उत्तर प्रदेश पुलिस का आदर्श वाक्य है 'सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा', लेकिन जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी न्याय की गुहार लगाने कहाँ जाए? मेरठ में एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक निर्दोष धागा कारोबारी को दिनदहाड़े अगवा कर, उसे आतंकवादी गतिविधियों और हवाला कारोबार का झूठा डर दिखाकर लाखों रुपये की रंगदारी वसूलने वाले दो दरोगा—लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार—आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गए हैं।READ ALSO:-बांदा का सबसे खौफनाक 'डार्क वेब' कांड: 50 से ज्यादा मासूमों से दरिंदगी कर 47 देशों में बेचे वीडियो, हैवान पति-पत्नी को कोर्ट का फरमान- 'मरते दम तक फंदे पर लटकाया जाए'
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शुक्रवार शाम प्रयागराज की एक कचहरी में उस समय हड़कंप मच गया, जब सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस की टीम ने एक अधिवक्ता के चैंबर की घेराबंदी कर इन दोनों फरार दरोगाओं को गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों वहां अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को रद्द कराने और गिरफ्तारी से स्टे (Stay) लेने की कानूनी जुगत भिड़ा रहे थे।
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आइए, इस पूरी खौफनाक वारदात और पुलिस विभाग के भीतर पनपते भ्रष्टाचार की इस कहानी को विस्तार से समझते हैं।
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वारदात की शुरुआत: 8 दिसंबर की वह खौफनाक शाम
\r\n\r\nयह पूरी घटना किसी बॉलीवुड की क्राइम थ्रिलर फिल्म जैसी लगती है। मेरठ शहर के इस्लामाबाद रिक्शा रोड के रहने वाले रासिख (पुत्र स्व. इदरीस), जो दक्षिणी इस्लामाबाद में 'एमएसआरएस टैक्सटाइल' (MSRS Textile) नाम से धागे का कारोबार करते हैं, इस खौफनाक साजिश का शिकार बने।
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8 दिसंबर की शाम, रासिख अपनी नौचंदी स्थित दुकान से घर लौट रहे थे। जब वे आजाद रोड पर पहुंचे, तभी अचानक एक कार उनके पास आकर रुकी। कार के रुकते ही उसमें से एक शख्स (जो दरोगा था) उतरा और बिना कुछ बताए, जबरन रासिख को गाड़ी में खींच लिया।
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कार के अंदर पहले से ही दूसरा दरोगा मौजूद था। रासिख अभी कुछ समझ पाते, इससे पहले ही दोनों दरोगाओं ने उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। उन्होंने रासिख पर आरोप लगाया कि वह 'हवाला' का पैसा मंगाकर गैर-कानूनी गतिविधियों की 'फंडिंग' करता है और धमकी दी कि वे उस पर 'रासुका' (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून - NSA) लगा देंगे।
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हापुड़ और अल्लीपुर के जंगलों में टॉर्चर
\r\n\r\nरासिख के अनुसार, दोनों दरोगा उन्हें गाड़ी में बंधक बनाकर मेरठ से सीधे हापुड़ की तरफ ले गए। रास्ते भर उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उन्हें बुरी तरह टॉर्चर किया गया, जिसके कारण रासिख की तबीयत बिगड़ने लगी।
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दहशत का यह खेल यहीं नहीं रुका। हापुड़ से लौटते समय ये भ्रष्ट पुलिसवाले रासिख को अल्लीपुर के सुनसान जंगलों में ले गए। वहां उन्होंने रासिख की कनपटी पर बंदूक रखकर उसे जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उन्होंने रासिख से जबरन एक वीडियो बनवाया, जिसमें डरा-धमकाकर रासिख से यह कुबूल करवाया गया कि वह हवाला फंडिंग में शामिल है। यह वीडियो उन्होंने भविष्य में रासिख को ब्लैकमेल करने के लिए 'ब्रह्मास्त्र' के रूप में तैयार किया था।
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रंगदारी का खेल: 50 लाख से शुरू होकर 20 लाख पर हुआ सौदा
\r\n\r\nजंगल में खौफ का माहौल बनाने के बाद, दोनों दरोगाओं ने अपनी असली मंशा जाहिर की। उन्होंने रासिख पर तत्काल 50 लाख रुपये की व्यवस्था करने का दबाव बनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अगर रकम मिल गई तो वे उसे छोड़ देंगे, अन्यथा मुठभेड़ (Encounter) में गोली मारकर जेल भेज देंगे।
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एक आम कारोबारी के लिए अचानक 50 लाख रुपये जुटाना असंभव था। रासिख के गिड़गिड़ाने और अपनी असमर्थता जताने के बाद, 'सौदा' 20 लाख रुपये में तय हुआ।
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बंधक बनाकर मंगवाए पैसे
\r\n\r\nदरोगाओं ने रासिख को कार में ही बंधक बनाए रखा और अलीपुर चौराहे पर एक सुनसान जगह पर कार खड़ी कर दी। रासिख ने मजबूर होकर अपने बहनोई नईम को फोन किया और किसी भी तरह रुपये लेकर आने को कहा। कुछ देर बाद, नईम अपने एक रिश्तेदार के साथ मौके पर पहुंचे। वे जल्दबाजी में केवल 14 लाख रुपये ही जुटा पाए थे, जो उन्होंने एक बैग में रखकर दरोगाओं को सौंप दिए।
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दरोगाओं ने पैसे गिने और 6 लाख रुपये कम होने पर भड़क गए। उन्होंने रासिख को चेतावनी दी कि बाकी के 6 लाख रुपये की जल्द व्यवस्था करे और फिर उसे वहीं छोड़कर फरार हो गए।
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लालच की इंतहा: अगले दिन फिर वसूली
\r\n\r\nइस खौफनाक घटना के बाद रासिख इस कदर डर गए थे कि उन्होंने घर जाकर अपने परिवार को भी कुछ नहीं बताया। अगले दिन उन्होंने किसी तरह बाकी बचे 6 लाख रुपये का इंतजाम किया और दरोगाओं द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे।
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लेकिन भ्रष्ट पुलिसवालों का लालच खत्म नहीं हुआ था। उन्होंने रासिख से कहा, "कल 14 नहीं, 13 लाख रुपये लाए थे। अब एक लाख और लाकर दे।" इस बार उन्होंने शहर के बीचों-बीच नौचंदी मैदान में रासिख को पैसे लेकर बुलाया।
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'दिल्ली ब्लास्ट' में फंसाने की धमकी और वीडियो का डर
\r\n\r\nदरोगाओं के कहे अनुसार रासिख जब 1 लाख रुपये लेकर नौचंदी मैदान पहुंचे, तो पैसे लेने के बाद दरोगाओं ने उन्हें एक और खौफनाक धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर रासिख ने इस घटना के बारे में किसी के भी सामने मुंह खोला, तो वे उसे 'दिल्ली ब्लास्ट' (Delhi Blast) के मामले में फंसा देंगे। उन्होंने धमकी दी कि वह पूरी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे सड़ेगा और उसके परिवार को भी वे शांति से जीने नहीं देंगे।
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जब रासिख और नईम वापस लौटने लगे, तो दरोगाओं ने उन्हें फिर आवाज देकर बुलाया और याद दिलाया कि उनके पास रासिख का वह वीडियो है जिसमें वह खुद 'फंडिंग' की बात कुबूल कर रहा है। उन्होंने धमकी दी कि मुंह खोलने पर वे इस वीडियो को वायरल कर देंगे।
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कहानी का टर्निंग पॉइंट: जब पुलिस के आला अधिकारी बने 'फरिश्ते'
\r\n\r\nकुछ दिनों तक रासिख इस खौफ में घुट-घुट कर जीते रहे। लेकिन जुल्म की भी एक इंतहा होती है। आखिरकार रासिख ने हिम्मत जुटाई और वे सीधे मेरठ के एसपी सिटी (SP City) आयुष विक्रम सिंह के दफ्तर पहुंच गए।
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रासिख ने एसपी सिटी के सामने फूट-फूट कर रोते हुए सिलसिलेवार तरीके से पूरी घटना बयान कर दी। एसपी सिटी ने मामले की गंभीरता को समझा और तुरंत उच्चाधिकारियों (विशेषकर एसएसपी) के संज्ञान में पूरा मामला डाला।
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एसएसपी (SSP) अविनाश पांडेय और एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने इस मामले में अत्यंत संवेदनशीलता और पेशेवर रवैया दिखाया। उनका पहला मकसद अपने भ्रष्ट मातहतों को बचाना नहीं, बल्कि एक पीड़ित नागरिक की मेहनत की कमाई वापस दिलाना और उसे न्याय देना था।
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अधिकारियों के कड़े रुख और दबाव के चलते, जैसे ही यह पुष्टि हुई कि दरोगाओं ने रंगदारी के 14 लाख रुपये वापस कर दिए हैं, आलाकमान ने बिना कोई देरी किए 10 फरवरी को दोनों आरोपी दरोगाओं (लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार) के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए। मुकदमा दर्ज होने की भनक लगते ही दोनों आरोपी दरोगा रातों-रात फरार हो गए।
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कानूनी शिकंजा: किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
\r\n\r\nइस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपने ही पुलिसकर्मियों के खिलाफ नए आपराधिक कानूनों (भारतीय न्याय संहिता - BNS, 2023) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत बेहद सख्त धाराएं लगाई हैं।
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नीचे दी गई तालिका में आरोपी दरोगाओं पर लगाई गई धाराओं का विवरण दिया गया है:
\r\n\r\n| \r\n कानून / अधिनियम \r\n | \r\n \r\n धारा \r\n | \r\n \r\n अपराध का विवरण \r\n | \r\n \r\n संभावित सजा \r\n | \r\n
| \r\n BNS, 2023 \r\n | \r\n \r\n धारा 308(5) \r\n | \r\n \r\n मौत या गंभीर चोट का डर दिखाकर जबरन वसूली (Extortion) करना। \r\n | \r\n \r\n आजीवन कारावास या 10 साल तक की जेल और जुर्माना। \r\n | \r\n
| \r\n BNS, 2023 \r\n | \r\n \r\n धारा 308(6) \r\n | \r\n \r\n किसी व्यक्ति को फर्जी मुकदमों में फंसाने या गंभीर आरोप लगाने का भय दिखाकर रंगदारी मांगना। \r\n | \r\n \r\n 10 साल तक की सजा और जुर्माना। \r\n | \r\n
| \r\n BNS, 2023 \r\n | \r\n \r\n धारा 351(3) \r\n | \r\n \r\n जान से मारने या गंभीर परिणाम भुगतने की आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) देना। \r\n | \r\n \r\n 7 साल तक का कारावास। \r\n | \r\n
| \r\n Prevention of Corruption Act, 1988 \r\n | \r\n \r\n धारा 7 \r\n | \r\n \r\n एक लोक सेवक (Public Servant) द्वारा अपने आधिकारिक कार्य के संबंध में रिश्वत या अनुचित लाभ लेना। \r\n | \r\n \r\n 3 से 7 साल तक की सजा। \r\n | \r\n
| \r\n Prevention of Corruption Act, 1988 \r\n | \r\n \r\n धारा 13 \r\n | \r\n \r\n सरकारी कर्मचारी द्वारा आपराधिक दुराचार (Criminal Misconduct) और पद का दुरुपयोग। \r\n | \r\n \r\n 4 से 10 साल तक की सजा। \r\n | \r\n
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(नोट: BNS या भारतीय न्याय संहिता ने पुराने IPC की जगह ली है, जिसमें रंगदारी और अपहरण के लिए अधिक सख्त प्रावधान किए गए हैं।)
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प्रयागराज में लुकाछिपी और आखिरकार गिरफ्तारी
\r\n\r\nमुकदमा दर्ज होने के बाद से ही मेरठ पुलिस की कई टीमें लोकेंद्र साहू और महेश गंगवार की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थीं। पुलिस सर्विलांस और मुखबिरों से पता चला कि दोनों की लोकेशन उत्तर प्रदेश की न्यायिक राजधानी प्रयागराज में है।
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शुरुआती दबिश में दोनों पुलिस को चकमा देकर फरार होने में सफल रहे। दरअसल, दोनों अच्छी तरह जानते थे कि पुलिस की कार्यप्रणाली कैसे काम करती है। वे इलाहाबाद हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द (Quash) कराने या कम से कम गिरफ्तारी पर स्टे (Stay) लेने का कानूनी रास्ता खोज रहे थे।
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लेकिन मेरठ पुलिस इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थी। शुक्रवार (20 फरवरी) को पुलिस को पक्की सूचना मिली कि दोनों दरोगा कचहरी परिसर में अपने बचाव के लिए एक वरिष्ठ अधिवक्ता के चैंबर में पहुंचने वाले हैं।
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सूचना मिलते ही सादे कपड़ों में पुलिस की स्पेशल टीम ने कचहरी और उस अधिवक्ता के चैंबर की घेराबंदी कर ली। शाम के वक्त जैसे ही लोकेंद्र और महेश वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें धर दबोचा। सूत्रों के अनुसार, दोनों ने मौके से भागने और पुलिस टीम को गुमराह करने का काफी प्रयास किया, लेकिन उनकी एक न चली। शनिवार सुबह तक कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों को मेरठ लाया जा रहा है, जहां उन्हें संबंधित न्यायालय में पेश कर जेल भेजा जाएगा।
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सिस्टम पर उठते सवाल और 'जीरो टॉलरेंस' नीति
\r\n\r\nमेरठ का यह मामला केवल दो भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सत्ता के नशे और 'वर्दी के खौफ' को दर्शाता है, जिसका शिकार आम जनता अक्सर होती है। जब कानून के रखवाले ही आतंकवाद (दिल्ली ब्लास्ट) और रासुका (NSA) जैसे गंभीर कानूनों का इस्तेमाल हथियार के रूप में निर्दोषों को लूटने के लिए करने लगें, तो समाज में खौफ का माहौल बनना स्वाभाविक है।
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हालांकि, इस घटना का एक उजला पहलू मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों (एसएसपी और एसपी सिटी) का त्वरित और निष्पक्ष एक्शन है। उन्होंने यह साबित किया कि यदि पीड़ित हिम्मत करके सही अधिकारी तक पहुंचे, तो 'खाकी' अपने ही दागदार चेहरों को बेनकाब करने से पीछे नहीं हटती। सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) नीति की असली परीक्षा ऐसे ही मामलों में होती है।
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अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट में इन दोनों दरोगाओं के खिलाफ पुलिस कितनी मजबूत चार्जशीट (Charge-sheet) पेश करती है, ताकि भविष्य में कोई अन्य पुलिसकर्मी ऐसी जुर्रत न कर सके।
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