मेरठ (Meerut News): उत्तर प्रदेश के मेरठ महानगर के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र स्थित किदवई नगर (Kidwai Nagar) में सोमवार रात हुए एक दर्दनाक अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। कपड़ा कारोबारी इकबाल अहमद के घर में लगी इस भीषण आग में 5 मासूम बच्चों समेत कुल 6 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि परिवार की बुजुर्ग महिला श्रीमती अमीर बानो गंभीर रूप से झुलस गईं। इस हृदय विदारक घटना ने प्रशासन की तैयारियों और आवासीय इलाकों में चल रहे छोटे उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।READ ALSO:-बिजनौर में किन्नर समाज की 'मनमानी वसूली' के खिलाफ फूटा लोगों का गुस्सा: झालू चौकी पर सर्व समाज का जोरदार धरना-प्रदर्शन
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घटना के अगले दिन, यानी 24 फरवरी 2026 को, शहर के गणमान्य नागरिकों और राजनेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार के आवास पर पहुंचकर उन्हें सांत्वना दी। पूर्व विधायक श्री राजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में पहुंचे इस प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करते हुए प्रदेश सरकार से 4 प्रमुख मांगें की हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम जानेंगे कि घटना वाली रात असल में क्या हुआ था, फायर ब्रिगेड की क्या कमियां रहीं, और नेताओं द्वारा क्या अहम मांगें उठाई गई हैं।
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मेरठ किदवई नगर अग्निकांड: एक हंसता-खेलता परिवार कैसे उजड़ गया? 

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सोमवार की रात किदवई नगर के गली नंबर 3 में स्थित कपड़ा कारोबारी इकबाल अहमद के तीन मंजिला मकान में सब कुछ सामान्य था। घर के पुरुष सदस्य—इकबाल और उनके बेटे आसिम व फारूक—तरावीह की नमाज पढ़ने के लिए पास की सुराही वाली मस्जिद में गए हुए थे। घर पर महिलाएं और बच्चे मौजूद थे। इसी बीच भूतल (Ground Floor) पर जहां सिलाई और एम्ब्रॉयडरी का काम होता था, वहां अचानक आग भड़क उठी।
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कुछ ही मिनटों में फैल गई आग: देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया क्योंकि भूतल पर भारी मात्रा में कपड़ा और धागे रखे हुए थे। धुएं का गुबार पूरी इमारत में भर गया। पहली और दूसरी मंजिल पर मौजूद महिलाओं और बच्चों को बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
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6 जिंदगियां आग में खाक: इस भीषण हादसे में दम घुटने और झुलसने से 6 लोगों की जान चली गई। मृतकों में आसिम की पत्नी रुखसार (30), उनका 3 वर्षीय बेटा अकदस, मात्र 6 माह की जुड़वां बेटियां नबिया व इनायत और फारूक की बेटी महविश (12) व बेटा हम्माद (4) शामिल हैं। इकबाल की पत्नी श्रीमती अमीर बानो (55) गंभीर रूप से झुलस गईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। दुधमुंहे बच्चों की इस तरह हुई मौत ने मानवता को रुला दिया है।
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नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल का दौरा

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इस हृदय विदारक 'मेरठ किदवई नगर अग्निकांड' (Meerut Kidwai Nagar Fire) की खबर जैसे ही अखबारों और न्यूज चैनलों के माध्यम से फैली, पूरे महानगर में शोक की लहर दौड़ गई। दिनांक 24 फरवरी 2026 को पीड़ित परिवार का दुख बांटने के लिए राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े कई प्रमुख लोग किदवई नगर पहुंचे।
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प्रतिनिधिमंडल में ये गणमान्य व्यक्ति रहे शामिल:

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    श्री राजेंद्र शर्मा: पूर्व विधायक
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    श्री शाहिद मंजूर: माननीय विधायक, किठौर
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    श्री योगेंद्र सिंह: चेयरमैन
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    श्री सलीम भारती: पूर्व सभासद
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    श्री सत्यपाल यादव: पूर्व प्रधान
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    श्री फिरोज़ खान
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    श्री दिलशाद सैफ़ी: पूर्व अध्यक्ष
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    श्री गौरव शर्मा
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    श्री शिवशंकर शुक्ला
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इसके अलावा किदवई नगर और आस-पास के मोहल्लों के सैकड़ों लोग भी रंज और गम में डूबे हुए वहां मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल ने अल्लाह से दुआ मांगी कि वह इस भयानक दुख की घड़ी में पीड़ित परिवार को सब्र और हिम्मत अता फरमाए।
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प्रशासन और फायर ब्रिगेड की भारी लापरवाही आई सामने

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जब प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों से बात की, तो प्रशासन के खोखले दावों की पोल खुल गई। हालांकि घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे जरूर थे, लेकिन बचाव कार्य में जिस तेजी की जरूरत थी, वह पूरी तरह नदारद थी।
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घंटों बाद पहुंची फायर ब्रिगेड की गाड़ी: क्षेत्रवासियों ने पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा और विधायक शाहिद मंजूर को बताया कि आग लगने के बाद तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई थी। लेकिन घनी आबादी और संकरी गलियों का हवाला देते हुए फायर ब्रिगेड (Fire Brigade) की गाड़ियां घंटों की देरी से मौके पर पहुंचीं। तब तक स्थानीय लोग अपनी जान जोखिम में डालकर छतों के रास्ते से महिलाओं और बच्चों को निकालने का प्रयास कर चुके थे।
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कर्मचारियों के पास नहीं थे पर्याप्त उपकरण: स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा आरोप यह था कि जो फायर कर्मी मौके पर पहुंचे भी, उनके पास आग बुझाने और धुआं निकालने वाले आधुनिक अग्नि नियंत्रण संयंत्र (Fire Fighting Equipment) या ऑक्सीजन मास्क नहीं थे। धुएं के गुबार के कारण दूसरी मंजिल पर फंसे बच्चों को समय रहते बाहर नहीं निकाला जा सका।
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प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से कीं 4 प्रमुख मांगें

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पूर्व विधायक श्री राजेंद्र शर्मा ने अपने प्रेस वक्तव्य (Press Release) के माध्यम से इस पूरी घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय प्रशासन (Local Administration) और उत्तर प्रदेश सरकार से निम्नलिखित 4 सूत्रीय मांगें तत्काल पूर्ण करने की अपील की है:
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1. पीड़ित परिवार को भारी आर्थिक सहायता: जिस परिवार ने एक झटके में अपने 5 बच्चों और एक बहू को खो दिया हो, उनका दुख किसी भी कीमत पर कम नहीं किया जा सकता। आग में कारोबारी का पूरा माल और घर भी जलकर राख हो गया है। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि पीड़ित परिवार को पुनः अपने पैरों पर खड़े होने और जीवन को दोबारा स्थापित करने के लिए राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त और त्वरित 'आर्थिक सहायता' (Financial Compensation) उपलब्ध कराई जाए।
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2. हर थाने में हो फायर ब्रिगेड की व्यवस्था: मेरठ एक घनी आबादी वाला शहर है, जहां के पुराने इलाकों की गलियां बेहद संकरी हैं। मुख्य फायर स्टेशन से गाड़ी आने में अक्सर देर हो जाती है। इसलिए, यह मांग की गई है कि मेरठ महानगर के प्रत्येक पुलिस थाने में अग्निशमन (Fire Tender) की एक छोटी लेकिन सुचारू व्यवस्था (Mini Fire Station) 24 घंटे उपलब्ध होनी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में पहले 15 मिनट (Golden Hour) के भीतर ही आग पर काबू पाया जा सके।
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3. लटकते बिजली के तारों को किया जाए सुव्यवस्थित: मेरठ किदवई नगर अग्निकांड के पीछे प्रथम दृष्टया जो कारण सामने आ रहा है, वह शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) है। मेरठ के पुराने मोहल्लों और गलियों में बिजली के तारों का जंजाल फैला हुआ है। बिजली के खतरनाक तार गलियों में इतने नीचे तक लटके रहते हैं कि अक्सर कोई न कोई वाहन या व्यक्ति इनकी चपेट में आ जाता है। प्रतिनिधिमंडल ने ऊर्जा विभाग से मांग की है कि इन लटकते तारों को तुरंत सुव्यवस्थित किया जाए या अंडरग्राउंड केबलिंग की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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4. छोटे उद्योगों में फायर सेफ्टी उपकरण हों अनिवार्य: लिसाड़ी गेट, किदवई नगर और आस-पास के आवासीय इलाकों में हजारों छोटे उद्योग, पावरलूम और सिलाई कारखाने चलते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने सभी सामाजिक संगठनों, मोहल्ला समितियों और व्यापार मंडलों से अपील की है कि वे सुनिश्चित करें कि गली-मोहल्लों में कारोबार चलाने वाले लोग अपने प्रतिष्ठानों में अग्नि शमन यंत्र (Fire Extinguishers) अनिवार्य रूप से लगाएं।
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रिहायशी इलाकों में कारखाने: एक टिक-टिक करता टाइम बम

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मेरठ का यह अग्निकांड कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी प्रदेश के कई शहरों में रिहायशी इलाकों (Residential Areas) में चल रहे अवैध या छोटे कारखानों में आग लगने से जानें जा चुकी हैं।
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    कॉमर्शियल गतिविधि बनाम सुरक्षा: शहर के पुराने इलाकों में घर के निचले हिस्से में कारखाने चलाना आम बात है। इन कारखानों में ज्वलनशील पदार्थ जैसे कपड़े, धागे, केमिकल और थिनर भारी मात्रा में रखे जाते हैं।
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    शॉर्ट सर्किट का खतरा: 24 घंटे चलने वाली मशीनों का लोड घरेलू बिजली कनेक्शन पर डाला जाता है, जिससे अक्सर ओवरलोडिंग के कारण शॉर्ट सर्किट होता है।
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    निकास का अभाव: ऐसे घरों में इमरजेंसी एग्जिट (Emergency Exit) नहीं होता है। जब नीचे आग लगती है, तो ऊपर रहने वाला परिवार पूरी तरह से फंस जाता है, ठीक वैसा ही जैसा किदवई नगर में इकबाल के परिवार के साथ हुआ।
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प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे कारखानों को नियमित करे, वहां फायर एनओसी (Fire NOC) को सख्ती से लागू करे और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करे।
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मेरठ के किदवई नगर में कपड़ा कारोबारी इकबाल के घर हुआ अग्निकांड (Meerut Kidwai Nagar Fire Incident) एक ऐसा नासूर बन गया है जिसे यह शहर कभी नहीं भूल पाएगा। 5 मासूम बच्चों और एक महिला की जलकर हुई मौत ने पूरे सिस्टम की नाकामियों को उघाड़ कर रख दिया है। 24 फरवरी 2026 को पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, विधायक शाहिद मंजूर और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने पीड़ित परिवार से मिलकर संवेदनाएं व्यक्त कीं और प्रशासन को आईना दिखाया। घंटों की देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड और बिना उपकरणों के आए दमकलकर्मियों की लापरवाही अक्षम्य है। प्रतिनिधिमंडल की मांगें—जिसमें पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, हर थाने में मिनी फायर स्टेशन, लटकते तारों का समाधान और छोटे कारखानों में फायर सेफ्टी उपकरणों की अनिवार्यता शामिल है—बिल्कुल जायज और समय की मांग हैं। यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो शायद हम किसी और मोहल्ले में ऐसी ही किसी दूसरी त्रासदी का इंतजार कर रहे हैं।
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