मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से मानवता को झकझोर देने वाला एक अत्यंत गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर समाज की रूढ़िवादी सोच, गैर-कानूनी पंचायतों के मनमाने फैसलों और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ महज साढ़े 13 साल की एक मासूम किशोरी के साथ पहले दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया और उसके बाद मामले को रफा-दफा करने के लिए तथाकथित पंचायतों की आड़ में उसका बाल विवाह (निकाह) करा दिया गया। अब जब इस मामले में न्याय की मांग उठी है और पीड़िता ने अपने पति के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया है, तो पुलिस की गहन जांच में चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस ने इस अमानवीय कृत्य में शामिल मां, मामा और ससुराल पक्ष के लोगों समेत कुल आठ लोगों को बाल विवाह कराने का मुख्य आरोपी बना दिया है।
\r\n\r\nघटना की पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुई इस खौफनाक दास्तां की शुरुआत?
\r\n\r\nप्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वीभत्स घटना की शुरुआत 7 अक्टूबर 2025 को हुई थी। उस दिन पीड़िता की मां अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी या अन्य काम के सिलसिले में घर से बाहर गई हुई थी। घर पर नाबालिग किशोरी अकेली थी। इसी बात का फायदा उठाकर मकान मालिक के बालिग बेटे, जिसका नाम इस्राइल बताया जा रहा है, ने मौका पाकर उनके कमरे में जबरन प्रवेश किया।
\r\n\r\nआरोपी ने इस नासमझ और नाबालिग किशोरी की मजबूरी और अकेलेपन का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। जब शाम को किशोरी की मां काम से घर लौटी, तो सहमी और डरी हुई बेटी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। एक मां के लिए यह खबर किसी वज्रापात से कम नहीं थी। इसके बाद मां ने तुरंत थाने में तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई। लेकिन कानून का पालन होने और निष्पक्ष जांच आगे बढ़ने से पहले ही स्थानीय स्तर पर तथाकथित पंचायतों और प्रभावशाली लोगों का हस्तक्षेप शुरू हो गया।
\r\n\r\nपंचायत का तुगलकी फरमान: न्याय देने के बजाय करा दिया निकाह
\r\n\r\nइस गंभीर आपराधिक मामले में कानून का सहारा लेने के बजाय गाँव या स्थानीय स्तर पर एक पंचायत बुलाई गई। इस पंचायत ने कानून और न्याय की धज्जियां उड़ाते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया जो पूरी तरह से असंवैधानिक और अमानवीय था। पंचायत ने आरोपी को सजा देने या सलाखों के पीछे भेजने के बजाय पीड़िता का निकाह उसी आरोपी युवक के साथ कराने का मनमाना निर्णय ले लिया।
\r\n\r\nपंचायत ने अपने इस फैसले में एक शर्त रखी कि चूंकि लड़की अभी नाबालिग (साढ़े 13 वर्ष की) है, इसलिए वह बालिग होने के बाद ही अपने पति के साथ ससुराल जाएगी। मामले को दबाने और परिवार को आर्थिक प्रलोभन देने के लिए आरोपी पक्ष के लोगों ने किशोरी के नाम पर 51 गज के एक मकान का बैनामा भी करा दिया। घटना के बाद से पीड़िता का परिवार उसी मकान में रहने लगा। इस तरह तथाकथित पंचायतों ने एक जघन्य बलात्कारी को बचाने के लिए एक बच्ची की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर दिया।
\r\n\r\n'गोद भराई' के बहाने बुलाया और फिर से ढाया जुल्म
\r\n\r\nइस काले अध्याय में नया मोड़ तब आया जब 23 अगस्त को आरोपी पक्ष एक बार फिर किशोरी के घर पहुंचा। उन्होंने घर में 'गोद भराई' के कार्यक्रम का हवाला देते हुए लड़की को महज दो दिन के लिए अपने घर ले जाने की अनुमति मांगी। दोनों पक्षों की आपसी सहमति और इस बात के आश्वासन के साथ कि पति उसके साथ कोई गलत काम नहीं करेगा, किशोरी को ससुराल भेज दिया गया।
\r\n\r\nलेकिन दरिदों के मन में इंसानियत और नैतिकता का कोई भाव नहीं था। ससुराल पहुंचते ही उस मासूम के साथ एक बार फिर से वहीशीपन दिखाया गया। पति ने उसके साथ फिर से दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। जब किसी तरह वह अपने मायके लौटी, तो उसने अपने ऊपर हुए इस अमानवीय अत्याचार की पूरी जानकारी अपने स्वजन को दी। इस बार परिवार ने किसी पंचायत के दबाव में आने के बजाय सीधा कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
\r\n\r\nपुलिस की बड़ी कार्रवाई: बाल विवाह कराने वाले 8 लोगों पर भी कसा शिकंजा
\r\n\r\nस्वजन पीड़िता को लेकर तुरंत थाने पहुंचे और पुलिस को पूरी घटना से अवगत कराया। किशोरी की स्पष्ट तहरीर के आधार पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लेते हुए आरोपी पति के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया। इसके बाद नियमानुसार पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया।
\r\n\r\nपुलिस की गहन विवेचना और जांच में जब तह तक पड़ताल की गई, तो एक और बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस को पता चला कि जिस लड़की की शादी कराई गई थी, वह कानूनी रूप से बाल विवाह था। इस पर पुलिस ने कानून का दायरा बढ़ाते हुए अत्यंत सख्त कदम उठाया। पुलिस ने किशोरी की मां, उसके मामा और ससुराल पक्ष के 6 अन्य लोगों को भी इस अवैध बाल विवाह को बढ़ावा देने और संपन्न कराने का मुख्य आरोपी बना दिया है। इस तरह कुल 8 लोगों के नाम इस गंभीर मुकदमे में शामिल किए गए हैं, जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बाल विवाह और बलात्कार जैसे मामलों में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
\r\n\r\nयह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे समाज की रूढ़िवादिता, गैर-कानूनी पंचायतें और कानूनों की अनदेखी मासूमों की जिंदगी को नर्क बना देती है। बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप है और बलात्कार एक जघन्य अपराध। समाज को अपनी इस संकुचित सोच से बाहर निकलना होगा और बेटियों की सुरक्षा के लिए आगे आना होगा। पुलिस और प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई एक कड़ा संदेश देती है कि अपराध और कुप्रथाओं को छिपाने वाले मददगार भी कानून की नजर में उतने ही बड़े अपराधी हैं।
\r\n\r\nDisclaimer (अस्वीकरण):
\r\n\r\nइस समाचार में दी गई सभी जानकारियां पुलिस रिपोर्ट, प्राथमिक दर्ज एफआईआर और उपलब्ध तथ्यात्मक विवरणों पर आधारित हैं। हमारा उद्देश्य केवल पाठकों तक अपराध और समाज से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं पहुंचाना है। किसी भी कानूनी विवाद या प्रक्रिया में न्यायालय और पुलिस के आधिकारिक आंकड़े ही अंतिम माने जाएंगे। यह पोर्टल किसी भी प्रकार के संवेदनशीलता से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच की पैरवी करता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.