मेरठ न्यूज: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दिल्ली रोड और उसके आसपास के दर्जनों सार्वजनिक स्थानों पर बुधवार को रहस्यमयी पोस्टर चिपके पाए गए। इन पोस्टरों में 'पूजा' नाम की एक युवती का जिक्र है, जो पिछले 17 वर्षों से लापता बताई जा रही है। 17 साल से लापता पूजा के पोस्टर अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।READ ALSO:-बिजनौर स्पेशल: "या तो मैं सुंदर की हो जाऊंगी या अपनी जान दे दूंगी..." धर्म की दीवार लांघकर जब 19 साल की सोनी ने लिखी बगावत की नई इबारत
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हैरानी की बात यह है कि इन पोस्टरों को लगाने वाले व्यक्ति ने अपना नाम 'अरुण बिजनौर' बताया है और भाषा काफी आक्रामक इस्तेमाल की गई है। पोस्टरों में न केवल युवती की तलाश की गुहार है, बल्कि पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी तीखे कटाक्ष किए गए हैं।
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प्रमुख इलाकों में रातों-रात चस्पा किए गए पोस्टर

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बुधवार सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले, तो उन्हें मोहिउद्दीनपुर, भूड़बराल, मेट्रो साउथ स्टेशन के पास, परतापुर तिराहा, पूठा रोड, संगम चौराहा और रिठानी तक के रैपिड रेल के पिलरों पर ये पोस्टर दिखाई दिए। बड़ी संख्या में एक ही तरह के पोस्टर अचानक दिखने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
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 Meerut: Posters of a Woman Missing for 17 Years Surface Across Meerut, Create Stir

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स्थानीय निवासियों का कहना है कि ये पोस्टर मंगलवार देर रात या बुधवार तड़के लगाए गए हैं। 
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'अरुण बिजनौर' का रहस्य और विवादित भाषा

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इन पोस्टरों के नीचे पोस्टर लगाने वाले शख्स ने अपना नाम 'अरुण बिजनौर' लिखा है। बिजनौर और मेरठ दोनों जिलों में इस तरह के पोस्टर देखे गए हैं। पोस्टरों पर लाल पेन से लिखा गया है— "पूजा तुम कहां हो, अब आ जाओ 17 साल से ढूंढ रहा हूं"| कुछ पोस्टरों में तो भाषा और भी ज्यादा गंभीर है। इसमें लिखा गया है कि आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों के होने के बावजूद वह 17 साल से अपनी पूजा को नहीं ढूंढ पाया है। इस तरह से सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। 
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ईसाई धर्म का उल्लेख और पुलिस की जांच

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रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ स्थानों पर मिले पोस्टरों में ईसाई धर्म का भी उल्लेख किया गया है, जिसने मामले को और अधिक पेचीदा बना दिया है। क्या यह कोई धार्मिक मामला है या फिर किसी सनकी प्रेमी की करतूत, पुलिस अभी इस गुत्थी को सुलझाने में लगी है। 17 साल से लापता पूजा के पोस्टर पहले भी एक साल पहले इसी क्षेत्र में देखे गए थे, लेकिन उस वक्त भी पुलिस पोस्टर लगाने वाले तक नहीं पहुंच सकी थी।
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सीसीटीवी कैमरों की मदद ले रही है परतापुर पुलिस

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परतापुर थाना प्रभारी ने मीडिया को बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस की एक टीम गठित की गई है। दिल्ली रोड और रैपिड रेल कॉरिडोर के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जो रात के अंधेरे में ये पोस्टर लगा रहे थे।
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पुलिस सूत्रों का कहना है कि "अरुण बिजनौर" नाम का व्यक्ति कौन है, इसका पता लगाने के लिए बिजनौर पुलिस से भी संपर्क किया जा सकता है। पुलिस इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि क्या 17 साल पहले पूजा नाम की किसी लड़की की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई थी या नहीं।
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सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल: लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं

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जैसे ही इन पोस्टरों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, इंटरनेट यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे 'लैला-मजनू' जैसी किसी अधूरी प्रेम कहानी का हिस्सा मान रहे हैं, तो कुछ इसे पुलिस प्रशासन की विफलता का प्रतीक बता रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सार्वजनिक प्रदर्शन किसी व्यक्ति के मानसिक तनाव या व्यवस्था के प्रति गहरे आक्रोश को दर्शाते हैं। 
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प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
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मेरठ के परतापुर में 17 साल से लापता पूजा के पोस्टर ने एक बार फिर पुराने अनसुलझे मामलों की याद दिला दी है। यदि यह मामला वाकई 17 साल पुराना है, तो यह जांच का विषय है कि आखिर इतने लंबे समय तक पुलिस क्या कर रही थी? फिलहाल, 'अरुण बिजनौर' पुलिस की पकड़ से बाहर है और पूरा मेरठ इस रहस्यमयी पोस्टर वार के पीछे की कहानी जानने को उत्सुक है।
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मेरठ के परतापुर क्षेत्र में 'अरुण बिजनौर' द्वारा 17 साल से लापता पूजा की तलाश में लगाए गए पोस्टरों ने पुलिस की नींद उड़ा दी है। दिल्ली रोड पर लगे इन पोस्टरों में प्रशासन पर तंज कसा गया है, जिसकी अब सीसीटीवी के जरिए जांच की जा रही है।
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