मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र से एक बेहद ही संवेदनशील और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहां एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना के बाद, समाज और रिश्तेदारों के कड़वे तानों से परेशान होकर परिजनों ने मजबूरन आरोपी पड़ोसी युवक से ही उसकी शादी करा दी। यह घटना समाज में महिलाओं के प्रति मानसिकता और कानूनी प्रक्रिया के बजाय सामाजिक दबाव को प्राथमिकता देने की कड़वी सच्चाई को दर्शाती है।Read also:-श्रीनगर पुलिस स्टेशन में 'हादसा' या बड़ी चूक? फॉरेंसिक टीम के 9 सदस्य सहित 9 की मौत, 32 घायल, DGP बोले- 'यह सिर्फ हादसा', आतंकी साजिश नहीं
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गर्भावस्था के खुलासे से सदमे में परिवार

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घटना का खुलासा तब हुआ जब आठ दिन पहले किशोरी के पेट में तेज दर्द उठा। परिजन उसे एक डॉक्टर के पास ले गए, जहां जांच के दौरान पता चला कि किशोरी तीन माह की गर्भवती है। इस खबर से परिवार सदमे में आ गया। जब किशोरी से सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने अपने पड़ोसी 21 वर्षीय युवक द्वारा किए गए दुष्कर्म की पूरी बात बताई।
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मासूमियत में किशोरी का यह कहना कि, “मेरी तो अभी शादी ही नहीं हुई है, शादी के बाद ही गर्भ होता है,” इस बात का प्रमाण है कि उसे इस अपराध की गंभीरता और परिणामों के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। डॉक्टर ने बेहद संवेदनशीलता से किशोरी की मां को स्थिति समझाई और प्यार से पूछताछ कर आरोपी का नाम जानने में मदद की।
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सामाजिक ताने बने मजबूरी की वजह

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दुष्कर्म की घटना सामने आने के बाद किशोरी की मां ने गांव में पंचायत बुलाई और आरोपी पर कार्रवाई की मांग की। हालांकि, पंचायत में बात आगे बढ़ने के बजाय गांव के युवकों ने किशोरी के भाई को लगातार ताने मारना शुरू कर दिया। घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया और पूरा परिवार शर्मिंदगी और मानसिक अपमान के बोझ तले दब गया।
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मां ने रोते हुए अपनी मजबूरी बताई कि उनके पति लंबे समय से बीमार हैं और घर की सारी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है। चार बच्चों के पालन-पोषण और एक छोटी बेटी की शादी की चिंता ने उन्हें तोड़ दिया। गांव में फैल रही बातों ने बच्चों को मानसिक रूप से परेशान कर दिया। इसी सामाजिक दबाव और मजबूरी के चलते, किशोरी की मां ने आरोपी युवक के परिवार से बात की।
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मंदिर में हुई मेरठ दुष्कर्म शादी

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सामाजिक बदनामी और तानों से मुक्ति पाने के लिए दो दिन पहले परिजनों ने गांव के एक मंदिर में किशोरी और आरोपी युवक की शादी करा दी। यह कदम कानूनी तौर पर गलत है, क्योंकि दुष्कर्म के आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (POCSO अधिनियम के तहत) होनी चाहिए थी, लेकिन समाज के दबाव ने न्याय की राह को अवरुद्ध कर दिया।
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यह मेरठ दुष्कर्म शादी का मामला कई सवाल खड़े करता है। किशोरी अभी भी नाबालिग है, और इस प्रकार की शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। इस तरह के फैसलों से पीड़ित को न्याय मिलने के बजाय, आरोपी को अपराध से बच निकलने का मौका मिल जाता है। (Internal link to related article on POCSO Act and child marriage)
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परिवार अब गांव छोड़ने पर मजबूर

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दुष्कर्म और फिर मेरठ दुष्कर्म शादी की इस घटना के बाद, किशोरी की मां ने अब गांव छोड़ने का मन बना लिया है। उनका मानना है कि गांव छोड़ने से ही उनके बच्चों को लगातार मिल रहे ताने और अपमान से मुक्ति मिल पाएगी।
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इस पूरे मामले पर पुलिस को स्वतः संज्ञान लेकर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि समाज में ऐसे घिनौने अपराध करने वालों को यह संदेश न जाए कि वे शादी करके बच सकते हैं। नाबालिग से दुष्कर्म एक गंभीर अपराध है, जिसे किसी भी सामाजिक समझौते के तहत माफ नहीं किया जा सकता।
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