पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर मेरठ इस समय कड़ाके की ठंड की चपेट में है। पिछले चार दिनों से मौसम के मिजाज में जो तल्खी आई है, उसने आम जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया है। स्थिति यह है कि मेरठ की सड़कें, जो आमतौर पर शोर-शराबे और ट्रैफिक से भरी रहती थीं, अब कोहरे की सफेद चादर में लिपटी हुई शांत नजर आ रही हैं।READ ALSO:-यूपी में 'संडे एनकाउंटर': 2 घंटे में 2 ढेर, मुख्तार के गुर्गे समेत 1.5 लाख के इनामी बदमाश खल्लास; पत्नी बोली- अब कैसे जिऊंगी?
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शनिवार का दिन इस सर्दी के सीजन का अब तक का सबसे ठंडा दिन (Coldest Day) रिकॉर्ड किया गया। दिन भर लोग सूरज के निकलने का इंतजार करते रहे, लेकिन आसमान में धुंध और बादलों का पहरा इतना सख्त था कि धूप के दर्शन दुर्लभ हो गए। बर्फीली हवाओं ने लोगों की कंपकंपी छुड़ा दी है। मौसम विभाग ने जो भविष्यवाणी की है, वह और भी डराने वाली है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अभी ठंड का यह सितम थमने वाला नहीं है, बल्कि आने वाले दिनों में इसका प्रकोप और बढ़ेगा।
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आंकड़ों की जुबानी: क्यों कांप रहा है मेरठ?

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मेरठ में ठंड का असर सिर्फ महसूस ही नहीं हो रहा, बल्कि आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCS University) स्थित मौसम वेधशाला (Meteorological Observatory) ने शनिवार को जो आंकड़े जारी किए, वे चौंकाने वाले हैं।
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    अधिकतम तापमान (Max Temp): 17.0 डिग्री सेल्सियस
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    न्यूनतम तापमान (Min Temp): 9.0 डिग्री सेल्सियस
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सामान्य तौर पर दिन और रात के तापमान में अंतर होता है, लेकिन अधिकतम तापमान का 17 डिग्री पर सिमट जाना यह बताता है कि दिन में भी 'कोल्ड डे' (Cold Day) जैसी स्थिति बनी हुई है। पिछले चार दिनों से ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। सुबह और शाम के वक्त गलन इतनी ज्यादा है कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए गाड़ी चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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मौसम विभाग की चेतावनी: अगले 72 घंटे 'ऑरेंज अलर्ट'

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अगर आप सोच रहे हैं कि यह ठंड बस एक-दो दिन की मेहमान है, तो आप गलत हो सकते हैं। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी जारी की है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी का सीधा असर मैदानी इलाकों, विशेषकर मेरठ और आसपास के जिलों पर पड़ रहा है।
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डॉ. शाही के अनुसार:

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"आने वाले 72 घंटों तक कोहरे और ठंड से राहत मिलने के कोई आसार नहीं हैं। अगले दो दिनों में शीतलहर (Cold Wave) चलने की प्रबल संभावना है। हवा की गति बढ़ने से ठिठुरन और ज्यादा महसूस होगी। दिन का तापमान और नीचे गिर सकता है।"
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इस चेतावनी का मतलब साफ है कि रविवार और सोमवार को भी लोगों को भारी ठंड का सामना करना पड़ेगा। सुबह और रात के समय 'विजिबिलिटी' (दृश्यता) 50 मीटर से भी कम रहने का अनुमान है।
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सड़क से लेकर ट्रैक तक: कोहरे ने लगाई 'ब्रेक'

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घने कोहरे (Dense Fog) ने न केवल ठंड बढ़ाई है, बल्कि शहर की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। इसका असर हर तरफ देखने को मिल रहा है:
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1. सड़कों पर रेंगते वाहन

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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (Delhi-Meerut Expressway) और नेशनल हाईवे-58 पर वाहनों की रफ्तार थम सी गई है। जिस हाईवे पर गाड़ियां 100 की स्पीड में दौड़ती थीं, वहां अब 30-40 की स्पीड में चलना भी जोखिम भरा हो गया है। दृश्यता (Visibility) इतनी कम है कि दिन के 12 बजे भी ड्राइवरों को फॉग लाइट्स और हेडलाइट्स जलानी पड़ रही हैं। शनिवार को कई जगहों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए।
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2. ट्रेनों का संचालन प्रभावित

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कोहरे का सबसे बुरा असर रेलवे पर पड़ा है। मेरठ सिटी और कैंट स्टेशन से गुजरने वाली कई ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों की देरी से चल रही हैं। लंबी दूरी की ट्रेनें, विशेषकर जो दिल्ली की ओर जा रही हैं या वहां से आ रही हैं, वे कोहरे के कारण सिग्नल न दिखने की समस्या से जूझ रही हैं। यात्रियों को स्टेशनों पर ठंड में ठिठुरते हुए अपनी ट्रेनों का इंतजार करना पड़ रहा है।
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3. बाजारों में सन्नाटा

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आम दिनों में गुलजार रहने वाले मेरठ के बेगमपुल, आबूलेन और पीएल शर्मा रोड जैसे बाजारों में शाम होते ही सन्नाटा पसरने लगा है। लोग जरूरी काम निपटाकर जल्दी घर लौटने की जल्दी में दिख रहे हैं। दुकानदार भी ठंड के कारण दुकानें जल्दी बंद कर रहे हैं।
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ट्रैफिक एडवाइजरी: कोहरे में जान है तो जहान है

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बढ़ते कोहरे और सड़क हादसों के खतरे को देखते हुए यातायात पुलिस और प्रशासन ने विशेष एडवाइजरी जारी की है। कोहरे में अक्सर एक्सप्रेसवे और हाईवे पर बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं, जिन्हें थोड़ी सी सावधानी से टाला जा सकता है।
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वाहन चालकों के लिए 4 महामंत्र:

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    किसानों के लिए विशेष निर्देश (Reflectors are Mandatory): मेरठ एक कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहाँ की सड़कों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और भैंसा-बुग्गी का आवागमन बहुत ज्यादा होता है। कोहरे में ये वाहन अक्सर पीछे से आ रही तेज रफ्तार गाड़ियों को दिखाई नहीं देते, जिससे भयानक हादसे होते हैं। प्रशासन ने अपील की है कि किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉली और बुग्गी के पीछे लाल रंग का रेडियम रिफ्लेक्टर (Radium Reflector) अवश्य लगाएं। यह छोटी सी टेप अंधेरे और कोहरे में पीछे से आने वाले वाहन चालक को सतर्क कर सकती है।
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    सफेद LED लाइट का प्रयोग वर्जित: आजकल लोग फैशन के चक्कर में अपनी कारों और बाइकों में तेज रोशनी वाली सफेद LED लाइट्स लगवा लेते हैं। कोहरे में यह बेहद खतरनाक है। सफेद रोशनी कोहरे में फैलती है (Scatters) और सामने से आ रहे ड्राइवर की आंखों को चकाचौंध कर देती है, जिससे उसे कुछ दिखाई नहीं देता। पीली फॉग लाइट का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि पीली रोशनी कोहरे को भेदने (Penetrate) में सक्षम होती है।
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    रॉन्ग साइड ड्राइविंग से बचें (No Wrong Side Driving): कोहरे में हाईवे या शहर की सड़कों पर शॉर्टकट के चक्कर में 'रॉन्ग साइड' (गलत दिशा) में वाहन चलाना आत्महत्या करने जैसा है। कोहरे के कारण सामने से आ रहे ड्राइवर को गलत दिशा से आ रही गाड़ी बिल्कुल आखिरी वक्त पर दिखाई देती है, जिससे ब्रेक लगाने का मौका नहीं मिलता। अपनी लेन में चलें और यातायात नियमों का पालन करें।
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    उचित दूरी और धीमी रफ्तार: कोहरे में सबसे ज्यादा हादसे 'पाइल-अप' (एक के पीछे एक गाड़ियां भिड़ना) के होते हैं। इसलिए, आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी (Safe Distance) बनाकर रखें। अगर आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगाती है, तो आपके पास अपनी गाड़ी रोकने के लिए पर्याप्त समय और जगह होनी चाहिए।
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सेहत का रखें ख्याल: ठंड में 'हार्ट' और 'सांस' पर आफत

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गिरता तापमान स्वास्थ्य के लिए भी कई चुनौतियां लेकर आया है। जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में पिछले दो दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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    हार्ट पेशेंट्स रहें सावधान: ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर (BP) बढ़ जाता है। यह हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ा देता है। डॉक्टरों की सलाह है कि दिल के मरीज सुबह की सैर (Morning Walk) धूप निकलने के बाद ही करें।
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    बच्चों और बुजुर्गों का ख्याल: निमोनिया और सर्दी-जुकाम का वायरस इस मौसम में तेजी से फैलता है। बच्चों को पूरे कपड़े पहनाकर रखें और कान ढककर ही घर से बाहर निकालें। बुजुर्गों को गुनगुना पानी पीने की सलाह दी गई है।
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    खानपान: अपने भोजन में गर्म तासीर वाली चीजें जैसे- गुड़, तिल, मूंगफली, अदरक और लहसुन का प्रयोग बढ़ा दें। यह शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है।
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किसानों के लिए: 'गेहूं' खुश, लेकिन 'सब्जियां' उदास

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मेरठ के देहात क्षेत्रों में मौसम का यह बदलाव खेती-किसानी पर भी गहरा असर डाल रहा है।
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    लाभ: कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कड़ाके की ठंड और कोहरा गेहूं (Wheat) की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इससे गेहूं में कल्ले अच्छे फूटेंगे और पैदावार बंपर होगी।
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    नुकसान: दूसरी ओर, आलू, टमाटर और सरसों की फसल के लिए पाला (Frost) नुकसानदायक हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों में हल्की सिंचाई करते रहें ताकि जमीन का तापमान बना रहे और पाले का असर कम हो।
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अभी इंतजार ही उपाय है

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कुल मिलाकर, मेरठवासियों को अभी ठंड से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। अगले 3 से 4 दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने रैन बसेरों (Shelter Homes) में भी इंतजाम पुख्ता करने के निर्देश दिए हैं ताकि बेघर लोगों को ठंड से बचाया जा सके।
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हमारी आपसे अपील है कि मौसम के इस रौद्र रूप को हल्के में न लें। कोहरे में गाड़ी चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन करें। अगर बहुत जरूरी न हो, तो देर रात और अल सुबह यात्रा करने से बचें।
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