मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर प्रशासनिक सख्ती और राजनीतिक सरगर्मियों के बीच भारी तनाव की स्थिति पैदा हो गई है। शांतिपूर्ण प्रदर्शन और धरने के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर पुलिस और 'शोषित क्रांति दल' (Shoshit Kranti Dal - SKD) आमने-सामने आ गए हैं।Read also:-दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे: विकास और प्रकृति का अद्भुत संगम, 14 अप्रैल को पीएम मोदी देंगे सौगात; शुरुआत के 18 किलोमीटर का सफर होगा बिल्कुल फ्री
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एसकेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने मेरठ पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने अपनी तानाशाही दिखाते हुए उनके कार्यकर्ताओं को अलोकतांत्रिक तरीके से 'हाउस अरेस्ट' (नजरबंद) कर लिया है। एसकेडी का एकमात्र उद्देश्य मेट्रो प्लाजा के पास स्थित बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा परिसर की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण कराना था, जिसके लिए उन्होंने एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरने का ऐलान किया था। लेकिन प्रशासन ने इस मांग को सुनने के बजाय बल प्रयोग और नजरबंदी का रास्ता चुना है।
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क्या है पूरा विवाद? जानिए धरने का मुख्य कारण
\r\n\r\nविवाद की जड़ मेरठ शहर के प्रमुख इलाके 'मेट्रो प्लाजा' (Metro Plaza) के पास स्थापित संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमा से जुड़ी है।
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शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत द्वारा जारी की गई लिखित प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मेट्रो प्लाजा स्थित बाबा साहेब की प्रतिमा और उसके आसपास का परिसर काफी समय से प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है। वहां साफ-सफाई का घोर अभाव है। चूंकि 14 अप्रैल को पूरे देश में अंबेडकर जयंती मनाई जानी है, इसलिए एसकेडी ने प्रशासन से मांग की थी कि प्रतिमा स्थल का तत्काल सौंदर्यीकरण और सफाई की जाए।
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जब प्रशासन ने उनकी मांगों पर कोई त्वरित संज्ञान नहीं लिया, तो एसकेडी ने लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रतिमा परिसर में ही 'एक दिवसीय धरना' देने का सार्वजनिक ऐलान कर दिया था।
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धरने के ऐलान के बाद पुलिस का 'क्रैकडाउन'
\r\n\r\nजैसे ही शोषित क्रांति दल ने धरने की घोषणा की, मेरठ पुलिस (विशेषकर ब्रह्मपुरी थाना पुलिस) तुरंत हरकत में आ गई। जयंती से ठीक पहले किसी भी तरह के जमावड़े या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस ने एसकेडी कार्यकर्ताओं की घेराबंदी शुरू कर दी।
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देर रात दबिश और सुबह 6 बजे से हाउस अरेस्ट
\r\n\r\nएसकेडी प्रमुख रविकांत ने बताया कि पुलिस की दमनात्मक कार्रवाई कल देर शाम से ही शुरू हो गई थी।
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- \r\n रात में दबिश: ब्रह्मपुरी पुलिस ने सबसे पहले शोषित क्रांति दल के मेरठ महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार के आवास पर देर रात दबिश दी और उन्हें धरने में शामिल न होने की चेतावनी दी।\r\n \r\n
- \r\n सुबह से नजरबंदी: जब कार्यकर्ता नहीं माने, तो आज (धरने वाले दिन) सुबह 6:00 बजे से ही पुलिस ने महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार सहित कई अन्य प्रमुख कार्यकर्ताओं को उनके घरों के भीतर ही जबरन 'नजरबंद' (House Arrest) कर दिया। घरों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया ताकि कोई भी बाहर न निकल सके।\r\n \r\n
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पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक
\r\n\r\nसुबह-सुबह घरों के बाहर पुलिस का पहरा देखकर एसकेडी कार्यकर्ता भड़क गए। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं और ब्रह्मपुरी पुलिस के बीच इस दौरान तीखी नोकझोंक और बहस भी हुई। पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें घर से बाहर कदम नहीं रखने दिया।
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"यूपी में कानून का नहीं, पुलिस का राज है" - रविकांत
\r\n\r\nइस पूरी घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए शोषित क्रांति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
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उन्होंने अपने बयान में कहा, "उत्तर प्रदेश में अब कानून का राज पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसकी जगह 'पुलिस राज' (Police State) स्थापित हो गया है। एक लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखना, वह भी संविधान निर्माता की प्रतिमा की सफाई के लिए, क्या कोई अपराध है? आज के इस उत्तर प्रदेश में लोकतंत्र नाम की कोई जगह नहीं बची है। नागरिकों के मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सरेआम हनन किया जा रहा है।" रविकांत ने सवाल उठाया कि अगर पुलिस सफाई की मांग करने वालों को ही हाउस अरेस्ट कर लेगी, तो फिर समाज में बाबा साहेब के आदर्शों का पालन कैसे होगा?
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SHO ब्रह्मपुरी से फोन पर वार्ता: "ऊपर से सख्त आदेश हैं"
\r\n\r\nकार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट किए जाने की सूचना मिलते ही एसकेडी अध्यक्ष रविकांत ने तुरंत ब्रह्मपुरी थाने के SHO (थानाध्यक्ष) राजेश कंबोज को फोन मिलाया और पुलिस की इस कार्रवाई पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
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रविकांत ने एसएचओ से सीधे सवाल किया, "पुलिस इस तरह से मनमाने ढंग से हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कैसे कुचल सकती है?"
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SHO राजेश कंबोज का स्पष्ट जवाब: फोन पर हुई इस वार्ता में एसएचओ ब्रह्मपुरी ने पुलिस का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि:
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- \r\n "हमें ऊपर (उच्चाधिकारियों) से सख्त आदेश मिले हैं। यह धरना किसी भी हाल में नहीं होने दिया जाएगा।"\r\n \r\n
- \r\n "खुफिया इनपुट और सूचनाएं हैं कि आपके इस धरने से शहर की कानून-व्यवस्था (Law and Order) और शांति भंग हो सकती है।"\r\n \r\n
- \r\n समाधान का आश्वासन: हालांकि, एसएचओ ने रविकांत को शांत करते हुए यह भी आश्वासन दिया कि, "आपकी जो भी मांगें (प्रतिमा की सफाई और सौंदर्यीकरण) हैं, वे उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आ चुकी हैं। उन पर तेजी से अमल किया जा रहा है। आप धरना न दें, पुलिस प्रशासन आपको आश्वस्त करता है कि अगले 2 घंटे के अंदर आपकी सभी समस्याओं का निस्तारण कर दिया जाएगा।"\r\n \r\n
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एसकेडी का अल्टीमेटम: कार्यक्रम स्थगित, शाम को करेंगे निरीक्षण
\r\n\r\nपुलिस प्रशासन के आश्वासन (कि 2 घंटे में सफाई करा दी जाएगी) और एसएचओ से हुई बातचीत के बाद, शोषित क्रांति दल की कोर कमेटी ने स्थिति की समीक्षा की। शहर का माहौल न बिगड़े और प्रशासन को काम करने का समय मिल सके, इसे ध्यान में रखते हुए एसकेडी ने एक रणनीतिक कदम उठाया है।
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राष्ट्रीय अध्यक्ष रविकांत ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए बताया:
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- \r\n आंदोलन फिलहाल स्थगित: आज होने वाले 'एक दिवसीय धरना आंदोलन' को कल सुबह 8:00 बजे तक के लिए स्थगित (Postpone) कर दिया गया है।\r\n \r\n
- \r\n प्रतिनिधिमंडल करेगा निरीक्षण: एसकेडी का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल आज शाम को मेट्रो प्लाजा स्थित बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा स्थल का भौतिक निरीक्षण करेगा।\r\n \r\n
- \r\n कल की चेतावनी: यदि शाम तक पुलिस प्रशासन के वादे के मुताबिक प्रतिमा स्थल का सौंदर्यीकरण और समुचित साफ-सफाई नहीं मिलती है, तो कल सुबह 8:00 बजे से पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी और किसी भी पुलिसिया दबाव के आगे नहीं झुकेगी।\r\n \r\n
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जयंती से पहले प्रशासन की 'अग्निपरीक्षा'
\r\n\r\nमेरठ में हुई यह घटना स्पष्ट करती है कि 14 अप्रैल की अंबेडकर जयंती को लेकर पुलिस प्रशासन कितना हाई-अलर्ट पर है। प्रशासन किसी भी कीमत पर सड़क पर भीड़ या धरना नहीं चाहता, भले ही इसके लिए 'प्रिवेंटिव हाउस अरेस्ट' (निवारक नजरबंदी) का सहारा लेना पड़े। हालांकि, प्रतिमा की सफाई जैसी बुनियादी मांग को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हुआ यह टकराव प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन आज शाम तक एसकेडी की मांग पूरी कर पाता है, या कल सुबह मेरठ में फिर से कोई नया राजनीतिक घमासान देखने को मिलेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.