मेरठ (Meerut): उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के पॉश इलाके शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के कड़े रुख ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। देश की सर्वोच्च अदालत ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त आदेश जारी करते हुए ध्वस्तीकरण (Demolition) के लिए 6 सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है। इस आदेश के बाद से ही शहर के सबसे व्यस्त बाजारों में से एक सेंट्रल मार्केट में हड़कंप मचा हुआ है।READ ALSO:-टोल प्लाजा पर नहीं खुलेगा बैरियर? अगर FASTag हो गया है 'ब्लैकलिस्ट' तो न हों परेशान; जानें वो 'शॉर्टकट' जिससे मिनटों में चालू होगा आपका टैग और बच जाएंगे दोगुने पैसे
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सुप्रीम कोर्ट की डेडलाइन का एक हफ्ता बीत चुका है और कार्रवाई की तलवार सिर पर लटकती देख व्यापारियों में बेचैनी साफ देखी जा सकती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई डरे हुए दुकानदारों ने प्रशासन के बुलडोजर के पहुंचने से पहले ही अपनी दुकानों के बाहर लगे अवैध टिन शेड, लोहे के जाल और चबूतरे खुद ही हटाने शुरू कर दिए हैं। इस बीच, अपनी रोजी-रोटी और भविष्य को बचाने की जद्दोजहद में व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर से मुलाकात की और इस संकट से उबारने की अपील की।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश और 6 सप्ताह का अल्टीमेटम
\r\n\r\nबीती 27 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मेरठ सेंट्रल मार्केट और शास्त्रीनगर में हुए अवैध निर्माणों के मामले में सुनवाई की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आवास एवं विकास परिषद (Awas Vikas Parishad) की कार्यशैली और अवैध निर्माणों की भरमार पर सख्त नाराजगी जताई।
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पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया कि नियमों को ताक पर रखकर किए गए अवैध निर्माणों को 6 सप्ताह के भीतर ध्वस्त किया जाए। इस आदेश के आधिकारिक रूप से अपलोड होने के बाद सोमवार रात से ही बाजार में खलबली मच गई।
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मुख्य बिंदु:
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- \r\n समय सीमा: ध्वस्तीकरण के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n बीता समय: आदेश को आए एक हफ्ता हो चुका है, अब केवल 5 हफ्ते शेष हैं।\r\n \r\n
- \r\n अगली सुनवाई: मामले की स्टेटस रिपोर्ट (Status Report) पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।\r\n \r\n
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यह आदेश न केवल उन संपत्तियों के लिए है जो सीधे तौर पर याचिका का हिस्सा थीं, बल्कि इसका दायरा पूरी शास्त्रीनगर योजना में फैले अन्य अवैध निर्माणों तक भी माना जा रहा है।
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व्यापारियों की मंत्री से गुहार: "साहब, हमारी दुकानें बचा लो"
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पैदा हुए डर के माहौल के बीच, व्यापारी नेता जितेंद्र अग्रवाल 'अट्टू' के नेतृत्व में दर्जनों व्यापारी ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर के आवास पर पहुंचे। व्यापारियों के चेहरे पर चिंता की लकीरें साफ थीं।
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उन्होंने मंत्री को बताया कि सेंट्रल मार्केट हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया है। अगर यहां तोड़फोड़ हुई, तो व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा और हजारों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। व्यापारियों ने तर्क दिया कि वे सालों से यहां व्यापार कर रहे हैं और टैक्स दे रहे हैं।
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मंत्री का आश्वासन: डॉ. सोमेंद्र तोमर ने व्यापारियों की व्यथा को धैर्यपूर्वक सुना। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार व्यापारियों के साथ है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान और पालन भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा, "मैं इस मामले को देखूंगा और नियमानुसार जो भी संभव मदद हो सकेगी, वह की जाएगी। हम अधिकारियों से बात करेंगे कि बीच का कोई रास्ता निकल सकता है या नहीं, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है।"
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खुद ही हथौड़ा चलाने को मजबूर हुए दुकानदार
\r\n\r\nप्रशासनिक कार्रवाई का डर कितना गहरा है, यह सेंट्रल मार्केट की गलियों में देखा जा सकता है। आमतौर पर जहां ग्राहक और भीड़भाड़ होती थी, वहां अब हथौड़ों की आवाजें गूंज रही हैं।
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सोमवार रात जैसे ही यह खबर फैली कि आवास विकास के अधिकारी कभी भी एक्शन ले सकते हैं, कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के आगे किए गए अस्थायी अतिक्रमण को हटाना शुरू कर दिया।
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- \r\n दुकानों के बाहर लगे लोहे के पक्के शेड काटे जा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n नालियों के ऊपर बनाए गए रैंप तोड़े जा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n डिस्प्ले के लिए बाहर रखे गए सामान को अंदर किया जा रहा है।\r\n \r\n
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एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "अगर आवास विकास का बुलडोजर आया तो वे सिर्फ अवैध हिस्सा नहीं तोड़ेंगे, बल्कि पूरी दुकान को नुकसान पहुंच सकता है। उससे बेहतर है कि हम खुद ही अपना अतिरिक्त निर्माण हटा लें, शायद इससे कोर्ट और अधिकारी थोड़ी नरमी बरतें।"
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रडार पर 1468 अवैध निर्माण: क्या है पूरा डाटा?
\r\n\r\nयह मामला सिर्फ कुछ दुकानों तक सीमित नहीं है। आवास एवं विकास परिषद के सर्वे और आरटीआई (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक, अवैध निर्माण का यह जाल बहुत बड़ा है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद अब पूरी शास्त्रीनगर योजना के अवैध निर्माण रडार पर आ गए हैं।
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आवास विकास के आंकड़ों के मुताबिक स्थिति भयावह है:
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- \r\n शास्त्रीनगर (कुल): यहां कुल 1468 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं।\r\n \r\n
- \r\n व्यावसायिक गतिविधियां: इन अवैध निर्माणों में केवल दुकानें नहीं हैं। आवासीय भूखंडों (Residential Plots) पर बड़े-बड़े शोरूम, मल्टी-ब्रांड आउटलेट, रेस्टोरेंट, नर्सिंग होम, होटल, बैंक और लग्जरी सैलून चल रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n भूखंड संख्या 661/6 का मामला: इससे पहले 17 दिसंबर 2024 को कोर्ट ने भूखंड संख्या 661/6 पर बने अवैध निर्माण को लेकर सख्त आदेश दिया था। अब हालिया आदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून सबके लिए बराबर है।\r\n \r\n
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स्थानीय निवासियों और आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना का कहना है कि आवासीय कॉलोनियों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण आम लोगों का जीना मुहाल हो गया है। पार्किंग की समस्या, जाम और शोर-शराबे ने रिहायशी इलाकों का सुकून छीन लिया है।
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केवल सेंट्रल मार्केट ही नहीं, ये इलाके भी खतरे में
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट की इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' का असर केवल शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट तक सीमित नहीं रहेगा। आवास विकास परिषद द्वारा तैयार की गई सर्वे रिपोर्ट बताती है कि नियम विरुद्ध निर्माण का यह कैंसर शहर के अन्य पॉश इलाकों में भी फैल चुका है।
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सर्वे रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े:
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- \r\n माधवपुरम (Madhavpuram): यहां कुल 5963 आवासीय संपत्तियां हैं। इनमें से 327 संपत्तियों में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियां पाई गई हैं। यहां लोग अपने घरों के नीचे दुकानें, गोदाम और वर्कशॉप चला रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n जागृति विहार (Jagriti Vihar): यह शहर का एक और प्रमुख रिहायशी इलाका है। यहां करीब 5500 भवन हैं, जिनमें से 495 भवनों का इस्तेमाल आवासीय के बजाय व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए हो रहा है।\r\n \r\n
- \r\n शास्त्री नगर (ए से एल ब्लॉक): इन ब्लॉकों में कुल 6106 संपत्तियां हैं। सर्वे में पाया गया कि 613 संपत्तियों में शोरूम, डेयरी, बेकरी और कोचिंग सेंटर खुल चुके हैं।\r\n \r\n
- \r\n शास्त्री नगर (सेक्टर 1-13): यहां स्थिति और भी गंभीर है। 6379 आवासीय संपत्तियों में से 860 में पूर्ण रूप से कमर्शियल गतिविधियां संचालित हैं।\r\n \r\n
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इन आंकड़ों को देखकर साफ है कि आवास विकास परिषद के अधिकारियों की नाक के नीचे किस तरह अवैध निर्माण का साम्राज्य खड़ा हुआ। अब सुप्रीम कोर्ट के डंडे के बाद अधिकारियों में भी खलबली है।
\r\n\r\nलखनऊ भागे अधिकारी: 13 मार्च की तैयारी
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मामले की गंभीरता को देखते हुए मेरठ आवास एवं विकास परिषद के आला अधिकारी लखनऊ मुख्यालय रवाना हो गए हैं। सूत्रों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए उच्च अधिकारियों और विधि विशेषज्ञों से राय लेने गए हैं।
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प्रशासन के सामने चुनौती: प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 6 सप्ताह के भीतर इतने बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण कैसे किया जाए।
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- \r\n कानून व्यवस्था: 1400 से ज्यादा संपत्तियों पर कार्रवाई करने के लिए भारी पुलिस बल की आवश्यकता होगी। व्यापारियों के विरोध का सामना करना पड़ सकता है।\r\n \r\n
- \r\n राजनीतिक दबाव: स्थानीय नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई रोकने का भारी दबाव है।\r\n \r\n
- \r\n कोर्ट की अवमानना: अगर तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिकारियों पर 'कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट' (Contempt of Court) की कार्रवाई हो सकती है। 13 मार्च को कोर्ट स्टेटस रिपोर्ट मांगेगा।\r\n \r\n
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने बताया, "न्यायालय ने समय सीमा तय कर दी है। अब अधिकारियों के पास कोई बहाना नहीं बचा है। 13 मार्च को यह तय हो जाएगा कि कानून का राज चलेगा या अतिक्रमणकारियों का।" इसके अलावा, सच संस्था के अध्यक्ष डॉ. संदीप पहल की याचिका भी इसी मामले में लंबित है, जो इस आग में घी का काम कर रही है।
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क्यों हुआ अवैध निर्माण? (Analysis of the Root Cause)
\r\n\r\nमेरठ में अवैध निर्माण की समस्या रातों-रात पैदा नहीं हुई है। यह दशकों की लापरवाही और मिलीभगत का नतीजा है।
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- \r\n आवासीय से व्यावसायिक का खेल: आवास विकास की कॉलोनियों में जमीन आवासीय (Residential) दरों पर आवंटित की गई थी। लेकिन शहर बढ़ने के साथ, मुख्य सड़कों पर स्थित मकानों की कीमत आसमान छूने लगी। मकान मालिकों ने भूतल (Ground Floor) पर दुकानें बना लीं और ऊपर रहने लगे।\r\n \r\n
- \r\n अधिकारियों की अनदेखी: जब ये निर्माण हो रहे थे, तब स्थानीय अभियंताओं और अधिकारियों ने आंखें मूंद लीं। समय-समय पर नोटिस तो जारी हुए, लेकिन ठोस कार्रवाई कभी नहीं हुई।\r\n \r\n
- \r\n लैंड यूज़ चेंज (Land Use Change): कई व्यापारियों का तर्क है कि उन्होंने लैंड यूज़ चेंज के लिए आवेदन किया था या कंपाउंडिंग फीस देने को तैयार थे, लेकिन विभाग की नीति स्पष्ट नहीं रही। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि अवैध निर्माण को वैध नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब वह मास्टर प्लान का उल्लंघन करता हो।\r\n \r\n
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आगे क्या होगा? (Road Ahead)
\r\n\r\nअगले 5 हफ्ते मेरठ के व्यापारियों और प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा के समान हैं।
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- \r\n ध्वस्तीकरण अभियान: संभावना है कि आवास विकास परिषद जल्द ही एक बड़ा ध्वस्तीकरण अभियान (Demolition Drive) शुरू करेगा। शुरुआत उन निर्माणों से हो सकती है जो पूरी तरह से अवैध हैं और सड़क पर अतिक्रमण कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n सीलिंग की कार्रवाई: जो दुकानें आवासीय भवनों में चल रही हैं, उन्हें सील किया जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई (13 मार्च): यह दिन सबसे महत्वपूर्ण होगा। अगर स्टेटस रिपोर्ट में कोर्ट को संतोषजनक कार्रवाई नहीं दिखी, तो अधिकारियों पर गाज गिरना तय है।\r\n \r\n
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मेरठ सेंट्रल मार्केट का यह मामला एक नजीर बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है—शहरों का विकास नियमों के तहत होना चाहिए, न कि अतिक्रमण के दम पर। व्यापारियों की चिंता अपनी जगह जायज है, लेकिन आवासीय कॉलोनियों का मूल स्वरूप बिगाड़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती। अब देखना यह है कि 13 मार्च तक प्रशासन कितना एक्शन लेता है और क्या मंत्री जी का आश्वासन व्यापारियों को कोई राहत दिला पाता है, या फिर सेंट्रल मार्केट का नक्शा हमेशा के लिए बदल जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण हटाने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया है। आदेश के बाद व्यापारियों में दहशत है और वे खुद अतिक्रमण हटा रहे हैं। शास्त्रीनगर, जागृति विहार और माधवपुरम में कुल मिलाकर हजारों संपत्तियां रडार पर हैं। आवास विकास अधिकारी कार्रवाई की रूपरेखा तय करने लखनऊ गए हैं। अगली सुनवाई 13 मार्च को है।
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