मेरठ (Meerut News): पश्चिमी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को एक नई दिशा देने के लिए राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी (Dr. Laxmikant Bajpai) ने बुधवार को उच्च सदन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। उन्होंने मेरठ (Meerut) में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की स्थापना की जोरदार मांग की। उनके इस प्रस्ताव को राज्यसभा के 45 अन्य सदस्यों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने हस्ताक्षर कर सभापति को अपना अनुमोदन सौंपा।READ ALSO:-मेरठ के लिए 'सुपर संडे' की तैयारी: 16 या 22 फरवरी से दौड़ सकती है नमो भारत; जानिए स्टेशनों और प्लेटफॉर्म का पूरा रूट मैप
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डॉ. बाजपेयी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि मेरठ में एम्स का बनना न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि इससे दिल्ली स्थित एम्स (Delhi AIIMS) पर मरीजों का दबाव भी काफी हद तक कम होगा।
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पश्चिमी यूपी के लिए क्यों जरूरी है एम्स?
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डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने सदन के पटल पर कुछ चौंकाने वाले आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि मेरठ मंडल की आबादी लगभग डेढ़ करोड़ और सहारनपुर मंडल की लगभग 90 लाख है। कुल मिलाकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों और 6 कमिश्नरियों की आबादी 7 करोड़ से अधिक है। इतनी बड़ी जनसंख्या के लिए क्षेत्र में उच्च स्तरीय, अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का घोर अभाव है।
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    दिल्ली एम्स पर बोझ: उन्होंने बताया कि रायबरेली और गोरखपुर में एम्स खुलने के बावजूद, दिल्ली एम्स में आने वाले कुल मरीजों में से लगभग 21 प्रतिशत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होते हैं। और तो और, हर साल इस संख्या में लगभग 17.61 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। यदि मेरठ में एम्स बनता है, तो यह भीड़ दिल्ली जाने के बजाय मेरठ की ओर मुड़ जाएगी।
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    गोल्डन ऑवर का महत्व: डॉ. बाजपेयी ने सड़क दुर्घटनाओं और हार्ट अटैक जैसे आपातकालीन मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour - दुर्घटना या अटैक के बाद का पहला घंटा) में उचित उपचार न मिल पाने के कारण कई लोगों की जान चली जाती है। मेरठ में एम्स होने से ऐसे मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिल सकेगा।
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लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज की खस्ता हालत

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सांसद ने मेरठ के ऐतिहासिक लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (LLR Medical College) की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश का सबसे पुराना सरकारी मेडिकल कॉलेज है और इसके पास 52 एकड़ की पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। इसके बावजूद, यहां की स्थिति दयनीय है:
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    डॉक्टरों के कई पद रिक्त हैं।
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    बिस्तरों (Beds) की कमी है।
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    मशीनें पुरानी और कई बार खराब रहती हैं।
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    कैंसर, हृदय रोग, न्यूरोलॉजी और जटिल सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को दिल्ली या महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
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एम्स नहीं तो सैटेलाइट सेंटर या कैंसर इंस्टीट्यूट ही सही

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डॉ. बाजपेयी ने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए कहा कि यदि पूर्ण एम्स की स्थापना तुरंत संभव न हो, तो सरकार को अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि:
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    एम्स का सैटेलाइट सेंटर: गुरुग्राम (Gurugram) की तर्ज पर मेरठ में भी एम्स का एक 30-बेड वाला सैटेलाइट सेंटर स्थापित किया जाए।
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    पीजीआई (PGI) या कैंसर इंस्टीट्यूट: या फिर, लखनऊ के पीजीआई जैसा संस्थान या एक समर्पित कैंसर इंस्टीट्यूट मेरठ में खोला जाए।
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उन्होंने बताया कि इसके भवन निर्माण पर लगभग 5 करोड़ रुपये का खर्च आएगा और इसके लिए केंद्र सरकार की सैद्धांतिक स्वीकृति आवश्यक है।
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45 सांसदों का समर्थन: एक बड़ी राजनीतिक पहल
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यह मुद्दा सिर्फ एक सांसद तक सीमित नहीं रहा। डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के इस प्रस्ताव पर राज्यसभा के 45 अन्य सदस्यों ने अपनी सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए हैं। यह दर्शाता है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुकी है। यह समर्थन सरकार पर दबाव बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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मेरठ में एम्स की मांग कोई नई नहीं है, लेकिन जिस तरह से डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने आंकड़ों और तर्कों के साथ इसे राज्यसभा में रखा है, उससे उम्मीद की एक नई किरण जगी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 7 करोड़ से अधिक आबादी को गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवा का अधिकार है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या कदम उठाती है। मेरठ में एम्स या उसके समकक्ष संस्थान का बनना न केवल क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि अनगिनत जिंदगियों को बचाने में भी सहायक होगा।
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राज्यसभा सांसद डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने मेरठ में एम्स की स्थापना की मांग की है, जिसे 45 अन्य सांसदों का समर्थन मिला है। उन्होंने तर्क दिया कि इससे दिल्ली एम्स का भार कम होगा और पश्चिमी यूपी की 7 करोड़ से अधिक आबादी को बेहतर इलाज मिलेगा। उन्होंने मेरठ मेडिकल कॉलेज की बदहाली का जिक्र करते हुए एम्स न मिलने पर सैटेलाइट सेंटर या कैंसर इंस्टीट्यूट बनाने का विकल्प भी सुझाया है।
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