:-बुलंदशहर/मेरठ: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में सोमवार की आधी रात एक ऐसी चीख गूंजी, जिसने मेरठ से लेकर लखनऊ तक के सियासी और सामाजिक गलियारों को झकझोर कर रख दिया। बुलंदशहर-मेरठ हाईवे पर एक भीषण सड़क हादसे ने तीन परिवारों के चिराग बुझा दिए। इस हृदयविदारक घटना में मेरठ के दिग्गज भाजपा नेता और एमएलसी (MLC) अश्वनी त्यागी के भतीजे अंकित त्यागी, उनके करीबी मित्र डॉ. आशुतोष पुनिया और सुरक्षाकर्मी महेश कुमार की जान चली गई।Read also:-नूरपुर में रफ़्तार का 'खूनी खेल': दवा लेने निकले थे, क्या पता था दर्द और बढ़ जाएगा; कार और बाइक की टक्कर में उड़े परखच्चे, सड़क पर बिछीं कांच की किरचें
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यह हादसा मात्र एक टक्कर नहीं थी, बल्कि तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहन के खतरनाक मेल का परिणाम था, जिसने एक मजबूत क्रेटा जैसी गाड़ी को लोहे के ढेर में तब्दील कर दिया।
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कैसे हुआ हादसा? मौत की वो खौफनाक रात

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घटना सोमवार रात करीब 11 बजे की है। बताया जा रहा है कि अंकित त्यागी अपने दोस्तों के साथ बुलंदशहर के पास किसी पोल्ट्री फार्म के काम से जमीन देखने आए थे। काम निपटाने के बाद तीनों खुशी-खुशी अपने घर मेरठ की ओर लौट रहे थे। उनकी क्रेटा कार की रफ्तार काफी तेज थी।
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जैसे ही कार गुलावठी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चिड़ावक कट के पास पहुंची, अचानक स्टीयरिंग से नियंत्रण खो गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मंजर इतना खौफनाक था कि कार सड़क पर चार-पांच बार हवा में कलाबाजी खाते हुए (पलटी मारते हुए) सीधे डिवाइडर को लांघ गई। किस्मत की मार देखिए कि जिस वक्त कार डिवाइडर लांघकर दूसरी लेन (विपरीत दिशा) में पहुंची, वहां से एक तेज रफ्तार ट्रक गुजर रहा था। कार सीधे ट्रक के नीचे जा घुसी।
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परखच्चे उड़े, कार की छत तक गायब हो गई

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हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद क्रेटा कार का अगला हिस्सा पूरी तरह खत्म हो गया। कार की छत किसी कागज की तरह उखड़कर दूर जा गिरी। चारों तरफ से कार पिचक गई थी, जिससे अंदर सवार लोगों को निकलने तक की जगह नहीं बची। हालांकि, आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के तौर पर कार के एयरबैग भी खुले, लेकिन टक्कर इतनी भीषण थी कि वे भी जीवन बचाने में नाकाम रहे।
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हाईवे पर गुजर रहे राहगीरों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब कार की हालत देखी, तो उनके भी होश उड़ गए। गैस कटर और क्रेन की मदद से जैसे-तैसे कार के मलबे को काटकर तीनों शवों को बाहर निकाला गया।
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मृतकों का परिचय: मेरठ के प्रतिष्ठित परिवार में शोक की लहर

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इस हादसे ने मेरठ के एक प्रतिष्ठित राजनीतिक और व्यावसायिक परिवार को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है:
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    अंकित त्यागी (37 वर्ष): अंकित मेरठ के भाजपा एमएलसी अश्वनी त्यागी के भतीजे थे। उनके पिता संजय त्यागी भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। अंकित अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे और मेरठ में प्रसिद्ध 'द्रोण स्कूल' और 'द्रोण अस्पताल' का संचालन करते थे। उनकी मृत्यु से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
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    डॉ. आशुतोष पुनिया (35 वर्ष): डॉ. आशुतोष अंकित के बेहद करीबी मित्र थे और उनके द्रोण अस्पताल में ही चिकित्सक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। वह एक होनहार डॉक्टर थे।
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    महेश कुमार (55 वर्ष): महेश कुमार, अंकित त्यागी के पीएसओ (निजी सुरक्षा अधिकारी) थे। वह लंबे समय से परिवार के साथ जुड़े हुए थे।
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ये तीनों ही व्यक्ति शादीशुदा थे और अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। अंकित त्यागी का इकलौता बेटा होना परिवार के लिए सबसे बड़ा आघात है।
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प्रशासनिक कार्रवाई और फरार ट्रक चालक

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हादसे की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) दिनेश कुमार सिंह और अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया है। हालांकि, हादसे के तुरंत बाद अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रक चालक मौके से फरार होने में कामयाब रहा।
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एसएसपी दिनेश कुमार सिंह ने मीडिया से बात करते हुए बताया, "हादसे का मुख्य कारण वाहन की अत्यधिक गति (Over Speeding) प्रतीत हो रही है। कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर कूद गई थी। शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और फरार चालक की तलाश के लिए टीमें गठित कर दी गई हैं।"
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 कार का एयरबैग खुलने के बाद भी कार सवार तीनों की मौत हो गई।

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हाईवे पर 'स्पीड' बनी साइलेंट किलर

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यह हादसा एक बार फिर उत्तर प्रदेश के हाईवे पर वाहनों की बेलगाम रफ्तार पर सवालिया निशान लगाता है। बुलंदशहर-मेरठ हाईवे पर अक्सर रात के समय वाहन निर्धारित गति सीमा से अधिक तेज चलते हैं। चिड़ावक कट के पास जहां यह हादसा हुआ, वहां पहले भी कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात में रोशनी की कमी और भारी वाहनों की तेज आवाजाही इस हाईवे को 'डेथ ट्रैप' बना देती है।
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परिवार और समर्थकों में भारी गम

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जैसे ही अंकित त्यागी और उनके साथियों की मौत की खबर मेरठ पहुंची, अस्पताल और उनके निवास पर शुभचिंतकों की भीड़ उमड़ पड़ी। भाजपा के कई बड़े नेता और स्थानीय विधायक परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। एमएलसी अश्वनी त्यागी और संजय त्यागी के समर्थकों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो रहा है कि हंसता-खेलता अंकित अब उनके बीच नहीं रहा।
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सुरक्षा ही एकमात्र बचाव

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बुलंदशहर का यह हादसा हमें सिखाता है कि सड़क पर एक पल की गफलत या थोड़ी सी अधिक रफ्तार कितनी महंगी पड़ सकती है। कार कितनी भी सुरक्षित क्यों न हो, भौतिक विज्ञान के नियम और तेज रफ्तार की टक्कर में अक्सर जान का नुकसान ही होता है।
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अंकित त्यागी, डॉ. आशुतोष और महेश की असमय मृत्यु ने न केवल तीन घरों के चिराग बुझा दिए, बल्कि समाज को एक गहरा जख्म दिया है। पुलिस अब इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों की भी मदद ले रही है ताकि यह साफ हो सके कि क्या कार में कोई तकनीकी खराबी आई थी या यह पूरी तरह मानवीय चूक का परिणाम था।
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डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर आधारित है। अंतिम जांच रिपोर्ट आना अभी शेष है।
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