गाजियाबाद के लोनी इलाके में हाल ही में हुए एक जानलेवा हमले ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अब इस बहुचर्चित मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रविवार रात गाजियाबाद में हुए सलीम वास्तिक एनकाउंटर में पुलिस ने उस मुख्य आरोपी को मार गिराया है, जिसने इस्लाम धर्म छोड़ चुके (Ex-Muslim) यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर 14 बार चाकू से वार किया था। इस मुठभेड़ में दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई, जिसमें आरोपी ढेर हो गया और पुलिस के दो जवान भी घायल हुए हैं।READ ALSO:-मेरठ: युवा ब्राह्मण समाज संगठन का भव्य पारिवारिक होली मिलन समारोह, 4 साल के कार्तिक के शिव तांडव और अद्विका के संस्कृत मंत्रों ने मोहा सबका मन
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इस घटना के बाद से ही उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था और पुलिस की त्वरित कार्रवाई की हर तरफ चर्चा हो रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी के ठीक एक दिन बाद ही पुलिस ने इस सलीम वास्तिक एनकाउंटर को अंजाम देकर साफ संदेश दे दिया है कि प्रदेश में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम, पुलिस की कार्रवाई और मामले की पृष्ठभूमि को विस्तार से समझते हैं।
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सलीम वास्तिक एनकाउंटर: गाजियाबाद के लोनी में कैसे हुई मुठभेड़?

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यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुए प्राणघातक हमले के बाद से ही गाजियाबाद पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) हाई अलर्ट पर थी। पुलिस की 10 विशेष टीमें हमलावरों की तलाश में जुटी थीं और 70 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही थी। इसी जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के लोनी इलाके में छिपे होने की गुप्त सूचना मिली।
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रविवार देर रात, एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह के नेतृत्व में लोनी पुलिस और देहात स्वाट (SWAT) टीम ने इलाके में सघन चेकिंग अभियान चलाया। इसी दौरान निठौरा अंडरपास के करीब पुलिस का आमना-सामना संदिग्ध बदमाशों से हो गया। पुलिस ने जब उन्हें रुकने का इशारा किया, तो बाइक सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर सीधी फायरिंग शुरू कर दी।
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जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और सलीम वास्तिक एनकाउंटर शुरू हो गया। दोनों तरफ से करीब 10 मिनट तक भीषण गोलीबारी हुई। पुलिस के अनुसार, इस दौरान कुल 20 राउंड फायरिंग हुई, जिसमें से 10 राउंड गोलियां अकेले बदमाश की तरफ से चलाई गईं।
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इंस्पेक्टर बाल-बाल बचे, दो पुलिसकर्मियों को लगी गोली

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इस मुठभेड़ के दौरान बदमाशों की एक गोली सीधे लोनी थाना प्रभारी (SHO) मुकेश कुमार को जा लगी। गनीमत यह रही कि उन्होंने बुलेटप्रूफ जैकेट पहनी हुई थी, जिससे उनकी जान बाल-बाल बच गई। हालांकि, इस क्रॉस-फायरिंग में दो अन्य पुलिसकर्मियों को गोलियां लगीं।
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घायल होने वाले पुलिसकर्मियों में हेड कांस्टेबल विपिन कुमार और सचिन कुमार शामिल हैं। दोनों के हाथ और बाजू में गोली लगी है। उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है और फिलहाल वे खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
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कौन था मारा गया बदमाश जीशान?

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पुलिस की जवाबी फायरिंग में बदमाश के सीने और पैर में गोली लगी, जिससे वह मौके पर ही गिर पड़ा। पुलिस उसे तुरंत गंभीर अवस्था में नजदीकी अस्पताल ले गई, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
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मारे गए बदमाश की पहचान जीशान (27 वर्ष) के रूप में हुई है। जीशान उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के नगला सैफी का रहने वाला था। पुलिस की प्रारंभिक जांच और सीसीटीवी फुटेज से यह साफ हो गया था कि जीशान ही वह मुख्य हमलावर था, जिसने सलीम वास्तिक पर सर्जिकल ब्लेड और चाकू से ताबड़तोड़ वार किए थे। फुटेज में वह कुर्ता-पजामा पहने और बाइक पर पीछे बैठा हुआ साफ नजर आ रहा था।
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सलीम वास्तिक एनकाउंटर के बाद पुलिस ने मौके से अपराध में इस्तेमाल किया गया एक धारदार चाकू (सर्जिकल ब्लेड), एक अवैध पिस्टल, कई जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट वाली वह बाइक भी बरामद कर ली है, जिसका इस्तेमाल हमले वाले दिन किया गया था। जीशान पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।
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यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हमले की खौफनाक दास्तान 

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इस सलीम वास्तिक एनकाउंटर की जड़ें शुक्रवार, 27 फरवरी की उस खौफनाक सुबह से जुड़ी हैं, जब 50 वर्षीय सलीम वास्तिक पर उनके ही दफ्तर में कातिलाना हमला हुआ था।
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सलीम वास्तिक गाजियाबाद के लोनी थाना क्षेत्र के अशोक विहार/अली गार्डन कॉलोनी में अपने दफ्तर में मौजूद थे। सुबह की नमाज के कुछ समय बाद, बिना नंबर प्लेट की एक बाइक पर दो नकाबपोश युवक वहां पहुंचे। उन्होंने हेलमेट पहन रखा था ताकि उनकी पहचान न हो सके। दोनों युवक शटर खोलकर सीधे सलीम के दफ्तर में दाखिल हुए और उन पर टूट पड़े।
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हमलावरों ने सलीम की गर्दन रेतने की कोशिश की और उनके सीने, पेट, बाजू और पैर पर चाकू से 14 गहरे वार किए। सलीम के चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर जब तक पड़ोसी और परिवार वाले वहां पहुंचते, हमलावर उन्हें खून से लथपथ और अधमरा छोड़कर अपनी बाइक से फरार हो चुके थे।
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अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग

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घायल सलीम को तुरंत लोनी के एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली के गुरु तेग बहादुर (GTB) अस्पताल रेफर कर दिया। जीटीबी अस्पताल के आईसीयू में उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, हमले में सलीम की गर्दन और पेट की नसें बुरी तरह कट गई थीं। उनकी गर्दन की एक बड़ी सर्जरी पूरी हो चुकी है, लेकिन उनकी हालत अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्त चेतावनी का असर

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का कड़ा संज्ञान लिया था। हमले के तुरंत बाद सीएम योगी ने सख्त लहजे में कहा था कि "उत्तर प्रदेश में अपराध और आतंक की कोई जगह नहीं है। कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।"
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मुख्यमंत्री के इस कड़े निर्देश के बाद गाजियाबाद पुलिस और एसटीएफ पर भारी दबाव था। पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत 10 विशेष टीमों का गठन किया। दिल्ली और गाजियाबाद के कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। नतीजा यह हुआ कि 48 घंटे के भीतर ही पुलिस ने मुख्य आरोपी को सलीम वास्तिक एनकाउंटर में ढेर कर दिया। यह घटना यूपी पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का एक और उदाहरण बनकर सामने आई है।
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कौन हैं सलीम वास्तिक और क्यों बने कट्टरपंथियों का निशाना?

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सलीम वास्तिक (जिनका असली नाम सलीम अहमद है) एक 50 वर्षीय यूट्यूबर हैं। वह यूट्यूब पर 'सलीम वास्तिक 0007' (Salim Vastik 0007) के नाम से अपना चैनल चलाते हैं, जिसके करीब 28,400 से अधिक सब्सक्राइबर्स हैं।
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सलीम ने कुछ समय पहले खुलेआम इस्लाम धर्म छोड़ने की घोषणा की थी और वह खुद को 'एक्स-मुस्लिम' (Ex-Muslim) कहते हैं। अपने वीडियोज में वह अक्सर इस्लाम की कुछ प्रथाओं, हलाला, और मदरसों की शिक्षा प्रणाली पर तीखे सवाल उठाते रहे हैं। उनके बेबाक बयानों के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर कई बार धमकियां भी मिल चुकी थीं।
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हमले से करीब तीन हफ्ते पहले ही सलीम ने एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने अंदेशा जताया था कि उन्हें चुप कराने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने अपने वीडियो में कहा था:
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"मेरा फेसबुक और इंस्टाग्राम डिलीट करवा दिया गया है, जहां मेरे साढ़े तीन लाख फॉलोवर थे। ऐसी गुंडागर्दी से तुम लोग मुझे चुप नहीं करा सकते। इससे तुम्हारा मजहब सही नहीं हो जाएगा। तुम लोग मेरा कुछ नहीं कर पाओगे। जब तक BJP सरकार है, हिंदू ताकत में है।"
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पुलिस का मानना है कि सलीम के इन्हीं विचारों और वीडियो सामग्री के कारण कट्टरपंथी उनसे नाराज थे और इसी वैचारिक मतभेद के चलते उनकी हत्या की साजिश रची गई।
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अस्पताल में लगा नेताओं का जमावड़ा

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सलीम वास्तिक पर हमले के बाद राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी भी तेज हो गई। हमले की निंदा करते हुए कई हिंदूवादी संगठन और नेता उनके समर्थन में उतर आए।
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उत्तर पूर्वी दिल्ली के सांसद और भाजपा नेता मनोज तिवारी ने जीटीबी अस्पताल पहुंचकर सलीम वास्तिक के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें हर संभव सुरक्षा और मदद का भरोसा दिलाया। लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर भी मौके पर पहुंचे और पुलिस अधिकारियों को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
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यति नरसिंहानंद का हाउस अरेस्ट और हंगामा

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इस बीच, डासना देवी मंदिर के पीठाधीश्वर और महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरि ने भी सलीम से मिलने जीटीबी अस्पताल जाने की घोषणा की। बताया जाता है कि सलीम वास्तिक, यति नरसिंहानंद के शिष्य माने जाते हैं। जब नरसिंहानंद अस्पताल के लिए निकले, तो कानून-व्यवस्था बिगड़ने के अंदेशे से दिल्ली पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया और हाउस अरेस्ट कर दिया। इसके बाद उनके समर्थकों ने भारी हंगामा किया। करीब दो घंटे की मशक्कत और बातचीत के बाद, पुलिस ने सुरक्षा घेरे में यति नरसिंहानंद को अस्पताल ले जाकर सलीम से मिलवाया।
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पुलिस की आगे की जांच और एफआईआर (FIR)

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हमले के तुरंत बाद, सलीम वास्तिक के बेटे उस्मान की शिकायत पर लोनी कोतवाली थाने में हत्या के प्रयास (धारा 307) सहित कई गंभीर धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई है। इस एफआईआर में एक स्थानीय AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) नेता समेत कुल 7 लोगों को नामजद किया गया है।
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सलीम वास्तिक एनकाउंटर में मुख्य शूटर जीशान के मारे जाने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई रुकी नहीं है। पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि इस हमले की मास्टरमाइंड कौन था। क्या जीशान को किसी ने 'सुपारी' देकर भेजा था? या यह किसी बड़े आतंकी या कट्टरपंथी नेटवर्क का हिस्सा है? पुलिस उन सभी 7 नामजद आरोपियों की तलाश में जुटी है, जो फिलहाल फरार चल रहे हैं। सर्विलांस और साइबर सेल की टीमें आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड्स और वित्तीय लेन-देन खंगाल रही हैं।
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कानून व्यवस्था और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस

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इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर विचारों की अभिव्यक्ति और उसके कारण होने वाले हिंसक हमलों की बहस को जन्म दे दिया है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, वहीं वैचारिक मतभेदों को लेकर हथियारों का इस्तेमाल कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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हालाँकि, उत्तर प्रदेश पुलिस ने सलीम वास्तिक एनकाउंटर के जरिए यह साबित किया है कि वह अपराधियों को किसी भी सूरत में सिर उठाने का मौका नहीं देगी। आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स ने यूपी पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की है।
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गाजियाबाद में यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर हुआ हमला निस्संदेह एक खौफनाक आपराधिक कृत्य था, जिसने स्वतंत्र विचारों को दबाने की एक क्रूर कोशिश को दर्शाया। लेकिन यूपी पुलिस ने महज कुछ ही घंटों के भीतर सलीम वास्तिक एनकाउंटर को अंजाम देकर हमलावर जीशान को मार गिराया और यह स्पष्ट कर दिया कि अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलेगी। इस एनकाउंटर में घायल हुए पुलिसकर्मियों की बहादुरी भी सराहनीय है। फिलहाल, सभी की निगाहें सलीम वास्तिक के स्वास्थ्य में सुधार और फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई हैं। यह मामला भविष्य में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सुरक्षा और राज्य में कानून के राज की स्थापना के लिए एक नजीर साबित होगा।
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