मेरठ (शिक्षा एवं खेल समाचार): युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, और तार्किक अभिव्यक्ति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेरठ पब्लिक स्कूल, पल्लवपुरम (MPS Pallavpuram) के प्रांगण में अंतर-विद्यालयीय युवा संसद 'विचार मंथन 2026' का भव्य एवं गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन विद्यालय के बहुप्रतीक्षित वार्षिक शैक्षिक एवं सांस्कृतिक मंच “एक्सप्रेसिव यूफोरिया 3.0 : द फ्यूज़न ऑफ स्कूल एजुकेशन” (Expressive Euphoria 3.0) की श्रृंखला के तहत संपन्न हुआ।
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​कार्यक्रम के दौरान संपूर्ण विद्यालय परिसर किसी वास्तविक संसद भवन के दृश्य में परिवर्तित नजर आया, जहां देश के 15 प्रतिष्ठित विद्यालयों से आए युवा प्रतिनिधियों ने देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक दिशा को आकार देने वाले गंभीर विषयों पर अपनी बात बेबाकी से रखी।
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​शुभ उद्घाटन, विशिष्ट अतिथियों का आगमन और श्रद्धांजलि

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​संसदीय कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत परंपरागत एवं वैदिक रीति से दीप प्रज्वलन एवं मुख्य अतिथियों के आत्मीय स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आदरणीय डॉ. (कर्नल) अनिरुद्ध सिंह (सेवानिवृत्त, आर्मी मेडिकल कॉर्प्स) ने शिरकत की।
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​कार्यक्रम में आए युवा प्रतिनिधियों के विचारों का निष्पक्ष एवं सटीक मूल्यांकन करने के लिए एक विद्वान निर्णायक मंडल उपस्थित रहा, जिसमें श्रीमती मनिका शर्मा और डॉ. जितेंद्र वीर चिकारा शामिल रहे। वहीं मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप की प्रबंध समिति की ओर से श्रीमती डिम्पल सिंह (परीक्षा नियंत्रक, मेरठ पब्लिक स्कूल ग्रुप) ने विशेष अतिथि के तौर पर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
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​कार्यक्रम की शुरुआत में विद्यालय परिवार, अतिथियों और उपस्थित विद्यार्थियों ने शिक्षा जगत में अमूल्य योगदान देने वाले स्वर्गीय श्री ताराचंद शास्त्री जी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उनके विचारों, स्मृतियों और दूरदर्शी सोच को नमन करते हुए समाज निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।
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​तत्पश्चात, मेरठ पब्लिक स्कूल, पल्लवपुरम की प्रधानाचार्या श्रीमती मुक्ति मिनोचा ने अपने स्वागत भाषण में मुख्य अतिथि, सम्मानित निर्णायक मंडल, विशेष अतिथियों और विभिन्न विद्यालयों से आए शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि युवा संसद केवल भाषण देने की कला नहीं है, बल्कि यह दूसरों के विचारों को सुनने, सहिष्णुता अपनाने और लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी समझने का एक जीवंत माध्यम है।
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​'युवा आवाज़, सशक्त लोकतंत्र : बेहतर भारत का निर्माण' विषय पर मंथन

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​इस वर्ष की युवा संसद का मुख्य विषय 'युवा आवाज़, सशक्त लोकतंत्र : बेहतर भारत का निर्माण' रखा गया था। विषय की प्रासंगिकता को देखते हुए प्रतिभागी विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और पूर्ण तैयारी के साथ हिस्सा लिया। जिले के कुल 15 प्रमुख विद्यालयों की टीमों ने इस प्रतियोगिता में भाग लेकर संसदीय गरिमा का परिचय दिया।
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​संसदीय कार्यवाही के मंचन के दौरान छात्रों को अलग-अलग महत्वपूर्ण भूमिकाएं सौंपी गई थीं।
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    संसदीय भूमिकाएं: विद्यार्थियों ने भारत के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition), विभिन्न विभागों के कैबिनेट मंत्रियों तथा सत्ता पक्ष व विपक्ष के सांसदों की भूमिकाएं पूरी निष्ठा के साथ निभाईं।
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    ​प्रश्नकाल (Question Hour): सत्र की शुरुआत तीखे और प्रासंगिक सवालों से हुई। विपक्ष के सांसदों ने शिक्षा नीति, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण सुरक्षा, और तकनीक के प्रभाव जैसे समसामयिक मुद्दों पर सरकार को घेरा।
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    ​संसदीय वाद-विवाद एवं प्रस्ताव: सत्ता पक्ष के मंत्रियों और प्रधानमंत्री की भूमिका में मौजूद छात्रों ने आंकड़ों और तर्कों के साथ विपक्ष के सवालों के जवाब दिए। सदन में विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विधेयक एवं प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिन पर व्यापक बहस के बाद मतदान कराया गया।
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​विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति ने न केवल उनकी प्रखर अध्ययन क्षमता और सामान्य ज्ञान का प्रदर्शन किया, बल्कि यह भी दिखाया कि आज की युवा पीढ़ी देश की राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था के प्रति कितनी जागरूक और संवेदनशील है।
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निर्णायक मंडल द्वारा मूल्यांकन के कड़े मापदंड

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​युवा संसद की कार्यवाही का अवलोकन कर रहे निर्णायक मंडल—श्रीमती मनिका शर्मा और डॉ. जितेंद्र वीर चिकारा—ने सभी प्रतिभागियों के प्रदर्शन की गहराई से समीक्षा की।
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मूल्यांकन के लिए निम्नलिखित मुख्य मापदंड निर्धारित किए गए थे:
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  1. \r\n
    ​विषय की स्पष्ट समझ और अध्ययन: प्रतिभागी को अपने मुद्दे की कितनी व्यावहारिक और तथ्यात्मक जानकारी है।
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  3. \r\n
    ​मौलिकता और सोच: विचारों में नवीनता और समस्याओं के समाधान प्रस्तुत करने का दृष्टिकोण।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    ​वक्तृत्व कौशल और आत्मविश्वास: भाषा शैली, आवाज का उतार-चढ़ाव, और बिना झिझक के अपनी बात रखने की क्षमता।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    ​दलगत समन्वय (Team Coordination): अपनी पार्टी और सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाकर सदन में अपनी बात रखना।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    ​संसदीय मर्यादाएं (Parliamentary Decorum): सदन के नियमों, अध्यक्ष (स्पीकर) के आदेशों का पालन करना और विरोधी विचारों का सम्मानपूर्वक खंडन करना।
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​निर्णायक मंडल ने बाल सांसदों के आत्मविश्वास, संसदीय नियमों की बारीकियों की समझ और वक्तृत्व कला की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
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​परिणाम और पुरस्कार वितरण: किसने मारी बाजी?

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​प्रतियोगिता के अंत में कड़े मुकाबले के बाद विजेता विद्यालयों एवं व्यक्तिगत रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों के नामों की घोषणा की गई, जिन्हें ट्रॉफी और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
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ओवरऑल विजेता विद्यालय (Overall School Winners):

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    ​प्रथम स्थान (First Position): द आर्यनस स्कूल (The Aryans School)
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  • \r\n
    ​द्वितीय स्थान (Second Position): पुलिस मॉडर्न स्कूल (Police Modern School)
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    ​तृतीय स्थान (Third Position): मेरठ पब्लिक स्कूल, मैन विंग (MPS Main Wing)
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​विशेष व्यक्तिगत श्रेणी पुरस्कार (Special Individual Category Awards):

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    ​सर्वश्रेष्ठ वक्ता (Best Speaker): वर्धमान अकैडमी (Vardhman Academy)

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    सर्वश्रेष्ठ वाद-विवादकर्ता (Best Debater): मेरठ पब्लिक स्कूल, शास्त्री नगर (MPS Shastri Nagar)
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  • \r\n
  • \r\n
    ​सर्वश्रेष्ठ सांसद (Best Parliamentarian): समसारा द वर्ल्ड स्कूल (Samsara The World School)
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विजेताओं की घोषणा होते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मुख्य अतिथि डॉ. (कर्नल) अनिरुद्ध सिंह, विशेष अतिथि श्रीमती डिम्पल सिंह तथा प्रधानाचार्या श्रीमती मुक्ति मिनोचा ने विजेता टीमों को ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया।
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​राष्ट्रगान के साथ गरिमापूर्ण समापन

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​पुरस्कार वितरण समारोह के पश्चात कार्यक्रम के सफल संयोजन के लिए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। आयोजकों ने सभी 15 प्रतिभागी विद्यालयों के प्राचार्यों, शिक्षकों, मार्गदर्शकों और छात्रों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से यह अंतर-विद्यालयीय प्रतियोगिता ऐतिहासिक रूप से सफल रही।
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​अंत में, सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने सम्मानपूर्वक खड़े होकर राष्ट्रगान का गायन किया, जिसके साथ ही 'विचार मंथन 2026' युवा संसद का गरिमापूर्ण समापन हुआ।
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​यह आयोजन मेरठ के शैक्षणिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है, जिसने युवाओं को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें देश के जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में एक सशक्त मंच प्रदान किया है।  
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