उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) ने गुरुवार को दो अलग-अलग जिलों में बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रदेश के मेरठ (Meerut) और अंबेडकरनगर (Ambedkar Nagar) जिलों में एंटी करप्शन ब्यूरो की टीमों ने जाल बिछाकर दो सरकारी कर्मचारियों (क्लर्कों) को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इन दोनों मामलों ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में निचले स्तर पर फैले भ्रष्टाचार और उसे जड़ से खत्म करने के लिए यूपी एंटी करप्शन टीम की सक्रियता को उजागर किया है। एक तरफ मेरठ में बकाया बिल पास करने के नाम पर 50 हजार रुपये की मोटी घूस मांगी जा रही थी, तो दूसरी तरफ अंबेडकरनगर में गरीबों के लिए बनी 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PM Awas Yojana) की फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 5 हजार रुपये लूटे जा रहे थे।READ ALSO:-मेरठ में हाईवे पर मौत का तांडव: 20 बाइक सवार दबंगों ने फिल्मी स्टाइल में किया चलती कार का पीछा, लाठी-डंडों से शीशे तोड़कर ड्राइवर को सड़क पर पीटा
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम न केवल इन दोनों घटनाओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे, बल्कि यह भी जानेंगे कि यूपी एंटी करप्शन टीम किस तरह से अपना जाल बिछाती है, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत क्या सजा मिलती है, और आम नागरिक कैसे घूसखोरों के खिलाफ अपनी आवाज उठा सकते हैं।
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मेरठ में पूर्व सैनिक कल्याण निगम का बाबू गिरफ्तार
\r\n\r\nमेरठ जिले के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया जब यूपी एंटी करप्शन टीम ने उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड (UP Purva Sainik Kalyan Nigam Limited) के एक बाबू को 50,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपी बाबू का नाम शक्ति सिंह है, जो वर्णिका स्टेट (रोहटा रोड) का निवासी बताया जा रहा है।
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शिकायत और जाल बिछाने की योजना
\r\n\r\nजानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने यूपी एंटी करप्शन टीम को दी गई अपनी तहरीर में आरोप लगाया था कि आरोपी बाबू शक्ति सिंह उसके बकाया बिलों को पास करने के एवज में भारी रिश्वत की मांग कर रहा है। बिना पैसे दिए बाबू फाइल को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर रहा था और लगातार मानसिक दबाव बना रहा था। इस पर पीड़ित ने भ्रष्टाचार के आगे घुटने टेकने के बजाय यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) से संपर्क करने का साहसिक निर्णय लिया।
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शिकायत मिलने के बाद, विभाग ने मामले की प्रारंभिक जांच की और शिकायत को सही पाए जाने पर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने की रणनीति तैयार की।
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कैसे बुना गया मेरठ में जाल?
\r\n\r\nनिरीक्षक कैलाश चंद के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। योजना के तहत, यूपी एंटी करप्शन टीम ने शिकायतकर्ता को 50,000 रुपये के नोट दिए, जिन पर एक विशेष प्रकार का केमिकल (फेनोल्फथेलिन पाउडर) लगा हुआ था। शिकायतकर्ता को निर्देश दिया गया कि वह यह रकम आरोपी बाबू शक्ति सिंह को सौंप दे।
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तय योजना के अनुसार, जैसे ही शिकायतकर्ता ने कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित कार्यालय में बाबू शक्ति सिंह को वह केमिकल लगे नोटों की गड्डी थमाई, पहले से ही सादे कपड़ों में घात लगाकर बैठी यूपी एंटी करप्शन टीम ने तुरंत उसे दबोच लिया। जब प्रक्रिया के तहत आरोपी के हाथ सोडियम कार्बोनेट के घोल में धुलवाए गए, तो केमिकल के कारण उसके हाथ और पानी का रंग गुलाबी हो गया। यह इस बात का पुख्ता वैज्ञानिक सबूत बन गया कि आरोपी ने रिश्वत की रकम को अपने हाथों से छुआ है।
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कंकरखेड़ा थाना प्रभारी विनय कुमार ने इस घटना की पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि यूपी एंटी करप्शन टीम आरोपी को पकड़कर थाने लाई है और टीम की लिखित तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस और विभाग आगे की विधिक कार्रवाई कर रहे हैं।
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अंबेडकरनगर: पीएम आवास योजना के नाम पर रिश्वत
\r\n\r\nमेरठ की ही तरह, गुरुवार को अंबेडकरनगर जिले में भी भ्रष्टाचार का एक शर्मनाक मामला सामने आया, जहां गरीबों के हक पर डाका डाला जा रहा था। अंबेडकरनगर के नगर पालिका परिषद जलालपुर में यूपी एंटी करप्शन टीम ने एक क्लर्क को 5,000 रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।
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जलालपुर नगर पालिका में मची खलबली
\r\n\r\nयह घटना गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे की है। जानकारी के मुताबिक, आरोपी रमाकांत चौबे मूल रूप से जल निगम का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है, जिसे वर्ष 2020 में पंप ऑपरेटर के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्तमान में वह जलालपुर नगर पालिका परिषद में परिनियुक्ति (Deputation) पर तैनात था और उसे अतिक्रमण प्रभारी के साथ-साथ 'प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना' के तहत लाभार्थियों की पात्रता जांचने का महत्वपूर्ण काम सौंपा गया था।
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आरोप है कि रमाकांत चौबे ने नगर क्षेत्र के वाजिदपुर निवासी अवधेश चौहान से पीएम आवास योजना के तहत आवास दिलाने और सूची में नाम दर्ज कराकर फाइल आगे बढ़ाने के नाम पर 5,000 रुपये की अवैध मांग की थी। एक गरीब लाभार्थी के लिए 5,000 रुपये की रकम बहुत बड़ी होती है, लेकिन आरोपी बिना पैसे लिए काम करने को राजी नहीं था।
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अयोध्या मंडल की टीम का एक्शन
\r\n\r\nपीड़ित अवधेश चौहान ने हार नहीं मानी और अयोध्या मंडल की यूपी एंटी करप्शन टीम से लिखित शिकायत की। शिकायत के आधार पर, टीम ने एक सुनियोजित ट्रैप बिछाया। गुरुवार दोपहर जब शिकायतकर्ता अवधेश चौहान तय रणनीति के तहत नगर पालिका गेट के सामने आरोपी कर्मचारी रमाकांत चौबे को 5,000 रुपये की रिश्वत देने पहुंचा, तो वहां पहले से मुस्तैद यूपी एंटी करप्शन टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
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जैसे ही टीम ने रमाकांत को पकड़ा, नगर पालिका परिसर में अफरातफरी और कर्मचारियों में भारी खलबली मच गई। टीम ने बिना कोई समय गंवाए मौके से जरूरी साक्ष्य (Chemical test) एकत्र किए और आरोपी को अपनी हिरासत में लेकर सीधे कोतवाली अकबरपुर ले गई।
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अकबरपुर कोतवाली प्रभारी श्रीनिवास पांडेय ने बताया कि यूपी एंटी करप्शन टीम की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जलालपुर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) अरविंद कुमार ने भी कर्मचारी के पकड़े जाने की पुष्टि की है।
\r\n\r\nएंटी करप्शन टीम का काम करने का तरीका (Modus Operandi)
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यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) भ्रष्टाचार के खिलाफ जो जाल बिछाती है, वह कानूनी और वैज्ञानिक रूप से बेहद मजबूत होता है। कोर्ट में आरोपी को सजा दिलाने के लिए सिर्फ शिकायतकर्ता का बयान काफी नहीं होता; पुख्ता सबूतों की आवश्यकता होती है। आइए समझते हैं कि यह ट्रैप कैसे काम करता है:
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- \r\n शिकायत का सत्यापन (Verification): जब भी कोई पीड़ित शिकायत करता है, तो टीम सबसे पहले यह पुष्टि करती है कि क्या वाकई रिश्वत की मांग की जा रही है। इसके लिए कई बार वॉयस रिकॉर्डिंग या गोपनीय जांच का सहारा लिया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n केमिकल पाउडर का प्रयोग: टीम शिकायतकर्ता द्वारा दिए जाने वाले नोटों पर 'फेनोल्फथेलिन' (Phenolphthalein) नाम का एक पारदर्शी पाउडर लगाती है। यह पाउडर नंगी आंखों से दिखाई नहीं देता है।\r\n \r\n
- \r\n गवाहों की मौजूदगी: ट्रैप बिछाते समय टीम अपने साथ दो स्वतंत्र सरकारी गवाह (Independent Witnesses) भी रखती है, जो पूरी घटना को अपनी आंखों से देखते हैं।\r\n \r\n
- \r\n रंगे हाथों पकड़ना और पिंक टेस्ट: जैसे ही घूसखोर उन नोटों को पकड़ता है, पाउडर उसके हाथों में चिपक जाता है। इसके बाद टीम उसे पकड़कर उसके हाथ 'सोडियम कार्बोनेट' (Sodium Carbonate) मिले पानी में धुलवाती है। विज्ञान के नियमानुसार, फेनोल्फथेलिन और सोडियम कार्बोनेट के मिलते ही पानी का रंग गहरा गुलाबी (Pink) हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n सबूतों की जब्ती: वह गुलाबी पानी एक शीशी में सील कर दिया जाता है, जिसे बाद में फोरेंसिक लैब भेजा जाता है। कोर्ट में यह सबसे बड़ा सबूत माना जाता है कि आरोपी ने रिश्वत के नोट छुए थे।\r\n \r\n
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मेरठ के बाबू शक्ति सिंह और अंबेडकरनगर के क्लर्क रमाकांत चौबे, दोनों के ही मामलों में यूपी एंटी करप्शन टीम ने इसी वैज्ञानिक और अचूक तरीके का इस्तेमाल किया, जिससे आरोपियों के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।
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सरकारी योजनाओं पर भ्रष्टाचार का प्रभाव: पीएम आवास योजना का संदर्भ
\r\n\r\nअंबेडकरनगर का मामला विशेष रूप से संवेदनशील है क्योंकि यह सीधे तौर पर केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PM Awas Yojana) से जुड़ा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन गरीब और बेघर लोगों को पक्की छत मुहैया कराना है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
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जब रमाकांत चौबे जैसे कर्मचारी ऐसे गरीब लाभार्थियों से 5,000 रुपये जैसी रकम रिश्वत के तौर पर मांगते हैं, तो यह केवल एक वित्तीय अपराध नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक पतन है।
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- \r\n लाभार्थियों का शोषण: कई बार गरीब लोग रिश्वत की रकम चुकाने के लिए साहूकारों से भारी ब्याज पर कर्ज लेते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n योजनाओं की गति धीमी होना: फाइलों को अटका कर रखने से सरकारी योजनाओं का लक्ष्य समय पर पूरा नहीं हो पाता।\r\n \r\n
- \r\n सरकार की छवि पर असर: ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के कारण सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की साख जनता के बीच खराब होती है।\r\n \r\n
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यही कारण है कि यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) को विशेष निर्देश हैं कि आम जनता से जुड़ी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जाए।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत कार्रवाई
\r\n\r\nमेरठ और अंबेडकरनगर, दोनों ही मामलों में आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है। भारत में लोक सेवकों (Public Servants) द्वारा किए जाने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए यह सबसे कड़ा कानून है।
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इस कानून के तहत:
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- \r\n धारा 7: कोई भी लोक सेवक जो अपने आधिकारिक काम को करने के लिए कानूनी पारिश्रमिक के अलावा कोई भी 'अनुचित लाभ' (रिश्वत) लेता है, मांगता है या स्वीकार करने का प्रयास करता है, उसे इस धारा के तहत अपराधी माना जाता है।\r\n \r\n
- \r\n सजा का प्रावधान: इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल से लेकर अधिकतम 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।\r\n \r\n
- \r\n नौकरी से बर्खास्तगी: एक बार रंगे हाथों पकड़े जाने और एफआईआर दर्ज होने के बाद, सरकारी कर्मचारी को तुरंत प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है। कोर्ट से सजा पुख्ता होने पर उसे सरकारी सेवा से हमेशा के लिए बर्खास्त (Dismiss) कर दिया जाता है, और उसकी पेंशन व अन्य भत्ते भी रोक दिए जाते हैं।\r\n \r\n
बाबू शक्ति सिंह और क्लर्क रमाकांत चौबे, दोनों का अब सरकारी सेवा में बने रहना लगभग असंभव है। यूपी एंटी करप्शन टीम द्वारा जुटाए गए रंगे हाथों पकड़े जाने और गुलाबी हाथ (Pink Hands test) के सबूत कोर्ट में उन्हें सजा दिलाने के लिए काफी हैं।
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उत्तर प्रदेश सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और एंटी करप्शन टीम की सक्रियता
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने शुरुआत से ही भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। इसका सीधा मतलब है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की कोई रियायत नहीं बरती जाएगी, चाहे आरोपी किसी भी पद पर क्यों न बैठा हो।
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यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) को इस नीति के तहत पूरी छूट और संसाधन दिए गए हैं ताकि वे भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों पर शिकंजा कस सकें। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में एंटी करप्शन ब्यूरो ने रिकॉर्ड संख्या में ट्रैप किए हैं:
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- \r\n राजस्व विभाग (लेखपाल, तहसीलदार)\r\n \r\n
- \r\n पुलिस विभाग (दरोगा, सिपाही)\r\n \r\n
- \r\n बिजली विभाग\r\n \r\n
- \r\n नगर निगम और पंचायत विभाग\r\n \r\n
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इन विभागों में काम कराने के एवज में आम जनता से सबसे ज्यादा रिश्वत मांगी जाती है। सरकार द्वारा जारी किए गए टॉल-फ्री नंबर और हेल्पलाइन की वजह से अब आम नागरिक भी निडर होकर यूपी एंटी करप्शन टीम के पास पहुंच रहे हैं। मेरठ और अंबेडकरनगर के जागरूक नागरिक इसके जीवंत उदाहरण हैं।
\r\n\r\nआम नागरिक कैसे करें एंटी करप्शन टीम से शिकायत?
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भ्रष्टाचार को खत्म करना केवल सरकार या यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) की जिम्मेदारी नहीं है; इसमें आम नागरिकों की भूमिका सबसे अहम है। अगर कोई भी सरकारी कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, लेखपाल या क्लर्क आपसे आपका जायज काम करने के लिए रिश्वत मांगता है, तो आपको डरने या उसे पैसे देने की जरूरत नहीं है। आप निम्नलिखित कदम उठा सकते हैं:
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शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया:
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- \r\n सबूत जुटाएं: यदि संभव हो, तो रिश्वत मांगने वाले अधिकारी की कॉल रिकॉर्ड कर लें या छुपकर वीडियो/ऑडियो बना लें। यह प्रारंभिक जांच में बहुत काम आता है।\r\n \r\n
- \r\n एंटी करप्शन संगठन (ACO) से संपर्क करें: उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार निवारण संगठन (Anti-Corruption Organization) के मंडल स्तर पर कार्यालय होते हैं। आप सीधे वहां जाकर पुलिस अधीक्षक (SP) या निरीक्षक से मिल सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n हेल्पलाइन नंबर्स का उपयोग: उत्तर प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार की शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर 1076 (CM Helpline) और एंटी करप्शन ब्यूरो के विशेष नंबर जारी किए हुए हैं। आप इन नंबरों पर कॉल करके भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\r\n \r\n
- \r\n लिखित तहरीर दें: अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से लिखें कि कौन सा अधिकारी, किस काम के लिए, कितनी रिश्वत मांग रहा है।\r\n \r\n
- \r\n योजना में सहयोग करें: शिकायत करने के बाद यूपी एंटी करप्शन टीम द्वारा बनाए गए ट्रैप (जाल) में पूरा सहयोग करें। टीम आपके साथ ही सादे कपड़ों में जाएगी और अधिकारी को रंगे हाथों गिरफ्तार करेगी।\r\n \r\n
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आपको यह भी पता होना चाहिए कि यूपी एंटी करप्शन टीम शिकायतकर्ता की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखती है और उसे हर संभव सुरक्षा और कानूनी सहायता प्रदान करती है। मेरठ के शिकायतकर्ता और अंबेडकरनगर के अवधेश चौहान ने जो हिम्मत दिखाई है, वह समाज के अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा है।
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मेरठ में 50,000 रुपये की घूस लेते बाबू शक्ति सिंह और अंबेडकरनगर में 5,000 रुपये रिश्वत लेते क्लर्क रमाकांत चौबे की गिरफ्तारी इस बात का स्पष्ट संदेश है कि भ्रष्टाचार के दिन अब लद चुके हैं। यूपी एंटी करप्शन टीम (UP Anti Corruption Team) की यह दोहरी सफलता न केवल भ्रष्ट अधिकारियों के मन में डर पैदा करेगी, बल्कि आम जनता के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास भी जगाएगी।
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सरकारी दफ्तरों में बैठे जो कर्मचारी यह सोचते हैं कि वे गरीब और लाचार जनता का शोषण करके अपनी जेबें भर सकते हैं, उन्हें अब समझ लेना चाहिए कि एंटी करप्शन का फंदा कभी भी उनके गले तक पहुंच सकता है। 'प्रधानमंत्री आवास योजना' जैसी कल्याणकारी योजनाओं में सेंधमारी करने वाले किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जाएंगे।
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एक जागरूक नागरिक के रूप में हमारी यह जिम्मेदारी बनती है कि हम भ्रष्टाचार को बढ़ावा न दें। यदि कोई रिश्वत मांगता है, तो उसकी शिकायत तुरंत संबंधित विभाग और यूपी एंटी करप्शन टीम से करें। तभी हम एक स्वच्छ, पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दे पाएंगे।
Sabse pehle comment karne wale banein.