SDO की भूमिका और उनके द्वारा उठाए गए कदम की भी विभागीय जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
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उपभोक्ताओं के लिए सबक: कैसे बचें इस तरह के फर्जीवाड़े से?

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मुरादाबाद की यह घटना उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली बिलों को लेकर हो रहे भ्रष्टाचार का एक जीता-जागता उदाहरण है। अक्सर जानकारी के अभाव में ग्रामीण उपभोक्ता मीटर रीडर या लाइनमैन को नकद पैसे दे देते हैं, जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता।
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उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) लगातार उपभोक्ताओं से अपील करता है कि:

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    नकद लेन-देन से बचें: बिल का भुगतान हमेशा ऑनलाइन पोर्टल (upenergy.in), आधिकारिक ऐप या मान्यता प्राप्त जन सुविधा केंद्रों (CSC) पर ही करें।
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    SMS अलर्ट चेक करें: बिल जमा करने के तुरंत बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर UPPCL की तरफ से कन्फर्मेशन SMS आता है। इसके बिना भुगतान को पूरा न मानें।
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    रसीद की जांच करें: यदि आप काउंटर पर नकद जमा कर रहे हैं, तो कंप्यूटर जनरेटेड आधिकारिक रसीद ही लें। हस्तलिखित (Handwritten) रसीदों पर भरोसा न करें।
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    शिकायत दर्ज करें: किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1912 पर कॉल करें।
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सिस्टम के सुधार की दरकार

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यह घटना केवल एक मीटर रीडर के भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में कितनी कमियां हैं। एक तरफ संविदा कर्मियों की जवाबदेही तय करने का कोई ठोस मैकेनिज्म नहीं है, तो दूसरी तरफ अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने से नहीं हिचकते। मुरादाबाद प्रशासन और बिजली विभाग को इस मामले में न केवल दोषी मीटर रीडर पर कानूनी शिकंजा कसना चाहिए, बल्कि कानून हाथ में लेने वाले SDO के खिलाफ भी सख्त नजीर पेश करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी खुद को 'जज' समझने की भूल न करे।
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