राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के परिवहन इतिहास में एक नया और स्वर्णिम अध्याय जुड़ चुका है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सराय काले खां से लेकर मेरठ के मोदीपुरम तक 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का पूर्ण रूप से उद्घाटन किए जाने के बाद, नमो भारत और मेरठ मेट्रो (Namo Bharat and Meerut Metro) ने रफ्तार भरनी शुरू कर दी है। यह देश का पहला ऐसा अनूठा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जहां एक ही ट्रैक और एक ही स्टेशन से रैपिड रेल (नमो भारत) और सिटी मेट्रो (मेरठ मेट्रो) दोनों का सफल संचालन हो रहा है।READ ALSO:-मेरठ: दलित परिवार पर दबंगों का जानलेवा हमला, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल!, पीड़ित ने NCSC से लगाई न्याय की गुहार
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इस मेगा प्रोजेक्ट के शुरू होने से मेरठ, गाजियाबाद, मोदीनगर और मुजफ्फरनगर तक के लाखों लोगों की जीवनशैली में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। दशकों से दिल्ली-मेरठ राजमार्ग (NH-58) पर लगने वाले भारी जाम, प्रदूषण और यात्रा की थकान से अब शहरवासियों को पूरी तरह से निजात मिल गई है। लेकिन, सिक्के का दूसरा पहलू भी है। नमो भारत और मेरठ मेट्रो की इस शानदार सफलता और बढ़ती लोकप्रियता ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) यानी यूपी रोडवेज की रातों की नींद उड़ा दी है। यात्रियों के रुझान में आए इस अचानक और बड़े बदलाव के कारण रोडवेज को हर दिन लाखों रुपये के भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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इस विस्तृत और विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम नमो भारत के प्रभाव, आम जनता के अनुभवों, अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर और यूपी रोडवेज के सामने खड़ी नई चुनौतियों का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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नमो भारत और मेरठ मेट्रो: जाम के झाम से आम जनता को मिली बड़ी और स्थायी मुक्ति
\r\n\r\nएक समय था जब दिल्ली से मेरठ की महज 70-80 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को तीन से चार घंटे का लंबा और थका देने वाला समय लगता था। मुरादनगर और मोदीनगर का भयंकर जाम किसी भी यात्री के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं होता था। लेकिन अब, नमो भारत और मेरठ मेट्रो के पूर्ण संचालन के बाद मेरठ की सड़कों पर वाहनों की संख्या और दबाव में स्पष्ट रूप से भारी कमी महसूस की जा रही है।
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समय की बचत और यात्रा में अभूतपूर्व सुविधा नमो भारत 160 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम रफ्तार से दौड़ती है, जबकि मेरठ मेट्रो 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से शहर के अंदर की कनेक्टिविटी को आसान बना रही है। मेरठ के निवासी शिव प्रकाश अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं, "पहले जब हम दिल्ली जाते थे, तो एक घंटा तो सिर्फ मेरठ शहर को पार करने और परतापुर तक पहुंचने में ही लग जाता था। अब स्थिति बिल्कुल बदल चुकी है। अब महज 50 से 55 मिनट में 82 किलोमीटर का पूरा सफर आसानी से तय हो जाता है। मेरठ से सराय काले खां पहुंचने में एक घंटे से भी कम समय लग रहा है।" यह समय की बचत केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की उत्पादकता (Productivity) को बढ़ाने वाला एक बड़ा कारक बन गई है। सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने से ट्रैफिक पुलिस को भी यातायात नियंत्रित करने में आसानी हो रही है।
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सुरक्षित यात्रा ने बढ़ाया युवाओं और महिलाओं का आत्मविश्वास
\r\n\r\nसार्वजनिक परिवहन की सफलता केवल उसकी गति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उसकी सुरक्षा और स्वच्छता पर भी निर्भर करती है। नमो भारत इस कसौटी पर पूरी तरह से खरी उतरी है।
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युवा यात्री शिवम कनौजिया बताते हैं, "पहले बस या अपनी बाइक से दिल्ली जाने में 3 घंटे लगते थे और सफर की धूल-मिट्टी से कपड़े पूरी तरह गंदे हो जाते थे। किसी भी मीटिंग या कॉलेज पहुंचने से पहले ही थकान हावी हो जाती थी। अब दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) तक पहुंचने में मिनटों का समय लगता है। एसी कोच और शानदार सुविधाओं के कारण अब कपड़े गंदे होने की टेंशन नहीं रहती, जिससे आत्मविश्वास (Self-confidence) में भारी वृद्धि हुई है।"
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महिलाओं के लिए भी यह सेवा एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। सीसीटीवी कैमरे, सुरक्षा गार्ड, महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें और सुरक्षित स्टेशन परिसर ने महिला यात्रियों को एक सुरक्षित माहौल प्रदान किया है। मेरठ निवासी विजय यादव का भी यही कहना है कि दिल्ली रोड और उसके आसपास के क्षेत्रों से गुजरना पहले दूभर था, लेकिन अब नमो भारत और मेरठ मेट्रो चलने से सड़कों पर निजी वाहनों में निश्चित ही कमी आई है।
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अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रियल एस्टेट पर पड़ने वाला व्यापक प्रभाव
\r\n\r\nजब भी किसी क्षेत्र में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी आती है, तो उसका सीधा और सकारात्मक असर वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। मेरठ और इसके आसपास के इलाके अब दिल्ली के एक सहज विस्तार (Seamless Extension) के रूप में विकसित हो रहे हैं।
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प्रॉपर्टी के दामों में उछाल और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी वरिष्ठ पत्रकार अनुज कौशिक इस बदलाव का विश्लेषण करते हुए कहते हैं, "अब धीरे-धीरे मेरठ में भी बिल्कुल दिल्ली और गुरुग्राम की तरह ही डेवलपमेंट और कॉरपोरेट बदलाव दिखेगा। कनेक्टिविटी बेहतर होने से प्रॉपर्टी और रियल एस्टेट के दामों में पहले ही उछाल आना शुरू हो गया है।" युवा कारोबारी अफजाल मानते हैं कि पहले दिल्ली के थोक बाजारों (जैसे चांदनी चौक या सदर बाजार) से मेरठ आवाजाही करने में ही व्यापारियों का पूरा दिन खत्म हो जाता था। अब व्यापारी सुबह जाकर दोपहर तक अपना माल लेकर वापस मेरठ आ सकते हैं। इससे स्थानीय व्यापार और सप्लाई चेन को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है।
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छात्रों के लिए बना वरदान, शिक्षा के नए द्वार खुले युवा पत्रकार प्रदीप मावी इस परियोजना के शैक्षणिक महत्व को रेखांकित करते हुए बताते हैं कि इसका फायदा सिर्फ मेरठ के लोगों को ही नहीं, बल्कि मुजफ्फरनगर और खतौली तक के युवाओं को भी हो रहा है। जो बच्चे दिल्ली उच्च शिक्षा के लिए जाते थे, वे अब बिना हॉस्टल का भारी खर्च उठाए, रोजाना आसानी से समय पर अपने शिक्षण संस्थानों में पहुंच रहे हैं।
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किराये को लेकर जनता की राय: "किराया कम होना चाहिए" हालांकि इस अत्याधुनिक सुविधा की चौतरफा तारीफ हो रही है, लेकिन कुछ वर्गों की अपनी चिंताएं भी हैं। स्थानीय निवासी चौधरी प्रहलाद कहते हैं, "नमो भारत और मेट्रो का संचालन बेहद अच्छा और सुविधाजनक है। हालांकि, एक आम आदमी और दिहाड़ी मजदूर के लिए इसका नियमित किराया अभी भी थोड़ा ज्यादा है। यदि सरकार दैनिक यात्रियों के लिए मासिक पास में भारी छूट दे या मूल किराया थोड़ा कम करे, तो इसका फायदा समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा।"
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यूपी रोडवेज (UPSRTC) पर बड़ा प्रहार: हर दिन 10 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान
\r\n\r\nजहां एक ओर आम जनता नमो भारत और मेरठ मेट्रो की सुविधाओं का जश्न मना रही है, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के मेरठ रीजन के कार्यालयों में चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। विश्वस्तरीय और वातानुकूलित रेल सेवा के शुरू होने का सीधा और सबसे बड़ा आर्थिक प्रभाव रोडवेज की बसों के संचालन पर पड़ा है।
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यूपीएसआरटीसी के मेरठ क्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक (Regional Manager) संदीप नायक इस स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताते हैं, "परिवहन निगम पर पहला बड़ा प्रभाव तो उसी वक्त पड़ गया था, जब मेरठ दक्षिण (Meerut South) स्टेशन तक नमो भारत ट्रेन का संचालन दिल्ली की ओर शुरू हुआ था। अब चूंकि पूरा कॉरिडोर खुल गया है और मोदीपुरम से लेकर सराय काले खां तक नमो भारत का सीधा संचालन हो रहा है, ऐसे में इसका निश्चित ही बहुत बड़ा और सीधा असर परिवहन निगम की आय पर पड़ रहा है।"
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10 से 20 प्रतिशत तक घटी रोडवेज बसों के यात्रियों की संख्या आंकड़ों की बात करें तो स्थिति रोडवेज के लिए काफी चिंताजनक है। क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप नायक के अनुसार, वर्तमान में रमजान का पवित्र महीना चल रहा है, जिसमें आमतौर पर भी यात्रियों की आवाजाही थोड़ी कम हो जाती है। इसलिए अभी पूरे सटीक आंकड़ों का अंतिम आकलन करना बाकी है।
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लेकिन, वे स्पष्ट रूप से स्वीकार करते हैं, "यह तो निश्चित है कि शहर के भीतर से नमो भारत और मेट्रो के पूर्ण रूप से चलने के बाद यूपी रोडवेज को प्रतिदिन लगभग 10 लाख रुपये के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है। दिल्ली-मेरठ रूट पर हमारी बसों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में सीधे तौर पर 10 से 20 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी जा रही है।" यात्री अब बसों के धक्के खाने, धूल फांकने और घंटों जाम में फंसने के बजाय थोड़े अधिक पैसे देकर आरामदायक और वातानुकूलित नमो भारत को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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नुकसान की भरपाई के लिए रोडवेज की नई और रणनीतिक 'प्लानिंग'
\r\n\r\nलगातार हो रहे इस आर्थिक नुकसान को देखते हुए यूपीएसआरटीसी ने हाथ पर हाथ धरकर बैठने के बजाय एक नई रणनीति और 'प्लान बी' (Plan B) पर काम करना शुरू कर दिया है। निगम जानता है कि वह स्पीड और लग्जरी में नमो भारत का मुकाबला नहीं कर सकता, लेकिन वह 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' (Last-Mile Connectivity) में अपनी उपयोगिता साबित कर सकता है।
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लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर विशेष जोर क्षेत्रीय प्रबंधक संदीप नायक कहते हैं कि निगम इस वास्तविकता को स्वीकार करता है कि जो रोडवेज बसें दिल्ली से मेरठ के बीच चलती थीं, वे ट्रैफिक और जाम में काफी फंसी रहती थीं। ऐसे में अब परिवहन निगम अपनी रणनीति बदल रहा है।
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- \r\n स्टेशनों से फीडर बस सेवा: रोडवेज अब इस बात पर फोकस कर रहा है कि जो हजारों यात्री नमो भारत ट्रेन से मेरठ के विभिन्न स्टेशनों (जैसे भैंसाली, बेगमपुल, या मेरठ साउथ) पर उतरेंगे, उन्हें उनके अंतिम गंतव्य (जैसे आस-पास के गांवों, कस्बों या अन्य जिलों) तक पहुंचाने के लिए स्टेशनों के ठीक बाहर रोडवेज की बसों की निर्बाध उपलब्धता कराई जाए।\r\n \r\n
- \r\n हाईवे पर समय की बचत: जो बसें पहले शहर के अंदरूनी जाम में घंटों फंसी रहती थीं, उन्हें अब बाईपास और एक्सप्रेसवे जैसे खुले हाईवे पर संचालित किया जाएगा। इससे बसों के चक्कर (Trips) बढ़ेंगे, समय का सदुपयोग होगा और संचालन लागत में कमी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n नए रूटों की तलाश: दिल्ली-मेरठ के मुख्य रूट से कुछ बसों को हटाकर उन्हें उन ग्रामीण और अर्ध-शहरी रूटों पर डायवर्ट किया जा रहा है जहां अभी भी परिवहन के साधनों की भारी कमी है।\r\n \r\n
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डिजिटल इंडिया की झलक: प्रत्येक टिकट पर पाएं लॉयल्टी पॉइंट्स और मुफ्त यात्रा
\r\n\r\nनमो भारत और मेरठ मेट्रो केवल अपनी गति के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अत्याधुनिक डिजिटल टिकटिंग प्रणाली के लिए भी जानी जा रही है। यह प्रणाली यात्रियों को 'डिजिटल इंडिया' का एक शानदार अनुभव प्रदान कर रही है, जहां कैशलेस यात्रा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
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नमो भारत कनेक्ट ऐप और एनसीएमसी (NCMC) कार्ड के फायदे एनसीआरटीसी (NCRTC) ने यात्रियों की सुविधा के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (NCMC) और 'नमो भारत कनेक्ट ऐप' (Namo Bharat Connect App) की शुरुआत की है। इन डिजिटल माध्यमों से यात्रा करने पर यात्रियों को न केवल लाइनों में लगने से छुटकारा मिलता है, बल्कि उन्हें आकर्षक 'लॉयल्टी पॉइंट्स' (Loyalty Points) भी दिए जा रहे हैं।
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- \r\n पॉइंट्स का गणित: यदि आप एनसीएमसी कार्ड या ऐप के जरिए टिकट बुक करते हैं, तो यात्रा पर खर्च किए गए प्रत्येक 1 रुपये पर 1 लॉयल्टी पॉइंट आपके खाते में जमा हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n पॉइंट्स की कीमत: प्रत्येक लॉयल्टी पॉइंट का मौद्रिक मूल्य 10 पैसे के बराबर तय किया गया है। उदाहरण के लिए, यदि कोई यात्री अपनी यात्रा पर 100 रुपये खर्च करता है, तो उसे 100 पॉइंट मिलते हैं, जिनकी कीमत 10 रुपये के बराबर होती है।\r\n \r\n
- \r\n मुफ्त यात्रा का लाभ: जब यात्री के खाते में न्यूनतम 300 लॉयल्टी पॉइंट्स (यानी 30 रुपये की वैल्यू) इकट्ठे हो जाते हैं, तो वह इन पॉइंट्स को रिडीम (Redeem) करके नमो भारत या मेरठ मेट्रो में बिल्कुल मुफ्त यात्रा का आनंद ले सकता है।\r\n \r\n
- \r\n पास की सुविधा: यदि कोई नियमित यात्री पांच-ट्रिप (5-Trip) का पास लेता है, तो उसे अपनी सभी पांचों यात्राओं का उपयोग निर्धारित 7 दिनों की अवधि के भीतर करना आवश्यक होता है।\r\n \r\n
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इसके अलावा, सभी स्टेशनों और ट्रेनों के भीतर मुफ्त और हाई-स्पीड वाई-फाई (Wi-Fi) की सुविधा भी उपलब्ध है। इससे यात्री आसानी से अपने मोबाइल से डिजिटल पेमेंट कर सकते हैं, टिकट जनरेट कर सकते हैं और यात्रा के दौरान अपना जरूरी काम भी निपटा सकते हैं। स्टेशन पर लगी टिकट वेंडिंग मशीन (TVM) और टिकट रीडर के माध्यम से यात्री अपने जमा लॉयल्टी पॉइंट्स का बैलेंस भी तुरंत चेक कर सकते हैं।
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पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण में नमो भारत की अहम भूमिका
\r\n\r\nदिल्ली-एनसीआर की सबसे बड़ी और जानलेवा समस्या 'वायु प्रदूषण' (Air Pollution) रही है। सर्दियों के मौसम में तो यह क्षेत्र गैस चैंबर में तब्दील हो जाता है। ऐसे में नमो भारत और मेरठ मेट्रो जैसी इलेक्ट्रिक और मास ट्रांजिट प्रणाली पर्यावरण के लिए एक संजीवनी बनकर उभरी है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के चालू होने से रोजाना लाखों लोग अपनी निजी कारों, टैक्सियों और डीजल से चलने वाली बसों को छोड़कर इलेक्ट्रिक रेल का उपयोग करेंगे।
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- \r\n कार्बन उत्सर्जन में कमी: एक अनुमान के अनुसार, इस परियोजना से सालाना लाखों टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन में कमी आएगी।\r\n \r\n
- \r\n पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5): हाईवे पर वाहनों की संख्या कम होने से टायर के घर्षण और धुएं से उत्पन्न होने वाले खतरनाक PM 2.5 और PM 10 कणों के स्तर में भारी गिरावट आने की उम्मीद है। बहरहाल, आम आदमी को जो बड़ी राहत मिली है, उसका सीधा असर न केवल उनके बैंक बैलेंस और समय पर पड़ेगा, बल्कि उनके फेफड़ों की सेहत पर भी पड़ेगा। यह परियोजना सस्टेनेबल डेवलपमेंट (Sustainable Development) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।\r\n \r\n
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एक नए, आधुनिक और विकसित एनसीआर (NCR) की मजबूत नींव
\r\n\r\nअंततः, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नमो भारत और मेरठ मेट्रो का पूर्ण रूप से शुरू होना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का पूरा होना नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय परिदृश्य में एक युगांतरकारी बदलाव है। जहां एक ओर यह 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन लाखों युवाओं, व्यापारियों और महिलाओं के लिए प्रगति का नया मार्ग प्रशस्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर यह यूपी रोडवेज जैसे पारंपरिक परिवहन निगमों के सामने नई चुनौतियां भी पेश कर रही है।
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रोडवेज को हो रहा 10 लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान इस बात का संकेत है कि जनता अब गुणवत्ता, समय की पाबंदी और सुविधा के लिए पैसे खर्च करने को तैयार है। अब रोडवेज को भी अपने इंफ्रास्ट्रक्चर और कार्यप्रणाली को समय के साथ अपग्रेड करना होगा। अत्याधुनिक स्टेशनों, अंडरग्राउंड टनल (जैसे बेगमपुल), लॉयल्टी रिवॉर्ड्स और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक के साथ, नमो भारत ने भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मायने हमेशा के लिए बदल दिए हैं। आने वाले वर्षों में, इस मॉडल को देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी लागू किया जाएगा, जो 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।
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प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नमो भारत रैपिड रेल और मेरठ मेट्रो के 82 किमी लंबे कॉरिडोर के उद्घाटन के बाद, दिल्ली से मेरठ का सफर 55 मिनट में सिमट गया है। इससे जनता को भयंकर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से स्थायी मुक्ति मिली है। महिलाओं और युवाओं के लिए यह सुरक्षित और सुगम यात्रा का नया विकल्प बन गया है। स्मार्ट एनसीएमसी टिकटिंग के साथ लॉयल्टी पॉइंट्स से मुफ्त यात्रा का लाभ भी मिल रहा है। हालांकि, इस अत्याधुनिक सुविधा के कारण यूपी रोडवेज (UPSRTC) को भारी झटका लगा है; उनके यात्रियों में 20% तक की कमी आई है, जिससे निगम को रोजाना लगभग 10 लाख रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके समाधान के रूप में रोडवेज अब स्टेशनों से लास्ट-माइल कनेक्टिविटी और हाईवे रूटों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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