मेरठ (Meerut News): अपनी बेबाक और अक्सर विवादित रहने वाली बयानबाजी के लिए मशहूर विश्व हिंदू परिषद (VHP) की फायरब्रांड नेता साध्वी प्राची (Sadhvi Prachi) ने एक बार फिर ऐसा बयान दिया है, जिससे नया सियासी और सामाजिक बखेड़ा खड़ा हो सकता है। रविवार को मेरठ में आयोजित 'विराट हिंदू सम्मेलन' (Virat Hindu Sammelan) में बोलते हुए साध्वी प्राची ने आधुनिकता, सोशल मीडिया रील और कॉन्वेंट स्कूलों की शिक्षा पद्धति पर कड़ा प्रहार किया।READ ALSO:-गाजियाबाद: सरकारी नौकरी की खुशियों को लगा 'मातम' का ग्रहण, गूगल पर 'मौत का तरीका' ढूंढने वाले युवक की जलकर मौत— सुसाइड या साजिश?
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साध्वी प्राची ने मंच से खुले तौर पर कहा कि आजकल की बच्चियां छोटे-छोटे कपड़े पहनकर सोशल मीडिया पर 'गंदी रील' बना रही हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने कॉन्वेंट स्कूलों (Convent Schools) की शिक्षा की तुलना 'नीले ड्रम' (Blue Drum) से करते हुए इसे संस्कारों के विनाश का कारण बताया।
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सोशल मीडिया और रील्स पर साध्वी का 'प्रहार'
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में जहां सोशल मीडिया युवाओं की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, वहीं साध्वी प्राची ने इसके दुरुपयोग पर चिंता जताई है, लेकिन उनके शब्दों के चयन ने एक नई बहस छेड़ दी है।
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सम्मेलन को संबोधित करते हुए साध्वी प्राची ने कहा, "आजकल बच्चियां छोटे-छोटे कपड़ों में रील बना रही हैं। इससे लोगों के बीच गलत मैसेज जा रहा है। मैं बच्चियों से कहना चाहती हूं कि छोटे कपड़े पहनकर गंदी रील न बनाएं।"
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उन्होंने आगे कहा कि बेटियों को ऐसी रील बनानी चाहिए जिससे उनके पिता और परिवार का सम्मान बढ़े, न कि उन पर उंगली उठे। उनका कहना था, "रील ऐसी होनी चाहिए, जिसे देखकर पिता गर्व से कह सकें कि वीडियो में उसकी बेटी है। पिता की इज्जत पर आंच नहीं आनी चाहिए।"
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विशेषज्ञों का मानना है कि साध्वी का यह बयान एक बार फिर 'मोरल पुलिसिंग' (Moral Policing) की बहस को जन्म दे सकता है।
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कॉन्वेंट स्कूलों को बताया 'नीला ड्रम'
\r\n\r\nअपने संबोधन के दौरान साध्वी प्राची ने शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर अंग्रेजी माध्यम के कॉन्वेंट स्कूलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने हालिया आपराधिक घटनाओं (जिनमें शवों को ड्रम या फ्रिज में छिपाने की घटनाएं सामने आई थीं) का संदर्भ लेते हुए इसे संस्कारों की कमी बताया।
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साध्वी प्राची ने कहा, "आजकल लोग अपनी बच्चियों को कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। बाद में जब वे ससुराल जाती हैं, तो नीले ड्रम की धमकी देती हैं। कॉन्वेंट की शिक्षा ही 'नीला ड्रम' है।"
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उनका तर्क था कि कॉन्वेंट स्कूलों में भारतीय संस्कृति और संस्कारों (Samskars) का अभाव है। उन्होंने कहा, "हम सरस्वती शिशु मंदिर और गुरुकुल में पढ़े हैं, जहां संस्कार दिए जाते हैं। आज हम अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं, उन्हें छोड़ रहे हैं। इसी वजह से आजकल के बच्चों में इस तरह के हिंसक और विकृत विचार आ रहे हैं।"
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यह बयान सीधे तौर पर पश्चिमी शिक्षा पद्धति और भारतीय पारंपरिक शिक्षा पद्धति के बीच की वैचारिक लड़ाई को दर्शाता है। साध्वी का मानना है कि गुरुकुलों में ही असली नैतिक शिक्षा मिलती है।
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RSS और हिंदू एकता का आह्वान
\r\n\r\nविराट हिंदू सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को एकजुट करना था। इस मंच से साध्वी प्राची ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि अगर आज के समय में हमें सुरक्षित रहना है, तो एकजुटता ही एकमात्र विकल्प है।
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संघ की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा:
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- \r\n "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 सालों से देश सेवा और धर्म रक्षा के लिए हर क्षेत्र में सक्रिय है।"\r\n \r\n
- \r\n "अब संघ की पहुंच हर घर तक हो चुकी है, और यही कारण है कि ऐसे विशाल सम्मेलन आयोजित हो पा रहे हैं।"\r\n \r\n
- \r\n "शिक्षा से लेकर आपदा प्रबंधन तक, संघ हमेशा आगे रहा है।"\r\n \r\n
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विरोधियों पर निशाना साधते हुए उन्होंने एक बेहद विवादास्पद टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा, "इसके बावजूद कुछ लोग संघ का विरोध कर रहे हैं। उन्हें संगठन से खतरा महसूस हो रहा है। ऐसे लोगों के न तो काम नेक हैं और न ही उनके बाप एक हैं।"
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लव जिहाद: कलावा और 'हैप्पी-पप्पू' का खेल
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश (West UP) में लव जिहाद (Love Jihad) एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। साध्वी प्राची ने इस मुद्दे को फिर से हवा दी। उन्होंने युवतियों और उनके माता-पिता को सतर्क रहने की सलाह दी।
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साध्वी ने चेतावनी देते हुए कहा, "कुछ लोग हाथ में कलावा (हिंदू धार्मिक धागा) पहनकर और चमचमाती बाइक पर आते हैं। वे अपना असली नाम छिपाकर हैप्पी, पप्पू या कल्लू बताते हैं और हिंदू बेटियों को अपने जाल में फंसाते हैं।"
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उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश करार दिया और हिंदू समाज से अपील की कि वे अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूक रहें ताकि उनकी बेटियां ऐसे किसी भी षड्यंत्र का शिकार न बनें।
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साध्वी प्राची के पुराने विवादित बोल: एक नजर
\r\n\r\nयह पहली बार नहीं है जब साध्वी प्राची ने ऐसा बयान दिया हो। उनका विवादों से पुराना नाता रहा है।
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1. चरखे से नहीं मिली आजादी (25 दिसंबर, अलीगढ़): हाल ही में अलीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) और उनके चरखे पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था, "देश को आजादी तकली और चरखे से नहीं मिली, बल्कि भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली है। चरखे वालों को राष्ट्रपिता घोषित करना गलत है। इतिहास से तकली-चरखे वाली कहावत उखाड़ फेंकनी चाहिए।" उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी को राष्ट्रपिता का दर्जा देने की मांग की थी।
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2. 4 बॉयफ्रेंड और हत्याएं (मुजफ्फरनगर): करीब 6 महीने पहले उन्होंने मुजफ्फरनगर में कहा था, "जो लड़कियां 4-4 बॉयफ्रेंड रखती हैं, वे कभी अपना घर नहीं बसा सकतीं। हमारी संस्कृति में पति को परमेश्वर माना जाता है, लेकिन आज बॉयफ्रेंड बनाना फैशन हो गया है।" उन्होंने मेरठ के सौरभ हत्याकांड और इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड का उदाहरण देते हुए कहा था कि गैर मर्दों के चक्कर में पत्नियां अपने पतियों की हत्या कर रही हैं।
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विश्लेषण: संस्कृति की रक्षा या व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर हमला?
\r\n\r\nसाध्वी प्राची का मेरठ में दिया गया बयान दो धड़ों में बंटे समाज की तस्वीर पेश करता है।
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- \r\n समर्थक: एक वर्ग का मानना है कि साध्वी प्राची भारतीय संस्कृति (Indian Culture) के क्षरण और पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण के खिलाफ सही आवाज उठा रही हैं। उनका मानना है कि रील संस्कृति और कॉन्वेंट शिक्षा वास्तव में बच्चों को उनकी जड़ों से काट रही है।\r\n \r\n
- \r\n आलोचक: वहीं, दूसरा वर्ग इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Individual Freedom) पर हमला मानता है। उनका कहना है कि लड़कियों के कपड़ों पर टिप्पणी करना या शिक्षा संस्थानों को 'नीला ड्रम' (अपराध का प्रतीक) बताना संकीर्ण मानसिकता है।\r\n \r\n
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मेरठ के विराट हिंदू सम्मेलन में साध्वी प्राची (Sadhvi Prachi Statement) ने एक बार फिर अपने तेवरों से स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी हार्डलाइन विचारधारा से पीछे हटने वाली नहीं हैं। "गंदी रील", "नीला ड्रम" और "लव जिहाद" जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने आगामी समय के लिए विमर्श की एक नई दिशा तय कर दी है। अब देखना यह होगा कि उनके इस बयान पर राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या यह बयान केवल सुर्खियों तक सीमित रहेगा, या इसके गहरे सामाजिक निहितार्थ होंगे?
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VHP नेता साध्वी प्राची ने मेरठ में लड़कियों द्वारा छोटे कपड़ों में रील बनाने की आलोचना की है और इसे पिता के सम्मान के खिलाफ बताया है। उन्होंने कॉन्वेंट स्कूलों की शिक्षा को संस्कारहीन बताते हुए उसकी तुलना 'नीले ड्रम' (अपराध) से की है। साथ ही, उन्होंने लव जिहाद के प्रति सचेत रहने और संघ (RSS) के साथ एकजुट होने का आह्वान किया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.