मेरठ (ब्यूरो): शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालयों में अगर छात्रों के बीच नफरत की दीवार खड़ी हो जाए और एक छात्र को उसकी धार्मिक पहचान के कारण प्रताड़ना का शिकार होना पड़े, तो यह समाज के लिए चिंता का विषय है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने इंसानियत और धार्मिक सौहार्द को शर्मसार कर दिया है। शहर के प्रतिष्ठित सनातन धर्म इंटर कॉलेज में 12वीं कक्षा के एक सिख छात्र के साथ उसके सहपाठियों ने न केवल बर्बरतापूर्वक मारपीट की, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था का प्रतीक 'पगड़ी' भी उतार फेंकी।READ ALSO:-मेरठ में बाबा साहेब के अपमान पर उबाल: अंबेडकर के बोर्ड पर थूका गुटखा, सड़कों पर उतरे ग्रामीण; पुलिस के छूट गए पसीने
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इस घटना के बाद से पीड़ित छात्र गहरे सदमे में है। छात्र के पिता की तहरीर पर सदर बाजार थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 5 नामजद और अन्य अज्ञात छात्रों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
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क्या है पूरा मामला?
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घटना मेरठ के सदर बाजार थाना क्षेत्र स्थित सनातन धर्म इंटर कॉलेज की है। भावनपुर क्षेत्र के पंचगांव पट्टी गांव के रहने वाले जगदेव सिंह ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि उनका बेटा सरबजीत सिंह (काल्पनिक नाम, गोपनीयता हेतु) इसी कॉलेज में 12वीं कक्षा का छात्र है। एक सिख परिवार से ताल्लुक रखने वाले सरबजीत के लिए उसके केश और पगड़ी उसकी धार्मिक मर्यादा का हिस्सा हैं।
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आरोप है कि कक्षा के ही कुछ उद्दंड छात्र पिछले काफी समय से सरबजीत को निशाना बना रहे थे। वे उसे आए दिन परेशान करते, धक्का-मुक्की करते और बिना किसी उकसावे के गालियां देते थे। हद तो तब हो गई जब इन छात्रों ने सरबजीत की धार्मिक पहचान को लेकर उसे निशाना बनाना शुरू कर दिया। उसे जातिसूचक शब्द कहे जाते थे और मानसिक रूप से तोड़ा जा रहा था।
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16 अक्टूबर: जब हदें पार हो गईं

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पीड़ित परिवार के अनुसार, सब्र का बांध 16 अक्टूबर को उस वक्त टूट गया, जब आरोपियों ने सारी हदें पार कर दीं। स्कूल परिसर में ही कक्षा 12 के पांच छात्रों ने सरबजीत को घेर लिया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, आरोपियों ने उस पर हमला बोल दिया।
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प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित के बयान के मुताबिक, हमलावर छात्रों ने सरबजीत के बाल (केश) बुरी तरह से नोचे और सिर से उसकी पगड़ी खींचकर उतार दी। सिख धर्म में पगड़ी उतारना या केशों का अपमान करना एक गंभीर धार्मिक अपराध और बेअदबी मानी जाती है। जब सरबजीत ने अपनी पगड़ी बचाने और विरोध करने की कोशिश की, तो आरोपियों ने उसे लात-घूंसों से पीटा। इस दौरान उसे जातिसूचक गालियां दी गईं और अधमरा कर छोड़ दिया गया।
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कॉलेज प्रबंधन की भूमिका पर सवालिया निशान

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इस पूरे घटनाक्रम में कॉलेज प्रबंधन और शिक्षकों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित छात्र के पिता जगदेव सिंह का आरोप है कि उनका बेटा काफी समय से परेशान था। इस बाबत कॉलेज प्रबंधन और संबंधित शिक्षकों को जानकारी भी दी गई थी। यदि समय रहते कॉलेज प्रशासन ने उन शरारती छात्रों पर लगाम लगाई होती या उन्हें काउंसलिंग दी होती, तो शायद इतनी बड़ी घटना नहीं घटती।
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आरोप है कि प्रबंधन की ढिलाई के कारण ही आरोपी छात्रों के हौसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने स्कूल परिसर के भीतर ही इतनी बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है।
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धमकियों का सिलसिला जारी: 'जान से मार देंगे'

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हैरानी की बात यह है कि मारपीट की घटना के बाद भी आरोपियों के मन में कानून का कोई खौफ नहीं है। पीड़ित परिवार का दावा है कि मुकदमा दर्ज होने की भनक लगते ही आरोपी छात्र अब सरबजीत को फोन पर और सोशल मीडिया के जरिए धमका रहे हैं। उसे आपत्तिजनक संदेश भेजे जा रहे हैं और मुंह खोलने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इस कारण पूरा परिवार दहशत के माहौल में है और छात्र स्कूल जाने से भी डर रहा है।
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पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच शुरू

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मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मेरठ पुलिस तुरंत हरकत में आई। सदर बाजार थाना पुलिस ने पीड़ित पिता जगदेव सिंह की तहरीर के आधार पर 5 छात्रों को नामजद करते हुए 3 से 4 अन्य अज्ञात छात्रों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। चूंकि मामले में जातिसूचक शब्दों का प्रयोग और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है, इसलिए पुलिस इसे बेहद गंभीरता से ले रही है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की जांच की जा रही है। स्कूल के अन्य छात्रों और स्टाफ से भी पूछताछ की जा सकती है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में शिक्षण संस्थानों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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मेरठ की यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह स्कूलों में बढ़ रही 'बुलिंग' (Bullying) और असहिष्णुता का खतरनाक संकेत है। एक छात्र की पगड़ी उतारना उसकी आत्मा को चोट पहुंचाने जैसा है। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन इस मामले में क्या नजीर पेश करते हैं, ताकि पीड़ित छात्र को न्याय मिल सके और वह फिर से निडर होकर शिक्षा प्राप्त कर सके।
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