उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में हापुड़ रोड से दिल्ली-दून बाईपास तक प्रस्तावित रिंग रोड परियोजना एक बार फिर विभागों के बीच जिम्मेदारी के हस्तांतरण में उलझ गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) और लोक निर्माण विभाग (PWD) एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं, जिसके चलते जमीन अधिग्रहण का काम अधर में लटक गया है। मेरठ में रिंग रोड के निर्माण की समय सीमा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोग और निवेशक चिंतित हैं।READ ALSO:-योगी सरकार का बड़ा कदम: UP में 'एग्रीगेटर पॉलिसी' को जल्द मिलेगी हरी झंडी, EV खरीदने पर कंपनियों को ₹20 लाख तक की सब्सिडी
\r\n\r\n\r\n\r\n
रिंग रोड की आवश्यकता और प्रारंभिक योजना
\r\n\r\nयह रिंग रोड मेरठ शहर के दक्षिणी हिस्से को हापुड़ रोड से दिल्ली रोड होते हुए दिल्ली-दून बाईपास तक जोड़ेगी, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और दिल्ली-एनसीआर से कनेक्टिविटी सुधरेगी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n परियोजना का उद्देश्य: यातायात को सुगम बनाना और मेरठ की गतिशीलता (Mobility) में सुधार लाना।\r\n \r\n
- \r\n सड़क की चौड़ाई: रिंग रोड 24 मीटर चौड़ी बनेगी, और भविष्य में विस्तार के लिए दोनों तरफ 10-10 मीटर जमीन आरक्षित करने का भी निर्णय लिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n प्रारंभिक कार्य: रिंग रोड के लिए एलाइनमेंट सर्वे पहले ही पूरा हो चुका है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
162 करोड़ रुपये की योजना, फिर भी काम रुका
\r\n\r\nपरियोजना को लेकर मेडा बोर्ड बैठक में विस्तृत वित्तीय और निष्पादन योजना तय की गई थी, लेकिन क्रियान्वयन (Execution) में स्पष्टता की कमी दिख रही है।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
- \r\n
- \r\n जमीन अधिग्रहण का प्लान: रिंग रोड निर्माण के लिए कुल 15 हेक्टेयर जमीन खरीदी जाएगी, जिस पर कुल ₹162 करोड़ खर्च होंगे।\r\n \r\n
- \r\n जमीन का विवरण:\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सुंदरा पूठा और रिठानी गांव: 2.7 हेक्टेयर (अनुमानित लागत ₹21 करोड़)\r\n \r\n
- \r\n गूमी, बुढेड़ा जाहिदपुर व जुर्रानपुर गांव: 12 हेक्टेयर (अनुमानित लागत ₹100 करोड़)\r\n \r\n
\r\n - \r\n
- \r\n फंडिंग: तय हुआ था कि ₹100 करोड़ मेडा अपने कोष से देगा, जबकि शेष ₹62 करोड़ रुपये शासन (राज्य सरकार) से मिलेंगे।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मेडा और PWD के बीच मतभेद
\r\n\r\nपरियोजना पर काम अटकने का मुख्य कारण दोनों प्रमुख विभागों के बीच समन्वय (Coordination) की कमी है:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n PWD का बयान (सत्येंद्र कुमार, अधिशासी अभियंता): उन्होंने साफ कहा कि रिंग रोड की जमीन खरीदने के संबंध में मेडा की ओर से उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, "जब कोई पत्र व संबंधित दस्तावेज मिल जाएंगे, तभी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।"\r\n \r\n
- \r\n मेडा का बयान (मानवेंद्र सिंह, मुख्य अभियंता): मेडा ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि "बोर्ड बैठक में निर्णय हो चुका है और उसके मिनट्स भी जारी हो गए हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि PWD को जमीन खरीदनी है और मेडा ने ₹100 करोड़ आरक्षित कर रखे हैं। मेडा ने PWD को यह भी बताया था कि जैसे-जैसे जमीन की खरीद होगी, उसी क्रम में धनराशि का भुगतान होता रहेगा। मेडा का कहना है कि एलाइनमेंट सर्वे की रिपोर्ट भी PWD के पास है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
बढ़ी निराशा
\r\n\r\nमेरठ के नागरिकों में इस महत्वपूर्ण रिंग रोड परियोजना की लेटलतीफी को लेकर निराशा बढ़ गई है। दो प्रमुख सरकारी विभागों के बीच संचार की कमी के कारण एक बड़ी परियोजना का रुक जाना, प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है। शहरवासी अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि दोनों विभाग समन्वय स्थापित करें और जमीन अधिग्रहण का कार्य तत्काल शुरू करें।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासनिक समन्वय की आवश्यकता
\r\n\r\nजब तक मेडा आधिकारिक तौर पर दस्तावेज PWD को नहीं सौंपता और PWD धनराशि की औपचारिक मांग नहीं करता, तब तक जमीन खरीद की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकती। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए जिलाधिकारी या मंडल आयुक्त के हस्तक्षेप की आवश्यकता है, ताकि UP Ring Road परियोजना जल्द ट्रैक पर आ सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.