मेरठ (Meerut): लोकतंत्र के महापर्व में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची (Voter List) में नाम होना सबसे अनिवार्य शर्त है। लेकिन मेरठ वासियों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मेरठ जिले में चल रहे विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (Special Intensive Revision - SIR) के समापन के साथ ही एक बड़ा आंकड़ा निकलकर सामने आया है। जिले के लगभग 6.68 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाएंगे।READ ALSO:-Meerut College Horror: शिक्षा के मंदिर में 'लेडी डॉन' का आतंक; MIET कॉलेज के ग्राउंड में छात्रा को बेल्ट और लात-घूसों से पीटा, वीडियो वायरल
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शुक्रवार को इस अभियान की समय सीमा समाप्त होने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने डाटा को लॉक कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि जिन मतदाताओं ने गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) भरकर जमा नहीं किए, उन्हें अब वोटर लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा।
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Meerut Voter List 2025: क्यों कटे इतने बड़े पैमाने पर नाम?

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मेरठ जिला प्रशासन और चुनाव आयोग के निर्देश पर पिछले एक महीने से घर-घर जाकर वोटरों के सत्यापन का काम चल रहा था। इस महाअभियान का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को त्रुटिहीन बनाना और बोगस वोटरों को बाहर करना था।
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आंकड़ों पर गौर करें तो जनपद में वर्ष 2025 की मतदाता सूची के आधार पर कुल 26,99,820 मतदाता थे। इन सभी के सत्यापन के लिए गणना प्रपत्र वितरित किए गए थे। बीएलओ (Booth Level Officers) ने घर-घर जाकर संपर्क किया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब एक महीने की मशक्कत के बाद भी 6.68 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्र वापस नहीं मिले।
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प्रशासन के मुताबिक, ये वो मतदाता हैं जो या तो अपने पते पर नहीं मिले, या जिनका देहांत हो चुका है, या फिर वे शहर छोड़कर कहीं और शिफ्ट हो गए हैं। बीएलओ ने अपनी रिपोर्ट में इन मतदाताओं को निम्नलिखित श्रेणियों में चिह्नित किया है:
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    मृतक (Deceased): जिनका निधन हो चुका है लेकिन नाम अभी भी लिस्ट में था।
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    स्थानांतरित (Shifted): जो अपना मकान बेचकर या छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं।
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    अनुपस्थित (Absent): जो बार-बार संपर्क करने पर भी अपने पते पर नहीं मिले।
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    दोहराव (Duplication): जिनके नाम दो अलग-अलग जगहों या बूथों पर दर्ज थे।
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डाटा लॉक: अब न फॉर्म जमा होंगे, न ही डिजिटाइजेशन होगा

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शुक्रवार को अभियान खत्म होने के साथ ही 'डाटा फ्रीज' (Data Freeze) की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। चुनाव आयोग के सख्त निर्देशों के तहत अब किसी भी मतदाता का गणना प्रपत्र न तो स्वीकार किया जाएगा और न ही उसे डिजिटाइज्ड किया जाएगा।
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यह खबर उन लोगों के लिए झटका हो सकती है जो आखिरी समय का इंतजार कर रहे थे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब पुराने बैकलॉग को क्लियर करने का कोई मौका नहीं मिलेगा। जो लोग इस अभियान के दौरान सक्रिय नहीं दिखे, उन्हें अब ड्राफ्ट लिस्ट (Draft List) में अपना नाम नहीं मिलेगा।
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वर्ष 2003 की मैपिंग का काम भी रुका

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इस बार के पुनरीक्षण अभियान में एक और महत्वपूर्ण पहलू था - वर्तमान मतदाताओं का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान (Mapping)। इसका उद्देश्य यह सत्यापित करना था कि मतदाता कितने लंबे समय से उस क्षेत्र में निवास कर रहा है।
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पहले आदेश था कि 31 दिसंबर तक यह मैपिंग कार्य जारी रहेगा। लेकिन चुनाव आयोग ने नए निर्देश जारी करते हुए इस पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब वर्ष 2003 की मतदाता सूची के विवरण से वर्तमान मतदाताओं की मैपिंग नहीं होगी। अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र में वर्ष 2003 की मतदाता सूची का विवरण नहीं भरा था, उन्हें अब प्रशासन द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा। यह कदम नागरिकता और निवास के सत्यापन को और पुख्ता करने के लिए उठाया जा रहा है।
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31 दिसंबर को जारी होगी 'ड्राफ्ट वोटर लिस्ट'

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मेरठ की जनता अब 31 दिसंबर का इंतजार कर रही है। इसी दिन जिला प्रशासन Meerut Voter List 2025 की ड्राफ्ट सूची (Draft Electoral Roll) प्रकाशित करेगा।
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प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस ड्राफ्ट लिस्ट में केवल उन्हीं मतदाताओं के नाम शामिल होंगे, जिन्होंने एसआईआर अभियान (SIR Campaign) के दौरान अपने गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को जमा कराए हैं। जिन 6.68 लाख लोगों ने फॉर्म जमा नहीं किए, उनके नाम इस लिस्ट से नदारद रहेंगे।
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हालांकि, लोकतंत्र में नागरिकों को अधिकार देने की प्रक्रिया इतनी सख्त होते हुए भी लचीली रखी जाती है। 31 दिसंबर को ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद दावे और आपत्तियां (Claims and Objections) प्राप्त करने का दौर शुरू होगा। अगर किसी असली (Genuine) मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो उसे दोबारा नाम जुड़वाने का मौका दिया जाएगा।
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7 विधानसभा, 2758 बूथ और बीएलओ की फौज

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मेरठ जनपद में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं। इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए जिले में 2,758 पोलिंग बूथ बनाए गए थे और इतने ही बीएलओ (BLO) को इस काम में लगाया गया था।
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यह अभियान इतना महत्वपूर्ण था कि चुनाव आयोग ने इसकी अंतिम तिथि को दो बार आगे बढ़ाया था ताकि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए। राजनीतिक दलों के बूथ एजेंटों (Booth Agents) को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया था ताकि पारदर्शिता बनी रहे। बीएलओ द्वारा चिह्नित किए गए मृतक, शिफ्टेड और अनुपस्थित वोटरों की सूची मतदान केंद्रों और जनपद की वेबसाइट पर पहले ही सार्वजनिक कर दी गई थी, ताकि किसी को कोई आपत्ति हो तो वह दर्ज करा सके।
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मतदाता सूची शुद्धिकरण: क्यों है जरूरी?

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भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में निष्पक्ष चुनाव के लिए एक 'क्लीन वोटर लिस्ट' का होना बेहद जरूरी है। अक्सर देखा जाता है कि एक ही व्यक्ति का नाम कई जगहों पर होता है या फिर जो लोग दुनिया में नहीं हैं, उनके नाम पर भी वोट पड़ जाते हैं। Meerut Voter List 2025 का यह अभियान इसी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए चलाया गया था। 6.68 लाख नामों का कटना यह दर्शाता है कि लिस्ट में कितनी बड़ी संख्या में ऐसे नाम थे जिनकी अब वहां जरूरत नहीं थी। हालांकि, इसमें यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होगी कि इस छंटनी में कोई भी वास्तविक मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।
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अब आगे क्या करें मतदाता?

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अगर आप मेरठ के निवासी हैं और आपको आशंका है कि आपका नाम कट सकता है, तो 31 दिसंबर को जारी होने वाली ड्राफ्ट लिस्ट पर नजर रखें।
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    लिस्ट चेक करें: अपने नजदीकी मतदान केंद्र या चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम चेक करें।
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    फॉर्म 6 भरें: अगर आपका नाम लिस्ट में नहीं है, तो नया नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 (Form-6) भरें।
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  5. \r\n
    आपत्ति दर्ज करें: अगर नाम गलत कट गया है, तो आप अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
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मेरठ में मतदाता सूची पुनरीक्षण का यह चरण अब समाप्त हो चुका है। 6.68 लाख नामों का हटाया जाना एक बड़ा कदम है जो आगामी चुनावों की तस्वीर बदल सकता है। प्रशासन ने अपनी तरफ से प्रक्रिया पूरी कर ली है और डाटा लॉक कर दिया है। अब गेंद जनता के पाले में है। 31 दिसंबर को आने वाली सूची ही बताएगी कि मेरठ का चुनावी गणित भविष्य में कैसा होगा। इसलिए, एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते, सूची आते ही अपना नाम जरूर चेक करें।
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मेरठ में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) के समापन के बाद 6.68 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। ये वे मतदाता हैं जिन्होंने गणना प्रपत्र जमा नहीं किए या जो पते पर नहीं मिले। चुनाव आयोग ने डाटा लॉक कर दिया है और 2003 की मैपिंग भी रोक दी है। संशोधित ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 दिसंबर को जारी की जाएगी।
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