मेरठ, उत्तर प्रदेश: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से सटे मेरठ शहर में आवारा पशुओं का आतंक एक बार फिर खून खराबे के साथ सामने आया है। सदर थाना क्षेत्र की बेगमपुल चौकी के सामने रविवार रात आवारा कुत्तों का हमला मेरठ की एक दिल दहला देने वाली घटना बन गया, जहां आवारा कुत्तों के एक झुंड ने सड़क किनारे डिवाइडर पर सो रहे डेढ़ साल के मासूम बच्चे को नोंचकर मार डाला। यह घटना प्रशासन और नगर निगम की सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।READ ALSO:-मेरठ में खुशियों पर भारी पड़ा मातम: बारात की 'हर्ष फायरिंग' ने छीनी जिंदगी; छत से नजारा देख रही युवती के पेट में लगी गोली, दूल्हे समेत 25 पर FIR
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पंजाब से अपनी मां के साथ ननिहाल आया यह बच्चा एक खानाबदोश परिवार का था, जो कूड़ा बीनकर अपना जीवन यापन करता है। रात के अंधेरे में कुत्तों ने बच्चे को उसकी मां के पास से खींच लिया, और 100 मीटर दूर जाकर उसके शव को क्षत-विक्षत कर दिया।
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मां की गोद से उठाकर ले गए कुत्ते
\r\n\r\nमृतक बच्चे की पहचान गंगोत्री के डेढ़ वर्षीय बेटे सीते के रूप में हुई है। गंगोत्री की शादी पंजाब के रमेश से तीन साल पहले हुई थी और वह अपने इकलौते बेटे के साथ रविवार सुबह ही अपने मायके मेरठ पहुंची थी। खानाबदोश परिवार होने के कारण, वह बेगमपुल चौकी के सामने डिवाइडर पर ही रात बिता रहे थे।
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परिवार के सदस्यों ने बताया कि रात लगभग 10 बजे सभी खाना खाने के बाद सो गए थे। इसी दौरान, गंगोत्री की आंख खुली तो उसने देखा कि बच्चा गायब है। परिजनों ने तुरंत खोज शुरू की। करीब 100 मीटर की दूरी पर उन्हें कुत्तों का एक झुंड दिखा, जो मासूम सीते को नोंच रहा था। यह आवारा कुत्तों का हमला मेरठ की सबसे वीभत्स घटनाओं में से एक है। परिजनों ने लाठी-डंडों से कुत्तों को भगाया और लहूलुहान बच्चे को छुड़ाया।
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गंभीर चोटें और अस्पताल में मौत
\r\n\r\nगंभीर रूप से घायल बच्चे को परिजन तुरंत पीएल शर्मा जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉ. लॉरेंस वर्मा ने बताया कि बच्चे को रात लगभग 11 बजे लाया गया था। कुत्तों ने उसकी आंख और पेट को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे उसकी हालत अत्यंत नाजुक थी। डॉक्टरों ने फौरन एंटी-रेबीज इंजेक्शन दिया और इलाज शुरू किया।
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डॉक्टरों ने बताया कि गंभीर स्थिति के कारण बच्चे को मेडिकल कॉलेज रेफर करने की तैयारी की जा रही थी, लेकिन आधे घंटे के भीतर ही मासूम ने दम तोड़ दिया। यह आवारा कुत्तों का हमला मेरठ (FK) की एक ऐसी त्रासदी है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
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नगर निगम की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
\r\n\r\nयह दर्दनाक घटना मेरठ नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की लचर व्यवस्था को उजागर करती है। शहर के मुख्य मार्ग और पुलिस चौकी के ठीक सामने आवारा कुत्तों का इतना बड़ा झुंड होना और उनका इंसानों पर, खासकर मासूमों पर हमला करना, सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति घोर लापरवाही का संकेत है।
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स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर भारी गुस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। इस आवारा कुत्तों का हमला मेरठ की समस्या को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है, जिसका नतीजा एक मासूम की मौत के रूप में सामने आया है। आवारा पशुओं के आतंक के कारण सड़कों पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है।
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मासूम की मौत पर मातम, कड़ी कार्रवाई की मांग
\r\n\r\nइस दुखद आवारा कुत्तों का हमला मेरठ (FK) घटना के बाद, खानाबदोश परिवार और पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। मां गंगोत्री और पिता रमेश का रो-रोकर बुरा हाल है। इस परिवार के लिए यह बच्चा इकलौती उम्मीद था, जो आवारा कुत्तों का हमला मेरठ (FK) की भेंट चढ़ गया।
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पुलिस ने मामले की संज्ञान लिया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन को अब सिर्फ खानापूर्ति की जगह, आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी पर तत्काल नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों, विशेष रूप से बेघर और सड़क किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है।
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मेरठ के बेगमपुल में आवारा कुत्तों का हमला मेरठ एक 1.5 वर्षीय बच्चे की मौत का कारण बना। डिवाइडर पर सो रहे मासूम को कुत्तों ने मां के पास से खींचकर नोच डाला। इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों के आतंक और नगर निगम की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन यह त्रासदी प्रशासन को सार्वजनिक सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.