मेरठ/रुड़की:
\r\n\r\nतीन दिन का तनाव, सीमाओं पर सियासी संग्राम और पुलिस की दर्जनों टीमों की दौड़-भाग के बाद आखिरकार मेरठ पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। सरधना के कपसाड़ गांव (Kapsad Village) को दहला देने वाले सनसनीखेज हत्याकांड और अपहरण मामले का पटाक्षेप हो गया है।READ ALSO:-UP Weather LIVE: पहाड़ों पर बर्फबारी से 'डीप फ्रीजर' बना उत्तर प्रदेश, मेरठ में हड्डियां गलाने वाली ठंड (4.1°C); कानपुर में धूप सेंकने बिल से बाहर आया 10 फीट का अजगर
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मां सुनीता की हत्या कर उनकी बेटी रूबी को अगवा करने वाला मुख्य आरोपी पारस सोम (Paras Som) पुलिस के हत्थे चढ़ गया है। पुलिस ने अपहृत युवती रूबी को भी सकुशल बरामद कर लिया है। यह गिरफ्तारी किसी आम जगह से नहीं, बल्कि रुड़की रेलवे स्टेशन (Roorkee Railway Station) से हुई, जहां आरोपी ट्रेन पकड़कर हरिद्वार और वहां से आगे भागने की फिराक में था।
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शनिवार की शाम जैसे ही सूरज ढला, आरोपी की किस्मत भी डूब गई। एक छोटी सी गलती, एक फोन कॉल और पुलिस के सर्विलांस जाल ने पारस सोम की 'फ्रीडम' पर फुलस्टॉप लगा दिया। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि कैसे पुलिस ने इस 'ऑपरेशन' को अंजाम दिया, कैसे राजनीति गरमाई और अब आगे क्या होगा।
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द एंड: रुड़की स्टेशन पर वो आखिरी 15 मिनट
\r\n\r\nयह कहानी किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है। शनिवार शाम तक मेरठ पुलिस के हाथ खाली थे, लेकिन कान खड़े थे। सर्विलांस टीमें लगातार सक्रिय थीं।
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वह 'गलती' जिसने पारस को फंसाया:
\r\n\r\nपारस सोम बेहद शातिर अपराधी की तरह व्यवहार कर रहा था। घटना के बाद से उसने अपना फोन बंद रखा था या वह पुलिस को चकमा दे रहा था। लेकिन शनिवार शाम रुड़की स्टेशन पहुंचकर उसने अपने एक दोस्त को फोन मिलाया।
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उसने फोन पर बस इतना कहा— "मैं बाहर निकल रहा हूं..."
\r\n\r\nयह कॉल महज कुछ सेकंड की थी, लेकिन मेरठ पुलिस की सर्विलांस टीम (Surveillance Team) के लिए यह काफी थी। कॉल इंटरसेप्ट होते ही लोकेशन फ्लैश हुई— 'रुड़की रेलवे स्टेशन'।
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एक्शन में मेरठ और हरिद्वार पुलिस:
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- \r\n मेरठ एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने तुरंत हरिद्वार एसएसपी से संपर्क साधा।\r\n \r\n
- \r\n समय बेहद कम था। ट्रेन आने वाली थी और अगर पारस ट्रेन में बैठ जाता, तो उसे भीड़ में ढूंढना मुश्किल हो जाता।\r\n \r\n
- \r\n हरिद्वार एसएसपी ने तत्काल एसपी देहात (SP Rural, Haridwar) को फोर्स के साथ स्टेशन भेजा।\r\n \r\n
- \r\n इधर मेरठ से एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह की टीम भी सायरन बजाते हुए रुड़की की तरफ दौड़ी।\r\n \r\n
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लेकिन मेरठ पुलिस के पहुंचने से पहले ही हरिद्वार पुलिस ने मोर्चा संभाल लिया। स्टेशन की घेराबंदी की गई। प्लेटफार्म पर यात्रियों के बीच छिपे पारस सोम और घबराई हुई रूबी को पुलिस ने पहचान लिया। इससे पहले कि ट्रेन के पहिए घूमते, पुलिस की हथकड़ी पारस के हाथों में थी।
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फरारी की कहानी: 48 घंटे तक कहां छिपा था कातिल?
\r\n\r\nगिरफ्तारी के बाद जो शुरूआती जानकारी सामने आई है, वह पुलिस की चुनौती को दर्शाती है। घटना गुरुवार (बृहस्पतिवार) सुबह की थी और गिरफ्तारी शनिवार शाम को हुई। सवाल यह है कि बीच के दो दिन पारस कहां था?
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हत्याकांड का फ्लैशबैक: क्या हुआ था उस काली सुबह?
\r\n\r\nजो पाठक इस मामले से अब तक अनजान हैं, उनके लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर कपसाड़ गांव में हुआ क्या था, जिसने पूरे पश्चिमी यूपी में उबाल ला दिया।
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बृहस्पतिवार (Thursday) की सुबह:
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- \r\n समय: सुबह का वक्त।\r\n \r\n
- \r\n घटनास्थल: सरधना थाना क्षेत्र, कपसाड़ गांव, रजबहे की पटरी के पास।\r\n \r\n
- \r\n पीड़ित: सुनीता (मां) और रूबी (बेटी)।\r\n \r\n
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सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत की ओर जा रही थीं। गांव का ही दबंग युवक पारस सोम, अपने साथी सुनील और कुछ अन्य लोगों के साथ कार में सवार होकर वहां पहुंचा। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के आरोपों के मुताबिक, पारस की मंशा रूबी को अगवा करने की थी।
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मां का संघर्ष और बलिदान:
\r\n\r\nजब आरोपियों ने रूबी को जबरन कार में खींचने की कोशिश की, तो मां सुनीता ढाल बनकर सामने आ गईं। उन्होंने बेटी को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी। इस विरोध से बौखलाए आरोपियों ने सुनीता पर फरसे (धारदार हथियार) से जानलेवा हमला कर दिया।
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सुनीता वहीं लहूलुहान होकर गिर पड़ीं। इसके बाद आरोपी रूबी को जबरन गाड़ी में डालकर फरार हो गए।
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अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझती सुनीता ने आखिरकार दम तोड़ दिया। मां की मौत और बेटी के अपहरण की खबर ने गांव में आग लगा दी।
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सियासी संग्राम: बॉर्डर सील, नेताओं से धक्कामुक्की
\r\n\r\nकपसाड़ कांड सिर्फ एक अपराध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया। शनिवार को मेरठ की सीमाएं किसी छावनी (Cantonment) में तब्दील हो गई थीं।
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सपा का हल्ला बोल:
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- \r\n शनिवार सुबह समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद रामजी लाल सुमन और सरधना विधायक अतुल प्रधान (Atul Pradhan) अपने समर्थकों के साथ कपसाड़ जाने के लिए निकले।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस ने उन्हें काशी टोल प्लाजा (Kashi Toll Plaza) पर ही रोक दिया।\r\n \r\n
- \r\n यहां पुलिस और सपा नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्कामुक्की हुई। रोकने जाने पर नेता वहीं धरने पर बैठ गए।\r\n \r\n
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चंद्रशेखर आजाद की एंट्री:
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- \r\n शाम होते-होते आसपा (ASP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) गाजियाबाद से बाइक पर सवार होकर काशी टोल प्लाजा पहुंचे।\r\n \r\n
- \r\n पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें भी रोका। आजाद के समर्थकों और पुलिस के बीच भी भारी गहमागहमी हुई। चंद्रशेखर ने भी वहीं धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।\r\n \r\n
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कांग्रेस भी पीछे नहीं:
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- \r\n कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम, राष्ट्रीय सचिव प्रदीप नरवाल और सांसद तनुज पूनिया भी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, लेकिन उन्हें भी टोल प्लाजा से आगे नहीं बढ़ने दिया गया।\r\n \r\n
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प्रशासन का तर्क था कि नेताओं के गांव में जाने से कानून-व्यवस्था (Law and Order) बिगड़ सकती है, क्योंकि गांव में पहले से ही तनाव चरम पर था।
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पुलिस का 'वॉर रूम': सलावा चौकी बनी हेडक्वार्टर
\r\n\r\nमामले की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ से लेकर मेरठ तक पुलिस महकमा हिल गया था। शनिवार को पूरा पुलिस प्रशासन सड़क पर था।
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- \r\n ADG भानु भास्कर और DIG कलानिधि नैथानी खुद मौके पर कैंप कर रहे थे।\r\n \r\n
- \r\n SSP डॉ. विपिन ताडा सलावा चौकी (Salava Chowki) पर डटे रहे।\r\n \r\n
- \r\n यह चौकी अस्थाई मुख्यालय बन गई थी, जहां से लखनऊ हेडक्वार्टर को पल-पल की रिपोर्ट भेजी जा रही थी।\r\n \r\n
- \r\n अधिकारियों ने गांव के हर पॉइंट का निरीक्षण किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश न दिया जाए।\r\n \r\n
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जांच की पहेली: सुनील और वो 'दो अज्ञात' कौन?
\r\n\r\nभले ही मुख्य आरोपी पारस सोम पकड़ा गया हो, लेकिन पुलिस की जांच अभी खत्म नहीं हुई है। इस केस में एक बड़ा पेंच (Twist) अभी भी फंसा हुआ है।
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FIR में नामजदगी बनाम हकीकत:
\r\n\r\nपीड़ित परिवार ने जो तहरीर दी थी, उसमें चार लोगों का जिक्र था:
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- \r\n पारस सोम (मुख्य आरोपी)\r\n \r\n
- \r\n सुनील राजपूत (सह-आरोपी)\r\n \r\n
- \r\n दो अज्ञात युवक।\r\n \r\n
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परिवार का दावा है कि ये चारों लोग साजिश और घटना में शामिल थे। लेकिन पुलिस की शुरूआती जांच कुछ और इशारा कर रही है।
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पुलिस का असमंजस:
\r\n\r\nपुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक की विवेचना और पारस की गिरफ्तारी के बाद जो बातें सामने आई हैं, उससे यह लग रहा है कि घटनास्थल पर केवल पारस सोम और युवती रूबी ही मौजूद थे।
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अब पुलिस के सामने सवाल यह है:
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- \r\n क्या सुनील राजपूत और अज्ञात युवक मौके पर थे?\r\n \r\n
- \r\n क्या वे केवल साजिश (Conspiracy) रचने में शामिल थे?\r\n \r\n
- \r\n या फिर एफआईआर में उनका नाम शक के आधार पर लिखवाया गया?\r\n \r\n
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एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का बयान:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी गिरफ्तार है। बाकी नामजद आरोपियों की भूमिका (Role) की जांच कॉल डिटेल्स और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी।"\r\n
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अब आगे क्या? (Next Steps in Investigation)
\r\n\r\nदेर रात करीब 10:30 बजे मेरठ पुलिस की टीम पारस और रूबी को लेकर मेरठ पहुंची। अब कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
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- \r\n रूबी का बयान (Statement): सबसे अहम होगा युवती रूबी का बयान। पुलिस उसे आज कोर्ट में पेश करेगी। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने उसका बयान दर्ज होगा। रूबी ही बताएगी कि घटना के वक्त असल में क्या हुआ था और क्या उसके साथ जोर-जबर्दस्ती की गई थी।\r\n \r\n
- \r\n पारस का कबूलनामा: एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में पारस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उसने माना है कि उसने सुनीता पर हमला किया और रूबी को अगवा किया।\r\n \r\n
- \r\n क्रिमिनल हिस्ट्री: पुलिस ने बताया कि पारस सोम का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है। वह पहले अपने ही पिता पर हमला कर चुका है, जिससे उसकी हिंसक प्रवृत्ति का पता चलता है।\r\n \r\n
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कानून का डर और सिस्टम की चुनौती
\r\n\r\nकपसाड़ कांड ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और ग्रामीण इलाकों में दबंगों के हौसलों पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मेरठ पुलिस ने 72 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर अपनी साख बचा ली है और पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद दी है। लेकिन सवाल अब भी बरकरार है—क्या नामजद अन्य आरोपी वाकई दोषी हैं या यह मामला सिर्फ पारस की सनक का नतीजा था?
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राजनीतिक रस्साकशी के बीच, अब सबकी निगाहें कोर्ट में रूबी के बयान पर टिकी हैं, जो इस केस की दिशा तय करेगा।
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खबरीलाल अपने पाठकों से अपील करता है: अपराध के खिलाफ आवाज उठाएं और पुलिस का सहयोग करें।
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घटनाक्रम एक नजर में (Timeline of Events)
\r\n\r\n| \r\n दिन/समय \r\n | \r\n \r\n घटनाक्रम \r\n | \r\n
| \r\n गुरुवार सुबह \r\n | \r\n \r\n कपसाड़ में सुनीता की हत्या, बेटी रूबी का अपहरण। \r\n | \r\n
| \r\n गुरुवार दोपहर \r\n | \r\n \r\n गांव में हंगामा, शव रखकर प्रदर्शन, FIR दर्ज। \r\n | \r\n
| \r\n शुक्रवार \r\n | \r\n \r\n पुलिस की छापेमारी, पारस सोम का सुराग नहीं। \r\n | \r\n
| \r\n शुक्रवार रात \r\n | \r\n \r\n पारस और रूबी सहारनपुर के नागल में रुके। \r\n | \r\n
| \r\n शनिवार सुबह \r\n | \r\n \r\n मेरठ की सीमाएं सील, नेताओं का जमावड़ा, टोल प्लाजा पर झड़प। \r\n | \r\n
| \r\n शनिवार शाम \r\n | \r\n \r\n पारस की लोकेशन मिली)। \r\n | \r\n
| \r\n शनिवार शाम 6:00 बजे \r\n | \r\n \r\n रुड़की रेलवे स्टेशन से पारस गिरफ्तार, रूबी बरामद। \r\n | \r\n
| \r\n शनिवार रात 10:30 बजे \r\n | \r\n \r\n पुलिस दोनों को लेकर मेरठ पहुंची। \r\n | \r\n
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