मेरठ (स्पेशल डेस्क): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की धरती क्रांतिकारियों और वीरों की धरती रही है। यहां का हर दूसरा घर देश की सेवा में अपने बेटे को सीमा पर भेजता है। लेकिन जब वही बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटता है, तो पूरा इलाका गमगीन हो जाता है। कुछ ऐसा ही मंजर सोमवार को मेरठ के किठौर क्षेत्र स्थित भड़ौली गांव में देखने को मिला।READ:-सावधान यूपी! मौसम ले रहा है खतरनाक करवट: 48 घंटे में आंधी-बारिश का अलर्ट, इसके बाद शुरू होगा अब तक का सबसे भीषण 'अग्नि-काल'
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जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में तैनात भारतीय सेना के 33 वर्षीय हवलदार राहुल भड़ाना (Rahul Bhadana) का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो हर आंख नम हो गई। हिमाचल प्रदेश के डमटाल में एक सड़क हादसे में उनकी दुखद मृत्यु हो गई थी। सोमवार को जैसे ही सेना का वाहन उनके शव को लेकर गांव की सीमा में दाखिल हुआ, "राहुल भड़ाना अमर रहें" और "जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल तेरा नाम रहेगा" के गगनभेदी नारों से आसमान गूंज उठा।
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अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

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सोमवार सुबह से ही भड़ौली गांव के रास्तों पर लोगों का हुजूम जमा होने लगा था। आसपास के गांवों से हजारों की संख्या में लोग अपने लाडले को अंतिम विदाई देने पहुंचे थे। जैसे ही सेना के अधिकारियों ने पार्थिव शरीर परिजनों को सौंपा, वहां मौजूद हर शख्स की रुलाई फूट पड़ी।
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    फूलों की बारिश: जवान के सम्मान में ग्रामीणों ने अपने घरों की छतों से फूलों की बारिश की। पूरा रास्ता फूलों से पट गया था।
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    सेना का सम्मान: सेना की टुकड़ी ने मातमी धुन के साथ अपने साथी को अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे राहुल के पार्थिव शरीर को देखकर युवाओं में देशभक्ति का ज्वार और आंखों में आंसू दोनों एक साथ दिखाई दे रहे थे।
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    नारेबाजी: युवाओं की टोली हाथों में तिरंगा लिए सेना के वाहन के आगे-आगे चल रही थी। पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंगा हुआ था, लेकिन इसके पीछे एक गहरा सन्नाटा और दुख भी छिपा था।
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हिमाचल में हुआ था दर्दनाक हादसा

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, हवलदार राहुल भड़ाना वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के अखनूर जिले में तैनात थे। वे भारतीय सेना का एक अहम हिस्सा थे और पिछले 10 वर्षों से देश की सेवा कर रहे थे।
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हादसा उस वक्त हुआ जब राहुल छुट्टी पर थे और हिमाचल प्रदेश में यात्रा कर रहे थे।
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    स्थान: डमटाल, हिमाचल प्रदेश।
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    घटना का समय: शनिवार दोपहर।
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    वजह: भीषण सड़क हादसा।
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सेना की ओर से मिली आधिकारिक सूचना के मुताबिक, यात्रा के दौरान उनकी गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई, जिसमें राहुल गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उन्होंने दम तोड़ दिया। इस खबर ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे मेरठ को झकझोर कर रख दिया।
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परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़: "मेरे लाल को क्या हो गया..."

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राहुल भड़ाना के परिवार के लिए यह वज्रपात से कम नहीं था। बेटे का शव देखकर मां-बाप सुधबुध खो बैठे।
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    माता-पिता का हाल: बूढ़े माता-पिता बार-बार यही कह रहे थे, "हमारे लाल के साथ क्या हुआ? वह तो देश की रक्षा के लिए गया था, हमें ऐसे छोड़कर क्यों चला गया?" बचपन से ही फौज में जाना राहुल का सपना था, जिसे उन्होंने पूरा तो किया, लेकिन इतनी जल्दी दुनिया को अलविदा कह देंगे, यह किसी ने नहीं सोचा था।
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    पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल: राहुल की पत्नी सोनल का विलाप देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति का कलेजा फट गया। शादी को अभी मात्र साढ़े पांच साल ही हुए थे। सोनल पर अब पूरे परिवार और मासूम बच्चे की जिम्मेदारी आ गई है।
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मासूम दिव्यांश को नहीं पता, पिता अब कभी नहीं लौटेंगे

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इस पूरे घटनाक्रम में सबसे हृदयविदारक दृश्य राहुल के साढ़े चार साल के बेटे दिव्यांश का था। वह मासूम अभी यह समझ भी नहीं पा रहा है कि उसके पिता अब कभी उसे गोद में नहीं उठाएंगे। पिता के अंतिम संस्कार के समय जब उसे आगे लाया गया, तो वहां मौजूद पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े। दिव्यांश का भविष्य अब इस परिवार और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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2016 में पहनी थी वर्दी, 10 साल की बेदाग सेवा

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किसान नेता पवन गुर्जर, जो रिश्ते में राहुल के भाई लगते हैं, ने बताया कि राहुल भड़ाना के पिता हेम सिंह भड़ाना ने अपने बेटे को देश सेवा के लिए तैयार किया था।
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    भर्ती: राहुल वर्ष 2016 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे।
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    पोस्टिंग: पिछले 10 सालों में उन्होंने देश के विभिन्न दुर्गम स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं। वे अपनी बहादुरी और मिलनसार स्वभाव के लिए अपनी यूनिट में जाने जाते थे।
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    हालिया तैनाती: पिछले कुछ समय से वे जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाके अखनूर में तैनात थे।
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राहुल तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी चार बहनें भी हैं। रक्षाबंधन पर अब कलाई सुनी रहेगी, यह सोचकर बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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सड़क सुरक्षा: सेना के जवानों के लिए एक बड़ी चुनौती

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राहुल भड़ाना की मौत ने एक बार फिर सेना के जवानों की सुरक्षा के मुद्दे को उजागर किया है। अक्सर देखा जाता है कि सीमा पर दुश्मन से लोहा लेने वाले हमारे जवान छुट्टियों के दौरान या ट्रांजिट में सड़क हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों (जैसे हिमाचल और उत्तराखंड) में सड़कें बेहद खतरनाक होती हैं। मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां हादसे आम हैं। राहुल भी इसी अनहोनी का शिकार हुए। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है।
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क्षेत्रीय नेताओं और प्रशासन ने दी श्रद्धांजलि

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राहुल भड़ाना के अंतिम संस्कार में न केवल ग्रामीण, बल्कि जिले के कई गणमान्य लोग और प्रशासनिक अधिकारी भी पहुंचे। सभी ने शहीद के परिवार को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
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    स्थानीय विधायकों और नेताओं ने राहुल की शहादत को नमन किया।
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    प्रशासन की ओर से राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई।
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मेरठ की मिट्टी का कर्ज

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मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का इतिहास गवाह है कि यहां की मिट्टी ने देश को अनगिनत शूरवीर दिए हैं। 1857 की क्रांति से लेकर कारगिल युद्ध और आज तक, यहां के जवानों ने अपना लोहा मनवाया है। राहुल भड़ाना भी उसी श्रृंखला की एक कड़ी थे। भड़ौली गांव के लिए यह गर्व और गम का मिश्रित क्षण है। गर्व इस बात का कि उनके बेटे ने सेना की वर्दी पहनी, और गम इस बात का कि वह इतनी कम उम्र में चला गया।
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भविष्य की चिंता और सरकारी मदद

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अब सबसे बड़ा सवाल परिवार के भविष्य का है। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से शहीदों और ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले जवानों के परिवारों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन जल्द से जल्द राहुल के परिवार को आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं मुहैया कराएगा, ताकि मासूम दिव्यांश और पत्नी सोनल का जीवन सुरक्षित हो सके।
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राहुल भड़ाना का जाना न केवल भड़ौली गांव बल्कि पूरे देश के लिए एक क्षति है। 33 साल की उम्र में दुनिया छोड़ जाना, पीछे एक हंसता-खेलता परिवार, बूढ़े मां-बाप और एक मासूम बच्चा छोड़ जाना, यह नियति का सबसे क्रूर मजाक है। लेकिन एक सैनिक कभी मरता नहीं है, वह अपने बलिदान और अपनी सेवा के जरिए लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहता है।
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जब तक सूरज चांद रहेगा, राहुल तुम्हारा नाम रहेगा... यह नारा सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि उस भावना का प्रतीक है जो भारत के हर नागरिक के दिल में अपने सैनिकों के लिए धड़कती है।
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मेरठ के भड़ौली गांव के जवान राहुल भड़ाना का हिमाचल प्रदेश में सड़क हादसे में निधन हो गया। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, जहां हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। 2016 में सेना में भर्ती हुए राहुल अपने पीछे पत्नी, 4 साल का बेटा और माता-पिता छोड़ गए हैं। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
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