मेरठ, उत्तर प्रदेश: मेरठ पुलिस ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए हाई-टेक साइबर फ्रॉड के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। साइबर क्राइम पुलिस और लिसाड़ी गेट पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक अवैध टेलीफोन एक्सचेंज को पकड़ा है, जो विदेशों में बैठे साइबर ठगों को भारत में आसानी से ठगी करने में मदद कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने छह लोगों को गिरफ्तार किया है।
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विदेशों से ठगी का 'लोकल' कनेक्शन
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गिरोह लक्खीपुरा के एक घर से संचालित हो रहा था। आरोपी फर्जी दस्तावेजों पर सिम कार्ड लेकर एक खास डिवाइस, जिसे सिम बॉक्स कहा जाता है, में लगाते थे। यह डिवाइस एक साथ 32 सिम कार्ड का उपयोग कर सकता था। इस एक्सचेंज की मदद से:
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    टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग: आरोपी वॉइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) तकनीक का उपयोग कर विदेशों से आने वाली कॉल्स को लोकल भारतीय नंबर में बदल देते थे।
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    आसान हुई ठगी: इससे विदेशों में बैठे साइबर ठगों के लिए भारत में लोगों को कॉल कर ठगी करना आसान हो गया, क्योंकि कॉल भारतीय नंबर से आती थी और पहचान करना मुश्किल हो जाता था।
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क्रिप्टो करेंसी की काली कमाई का खेल
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पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि इस अवैध काम के बदले आरोपियों को प्रति मिनट 1,000 से 1,500 रुपये तक मिलते थे, जिसका भुगतान क्रिप्टो करेंसी में किया जाता था। आरोपियों ने बताया कि वे प्रतिदिन 35 से 40 हजार रुपये तक की कमाई कर रहे थे।
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पुलिस ने मुख्य आरोपी कासिम के साथ-साथ आस मोहम्मद, मोहम्मद चांद उर्फ सोनू, हाशिम, मोहम्मद इमरान, और सरफराज को गिरफ्तार किया है। कासिम ने बताया कि उसने नोएडा में इस काम की ट्रेनिंग ली थी। पुलिस ने मौके से 32 सिम कार्ड, लैपटॉप और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। पुलिस इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है।
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