मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में नगर निगम कार्यकारिणी सदस्यों का चुनाव आज भारी हंगामे, आपसी विवाद और चुनाव अधिकारी पर पक्षपात के गंभीर आरोपों के बाद निरस्त कर दिया गया है। शास्त्रीनगर के बी ब्लॉक में चल रहे चुनाव में बीजेपी के पार्षदों के बीच जमकर खींचतान और गर्मागर्मी देखने को मिली, जिसके बाद नगर आयुक्त से चुनाव निरस्त करने की मांग की गई।READ ALSO:-दिल दहला देने वाली घटना: पति ने पत्नी को जुए में हारा, 8 लोगों ने किया सामूहिक दुष्कर्म, ससुर-जेठ पर भी लगा शोषण का आरोप; तेजाब से जलाकर नदी में धकेला
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बीजेपी महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी और महापौर ने चुनाव अधिकारी पर पक्षपात का आरोप लगाया और उनकी जांच की मांग की। आरोपों के केंद्र में चुनाव अधिकारी द्वारा 4 वोटों को बिना स्पष्टीकरण के निरस्त करना था, जिससे पूरा विवाद शुरू हुआ। चुनाव अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि उन पर आरोप लग रहे थे, जिसके कारण चुनाव को निरस्त कर दिया गया।
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बीजेपी महानगर अध्यक्ष और पार्षद में जमकर बहस

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चुनाव में सबसे बड़ा विवाद बीजेपी के ही दो प्रमुख नेताओं के बीच देखने को मिला। वोटों की गिनती के दौरान बीजेपी महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी और वार्ड 50 के पार्षद संजय सैनी आपस में भिड़ गए। दोनों के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें विवेक रस्तोगी ने संजय सैनी को 'तमीज में बात करने' की चेतावनी दी।
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इस विवाद के तुरंत बाद, महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने के आरोप में पार्षद संजय सैनी की सदस्यता रद करने का एलान कर दिया।
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    अनुशासनहीनता का आरोप: महानगर अध्यक्ष का कहना है कि संजय सैनी ने अनुशासनहीनता की है। पार्टी द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होने से पहले ही संजय ने पर्चा दाखिल कर दिया था और कहने के बावजूद वापस नहीं लिया।
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नामांकन को लेकर बवाल: 'एक मिनट की देरी'

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इससे पहले सोमवार सुबह भी पर्चा जमा करने को लेकर भाजपा पार्षदों में आपस में बहस हुई। चुनाव में कुल 8 भाजपा पार्षदों ने नामांकन किया था।
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नामांकन फॉर्म भरने की समय सीमा के दौरान, बीजेपी पार्षद संजय सैनी एक मिनट की देरी से पर्चा जमा करने पहुंचे। इस पर दूसरे पार्षद अनुज वशिष्ठ ने चुनाव अधिकारी से मांग की कि संजय सैनी का पर्चा समय सीमा खत्म होने के कारण निरस्त कर दिया जाए।
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संजय सैनी ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह भी भारतीय जनता पार्टी के सिपाही हैं और हर किसी को नियमानुसार चुनाव लड़ने का हक है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षद अनुज वशिष्ठ और संदीप रेवड़ी चुनाव को सही तरीके से नहीं होने देना चाहते हैं।
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सांसदों को नहीं मिले बैलेट पेपर, हुई फटकार

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वोटिंग की प्रक्रिया में देरी होने पर भाजपा के वरिष्ठ नेता भी मौके पर पहुंचे। दोपहर 3:10 बजे राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई, सांसद अरुण गोविल, और एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज मतदान केंद्र पहुंचे। जब उन्होंने वोट डालने के लिए बैलेट पेपर मांगा, तो चुनाव अधिकारी उन्हें पेपर उपलब्ध नहीं करा सके।
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बैलेट पेपर न मिलने पर डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेई ने चुनाव अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। वोटिंग में देरी का मुख्य कारण पार्षद संजय सैनी के नामांकन पत्र को स्वीकार या निरस्त करने पर चल रही लंबी बहस थी, जिस पर चुनाव अधिकारी कोई फैसला नहीं ले पा रहे थे। 
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मेरठ नगर निगम कार्यकारिणी का चुनाव, बीजेपी पार्षदों के आपसी वर्चस्व की लड़ाई और चुनाव अधिकारी पर पक्षपात के आरोपों के चलते निरस्त कर दिया गया। मेरठ नगर निगम चुनाव निरस्त होने की घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के भीतर गहरा आंतरिक कलह है, जिसकी परिणति महानगर अध्यक्ष द्वारा पार्षद संजय सैनी की सदस्यता रद्द करने के रूप में हुई है। चुनाव अधिकारी के असमंजस और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार चुनाव को रद्द कर दिया गया।
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