उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देने वाली घटना सामने आई है। आमतौर पर अपराधियों में पुलिस का खौफ देखने को मिलता है, लेकिन मेरठ के थाना नौचंदी क्षेत्र में इसके उलट ही नजारा देखने को मिला। यहाँ एक हिस्ट्रीशीटर और उसके परिवार ने न केवल थाने के भीतर जमकर गुंडागर्दी की, बल्कि पुलिसकर्मियों पर हमला कर खाकी की मर्यादा को भी तार-तार करने की कोशिश की।READ ALSO:-सर्राफा बाजार में भूचाल: रिकॉर्ड ऊंचाई से औंधे मुंह गिरे सोने-चांदी के दाम, सोना 37 हजार तो चांदी 1.66 लाख रुपये हुई सस्ती; जानें असली पहचान और खरीदारी का अचूक फॉर्मूला!
\r\n\r\n\r\n\r\n
यह पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए, लेकिन जब उच्चाधिकारियों के निर्देश पर एक्शन हुआ, तो अपराधी के परिवार ने थाने को ही अखाड़ा बना दिया। आइए, इस पूरी घटना के हर पहलू को विस्तार से समझते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
हथियारों के साथ वायरल हुआ था वीडियो: यहीं से शुरू हुई कहानी
\r\n\r\nआज के डिजिटल युग में अपराधी अक्सर अपनी धमक जमाने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। मेरठ में भी रविवार को ऐसा ही एक मामला सामने आया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा, जिसमें दो युवक हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन करते नजर आ रहे थे। इस वीडियो का मकसद स्पष्ट रूप से इलाके में दहशत फैलाना और अपना वर्चस्व कायम करना था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
शुरुआती दौर में थाना नौचंदी पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया। पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि यह वीडियो काफी पुराना है और इसका वर्तमान से कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन सोशल मीडिया की ताकत और लोगों की जागरूकता के चलते यह मामला जल्द ही उच्चाधिकारियों (Senior Police Officials) तक पहुंच गया। जब आला अफसरों ने इस पर संज्ञान लिया और जांच बैठा दी, तो स्थानीय पुलिस की नींद टूटी।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
जांच में यह साफ हो गया कि वायरल वीडियो और फोटो में दिख रहा शख्स कोई और नहीं, बल्कि शास्त्रीनगर सेक्टर-4 का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर जमाल है। जमाल का पहले से ही आपराधिक इतिहास रहा है और उसके इस तरह हथियारों के साथ वीडियो ने पुलिस के लिए खुली चुनौती पेश कर दी थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सोमवार की सुबह: जमाल की गिरफ्तारी और पुलिस का एक्शन
\r\n\r\nउच्चाधिकारियों की फटकार और सख्त निर्देशों के बाद सोमवार सुबह नौचंदी पुलिस की एक टीम शास्त्रीनगर सेक्टर-4 स्थित जमाल के घर पहुंची। पुलिस ने बिना कोई समय गंवाए जमाल को हिरासत में लिया। हालांकि, जमाल जैसे आदतन अपराधी के लिए यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन इस बार मामला वायरल वीडियो का था, जिससे पुलिस महकमे की किरकिरी हो रही थी।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस टीम जमाल को पुलिस जीप में बैठाकर थाने ले आई। बताया जा रहा है कि घर से लेकर थाने तक के सफर में जमाल लगातार पुलिसकर्मियों के साथ बहस करता रहा। वह खुद को निर्दोष बताने और पुलिस पर ही धौंस जमाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन पुलिसकर्मी उसे लेकर थाने पहुंच गए। असली हाई-वोल्टेज ड्रामा थाने के गेट से शुरू होना अभी बाकी था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
थाने पहुंचते ही हिस्ट्रीशीटर का 'खूनी' ड्रामा: खुद का सिर दीवार में फोड़ा
\r\n\r\nजैसे ही पुलिस की जीप नौचंदी थाने के प्रांगण में रुकी और पुलिसकर्मियों ने जमाल को नीचे उतारा, उसने एक सोची-समझी साजिश के तहत खौफनाक कदम उठाया। जमाल अच्छी तरह जानता था कि पुलिस की गिरफ्त से बचना आसान नहीं है, इसलिए उसने पुलिस पर 'मानवाधिकार उल्लंघन' और 'कस्टोडियल टॉर्चर' का दबाव बनाने की योजना बनाई।
\r\n\r\n\r\n\r\n
जीप से उतरते ही जमाल ने अचानक एक पुलिसकर्मी को जोर से धक्का दिया और तेजी से थाने की एक मजबूत दीवार की तरफ भागा। इससे पहले कि पुलिसकर्मी कुछ समझ पाते या उसे रोक पाते, जमाल ने पूरी ताकत से अपना सिर दीवार में दे मारा। एक बार नहीं, बल्कि उसने खुद को लहूलुहान करने के लिए यह हरकत की। देखते ही देखते जमाल के सिर से खून बहने लगा और वह लहूलुहान हो गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
थाने के भीतर खून-खराबा देखकर पल भर के लिए पुलिसकर्मियों के भी हाथ-पैर फूल गए। यह एक बेहद संवेदनशील स्थिति थी। पुलिस कस्टडी में किसी भी आरोपी का घायल होना पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। पुलिसकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाला और जमाल को काबू में किया। इसके बाद, नियमों के तहत जमाल का मेडिकल परीक्षण कराने के लिए चार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई ताकि उसे अस्पताल भेजा जा सके।
\r\n\r\n\r\n\r\n
बचाव में उतरा परिवार: थाने को बनाया अखाड़ा
\r\n\r\nअभी पुलिस जमाल को अस्पताल भेजने की तैयारी कर ही रही थी कि मामले ने एक और खतरनाक मोड़ ले लिया। जमाल की गिरफ्तारी की खबर उसके परिवार तक पहुंच चुकी थी। कुछ ही मिनटों में जमाल की मां रूकसाना और उसकी दो बहनें, उरूज और रूही, भड़कते हुए नौचंदी थाने पहुंच गईं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
थाने में घुसते ही इन तीनों महिलाओं ने कानून और व्यवस्था की परवाह किए बिना पुलिसकर्मियों के साथ भद्दी-भद्दी गालियां देना शुरू कर दिया। वे पुलिस पर जमाल को झूठे केस में फंसाने और उसे पीटने का मनगढ़ंत आरोप लगा रही थीं, जबकि जमाल ने खुद अपना सिर फोड़ा था। महिलाओं ने हंगामा करते हुए उस पुलिस जीप का रास्ता रोक लिया, जिसमें जमाल को अस्पताल ले जाया जाना था। वे जीप के बिल्कुल सामने आकर खड़ी हो गईं और चीख-पुकार मचाने लगीं। थाने का माहौल पूरी तरह से अफरातफरी में बदल गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेडी कांस्टेबल से मारपीट: जब फाड़ी गई पुलिस की वर्दी
\r\n\r\nहालात बेकाबू होते देख वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मियों को आगे आना पड़ा। ड्यूटी पर तैनात एक महिला कांस्टेबल ने जमाल की मां और बहनों को समझाकर जीप के आगे से हटाने का प्रयास किया। उसने उन्हें चेतावनी दी कि वे सरकारी काम में बाधा न डालें।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन गुस्से और गुंडागर्दी पर उतारू उन महिलाओं ने महिला कांस्टेबल की एक न सुनी। उल्टा, जमाल की मां और बहनों ने मिलकर महिला कांस्टेबल पर ही हमला बोल दिया। उन्होंने कांस्टेबल के साथ हाथापाई शुरू कर दी। यह हाथापाई इतनी हिंसक थी कि महिलाओं के नोचने और खींचने से महिला कांस्टेबल की वर्दी तक फट गई। खाकी वर्दी पर यह हमला राज्य की कानून व्यवस्था पर सीधा हमला था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिसकर्मी के साथ इस तरह की अभद्रता और उसकी वर्दी फाड़े जाने की घटना ने थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों को आक्रोशित कर दिया। स्थिति को संभालने के लिए तुरंत कई अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला। उन्होंने घेराबंदी कर हंगामा और मारपीट कर रही जमाल की मां रूकसाना और बहनें उरूज व रूही को दबोच लिया। तीनों को कस्टडी में लेकर थाने में बैठा दिया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सीओ सिविल लाइन की एंट्री और स्थिति पर नियंत्रण
\r\n\r\nनौचंदी थाने में पुलिस बल पर हमले और महिला कांस्टेबल की वर्दी फाड़े जाने की सूचना आग की तरह पूरे शहर के पुलिस महकमे में फैल गई। वायरलेस सेट पर मैसेज गूंजने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सीओ (सर्किल ऑफिसर) सिविल लाइन, अभिषेक तिवारी, तत्काल भारी पुलिस बल के साथ नौचंदी थाने पहुंच गए।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सीओ के पहुंचते ही थाने में चल रहा हंगामा कुछ हद तक शांत हुआ। उन्होंने सबसे पहले घायल जमाल को सख्त सुरक्षा के बीच मेडिकल के लिए भिजवाया। इसके बाद उन्होंने उस महिला कांस्टेबल से पूरी घटना की जानकारी ली जिसके साथ मारपीट की गई थी। सीओ अभिषेक तिवारी ने पूरे घटनाक्रम से वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और एसपी सिटी को अवगत कराया। काफी देर तक थाने में गहमागहमी का माहौल रहा, लेकिन अधिकारियों की मुस्तैदी से स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।
\r\n\r\n\r\n\r\n
एसपी सिटी का बयान: "दबाव बनाने की रची गई थी साजिश"
\r\n\r\nशाम होते-होते इस हाई-प्रोफाइल मामले की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों की मेज पर पहुंच चुकी थी। पुलिस की तरफ से मामले में सख्त रुख अख्तियार किया गया है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
इस पूरी घटना पर मीडिया को जानकारी देते हुए एसपी सिटी (SP City) आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि:
\r\n\r\n\r\n\r\n
\r\n\r\n\r\n"सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ एक फोटो और वीडियो वायरल हुआ था। जांच में पता चला कि यह व्यक्ति शास्त्रीनगर का हिस्ट्रीशीटर जमाल है। पुलिस उसे पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के लिए थाने लाई थी। लेकिन, पुलिस पर अनुचित दबाव बनाने और कस्टडी से बचने के इरादे से जमाल ने थाने की दीवार में अपना सिर मारकर खुद को घायल कर लिया। इसके बाद उसकी मां और बहनों ने थाने में आकर न सिर्फ हंगामा काटा, बल्कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों (महिला कांस्टेबल) के साथ मारपीट और अभद्रता की।"\r\n
\r\n\r\n
एसपी सिटी ने स्पष्ट किया कि पुलिस किसी भी सूरत में इस तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं करेगी। सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पर हमला करने और वर्दी फाड़ने के गंभीर आरोपों में हिस्ट्रीशीटर जमाल, उसकी मां रूकसाना, और दोनों बहनों (उरूज व रूही) सहित कुल चार लोगों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। अब पुलिस सभी को जेल भेजने की तैयारी कर रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
यूपी पुलिस की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और अपराधियों की बौखलाहट
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों से अपराध और अपराधियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। ऐसे में अपराधी पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए नए-नए और खौफनाक हथकंडे अपना रहे हैं। कस्टडी में खुद को चोट पहुंचाना (Self-inflicted injury) एक ऐसा ही पैंतरा है, जिसका इस्तेमाल अपराधी अक्सर पुलिस पर मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) या मीडिया का दबाव बनाने के लिए करते हैं। जमाल ने भी इसी ट्रिक का इस्तेमाल किया था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
लेकिन, थानों में लगे सीसीटीवी कैमरे और पुलिस की तत्परता अक्सर अपराधियों की इन चालों को नाकाम कर देती है। नौचंदी थाने की घटना यह साबित करती है कि अपराधी अब न सिर्फ खुद कानून तोड़ रहे हैं, बल्कि अपने परिवार की महिलाओं को भी ढाल बनाकर पुलिस पर हमले करवा रहे हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
सरकारी काम में बाधा और पुलिस पर हमले की सजा
\r\n\r\nभारतीय कानून प्रणाली में पुलिस या किसी भी सरकारी कर्मचारी पर ड्यूटी के दौरान हमला करना एक बेहद संगीन अपराध माना गया है। जमाल और उसके परिवार ने जो कृत्य किया है, उसके लिए उन्हें कड़ी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय दंड संहिता (IPC की पुरानी धाराओं के संदर्भ में) के तहत:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n सरकारी कर्मचारी को ड्यूटी से रोकना (Deterring public servant): इसके तहत गैर-जमानती वारंट जारी हो सकता है और कड़ी सजा का प्रावधान है।\r\n \r\n
- \r\n वर्दी फाड़ना और मारपीट (Assault on public servant): महिला कांस्टेबल पर हमला और वर्दी फाड़ना पुलिस के सम्मान और राज्य के अधिकार को चुनौती देने के समान है। इसमें 2 से 3 साल तक की कैद या भारी जुर्माना हो सकता है।\r\n \r\n
- \r\n खुद को चोट पहुंचाना (Attempting to manipulate the legal system): पुलिस को झूठे केस में फंसाने की नीयत से खुद को घायल करना भी कानूनी दायरे में अपराध की श्रेणी में आता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
आगे क्या होगा?
\r\n\r\nमेरठ के इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी पुलिस को चकमा देने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। एक तरफ जहां स्थानीय थाना पुलिस ने पहले वायरल वीडियो को नजरअंदाज करने की गलती की, वहीं दूसरी तरफ आला अधिकारियों की सख्ती ने अपराधी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। अब जमाल और उसका परिवार कानूनी शिकंजे में बुरी तरह फंस चुका है। इस घटना से यह भी संदेश जाता है कि कानून का राज स्थापित करने में पुलिस को किन-किन जमीनी चुनौतियों और 'हाई-वोल्टेज ड्रामों' का सामना करना पड़ता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
पुलिस अब जमाल के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड (History Sheet) को भी खंगाल रही है, ताकि कोर्ट में उसके खिलाफ मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट इस मामले में पुलिस पर हमला करने वाले परिवार को क्या सजा सुनाती है।
Sabse pehle comment karne wale banein.