भारत के रेलवे नेटवर्क को अपना नया "स्पीड चैंपियन" मिल गया है। दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से दौड़ने वाली 'नमो भारत' ट्रेन आधिकारिक तौर पर देश की सबसे तेज ट्रेन बन गई है। इस उपलब्धि के साथ, नमो भारत ने वंदे भारत और गतिमान एक्सप्रेस जैसी सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों को पीछे छोड़ दिया है, जिनकी अधिकतम गति सीमा अब 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित कर दी गई है।READ ALSO:-मेरठ में 'जॉब सेंटर' की आड़ में जिस्मफरोशी का अड्डा, ऑन डिमांड सप्लाई से लेकर ब्लैकमेलिंग तक, 13 गिरफ्तार
\r\n\r\n\r\n\r\n
यह सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि दिल्ली से मेरठ के बीच यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। अब दिल्ली से मेरठ का सफर सभी स्टेशनों पर रुकते हुए भी एक घंटे से कम समय में पूरा हो सकेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
रफ्तार के लिए बना विशेष कॉरिडोर
\r\n\r\nफिलहाल, यह रैपिड रेल कॉरिडोर पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर से मेरठ साउथ के बीच 55 किलोमीटर के हिस्से पर चालू है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्रीय परिवहन निगम (NCRTC) जल्द ही पूरे 82.15 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को चालू करने की तैयारी में है, जो दिल्ली के सराय काले खां को मेरठ के मोदीपुरम से जोड़ेगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
NCRTC के अधिकारियों के अनुसार, इस रूट पर दो स्टेशनों के बीच 5 से 8 किलोमीटर की दूरी है, जिससे ट्रेन को अपनी अधिकतम 160 KMPH की गति पकड़ने के लिए पर्याप्त समय और ट्रैक मिल जाता है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
क्या है 'नमो भारत' की खासियत?
\r\n\r\nनमो भारत सिर्फ अपनी गति के लिए ही खास नहीं है, बल्कि यह भारत की पहली रीजनल रैपिड रेल सेवा है जिसकी अपनी अनूठी पहचान है।
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n न मेट्रो, न पारंपरिक ट्रेन: यह मेट्रो की तरह हर कुछ मिनटों में उपलब्ध है (फिलहाल 15 मिनट के अंतराल पर), लेकिन इसमें सीट रिजर्वेशन की जरूरत नहीं होती। यह लंबी दूरी और कम स्टॉप के साथ चलती है, जो इसे मेट्रो से अलग बनाता है।\r\n \r\n
- \r\n 'मेक इन इंडिया' की मिसाल: इन ट्रेनों को हैदराबाद में डिजाइन किया गया है और गुजरात के सावली में एल्सटॉम (Alstom) के कारखाने में बनाया गया है।\r\n \r\n
- \r\n अत्याधुनिक तकनीक: ये ट्रेनें ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP), ऑटोमेटिक ट्रेन कंट्रोल (ATC) और ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन (ATO) जैसी उन्नत प्रणालियों से लैस हैं।\r\n \r\n
- \r\n जबरदस्त लोकप्रियता: 21 अक्टूबर 2023 को अपने उद्घाटन के बाद से अब तक यह 1.5 करोड़ से अधिक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचा चुकी है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
भविष्य की कनेक्टिविटी: मेरठ मेट्रो का एकीकरण
\r\n\r\nइस प्रोजेक्ट का एक और क्रांतिकारी कदम है मेरठ मेट्रो का इसी RRTS ट्रैक पर संचालन। NCRTCL इसी ट्रैक पर मेरठ मेट्रो सेवाओं का परीक्षण कर रहा है, जिसमें 13 स्टेशन होंगे। इसका मतलब है कि यात्री एक ही सिस्टम का उपयोग करके लंबी दूरी की यात्रा (नमो भारत) और शहर के अंदर की यात्रा (मेरठ मेट्रो) के बीच आसानी से स्विच कर सकेंगे, जिससे यात्रा का अनुभव बेहद सहज और कुशल हो जाएगा।
\r\n\r\n
Sabse pehle comment karne wale banein.