पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र कहे जाने वाले मेरठ (Meerut) में मंगलवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। इसे आप वोटर लिस्ट का 'शुद्धिकरण' कहें या 'सियासी सर्जिकल स्ट्राइक', लेकिन आंकड़ों ने बड़े-बड़े दिग्गजों की नींद उड़ा दी है।READ ALSO:-UP Shikshamitra News: शिक्षामित्रों के 'अच्छे दिन' शुरू! योगी सरकार ने खोला खुशियों का पिटारा; मानदेय से लेकर तैनाती तक, पूरी होंगी ये 3 बड़ी मांगें
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स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) अभियान के बाद जो तस्वीर सामने आई है, वह डराने वाली है। मेरठ जिले में एक झटके में 6,65,647 मतदाता (Voters) लिस्ट से बाहर हो गए हैं। यह आंकड़ा इतना बड़ा है कि यह आने वाले 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी का खेल बना या बिगाड़ सकता है। सबसे बड़ा झटका मेरठ दक्षिण (Meerut South) विधानसभा सीट को लगा है, जहां से योगी सरकार में मंत्री सोमेंद्र तोमर विधायक हैं।
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'खबरीलाल' की इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर इतने वोट क्यों कटे, किस नेता की कुर्सी खतरे में है, और अब पार्टियां डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कर रही हैं।
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मेरठ का 'वोटर गणित' - अर्श से फर्श तक

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मंगलवार को प्रकाशित ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली ने जिले के आंकड़ों को पूरी तरह बदल दिया है।
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    SIR से पहले कुल वोटर: 26.99 लाख।
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    कटौती: 6.65 लाख वोटर्स के नाम कट गए।
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    अब बचे कुल वोटर: 20.34 लाख।
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क्यों कटे इतने नाम? (वजह)

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चुनाव आयोग की सख्ती के चलते उन वोटर्स को बाहर किया गया है जो या तो शहर छोड़ चुके हैं या दुनिया।
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  1. \r\n
    शिफ्टेड (Shifted): 3,00,300 वोटर (सबसे बड़ी वजह)।
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  3. \r\n
    अनुपस्थित (Absent): 1,69,000 वोटर।
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  4. \r\n
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    मृतक (Dead): 89,091 वोटर।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    डुप्लीकेट (Duplicate): 36,571 वोटर।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    मैपिंग पेंडिंग: 2.75 लाख वोटर्स की मैपिंग अभी होनी बाकी है, जिन पर तलवार लटकी है।
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  10. \r\n
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हैरानी की बात यह है कि वोटर घटने के बावजूद बूथों की संख्या बढ़ गई है। पहले जिले में 2,758 बूथ थे, जो अब बढ़कर 2,981 हो गए हैं।
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दक्षिण विधानसभा - 'खतरे की घंटी'

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पूरे जिले में सबसे ज्यादा चर्चा मेरठ दक्षिण (Meerut South) सीट की हो रही है। यह सीट भाजपा का गढ़ मानी जाती है और यहां से डॉ. सोमेंद्र तोमर विधायक और राज्यमंत्री हैं।
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आंकड़ों का खेल:

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    SIR से पहले वोटर: 5,10,018
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    कटे वोट: 1,54,739 (जिले में सर्वाधिक)
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    अब बचे वोटर: 3,55,279
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क्यों उड़ी मंत्री जी की नींद?

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इस सीट पर खतरे की घंटी इसलिए बज रही है क्योंकि जीत-हार का अंतर बहुत कम था।
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    2022 का नतीजा: सोमेंद्र तोमर (BJP) को 1,29,667 वोट मिले थे, जबकि सपा-रालोद गठबंधन के आदिल चौधरी को 1,21,725 वोट मिले थे।
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    जीत का अंतर: मात्र 7,942 वोट।
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अब सोचिए, जिस सीट पर फैसला 8 हजार वोटों से हुआ हो, वहां से अगर 1.54 लाख वोट कट जाएं, तो 2027 में क्या होगा? यह कटौती किसी भी प्रत्याशी के समीकरण को ध्वस्त करने के लिए काफी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण सीट पर अब एक-एक वोट के लिए 'मारामारी' होगी।
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अन्य सीटों का हाल - कहीं खुशी, कहीं गम

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सिर्फ दक्षिण ही नहीं, मेरठ की अन्य सीटों पर भी कैंची खूब चली है।
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1. मेरठ कैंट (Meerut Cantt):

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भाजपा के अमित अग्रवाल यहां से विधायक हैं। यहां दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वोट कटे हैं।
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    कटे वोट: 1,49,000
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    अब बचे: 2,88,966
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    (नोट: यहां जीत का अंतर 1.18 लाख था, इसलिए शायद झटका थोड़ा कम लगे, लेकिन संख्या बहुत बड़ी है।)
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2. हस्तिनापुर (सुरक्षित):

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राज्यमंत्री दिनेश खटीक की इस सीट पर सबसे कम वोट कटे हैं, जो उनके लिए राहत की बात है।
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    कटे वोट: 64,550
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    अब बचे: 2,87,614
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3. शहर विधानसभा (Meerut City):

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सपा के रफीक अंसारी यहां से विधायक हैं।
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    कटे वोट: 89,057
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    अब बचे: 2,27,909
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4. देहात की सीटें (सिवालखास, सरधना, किठौर):

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    सिवालखास (गुलाम मोहम्मद, RLD): 64,555 वोट कटे।
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    सरधना (अतुल प्रधान, SP): 79,006 वोट कटे।
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    किठौर (शाहिद मंजूर, SP): 64,740 वोट कटे।
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सियासी दलों में हड़कंप - अब क्या होगा?

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इतनी बड़ी संख्या में वोट कटने से भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस—सभी दलों के रणनीतिकार परेशान हैं। 7 जनवरी से प्रशासन उन वोटर्स को नोटिस भेजना शुरू करेगा जिनकी 'मैपिंग' नहीं हुई है (No Mapping Voters)।
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भाजपा का प्लान (BJP Strategy)

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भाजपा ने इसे चुनौती के रूप में लिया है। जिलाध्यक्ष डॉ. हरवीर सिंह पाल का कहना है:
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"हमारा फोकस अब डैमेज कंट्रोल पर है। जो जायज वोट कट गए हैं, उन्हें चेक करवा रहे हैं। साथ ही, हमारा पूरा जोर अब नए मतदाताओं (New Voters) को जोड़ने पर है ताकि संख्या बल कम न हो।"
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सपा का प्लान (SP Strategy)

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समाजवादी पार्टी को डर है कि कहीं उनके कोर वोटर्स (PDA) को निशाना तो नहीं बनाया गया। जिलाध्यक्ष कर्मवीर सिंह गूमी ने कहा:
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"हमने टीमें गठित कर दी हैं। जो नाम कटे हैं, उनकी लिस्ट की जांच हो रही है। हम आपत्तियां दर्ज कराएंगे। बीएलओ के साथ मिलकर हम सुनिश्चित करेंगे कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का एक भी वोटर मतदान से वंचित न रहे।"
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आप (AAP) का रुख

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आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष अंकुश चौधरी ने भी कहा कि उनका पूरा फोकस अब वोटर लिस्ट में नए युवाओं को जोड़ने पर है।
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विधानसभा-वार आंकड़ों की विस्तृत टेबल

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एक नज़र में देखें कि किस विधानसभा में 'सर्जिकल स्ट्राइक' का कितना असर हुआ है:
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विधानसभा क्षेत्र
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SIR से पहले वोटर
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SIR के बाद वोटर
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कुल कटे वोट
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मेरठ दक्षिण
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5,10,018
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3,55,279
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1,54,739 (सर्वाधिक)
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मेरठ कैंट
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4,37,966
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\r\n
2,88,966
\r\n
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1,49,000
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\r\n
मेरठ शहर
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3,16,966
\r\n
\r\n
2,27,909
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\r\n
89,057
\r\n
\r\n
सरधना
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\r\n
3,67,626
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\r\n
2,88,620
\r\n
\r\n
79,006
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किठौर
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\r\n
3,70,179
\r\n
\r\n
3,05,439
\r\n
\r\n
64,740
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\r\n
सिवालखास
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3,44,901
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\r\n
2,80,346
\r\n
\r\n
64,555
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हस्तिनापुर
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\r\n
3,52,164
\r\n
\r\n
2,87,614
\r\n
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64,550 (सबसे कम)
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कुल (Total)
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26,99,820
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20,34,173
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6,65,647
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2027 में 'आसान' नहीं होगी राह

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मेरठ के ये आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि 2027 का विधानसभा चुनाव 2022 जैसा नहीं होगा।
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  1. \r\n
    समीकरण बदले: दक्षिण और कैंट जैसी सीटों पर डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) बदल सकती है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    कांटे की टक्कर: जिन सीटों पर हार-जीत का अंतर कम था (जैसे दक्षिण, सिवालखास, किठौर), वहां कटे हुए वोट निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    एक्टिव मोड: अब अगले कुछ महीने सभी पार्टियां 'वोटर लिस्ट' को दुरुस्त कराने में ही अपनी ताकत झोंकेंगी।
    \r\n
  6. \r\n
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मेरठ के निवासियों के लिए यह अलर्ट है। अगर आप सोचते हैं कि आपका वोट सुरक्षित है, तो गलतफहमी में न रहें। तुरंत अपनी वोटर लिस्ट चेक करें, क्योंकि 6.65 लाख लोगों में आपका नाम भी हो सकता है।
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(मेरठ की सियासत और वोटर लिस्ट से जुड़ी पल-पल की अपडेट के लिए जुड़े रहें 'खबरीलाल' के साथ।)
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