पश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh) इस समय प्रकृति की दोहरी और मारक परीक्षा से गुजर रहा है। एक तरफ जहां आसमान से बरसती आग जैसी ठंड ने हड्डियों में सिहरन पैदा कर दी है, वहीं दूसरी तरफ वातावरण में घुले जहर (प्रदूषण) ने सांसों पर पहरा लगा दिया है। क्रांतिधरा मेरठ में कड़ाके की ठंड ने पिछले दो दशकों के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए हैं।READ ALSO:-धामपुर के के.एम. इंटर कॉलेज में सजी संस्कृति और खेल की महफिल: 'हमारी संस्कृति-हमारी पहचान' उत्सव में ग्रामीण छात्रों का दबदबा, दिखाई अपनी प्रतिभा
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मंगलवार सुबह जब लोग नींद से जागे, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह ठंड सामान्य नहीं है। मौसम विभाग के आंकड़ों ने इस अहसास पर मुहर लगा दी। 12 जनवरी की रात मेरठ के इतिहास में पिछले 21 सालों की सबसे सर्द रात के रूप में दर्ज हो गई है। तापमान का मीटर लुढ़कते-लुढ़कते 2.9 डिग्री सेल्सियस पर आकर रुक गया। यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस ठिठुरन का प्रमाण है जिसने अमीर-गरीब, बच्चे-बुजुर्ग, और पशु-पक्षियों तक को बेहाल कर दिया है।
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'खबरिलाल' की इस महा-कवरेज (Mega Coverage) में हम आपको बताएंगे कि आखिर मौसम का मिजाज इतना हिंसक क्यों हुआ है, प्रदूषण के खतरनाक स्तर के पीछे का विज्ञान क्या है, खेती पर इसका क्या असर होगा और देश के बड़े डॉक्टरों की टीम इस मौसम में जिंदा रहने के लिए क्या सलाह दे रही है।
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'कोल्ड टॉर्चर' - 21 साल का सूखा खत्म, ठंड ने बनाया नया इतिहास
\r\n\r\nमेरठ और एनसीआर (NCR) के इलाकों में ठंड का ऐसा रौद्र रूप लंबे समय बाद देखने को मिला है। लोग अलाव और हीटर के सहारे दिन काटने को मजबूर हैं, लेकिन दीवारें और छतें इतनी ठंडी हो चुकी हैं कि घरों के अंदर भी 'शिमला' जैसा अहसास हो रहा है।
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12 जनवरी की रात का वो खौफनाक मंजर
\r\n\r\nचौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) की मौसम वेधशाला के अनुसार, 12 जनवरी की रात इस सीजन की ही नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों की सबसे सर्द रात साबित हुई।
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- \r\n रिकॉर्ड ब्रेकिंग पारा: न्यूनतम तापमान 2.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।\r\n \r\n
- \r\n तुलनात्मक अध्ययन: इससे पहले साल 2006 में पारा इतना नीचे गया था, जब 9.1 डिग्री के आसपास औसत रहता था, लेकिन 2.9 डिग्री का स्तर 21 सालों में नहीं देखा गया। पिछले साल (2025) यह 9.9 डिग्री था, और 2024 में 4.8 डिग्री। यानी इस बार की ठंड ने पिछले सभी बेंचमार्क तोड़ दिए हैं।\r\n \r\n
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दिन में भी राहत नहीं (Cold Day Conditions)
\r\n\r\nसिर्फ रात ही नहीं, दिन का हाल भी बेहाल है। मौसम विज्ञान की भाषा में इसे 'कोल्ड डे' (Cold Day) कंडीशन कहा जा रहा है।
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- \r\n अधिकतम तापमान: दिन का अधिकतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।\r\n \r\n
- \r\n धूप का धोखा: कोहरे की मोटी चादर के कारण सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। दोपहर में अगर थोड़ी देर के लिए धूप निकलती भी है, तो बर्फीली हवाओं (Icy Winds) के आगे उसकी तपिश बेअसर साबित हो रही है। लोग छतों पर धूप सेंकने जा रहे हैं, लेकिन हवा के थपेड़े उन्हें वापस नीचे भगा रहे हैं।\r\n \r\n
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मौसम वैज्ञानिक की चेतावनी - 'अभी और सताएगी सर्दी'
\r\n\r\nमौसम के इस बदले मिजाज पर हमने क्षेत्र के शीर्ष मौसम वैज्ञानिकों से बात की ताकि इसके पीछे के विज्ञान को समझा जा सके।
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क्यों जमी है मेरठ की धरती?
\r\n\r\nभारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR), मोदीपुरम के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम. शमीम ने स्थिति को स्पष्ट किया।
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\r\n\r\n\r\nविशेषज्ञ की राय:\r\n\r\n"वर्तमान में जो कड़ाके की ठंड हम देख रहे हैं, उसका मुख्य कारण 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbance) है। पहाड़ों (जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, उत्तराखंड) पर पिछले दिनों भारी बर्फबारी हुई है। वहां से टकराकर आ रही उत्तरी-पश्चिमी हवाएं (North-Western Winds) सीधे मैदानी इलाकों में प्रवेश कर रही हैं। इन हवाओं में नमी और ठंडक दोनों है। जब तक हवा की दिशा नहीं बदलेगी, गलन बरकरार रहेगी।"\r\n
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18 जनवरी तक रेड अलर्ट
\r\n\r\nडॉ. शमीम ने स्पष्ट किया है कि शीतलहर का प्रकोप अभी थमने वाला नहीं है।
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- \r\n पूर्वानुमान: अगले 5 दिनों तक दिन और रात का तापमान सामान्य से कम रहेगा।\r\n \r\n
- \r\n उम्मीद की किरण: 18 जनवरी के बाद एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिससे हवा की दिशा बदलेगी और तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के संकेत मिल सकते हैं। तब तक लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।\r\n \r\n
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'गैस चैंबर' बना शहर - ठंड के साथ जहरीली हवा का हमला
\r\n\r\nमेरठ वासियों के लिए मुसीबत सिर्फ गिरता पारा नहीं है, बल्कि बढ़ता वायु प्रदूषण (Air Pollution) भी है। पिछले 48 घंटों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में जो उछाल आया है, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
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ठंड और प्रदूषण का जानलेवा कनेक्शन (The Science of Smog)
\r\n\r\nसरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने इस 'कॉकटेल' के बारे में बताया।
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- \r\n इनवर्जन लेयर (Inversion Layer): गर्मियों में गर्म हवा के साथ प्रदूषक तत्व ऊपर वायुमंडल में चले जाते हैं। लेकिन सर्दियों में, खासकर जब हवा की रफ्तार कम होती है, तो 'कोल्ड एयर' भारी होकर नीचे बैठ जाती है।\r\n \r\n
- \r\n लॉकडाउन ऑफ पोल्यूटेंट्स: वाहनों और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और धूल के कण (PM2.5) इस भारी हवा में फंस जाते हैं और ऊपर नहीं जा पाते। कोहरे (Fog) के साथ मिलकर यह 'स्मॉग' (Smog) बनाता है, जो फेफड़ों के लिए बेहद घातक है।\r\n \r\n
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मेरठ के हॉटस्पॉट्स का हाल (AQI मीटर)
\r\n\r\nसेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, मेरठ का औसत AQI 249 से बढ़कर 279 पहुंच गया है। लेकिन शहर के कुछ विशिष्ट इलाकों में स्थिति 'आपातकाल' जैसी है:
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| \r\n क्षेत्र (Area) \r\n | \r\n \r\n एक्यूआई (AQI) \r\n | \r\n \r\n स्थिति (Category) \r\n | \r\n \r\n प्रभाव (Impact) \r\n | \r\n
| \r\n दिल्ली रोड \r\n | \r\n \r\n 335 \r\n | \r\n \r\n बेहद खराब (Very Poor) \r\n | \r\n \r\n लंबे समय तक संपर्क में रहने पर सांस की बीमारी। \r\n | \r\n
| \r\n बेगमपुल \r\n | \r\n \r\n 320 \r\n | \r\n \r\n बेहद खराब \r\n | \r\n \r\n आंखों में जलन, गले में खराश। \r\n | \r\n
| \r\n जयभीम नगर \r\n | \r\n \r\n 314 \r\n | \r\n \r\n बेहद खराब \r\n | \r\n \r\n बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरनाक। \r\n | \r\n
| \r\n पल्लवपुरम \r\n | \r\n \r\n 304 \r\n | \r\n \r\n बेहद खराब \r\n | \r\n \r\n अस्थमा अटैक का खतरा। \r\n | \r\n
| \r\n गंगानगर \r\n | \r\n \r\n 220 \r\n | \r\n \r\n खराब \r\n | \r\n \r\n संवेदनशील लोगों को परेशानी। \r\n | \r\n
आंकड़े चीख-चीख कर कह रहे हैं कि दिल्ली रोड और बेगमपुल जैसे व्यस्त इलाकों में सांस लेना, सिगरेट पीने जितना हानिकारक हो गया है।
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कोहरे का 'लॉकडाउन' - थमी रफ्तार, थमी जिंदगी
\r\n\r\nघने कोहरे (Dense Fog) ने सड़क से लेकर आसमान तक यातायात की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। विजिबिलिटी (दृश्यता) कम होने से जनजीवन अस्त-व्यस्त है।
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सड़क यातायात पर असर
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- \r\n जीरो विजिबिलिटी: सुबह 5 बजे से 9 बजे तक और रात 8 बजे के बाद दृश्यता 50 मीटर से भी कम रह जा रही है।\r\n \r\n
- \r\n हाइवे का हाल: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (DME) और एनएच-58 पर वाहन चालक रेंगने को मजबूर हैं। गाड़ियां दिन में भी पार्किंग लाइट (ब्लिंकर) जलाकर चल रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n दुर्घटना का डर: कोहरे के कारण पिछले दो दिनों में पश्चिमी यूपी में कई छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं की खबरें भी आई हैं।\r\n \r\n
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रेल और हवाई सेवा प्रभावित
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- \r\n ट्रेनें लेट: दिल्ली और मेरठ से गुजरने वालीं लंबी दूरी की ट्रेनें, जैसे संगम एक्सप्रेस, नौचंदी एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनें अपने निर्धारित समय से 4 से 10 घंटे की देरी से चल रही हैं।\r\n \r\n
- \r\n यात्रियों की फजीहत: स्टेशनों पर कड़ाके की ठंड में यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। प्लेटफॉर्म पर ठंडी हवाओं से बचने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होने से बच्चे और महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान हैं।\r\n \r\n
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विशेष स्वास्थ्य गाइड - डॉक्टर की सलाह (Health Advisory)
\r\n\r\nबढ़ती ठंड और प्रदूषण के इस खतरनाक मिश्रण को देखते हुए मेरठ के सीएमओ (CMO) और वरिष्ठ चिकित्सकों ने हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव शर्मा ने 'खबरिलाल' के पाठकों के लिए विस्तृत सुझाव दिए हैं।
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1. हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का खतरा (Why Winter Kills?)
\r\n\r\nडॉ. संजीव शर्मा बताते हैं, "ठंड में हमारी रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) सिकुड़ जाती हैं (Vasoconstriction)। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और दिल पर खून पंप करने का दबाव अधिक पड़ता है। यही कारण है कि सर्दियों में सुबह के वक्त हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के मामले बढ़ जाते हैं।"
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- \r\n सावधानी: बीपी (Blood Pressure) के मरीज अपनी दवाएं नियमित लें। सुबह जल्दी (तड़के 4-6 बजे) वॉक पर जाने से बचें। धूप निकलने पर ही बाहर जाएं।\r\n \r\n
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2. सांस के रोगियों के लिए 'रेड अलर्ट'
\r\n\r\nAQI 300 पार होने का मतलब है हवा में PM2.5 कणों की भरमार।
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- \r\n अस्थमा/COPD: जो लोग अस्थमा के मरीज हैं, उन्हें इनहेलर हमेशा साथ रखना चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n मास्क: घर से बाहर निकलते समय N95 मास्क का प्रयोग करें। साधारण कपड़ा प्रदूषण के कणों को नहीं रोक सकता।\r\n \r\n
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3. बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल
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- \r\n निमोनिया का डर: बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। उन्हें लेयर्स (परतों) में कपड़े पहनाएं। एक मोटे जैकेट से बेहतर हैं तीन पतले गर्म कपड़े (थर्मल + स्वेटर + जैकेट)। यह हवा को ट्रैप करके गर्मी बनाए रखता है।\r\n \r\n
- \r\n सिर और पैर: शरीर की गर्मी सबसे ज्यादा सिर और पैरों से बाहर निकलती है। इसलिए टोपी और मोज़े पहनना अनिवार्य करें।\r\n \r\n
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4. खानपान (Winter Diet)
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- \r\n क्या खाएं: गुड़, तिल, मूंगफली, अदरक, लहसुन और हल्दी का सेवन बढ़ाएं। गुनगुना पानी पिएं।\r\n \r\n
- \r\n क्या न खाएं: ठंडी चीजें, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक और बासी खाना पूरी तरह बंद कर दें।\r\n \r\n
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'साइलेंट किलर' - अंगीठी और हीटर से सावधान!
\r\n\r\nहर साल सर्दियों में बंद कमरे में अंगीठी जलाने से कई परिवारों के खत्म होने की दुखद खबरें आती हैं।
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- \r\n कार्बन मोनोऑक्साइड (CO): डॉ. शर्मा चेतावनी देते हैं, "बंद कमरे में कोयले की अंगीठी या गैस हीटर जलाने से ऑक्सीजन खत्म हो जाती है और कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस गंधहीन और रंगहीन होती है। सोता हुआ व्यक्ति बेहोश हो जाता है और उसकी नींद में ही मौत हो जाती है।"\r\n \r\n
- \r\n सुरक्षा नियम: अगर हीटर या अंगीठी जला रहे हैं, तो कमरे में वेंटिलेशन (खिड़की/रोशनदान) खुला रखें। सोने से पहले इसे बंद करना न भूलें।\r\n \r\n
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\r\n\r\nखेती-किसानी - अन्नदाता के लिए 'दोधारी तलवार'
\r\n\r\nपश्चिमी यूपी एक कृषि प्रधान क्षेत्र है। मौसम का यह मिजाज फसलों के लिए वरदान भी है और अभिशाप भी।
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गेहूं के लिए सोना (Wheat Crop)
\r\n\r\nकृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, गेहूं की फसल के लिए यह ठंड किसी टॉनिक से कम नहीं है। तापमान जितना कम होगा, गेहूं की 'फूटान' (Tillering) उतनी ही अच्छी होगी और दाना मोटा होगा। इससे पैदावार बंपर होने की उम्मीद है।
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सब्जियों और सरसों के लिए खतरा (Frost Damage)
\r\n\r\nदूसरी ओर, आलू, सरसों, मटर और टमाटर की फसल के लिए 'पाला' (Frost) काल साबित हो सकता है।
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- \r\n नुकसान: जब तापमान 4 डिग्री से नीचे जाता है, तो पौधों की कोशिकाओं में मौजूद पानी जम जाता है, जिससे पौधे मर जाते हैं। इसे 'पाला मारना' कहते हैं।\r\n \r\n
- \r\n बचाव: किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे खेत में हल्की सिंचाई (Irrigation) करें। नमी होने से तापमान थोड़ा नियंत्रित रहता है। रात के समय खेत के किनारों पर धुआं करने से भी फसल को पाले से बचाया जा सकता है।\r\n \r\n
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आंकड़ों का आईना - 21 साल का इतिहास
\r\n\r\n'खबरिलाल' की रिसर्च टीम ने मौसम वेधशाला से पिछले 21 सालों के 12 जनवरी के आंकड़ों का संकलन किया है। यह चार्ट स्पष्ट करता है कि 2026 की ठंड ने कैसे इतिहास रचा है।
\r\n\r\n| \r\n वर्ष (Year) \r\n | \r\n \r\n न्यूनतम तापमान (°C) \r\n | \r\n \r\n टिप्पणी (Remark) \r\n | \r\n
| \r\n 2026 \r\n | \r\n \r\n 2.9 \r\n | \r\n \r\n ऐतिहासिक गिरावट (All Time Low) \r\n | \r\n
| \r\n 2025 \r\n | \r\n \r\n 9.9 \r\n | \r\n \r\n सामान्य \r\n | \r\n
| \r\n 2024 \r\n | \r\n \r\n 4.8 \r\n | \r\n \r\n शीतलहर \r\n | \r\n
| \r\n 2023 \r\n | \r\n \r\n 8.2 \r\n | \r\n \r\n सामान्य \r\n | \r\n
| \r\n 2022 \r\n | \r\n \r\n 7.3 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2021 \r\n | \r\n \r\n 7.0 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2020 \r\n | \r\n \r\n 7.2 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2019 \r\n | \r\n \r\n 6.1 \r\n | \r\n \r\n तेज ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2018 \r\n | \r\n \r\n 5.8 \r\n | \r\n \r\n तेज ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2017 \r\n | \r\n \r\n 7.1 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2016 \r\n | \r\n \r\n 6.9 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2015 \r\n | \r\n \r\n 8.4 \r\n | \r\n \r\n राहत \r\n | \r\n
| \r\n 2014 \r\n | \r\n \r\n 7.9 \r\n | \r\n \r\n राहत \r\n | \r\n
| \r\n 2013 \r\n | \r\n \r\n 6.5 \r\n | \r\n \r\n तेज ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2012 \r\n | \r\n \r\n 5.9 \r\n | \r\n \r\n तेज ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2011 \r\n | \r\n \r\n 6.7 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2010 \r\n | \r\n \r\n 8.9 \r\n | \r\n \r\n राहत \r\n | \r\n
| \r\n 2009 \r\n | \r\n \r\n 5.2 \r\n | \r\n \r\n शीतलहर \r\n | \r\n
| \r\n 2008 \r\n | \r\n \r\n 6.4 \r\n | \r\n \r\n मध्यम ठंड \r\n | \r\n
| \r\n 2007 \r\n | \r\n \r\n 5.1 \r\n | \r\n \r\n शीतलहर \r\n | \r\n
| \r\n 2006 \r\n | \r\n \r\n 9.1 \r\n | \r\n \r\n सामान्य (तुलनात्मक आधार वर्ष) \r\n | \r\n
(स्रोत: मौसम वेधशाला, मेरठ)
\r\n\r\nयह टेबल साफ दिखाती है कि 2009 और 2024 में पारा नीचे गया था, लेकिन 2.9 डिग्री का आंकड़ा अकल्पनीय है।
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सामाजिक प्रभाव - कैसे गुजर रही है रात?
\r\n\r\nशहर के रैन बसेरों (Shelter Homes) और फुटपाथों पर हालात बेहद दयनीय हैं।
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- \r\n रैन बसेरे फुल: नगर निगम द्वारा बनाए गए रैन बसेरे पूरी तरह भर चुके हैं। प्रशासन ने अतिरिक्त बिस्तरों और कंबलों की व्यवस्था की है।\r\n \r\n
- \r\n अलाव बने सहारा: चौराहों पर प्रशासन द्वारा जलाए गए अलाव लोगों के लिए जीवनरक्षक बने हुए हैं। रिक्शा चालक, मजदूर और राहगीर अलाव के चारों ओर सिमटे नजर आ रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n बाजार पर असर: शाम 7 बजते ही बाजारों में सन्नाटा पसर रहा है। हालांकि, मूंगफली, रेवड़ी, अंडे और सूप की दुकानों पर भारी भीड़ देखी जा रही है। गर्म कपड़ों और इलेक्ट्रिक हीटर/ब्लोअर की बिक्री में 40% तक का उछाल आया है।\r\n \r\n
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अभी परीक्षा बाकी है
\r\n\r\nप्रकृति का यह रूप स्पष्ट संकेत दे रहा है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब हमारे दरवाज़े तक आ पहुंचा है। फिलहाल, 18 जनवरी तक मेरठ और पश्चिमी यूपी के लोगों को ठंड से राहत मिलने की उम्मीद कम है। आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
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'खबरीलाल' की अपील:
\r\n\r\nइस कड़ाके की ठंड में मानवता का परिचय दें।
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- \r\n दान करें: अगर आपके पास पुराने गर्म कपड़े या कंबल हैं, तो उन्हें फेंकें नहीं, बल्कि किसी जरूरतमंद को दें।\r\n \r\n
- \r\n पशु-पक्षी: अपने घर के बाहर बेजुबान जानवरों (कुत्तों, गायों) के लिए टाट की बोरी या पुराना कपड़ा डाल दें।\r\n \r\n
- \r\n सतर्कता: कोहरे में गाड़ी धीरे चलाएं और 'फॉग लाइट्स' का इस्तेमाल करें। आपकी सुरक्षा आपके हाथ में है।\r\n \r\n
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Sabse pehle comment karne wale banein.