मेरठ (Meerut News): मेरठ महानगर में विकास कार्यों में लापरवाही और जनता की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कड़ा संदेश आज मेरठ के प्रथम नागरिक और महापौर हरिकांत आहलुवालिया (Mayor Harikant Ahluwalia) ने प्रशासनिक अधिकारियों को दिया। शहर के वार्ड 15 और 38 (भोला रोड) में पिछले एक साल से नर्क समान जीवन जी रहे लोगों के सब्र का बांध जब टूटा, तो मेयर को खुद सड़कों पर उतरना पड़ा।READ ALSO:-मेरठ के आसमान में जल्द उड़ेंगे बड़े विमान: परतापुर हवाई पट्टी के 'एयरपोर्ट' बनने का रास्ता साफ, शुरू हुई कोआर्डिनेट प्रक्रिया
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बृहस्पतिवार, 5 फरवरी 2026 को महापौर ने भोला रोड क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। सड़कों पर घुटनों तक कीचड़, गहरे गड्ढे और जलभराव देखकर मेयर का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने मौके से ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों को फोन लगाया और ऐसी फटकार लगाई कि महकमे में हड़कंप मच गया।
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"सरकार के खिलाफ नारेबाजी आपकी वजह से होती है"

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निरीक्षण के दौरान मेयर हरिकांत आहलुवालिया का रौद्र रूप देखने को मिला। उन्होंने PWD के अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी। मेयर ने कहा:
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"आप लोग एयर कंडीशन कमरों में बैठे रहते हैं और जनता यहाँ कीचड़ में गिर रही है। जिन कुर्सियों पर आप बैठे हैं, उन्हें उखाड़ दिया जाएगा। काम में देरी और लापरवाही आपकी तरफ से होती है, लेकिन जनता सरकार और पार्टी के खिलाफ नारेबाजी करती है। यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
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मेयर ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे दफ्तरों से बाहर निकलें और खुद देखें कि जनता किस हाल में जी रही है। उन्होंने कहा, "अगर हम जनता के लिए सड़कों पर धूल फांक सकते हैं, तो आपको भी आना पड़ेगा।"
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क्या था पूरा मामला: क्यों उबल पड़ी जनता?

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यह पूरा विवाद भोला रोड (Bhola Road) के वार्ड 15 और वार्ड 38 से जुड़ा है। यह इलाका मेरठ के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार:
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    1 साल से सड़क गायब: पिछले एक साल से यहां मुख्य सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। सड़क पर इतने गहरे गड्ढे हैं कि यह पता ही नहीं चलता कि गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढे।
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    रोजाना हादसे: स्थानीय लोगों ने बताया कि आए दिन ई-रिक्शा पलटते हैं, बुजुर्ग और बच्चे गिरकर चोटिल होते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह रास्ता किसी खतरे से खाली नहीं है।
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    जलभराव: हल्की सी बारिश में भी यहां तालाब जैसा नजारा हो जाता है। जल निकासी की कोई व्यवस्था न होने से गंदा पानी लोगों के घरों के सामने जमा रहता है।
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विरोध प्रदर्शन: 'मुर्दाबाद' से 'जिंदाबाद' तक का सफर

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प्रशासन की नींद तब टूटी जब स्थानीय लोगों का धैर्य जवाब दे गया। एक दिन पहले ही गुस्साए स्थानीय निवासियों ने भोला रोड पर जाम लगा दिया था। आक्रोशित भीड़ ने भाजपा (BJP) और स्थानीय नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की थी और 'मुर्दाबाद' के नारे लगाए थे।
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इस विरोध प्रदर्शन की गूंज जब मेयर तक पहुंची, तो उन्होंने तत्काल संज्ञान लिया। बृहस्पतिवार को जब मेयर हरिकांत आहलुवालिया खुद कीचड़ भरे रास्ते पर चलकर लोगों के बीच पहुंचे, तो माहौल एकदम बदल गया।
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जनता का बदला मूड: मेयर ने जैसे ही अधिकारियों को फटकार लगाई और जल्द से जल्द सड़क निर्माण शुरू कराने का ठोस आश्वासन दिया, वैसे ही विरोध कर रही भीड़ का गुस्सा शांत हो गया। जो लोग कल तक नेताओं को कोस रहे थे, वे ही मेयर की सक्रियता देखकर "हरिकांत आहलुवालिया जिंदाबाद" और "भाजपा जिंदाबाद" के नारे लगाने लगे।
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एक स्थानीय निवासी ने कहा, "एक साल से हम अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं था। आज पहली बार कोई बड़ा जनप्रतिनिधि हमारे बीच आया और हमारी पीड़ा को समझा।"
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अधिकारियों को अल्टीमेटम: "हवा में बातें न करें"

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महापौर ने निरीक्षण के दौरान PWD के अधिकारियों से दो टूक सवाल पूछे:
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    सड़क निर्माण में इतनी देरी क्यों हुई?
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    टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काम क्यों नहीं शुरू हुआ?
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    जल निकासी का प्लान क्या है?
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उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कागजी घोड़े दौड़ाना बंद करें और धरातल पर काम करके दिखाएं। मेयर ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय सीमा के भीतर काम शुरू नहीं हुआ और गुणवत्ता (Quality) में कोई कमी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शासन स्तर पर लिखत-पढ़त की जाएगी।
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मेरठ की सड़कों का हाल: एक बड़ी चुनौती

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भोला रोड की समस्या मेरठ की अकेली समस्या नहीं है। शहर के कई बाहरी और आंतरिक इलाकों में सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन डालने के नाम पर सड़कें खोदी गईं, लेकिन उन्हें समय पर भरा नहीं गया। नगर निगम (Municipal Corporation) और PWD के बीच अक्सर सीमा विवाद और जिम्मेदारी को लेकर गेंद एक-दूसरे के पाले में डालने का खेल चलता रहता है। लेकिन मेयर हरिकांत आहलुवालिया के कड़े रुख से यह साफ है कि अब समन्वय की कमी का बहाना नहीं चलेगा।
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महापौर हरिकांत आहलुवालिया का यह निरीक्षण यह साबित करता है कि जनता की नाराजगी दूर करने के लिए जनप्रतिनिधियों को धरातल पर उतरना ही पड़ता है। भोला रोड के निवासियों को अब उम्मीद जगी है कि उनकी नर्क जैसी जिंदगी जल्द सुधरेगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या PWD के अधिकारी इस फटकार के बाद वाकई अपनी कार्यशैली सुधारेंगे, या मेयर के जाते ही फाइलें फिर धूल खाने लगेंगी? इसका जवाब आने वाले कुछ हफ्तों में सड़क की स्थिति देखकर ही मिलेगा।
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सारांश: मेरठ के भोला रोड (वार्ड 15 व 38) में खराब सड़क और जलभराव को लेकर जनता के प्रदर्शन के बाद मेयर हरिकांत आहलुवालिया ने 5 फरवरी को मौके का निरीक्षण किया। उन्होंने PWD अधिकारियों को काम में देरी पर कड़ी फटकार लगाते हुए कुर्सी उखाड़ने तक की चेतावनी दी। मेयर के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों ने उनके समर्थन में नारे लगाए।
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