राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आदर्शों और स्वावलंबन का प्रतीक माने जाने वाले 'गांधी आश्रम' की बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं की टेढ़ी नजर का मामला बुधवार को उत्तर प्रदेश की विधानसभा में जोर-शोर से गूंजा। मेरठ स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे और उसे खुर्द-बुर्द करने की साजिशों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा।READ ALSO:-मोबाइल की 'वर्चुअल' दुनिया से निकलकर अब 'किताबों' से दोस्ती करेंगे यूपी के नौनिहाल, योगी सरकार ने तैयार किया 'महाप्लान
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इस गंभीर मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन के भीतर अपना चिर-परिचित सख्त रुख अपनाते हुए दो टूक जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश में किसी भी ऐतिहासिक स्मारक, पौराणिक स्थल या महापुरुषों से जुड़ी धरोहरों पर अवैध कब्जा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
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विधानसभा में कैसे उठा मुद्दा? विपक्ष की चिंता
\r\n\r\nबुधवार को विधानसभा सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय (Mata Prasad Pandey) ने मेरठ गांधी आश्रम का मुद्दा पूरी गंभीरता से उठाया। उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यह केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि बापू की विरासत है, जो अब खतरे में है।
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माता प्रसाद पांडेय ने कहा, "मेरठ से बड़ी संख्या में लोग मेरे पास अपनी पीड़ा लेकर आए थे। मेरठ में महात्मा गांधी के नाम पर स्थापित गांधी आश्रम का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक क्षेत्र है। लेकिन, दुख की बात है कि इसके एक बड़े हिस्से पर भू-माफियाओं और कुछ स्वार्थी तत्वों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है।"
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नेता प्रतिपक्ष ने आशंका जताई कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो धीरे-धीरे आश्रम की बाकी बची जमीन पर भी कब्जा हो जाएगा और इस ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि महात्मा गांधी के नाम पर मौजूद इस संपत्ति को बचाया जाए और कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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सीएम योगी का 'दो टूक' जवाब: 'छोड़ूंगा नहीं'
\r\n\r\nविपक्ष द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने तत्काल संज्ञान लिया और बेहद कड़े लहजे में जवाब दिया। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि कुछ लोगों में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जा करने की 'प्रवृत्ति' बन गई है, जिसे उनकी सरकार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
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सीएम योगी ने सदन में आश्वस्त करते हुए कहा, "मैं इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हूं। यदि कोई भी व्यक्ति किसी स्मारक, पौराणिक स्थल या महापुरुषों से जुड़ी संस्था पर कब्जा करने का दुस्साहस करेगा, तो उसे मैं छोड़ूंगा नहीं।"
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मुख्यमंत्री ने तुरंत ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी करने की बात कही। उन्होंने कहा कि मेरठ गांधी आश्रम की संपत्ति पर कब्जे की जो शिकायत सामने आई है, उसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करूंगा। जो भी अतिक्रमणकारी पाया जाएगा, उसे वहां से तत्काल हटाया जाएगा और उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।"
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सीएम ने अपने संबोधन में यह भी जोर देकर कहा कि सरकारी जमीन गरीबों और सार्वजनिक कार्यों के लिए होनी चाहिए, न कि भू-माफियाओं की ऐशगाह बनने के लिए।
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मेरठ में जमीनी हकीकत: 2 साल से जारी है 'सत्याग्रह'
\r\n\r\nविधानसभा में यह मुद्दा भले ही अब गूंजा हो, लेकिन मेरठ में गांधी आश्रम को बचाने की लड़ाई पिछले दो वर्षों से भी अधिक समय से चल रही है। यह लड़ाई कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि गांधी आश्रम के कर्मचारी ही लड़ रहे हैं।
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मेरठ के गढ़ रोड स्थित गांधी आश्रम पर 'गांधी आश्रम कर्मचारी संगठन' के बैनर तले 9 अक्टूबर 2023 से अनवरत धरना-प्रदर्शन जारी है। ये कर्मचारी रात-दिन खुले आसमान के नीचे बैठकर बापू की विरासत को बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
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क्या हैं आरोप? अपनों पर ही उठे सवाल
\r\n\r\nप्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप बेहद गंभीर है। उनका कहना है कि आश्रम की बर्बादी के पीछे कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि संस्था के अंदर बैठे कुछ 'विभीषण' ही जिम्मेदार हैं।
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कर्मचारी संगठन का सीधा आरोप है कि गांधी आश्रम मेरठ और गांधी आश्रम लखनऊ मुख्यालय के कुछ वर्तमान पदाधिकारी और सदस्य मिलीभगत करके संस्था की बेशकीमती संपत्तियों को बेचने और उस पर अवैध कब्जा कराने की साजिश रच रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि करोड़ों-अरबों रुपये की इस जमीन को कौड़ियों के दाम पर भू-माफियाओं के हवाले करने का खेल चल रहा है।
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धरनारत कर्मचारियों की मुख्य मांगें हैं:
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- \r\n आश्रम की जमीन पर हुए सभी अवैध कब्जों को तत्काल हटाया जाए।\r\n \r\n
- \r\n संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने में शामिल पदाधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कठोर कार्रवाई हो।\r\n \r\n
- \r\n गांधी आश्रम के मूल स्वरूप और उद्देश्य (खादी और ग्रामोद्योग को बढ़ावा देना) को पुनर्स्थापित किया जाए।\r\n \r\n
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गांधी आश्रमों का ऐतिहासिक महत्व
\r\n\r\nस्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी ने देश भर में खादी के प्रचार-प्रसार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इन आश्रमों की स्थापना की कल्पना की थी। मेरठ का गांधी आश्रम भी उसी गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहा है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खादी आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र था।
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जानकारों का मानना है कि ऐसे ऐतिहासिक संस्थानों की जमीन पर कब्जा होना केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह उन मूल्यों और आदर्शों पर हमला है, जिनकी नींव पर आधुनिक भारत खड़ा है।
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राजनीतिक मायने और आगे की राह
\r\n\r\nविधानसभा में इस मुद्दे के उठने और मुख्यमंत्री के सख्त आश्वासन के बाद अब मेरठ प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। योगी सरकार अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति और भू-माफियाओं के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई के लिए जानी जाती है। ऐसे में, अब देखना यह होगा कि सीएम के आदेश के बाद मेरठ में जिला प्रशासन और पुलिस कितनी जल्दी हरकत में आती है।
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उधर, दो साल से धरने पर बैठे कर्मचारियों में सीएम के बयान के बाद न्याय की एक नई उम्मीद जगी है। वे इंतजार कर रहे हैं कि कब लखनऊ से जांच टीम मेरठ पहुंचेगी और कब गांधी आश्रम की जमीन को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा। यह मामला अब केवल मेरठ तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश सरकार के लिए ऐतिहासिक धरोहरों की रक्षा की प्रतिबद्धता का एक लिटमस टेस्ट भी बन गया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.