मेरठ (सरधना): पश्चिमी उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला, जो अक्सर अपनी राजनीतिक सरगर्मियों और आपराधिक घटनाओं के लिए सुर्खियों में रहता है, एक बार फिर एक ऐसी रूह कंपा देने वाली वारदात का गवाह बना है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। सरधना थाना क्षेत्र का शांत सा दिखने वाला कपसाड़ गांव, गुरुवार की शाम से ही छावनी में तब्दील है। एक तरफ एक परिवार का करुण क्रंदन है, जिसकी दुनिया कुछ ही पलों में उजड़ गई, तो दूसरी तरफ सिस्टम के खिलाफ उपजा वह भारी जनाक्रोश, जिसने 19 घंटे तक प्रशासन को घुटनों पर ला दिया।READ ALSO:-सड़क सुरक्षा में बड़ी क्रांति: अब गाड़ियां करेंगी आपस में 'बातचीत', एक्सीडेंट से पहले ड्राइवर को मिलेगा अलर्ट; सरकार 2026 तक लागू करेगी V2V टेक्नोलॉजी
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एक मां की दिनदहाड़े निर्मम हत्या और उसकी जवान बेटी का अपहरण—इस दोहरी वारदात ने न केवल पुलिस व्यवस्था की पोल खोली, बल्कि इलाके में सियासी भूचाल भी ला दिया। गुरुवार शाम से शुरू हुआ यह सिलसिला शुक्रवार शाम तक एक हाई-वोल्टेज ड्रामे में बदल गया, जहां एक शव के अंतिम संस्कार के लिए विधायकों, पूर्व विधायकों, आला अधिकारियों और हजारों ग्रामीणों के बीच घंटों रस्साकशी चली।
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 Murder of Dalit woman: Financial assistance of Rs 10 lakh, agreement on job and arms license

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यह रिपोर्ट उस खौफनाक मंजर, उसके बाद उपजे जनाक्रोश, सियासी रस्साकशी और उस समझौते की विस्तृत दास्तान है, जिसके बाद एक मां को मुखाग्नि तो मिली, लेकिन कई सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं।
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वो खौफनाक गुरुवार और उजड़ती दुनिया

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खेतों की खामोशी में गूंजी चीखें: घटना बृहस्पतिवार (गुरुवार) की दोपहर बाद की है। कपसाड़ गांव के रहने वाले सत्येंद्र की पत्नी सुनीता (45 वर्ष) अपनी जवान बेटी रूबी के साथ रोज की तरह खेत पर काम करने जा रही थीं। गांव के बाहरी इलाके में गन्ने और अन्य फसलों के बीच से गुजरता रास्ता आम दिनों की तरह शांत था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इस शांति के पीछे एक खौफनाक साजिश छिपी है।
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परिजनों और पुलिस के अनुसार, रास्ते में घात लगाए बैठे गांव के ही पारस सोम, सुनील और एक अन्य आरोपी ने मां-बेटी को घेर लिया। इरादे नेक नहीं थे, यह भांपते ही सुनीता ने विरोध किया। आरोप है कि हमलावरों ने सुनीता पर धारदार हथियारों और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला बोल दिया। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए दरिंदों से भिड़ गई, लेकिन वह अकेली पड़ गई। हमलावरों ने उसे बुरी तरह पीटा, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ी।
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बेटी का अपहरण और अस्पताल की दौड़: सुनीता को मरणासन्न हालत में छोड़ने के बाद आरोपी उनकी बेटी रूबी को जबरन अपने साथ अगवा करके ले गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे लोग जब तक मौके पर पहुंचते, आरोपी फरार हो चुके थे। खून से लथपथ सुनीता को देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। आनन-फानन में सूचना परिजनों और पुलिस को दी गई।
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गंभीर रूप से घायल सुनीता को मोदीपुरम स्थित एसडीएस (SDS) अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि शाम करीब 4:30 बजे सुनीता ने दम तोड़ दिया। मां की मौत की खबर और बेटी के अपहरण की सूचना जैसे ही गांव पहुंची, कोहराम मच गया।
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शादी की शहनाइयों से पहले मातम: इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि जिस घर में कुछ ही हफ्तों बाद शहनाइयां बजने वाली थीं, वहां अब मातम पसरा है। मृतका के पति सत्येंद्र और भाई नरसिंह ने रोते हुए बताया कि अगवा की गई बेटी रूबी की शादी तय हो चुकी थी। मई में शादी की तारीख थी, जिसे परिवार वाले बदलकर अप्रैल में करने का विचार कर रहे थे और जल्द ही नया मुहूर्त निकलवाने वाले थे। घर में शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी थीं, सामान जुटाया जा रहा था। लेकिन दरिंदों ने एक झटके में सब कुछ बर्बाद कर दिया। पिता सत्येंद्र कहते हैं, "मेरी दुनिया उजड़ गई। पत्नी चली गई, बेटी का पता नहीं। जिस आंगन से बेटी की डोली उठनी थी, वहां से उसकी मां की अर्थी उठ रही है।"
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19 घंटे का 'गतिरोध' - जब गांव बना किला

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आधी रात को शव पहुंचा, तो फूट पड़ा गुस्सा: पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे सुनीता का शव एंबुलेंस से कपसाड़ गांव पहुंचा। शव के पहुंचते ही ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण सत्येंद्र के घर के बाहर जमा हो गए। परिजनों ने शव को घर के आंगन में रख दिया और दो टूक ऐलान कर दिया— "जब तक हत्यारे गिरफ्तार नहीं होते और हमारी बेटी सकुशल वापस नहीं आती, तब तक अंतिम संस्कार नहीं होगा।"
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अधिकारियों की रातभर दौड़-भाग: स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए रात में ही एसपी देहात अनिरुद्ध सिंह, एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा, सीओ सरधना और कई थानों की फोर्स गांव पहुंच गई। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए। रातभर गांव में तनाव का माहौल रहा। पुलिसकर्मी ग्रामीणों को शांत करने में लगे रहे, लेकिन आक्रोश की आग ठंडी नहीं हुई।
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शुक्रवार का सूरज और बढ़ता तनाव: शुक्रवार की सुबह होते ही आसपास के गांवों के लोग भी कपसाड़ पहुंचने लगे। देखते ही देखते हजारों की भीड़ जमा हो गई। प्रशासन के हाथ-पांव फूलने लगे। शव रखे हुए 12 घंटे से ज्यादा हो चुके थे। गर्मी का मौसम और बढ़ती भीड़ के बीच कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा मंडराने लगा। मेरठ से अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी (PAC) और आरएएफ (RAF) की टुकड़ियों को गांव में तैनात कर दिया गया। पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो चुका था। हर तरफ खाकी वर्दी ही नजर आ रही थी।
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परिजनों की मांगें स्पष्ट थीं:

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    अपहृत बेटी रूबी की तत्काल और सकुशल बरामदगी।
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    हत्यारोपियों की अविलंब गिरफ्तारी और उनके घरों पर बुलडोजर की कार्रवाई।
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    पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता।
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    परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।
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    आत्मरक्षा के लिए परिवार को शस्त्र लाइसेंस।
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अधिकारी बार-बार वार्ता के लिए जाते, लेकिन परिजन लिखित आश्वासन और ठोस कार्रवाई के बिना मानने को तैयार नहीं थे।
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कपसाड़ बना 'सियासी अखाड़ा' - सोम बनाम प्रधान

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सरधना विधानसभा सीट हमेशा से ही राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील रही है। यहां भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम और समाजवादी पार्टी के तेजतर्रार विधायक अतुल प्रधान के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। कपसाड़ की इस घटना ने एक बार फिर इन दोनों दिग्गजों को आमने-सामने ला खड़ा किया।
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अतुल प्रधान का धरना और पुलिस से झड़प: शुक्रवार को सपा विधायक अतुल प्रधान अपने समर्थकों के साथ पीड़ित परिवार से मिलने कपसाड़ पहुंचे। जैसे ही उनका काफिला गांव के पास पहुंचा, पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने की कोशिश की। प्रशासन को डर था कि विधायक के पहुंचने से भीड़ और उग्र हो सकती है। अतुल प्रधान को रोके जाने पर उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।
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पुलिस द्वारा रोके जाने पर अतुल प्रधान गांव के बाहर ही धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन पर तानाशाही का आरोप लगाया। करीब ढाई घंटे तक चले इस ड्रामे के बाद, प्रशासन ने आखिरकार अतुल प्रधान को पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति दी। प्रधान ने परिवार के बीच पहुंचकर लगभग एक घंटे तक बातचीत की, उन्हें ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।
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अखिलेश यादव की एंट्री: मामले की गंभीरता को देखते हुए सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी पीड़ित परिवार से फोन पर बात की। उन्होंने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की और परिवार को सांत्वना दी। सपा की ओर से पीड़ित परिवार को 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की गई। वहीं, विधायक अतुल प्रधान ने अपनी तरफ से तत्काल 2 लाख रुपये का चेक पीड़ित परिवार को सौंपा।
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संगीत सोम की 'डैमेज कंट्रोल' एंट्री: देर शाम तक जब गतिरोध नहीं टूटा, तो भाजपा के पूर्व विधायक और क्षेत्र के प्रभावशाली नेता संगीत सोम गांव पहुंचे। सोम की एंट्री ने मामले को एक नया मोड़ दिया। एक तरफ जहां अतुल प्रधान विपक्ष की भूमिका में प्रशासन को घेर रहे थे, वहीं संगीत सोम सत्ता पक्ष के प्रतिनिधि के तौर पर 'डैमेज कंट्रोल' और समाधान निकालने की मुद्रा में थे।
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संगीत सोम ने सीधे परिजनों से बात की। उन्होंने प्रशासन और परिवार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई। सोम ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि यह लड़ाई उनकी अपनी लड़ाई है। उन्होंने ऐलान किया, "जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, मैं परिवार के पास गांव में ही डटा रहूंगा। दोषियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।"
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समझौता, अल्टीमेटम और अंतिम संस्कार

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समझौते की मेज पर प्रशासन: संगीत सोम की मौजूदगी और जनाक्रोश के दबाव में आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। शाम ढलते-ढलते प्रशासनिक अधिकारी एक बार फिर मृतका के पति सत्येंद्र को बातचीत के लिए पंचायत भवन लेकर आए। यहां पूर्व विधायक संगीत सोम, एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में निर्णायक वार्ता हुई।
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परिवार ने अपनी चार प्रमुख मांगें अधिकारियों के सामने रखीं। लंबी जद्दोजहद के बाद प्रशासन ने अधिकांश मांगों पर सहमति जताई और लिखित आश्वासन दिया।
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किन मांगों पर बनी सहमति?

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    48 घंटे का अल्टीमेटम: पुलिस ने लिखित में भरोसा दिलाया कि 48 घंटे के भीतर अपहृत युवती रूबी को सकुशल बरामद कर लिया जाएगा और मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। यह पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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  2. \r\n
  3. \r\n
    तत्काल आर्थिक मदद: प्रशासन की ओर से मौके पर ही पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये का चेक सौंपा गया। इसके अतिरिक्त, शासन स्तर से और अधिक आर्थिक सहायता दिलाने का प्रस्ताव भेजने का आश्वासन दिया गया।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    नौकरी का वादा: परिवार की मांग पर सहमति बनी कि परिवार के एक सदस्य को स्थानीय चीनी मिल या किसी अन्य उपयुक्त सरकारी/अर्ध-सरकारी संस्थान में नौकरी दिलाई जाएगी।
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  6. \r\n
  7. \r\n
    शस्त्र लाइसेंस: परिवार की सुरक्षा को खतरे में देखते हुए, आत्मरक्षा के लिए परिवार के एक सदस्य को शस्त्र लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने का आश्वासन दिया गया।
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  8. \r\n
  9. \r\n
    पुलिस सुरक्षा: पीड़ित परिवार को तत्काल प्रभाव से पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई।
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  10. \r\n
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19 घंटे बाद उठी अर्थी: इन आश्वासनों के बाद और संगीत सोम के व्यक्तिगत भरोसे पर, परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हुए। शाम करीब 7 बजे, लगभग 19 घंटे के लंबे और तनावपूर्ण इंतजार के बाद, सुनीता की शवयात्रा निकाली गई। शवयात्रा में सरधना विधायक अतुल प्रधान, पूर्व विधायक संगीत सोम, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता और हजारों की संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। गम और गुस्से के बीच सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया।
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सुलगते सवाल और आगे की राह

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भाई की आशंका: "कहीं अनहोनी न हो जाए" अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन परिवार का डर अभी खत्म नहीं हुआ है। पीड़िता के भाई नरसिंह ने अपनी बहन की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा, "24 घंटे से ज्यादा बीत चुके हैं। मेरी बहन किन दरिंदों के बीच है, किस हाल में है, यह सोचकर ही रूह कांप जाती है। मुझे अनहोनी की आशंका सता रही है। पुलिस को जल्द से जल्द उसे ढूंढना होगा।"
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पुलिस के लिए अग्निपरीक्षा: मेरठ पुलिस के लिए अगले 48 घंटे अग्निपरीक्षा के समान हैं। 10 थानों की फोर्स, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) और सर्विलांस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में जुटी हैं। संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि उन्हें कुछ अहम सुराग मिले हैं और जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा।
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बुलडोजर कार्रवाई की मांग: ग्रामीणों और परिजनों में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि अभी तक आरोपियों के घरों पर बुलडोजर क्यों नहीं चला। योगी सरकार में अपराधियों के खिलाफ बुलडोजर की कार्रवाई एक मानक बन चुकी है। ऐसे में कपसाड़ के लोग भी यही उम्मीद कर रहे हैं कि इस जघन्य अपराध के दोषियों के खिलाफ भी उसी सख्ती से कार्रवाई हो।
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कपसाड़ की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि यह समाज में महिलाओं की सुरक्षा की भयावह स्थिति का एक और प्रमाण है। एक मां अपनी बेटी को बचाने के लिए अपनी जान दे देती है, और सिस्टम 19 घंटे तक उसकी लाश के अंतिम संस्कार के लिए मान-मनौव्वल करता रहता है। सियासी रोटियां भी सेंकी जाती हैं, वादे भी किए जाते हैं। लेकिन असली न्याय तभी होगा जब रूबी सकुशल घर लौटेगी और उसकी मां के हत्यारों को कानून के मुताबिक सख्त से सख्त सजा मिलेगी। फिलहाल, कपसाड़ गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और शांति तो है, लेकिन यह शांति किसी तूफान से पहले की खामोशी जैसी है। सबकी निगाहें अब पुलिस की अगले 48 घंटे की कार्रवाई पर टिकी हैं।
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