मेरठ (Meerut News): पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक, मेरठ के शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट (Central Market) में इन दिनों अफरा-तफरी का माहौल है। जो बाजार आम दिनों में ग्राहकों की भीड़ से गुलजार रहता था, वहां अब हथौड़ों की आवाजें और गिरते हुए शटरों का शोर गूंज रहा है। वजह है—देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का सख्त आदेश।READ ALSO:-संघ के 100 वर्ष: 'रील' की दुनिया में खो रही 'रियलिटी', दाती महाराज ने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की दी सलाह; मेरठ में विराट हिंदू सम्मेलन में गूंजा राष्ट्रवाद का शंखनाद
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सोमवार को जैसे ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी वेबसाइट पर अपलोड हुई, व्यापारियों के बीच हड़कंप मच गया। कोर्ट ने आवासीय भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माणों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार को सेंट्रल मार्केट की साप्ताहिक बंदी (Weekly Off) होने के बावजूद, शाम होते-होते कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के बाहर निकले टिन शेड, लोहे के स्ट्रक्चर और अन्य अतिक्रमण को खुद ही हटाना शुरू कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण ध्वस्त करने के लिए 6 सप्ताह (Six Weeks) का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद प्रशासन की कार्रवाई तय मानी जा रही है।
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सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: 'आपके पास तो बहुत बुलडोजर हैं...'
\r\n\r\nइस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा सुप्रीम कोर्ट की उस टिप्पणी की हो रही है, जिसने प्रशासन और सरकार दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। पिछले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के न्याय कक्ष संख्या 6 में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला (Justice JB Pardiwala) और न्यायमूर्ति संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की थी।
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आरटीआई कार्यकर्ता और इस मामले में प्रमुख भूमिका निभाने वाले लोकेश खुराना (RTI Activist Lokesh Khurana) ने बताया कि सुनवाई के दौरान अदालत का रुख बेहद सख्त था। राज्य सरकार की तरफ से देश के दिग्गज वकील—भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि (R Venkataramani), सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (Tushar Mehta) और वरिष्ठ अधिवक्ता मलखान सिंह ने पैरवी की। सरकारी वकीलों ने व्यापारियों के हितों का हवाला देते हुए अवैध निर्माणों को नियमित (Regularize) करने के प्रस्तावों को स्वीकार करने का अनुरोध किया था।
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लेकिन, पीठ ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार, सुनवाई के दौरान जजों ने तंज कसते हुए राज्य सरकार से कहा, "आपके पास बहुत बुलडोजर हैं, अब चलाइए उनको।"
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यह टिप्पणी इसलिए भी अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार अक्सर अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ 'बुलडोजर एक्शन' के लिए सुर्खियों में रहती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसी 'बुलडोजर' का इस्तेमाल अवैध निर्माणों के खिलाफ करने का निर्देश दिया है, जो रिहायशी इलाकों में नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए हैं।
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6 सप्ताह का अल्टीमेटम और 'कंप्लायंस रिपोर्ट' की तलवार
\r\n\r\nसोमवार को अपलोड हुए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने पुराने आदेश में कोई बदलाव नहीं करेगा।
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- \r\n समय सीमा: अदालत ने निर्देश दिया है कि अगले छह सप्ताह के भीतर सेंट्रल मार्केट और आसपास के इलाकों में चिन्हित सभी अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जाए।\r\n \r\n
- \r\n रिपोर्ट तलब: ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पूरी होने के बाद, उसकी 'कंप्लायंस रिपोर्ट' (Compliance Report) याचिकाकर्ता के वकील के माध्यम से कोर्ट में जमा करनी होगी।\r\n \r\n
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आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना के अधिवक्ता तुषार जैन ने स्पष्ट किया कि कोर्ट ने विनियमितिकरण (Regularization) की किसी भी संभावना से फिलहाल इनकार कर दिया है। इसका सीधा मतलब है कि जो निर्माण नक्शे के विपरीत हैं या रिहायशी भूखंडों पर व्यावसायिक उद्देश्य से बनाए गए हैं, उन पर गाज गिरना तय है।
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व्यापारियों में खौफ: खुद चला रहे हथौड़ा
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का असर जमीन पर तुरंत देखने को मिला। सेंट्रल मार्केट, जो मेरठ की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, वहां सोमवार शाम को एक अलग ही नजारा था।
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- \r\n स्वयं ध्वस्तीकरण: सेक्टर 661/6 के सामने और बाजार के मुख्य मार्गों पर दुकानदारों ने अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर दुकानों के बाहर लगे अवैध टिन शेड उखाड़ने शुरू कर दिए।\r\n \r\n
- \r\n लोहे के जाल और सीढ़ियां: कई दुकानों ने सड़क पर कब्जा करके लोहे की सीढ़ियां और जाल लगा रखे थे, जिन्हें गैस कटर से काटकर हटाया जा रहा है।\r\n \r\n
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व्यापारियों का मानना है कि अगर प्रशासन या मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) ने बुलडोजर चलाया, तो नुकसान ज्यादा हो सकता है। ऐसे में वे खुद ही अतिक्रमण हटाकर नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।
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व्यापारियों की रणनीति: सीएम योगी से आस
\r\n\r\nइतने बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण की आशंका से व्यापारी वर्ग डरा हुआ है। सेंट्रल मार्केट के प्रमुख व्यापारी नेता जितेंद्र अग्रवाल अट्टू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश सर्वोपरि है और उसका सम्मान किया जाएगा, लेकिन व्यापारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
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- \r\n आदेश का अध्ययन: व्यापारी संघ के वकील कोर्ट के आदेश की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n सीएम से गुहार: जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि व्यापारी समाज जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से लखनऊ में मुलाकात करेगा। उनका कहना है कि हजारों परिवारों की आजीविका इस बाजार पर निर्भर है, इसलिए सरकार को कोई बीच का रास्ता निकालना चाहिए।\r\n \r\n
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'बाजार स्ट्रीट' योजना: क्या है उम्मीद की किरण?
\r\n\r\nजहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का डंडा चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद (UPAVP) ने सेंट्रल मार्केट को बचाने और व्यवस्थित करने के लिए 'बाजार स्ट्रीट' (Bazaar Street) योजना का प्रस्ताव रखा है।
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आवास आयुक्त ने इस योजना को लेकर आम जनता से 15 दिनों के भीतर आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। यह कदम विभाग की 274वीं बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय के बाद उठाया गया है।
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क्या है बाजार स्ट्रीट योजना? इस योजना के तहत सेंट्रल मार्केट के भूखंडों के 'भू-उपयोग' (Land Use) को बदलने की तैयारी है। यानी जो जमीनें अब तक कागजों में 'आवासीय' (Residential) थीं, उन्हें 'व्यावसायिक' (Commercial) या 'मिश्रित' (Mixed Use) घोषित किया जा सकता है।
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योजना में निम्नलिखित सड़कों और भूखंडों को शामिल किया गया है:
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- \r\n 36 मीटर चौड़ी सड़क: इस पर स्थित 2 भूखंड।\r\n \r\n
- \r\n 24 मीटर चौड़ी सड़क: इस पर स्थित 1 भूखंड।\r\n \r\n
- \r\n 18 मीटर चौड़ी सड़क: इस पर स्थित 50 भूखंड।\r\n \r\n
- \r\n 12 मीटर चौड़ी सड़क: इस पर स्थित 27 भूखंड।\r\n \r\n
आपत्ति और सुझाव कैसे भेजें? अगर किसी व्यक्ति को इस योजना से कोई आपत्ति है या वह कोई सुझाव देना चाहता है, तो वह 15 दिनों के भीतर अपनी बात रख सकता है।
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- \r\n पता: वास्तुविद नियोजक, वास्तुकला तथा नियोजन अनुभाग, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नीलगिरी कॉम्प्लेक्स, इंदिरा नगर, लखनऊ।\r\n \r\n
- \r\n ईमेल: cap@upavp.com\r\n \r\n
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जानकारों का मानना है कि अगर 'बाजार स्ट्रीट' योजना को मंजूरी मिल जाती है और इसे सही तरीके से लागू किया जाता है, तो भविष्य में सेंट्रल मार्केट को वैधता मिल सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट का वर्तमान आदेश अवैध निर्माण हटाने का है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह नई योजना कोर्ट के आदेश से पहले व्यापारियों को कोई राहत दे पाती है या नहीं।
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क्यों बना सेंट्रल मार्केट विवाद का केंद्र?
\r\n\r\nमेरठ का शास्त्री नगर इलाका मूल रूप से एक आवासीय योजना (Residential Scheme) के तहत विकसित किया गया था। नियमों के मुताबिक, यहां के भूखंडों पर केवल घर बनाए जा सकते थे। लेकिन पिछले कुछ दशकों में, शहर के विस्तार और बढ़ती आबादी के साथ, लोगों ने अपने घरों के ग्राउंड फ्लोर और बाद में पूरी इमारतों को दुकानों, शोरूम और रेस्टोरेंट में बदल दिया।
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- \r\n नियमों की अनदेखी: आवास विकास परिषद के नियमों को ताक पर रखकर यहां बड़े-बड़े कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़े हो गए।\r\n \r\n
- \r\n पार्किंग की समस्या: अवैध निर्माण के कारण यहां पार्किंग की भीषण समस्या पैदा हो गई, जिससे आए दिन जाम लगता है।\r\n \r\n
- \r\n अदालत में मामला: आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने इन अवैध गतिविधियों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। उनका तर्क था कि आवासीय क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां अवैध हैं और इससे निवासियों को परेशानी होती है।\r\n \r\n
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प्रशासन की तैयारी और आगे की राह
\r\n\r\nसुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) और आवास विकास परिषद पर कार्रवाई का भारी दबाव है।
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- \r\n चिन्हीकरण: प्रशासन ने पहले ही अवैध निर्माणों को चिन्हित कर लिया है। लाल निशान लगाने की कार्रवाई पूर्व में की जा चुकी है।\r\n \r\n
- \r\n फोर्स की तैनाती: 6 सप्ताह की समय सीमा को देखते हुए, जल्द ही भारी पुलिस बल के साथ ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया जा सकता है।\r\n \r\n
- \r\n कानूनी बाध्यता: चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है और 'कंप्लायंस रिपोर्ट' मांगी गई है, इसलिए अधिकारी इस बार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।\r\n \r\n
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Meerut Central Market Supreme Court Order ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। "बुलडोजर न्याय" की बात करने वाली सरकार को अब कोर्ट ने खुद बुलडोजर चलाने का आदेश दिया है। यह घटनाक्रम न केवल मेरठ बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के उन बाजारों के लिए एक नजीर (Example) बनेगा, जो रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे हैं।
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व्यापारियों के सामने अब दो ही रास्ते हैं—या तो वे सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलकर किसी नीतिगत बदलाव की उम्मीद करें, या फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए अपने अवैध निर्माण खुद हटा लें। आने वाले 6 सप्ताह मेरठ के सेंट्रल मार्केट के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे। 'बाजार स्ट्रीट' योजना एक उम्मीद की किरण जरूर है, लेकिन कानूनी हथौड़े की चोट से बचने के लिए यह कितनी कारगर होगी, यह वक्त ही बताएगा।
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