मेरठ (Meerut News): शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और निजी स्कूलों के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर मेरठ स्कूल्स फेडरेशन (Meerut Schools Federation - MSF) की एक महत्वपूर्ण आम सभा की बैठक बुधवार को केएल इंटरनेशनल स्कूल (KL International School) में संपन्न हुई। इस बैठक में न केवल आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए फीस वृद्धि पर स्थिति स्पष्ट की गई, बल्कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत गरीब बच्चों के प्रवेश के नियमों में हुए बड़े बदलावों की भी जानकारी दी गई।READ ALSO:-मेरठ विशेष: सेंट्रल मार्केट के ताबूत में सुप्रीम कोर्ट की 'आखिरी कील' — राजनीति, वादे और आश्वासन सब फेल, अब सिर्फ 'चमत्कार' बचा सकता है बाजार!
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बैठक में 50 से अधिक प्रमुख स्कूल संचालकों ने हिस्सा लिया। चर्चा के मुख्य बिंदुओं में स्कूल बसों की फिटनेस जांच का केंद्र बदलने, सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल विवाद और नए स्कूलों के लिए एनओसी (NOC) की शर्तों में ढील शामिल रही।
\r\n\r\n

 

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

RTE के तहत प्रवेश: अब 1 किलोमीटर की बाध्यता खत्म

\r\n\r\n
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण एजेंडा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) में हुए संशोधनों को लेकर था। अब तक निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश पाने के लिए एक सख्त नियम था कि छात्र का निवास स्कूल से 1 किलोमीटर की परिधि (Radius) में होना चाहिए। इस नियम के कारण कई बार पात्र छात्र अच्छे स्कूलों में प्रवेश से वंचित रह जाते थे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
फेडरेशन की बैठक में जानकारी दी गई कि शासन ने इस नियम में व्यापक बदलाव किया है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    शहरी क्षेत्र (Urban Area): अब 1 किलोमीटर की सीमा को बढ़ाकर पूरा 'वार्ड' (Ward) कर दिया गया है। यानी यदि बच्चा और स्कूल एक ही वार्ड में आते हैं, तो दूरी चाहे 1 किलोमीटर से ज्यादा हो, बच्चा प्रवेश का पात्र माना जाएगा।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    ग्रामीण क्षेत्र (Rural Area): ग्रामीण इलाकों में इस दायरे को बढ़ाकर ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) स्तर पर कर दिया गया है।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस फैसले का सीधा असर यह होगा कि आगामी सत्र में आरटीई के तहत आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में भारी इजाफा हो सकता है। स्कूल संचालकों को निर्देश दिया गया है कि वे नए नियमों के तहत ही अपनी सीटों का निर्धारण और प्रवेश प्रक्रिया को अंजाम दें।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

महंगाई की मार: 7.55% तक बढ़ सकती है स्कूल फीस

\r\n\r\n
अभिभावकों के लिए एक चिंताजनक खबर भी बैठक से निकलकर आई है। 'उत्तर प्रदेश शुल्क विनियमन अधिनियम' (UP Fee Regulation Act) पर चर्चा करते हुए फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि आगामी शैक्षणिक सत्र (2026-27) में स्कूल अपनी फीस में बढ़ोतरी कर सकते हैं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बैठक में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का हवाला देते हुए बताया गया कि महंगाई दर को देखते हुए स्कूलों को 7.55 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने का अधिकार है। फेडरेशन के पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    शिक्षकों के वेतन में वृद्धि,
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    स्कूल के रखरखाव के खर्च में बढ़ोतरी,
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    ट्रांसपोर्ट और बिजली के बढ़ते दामों के कारण फीस बढ़ाना मजबूरी है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
हालांकि, यह अधिकतम सीमा है। स्कूल प्रबंधन अपने स्तर पर यह तय करेगा कि उन्हें पूरी 7.55% की बढ़ोतरी करनी है या इससे कम। लेकिन इतना तय है कि अप्रैल से अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ना निश्चित है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

ट्रांसपोर्ट का संकट: मेरठ की बसें अब बिजनौर जाएंगी?

\r\n\r\n
बैठक में स्कूल संचालकों के माथे पर चिंता की लकीरें तब उभर आईं जब नए ट्रांसपोर्ट नियमों (New Transport Rules) पर चर्चा शुरू हुई। दरअसल, परिवहन विभाग के नए आदेशों के अनुसार, मेरठ के भारी वाहनों (जिनमें स्कूल बसें शामिल हैं) की फिटनेस जांच अब मेरठ के आरटीओ (RTO) ऑफिस के बजाय बिजनौर (Bijnor) में होगी।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
इस तुगलकी फरमान पर स्कूल संचालकों ने कड़ा ऐतराज जताया है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    लॉजिस्टिक्स की समस्या: केएल इंटरनेशनल, दीवान, और एमपीजीएस जैसे बड़े स्कूलों में 30 से 35 बसें हैं। इतनी बड़ी संख्या में बसों को फिटनेस के लिए दूसरे जिले (बिजनौर) भेजना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    समय और ईंधन की बर्बादी: मेरठ से बिजनौर की दूरी और वहां लाइन में लगने वाला समय स्कूलों के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को ध्वस्त कर सकता है।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    सुरक्षा चिंताएं: पुरानी व्यवस्था के तहत 2 साल में फिटनेस टेस्ट स्थानीय स्तर पर आसानी से हो जाता था।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
फेडरेशन ने निर्णय लिया है कि इस मुद्दे को प्रशासन के सामने सख्ती से उठाया जाएगा ताकि फिटनेस सेंटर की सुविधा मेरठ में ही बहाल की जा सके।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

सत्यकाम स्कूल विवाद: "यह पारिवारिक मामला, स्कूल का नहीं"

\r\n\r\n
शहर के प्रतिष्ठित सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल (Satyakam International School) को लेकर चल रहे विवाद पर भी फेडरेशन ने अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट किया। पिछले कुछ दिनों से स्कूल के ट्रस्टियों के बीच चल रही तनातनी सुर्खियों में है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
मेरठ स्कूल्स फेडरेशन ने गहन मंथन के बाद इसे एक "पारिवारिक संपत्ति विवाद" करार दिया। फेडरेशन का कहना है:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
\r\n
"इस विवाद का स्कूल के शैक्षणिक संचालन या छात्रों से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए। यह दो व्यक्तियों के बीच का मामला है। दोनों ट्रस्टी या तो आपस में बैठकर सुलह करें या फिर कोर्ट के आदेश का पालन करें। लेकिन किसी भी सूरत में स्कूल के दैनिक कार्यों (Daily Operations) में बाधा नहीं पड़नी चाहिए।"
\r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
एकता का संकल्प: बैठक में एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव पास किया गया। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि सत्यकाम विवाद या किसी अन्य मामले में एमएसएफ (MSF) के किसी सदस्य या पदाधिकारी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी या कार्रवाई की कोशिश की गई, तो पूरा फेडरेशन एकजुट होकर विरोध करेगा। यह संदेश प्रशासन और विवादित पक्षों दोनों के लिए स्पष्ट चेतावनी है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नए स्कूलों के लिए राहत: एनओसी और जमीन के नियम बदले

\r\n\r\n
शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा नए स्कूलों की मान्यता संबंधी नियमों में दी गई ढील पर भी चर्चा हुई।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    NOC की अनिवार्यता खत्म: बैठक में बताया गया कि अब नए स्कूलों का संचालन शुरू करने के लिए जटिल एनओसी (NOC) प्रक्रिया को खत्म कर दिया गया है।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    जमीन की शर्त: शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल खोलने के लिए 'न्यूनतम भूमि' (Minimum Land Requirement) की शर्तों में भी बदलाव की जानकारी दी गई, जिससे नए शिक्षाविदों को स्कूल खोलने में आसानी होगी।
    \r\n
  4. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

नई कार्यकारिणी और नियुक्तियां

\r\n\r\n
संगठन को मजबूती देने के लिए कुछ नए पदाधिकारियों का मनोनयन भी किया गया। सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों के अनुसार:
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • \r\n
    एडवोकेट अजीत सिंह (Advocate Ajit Singh): जो अब तक प्रवक्ता की भूमिका में थे, उन्हें वाइस प्रेसीडेंट (Vice President) चुना गया।
    \r\n
  • \r\n
  • \r\n
    प्रतीश ठाकुर (Pratish Thakur): इन्हें फेडरेशन का नया प्रवक्ता (Spokesperson) नियुक्त किया गया।
    \r\n
  • \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
बैठक में फेडरेशन के संरक्षक विष्णु सरन, तेजिंदर खुराना, मनोज रस्तोगी, विशाल जैन, अक्षय सिंह, अजीत कुमार, संजीव चौधरी, राहुल केशरवानी, शशांक तनेजा, तरुण तोमर, डीपी सिंह, गौरव अग्रवाल और रविंद्र सिंह सहित शहर के कई गणमान्य शिक्षाविद उपस्थित रहे।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

श्रद्धांजलि: अंकित त्यागी को किया याद

\r\n\r\n
बैठक की शुरुआत एक भावुक क्षण के साथ हुई। 19 जनवरी को हुई एक दुखद घटना में द्रोण पब्लिक स्कूल (Dron Public School) के संचालक संजय त्यागी के युवा पुत्र अंकित त्यागी का निधन हो गया था। फेडरेशन के सभी सदस्यों ने एक मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n

क्या हैं इन फैसलों के मायने?

\r\n\r\n
मेरठ स्कूल्स फेडरेशन की यह बैठक कई मायनों में अहम है।
\r\n\r\n
    \r\n
  1. \r\n
    RTE का विस्तार: वार्ड स्तर पर प्रवेश की अनुमति मिलने से स्कूलों में EWS कोटे की सीटें खाली रहने की समस्या कम होगी। हालांकि, इससे स्कूलों पर प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।
    \r\n
  2. \r\n
  3. \r\n
    फीस वृद्धि: 7.55% की संभावित वृद्धि मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट को बिगाड़ सकती है, खासकर तब जब अन्य खर्च भी बढ़ रहे हैं।
    \r\n
  4. \r\n
  5. \r\n
    यूनियन की ताकत: सत्यकाम मामले में फेडरेशन का एकजुट होना यह दर्शाता है कि निजी स्कूल लॉबी अपने सदस्यों को कानूनी और प्रशासनिक पचड़ों से बचाने के लिए आक्रामक रुख अपनाने को तैयार है।
    \r\n
  6. \r\n
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
केएल इंटरनेशनल स्कूल में हुई इस बैठक ने आगामी शैक्षणिक सत्र की रूपरेखा तय कर दी है। जहां एक तरफ RTE के दायरे में विस्तार गरीब छात्रों के लिए अच्छी खबर है, वहीं फीस बढ़ोतरी की संभावना अभिभावकों को परेशान कर सकती है। सबसे बड़ा पेंच ट्रांसपोर्ट नियमों को लेकर फंसा है, जिस पर यदि प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में स्कूली बच्चों के आवागमन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। अब देखना यह है कि बिजनौर में फिटनेस टेस्ट के आदेश पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है।
\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
सारांश: मेरठ स्कूल्स फेडरेशन की बैठक में RTE प्रवेश का दायरा 1 किमी से बढ़ाकर वार्ड/पंचायत स्तर तक करने की जानकारी दी गई। नए सत्र में 7.55% फीस वृद्धि को हरी झंडी मिली। बसों की फिटनेस बिजनौर शिफ्ट करने का विरोध हुआ। सत्यकाम विवाद को पारिवारिक बताते हुए फेडरेशन ने एकजुटता दिखाई। अजीत सिंह नए उपाध्यक्ष बने।
विज्ञापन
विज्ञापन